| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 196 |
प्रगाथः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ प्रगाथः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
ऊत्वा॑मन्ततूसो᳒माः । कृणुष्वाराथोअद्रिवः । आ᳒व॑ब्रह्मद्दी᳒षो॑जहि ॥ १ ॥
उ त्वा म न्द न्तु सोतूहोतमाःत। कृ णौ होकिष्वा रौ हो धोकीअ द्रि वाःचि। आकथ्व ब्राटाह्मात। द्वि षाटाहोकवाथऔटहोयइ जाटाट्हाखऔ हो वाशि। एतय यूःटाख् ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 197 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः गायत्री ॥
गिर्वा॑णःपाही᳹ना॑स्सूतं᳒ । माधोर्धारा॑भीरज्यसे । इन्द्रत्वा᳹दा॑तामिद्या᳹शाः॑ ॥ २ ॥
गि र्व णः प हि नषूस्सु त ङ्गि र्व णः पातू। ही ना स्सु ताटीच्म्मा धोकार्धा राकाभी रा हो वाकीज्या सेटाहा उ वाति। इ न्द्र त्वाटिदात। ता मा इ द्याटीट्शाखऔ हो वाशि। हाचरि श्रीःटाख् ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 198 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
सादा᳹वा॑इन्द्रश्चकृ᳒षात् । ऊ᳒पोनू᳹सा ᳹सा॑पर्यन् । ना᳒दे᳒वा᳒ऋतश्शूराइन्द्राः ॥ ३ ॥
सा दाता। व इ न्द्र श्च कृ षाखूताश। उ पो नु सातीसा प र्य न्न देकुवाःच। ॠ ताणाश्शूफराखइश। न्द्राःत्र ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 199 |
श्रुतकक्षः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः आंगिरसः (सुकक्षोः वा) इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳒त्वा॑वीशन्तू॑विन्दा॑वः । समुद्रा᳹मी॑वासिन्धा॑वः । नत्वा॑मिन्द्राति॑रिच्यते ॥ ४ ॥
आ त्वा वि श त्वि न्दातूवाःत। सा मु द्र मीकीवा सि न्धा वाःकीसा मू द्र मीकीवाकसि न्धाटावाःत। न त्वा मि न्द्राषीति रि च्य तेकीन त्वाकामाटइ न्द्राता। ति रि च्याटिताखण्इश। ओपइ ळाशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 200 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
इ᳒न्द्रा᳸मित्गा॑थीनो॑बृहात् । इ᳸न्द्रा॑मर्केभीरर्कीणाः॑ । इ᳒न्द्रंवाणी॑रनूषत ॥ ५ ॥
इ न्द्र मि त्गाती। थी नो बृ हाषीदि न्द्र माटिर्केतच्भीकर र्की णाःचि। इकन्द्रं वाटाणीतरा नूकाष ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥५॥ इ न्द्राफामि त्गा थि नोखीबृ हाशात् । इकन्द्रा म र्का इ भीकुर र्की णाःटि। आ इ न्द्रं वा णीटुर्हातहात। आ नूफाष ताप्ला। होप्लइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 201 |
श्रुतकक्षः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः आंगिरसः (सुकक्ष आंगिरसः) इन्द्रः गायत्री ॥
इन्द्राईषे᳒द॑दातुनः । ऋभुक्षा᳹णा॑म्भुंरायिं᳒ । वाजीद॑दातूवाजी᳒नम् ॥ ६ ॥
इ न्द्र इ षेषीद दा तु नातीएत। ॠ भु क्षा णाकीमृ भूंखाणफप्लराटयितम् । वाचजीथद दा तूकिवोपबा जाप्लाइ नाप्लाम् । हा इशा ॥७॥ इ न्द्र इ षेषीद दा तु न ओतूहातइश। ॠचभु क्ष णाटिमृ भुं राखियीणम् । वा जी द दा तु वातू। वाकजी द दाटितु वोपावाप्लजा इ नाप्लिम् । हा इशा ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 202 |
गृत्समदः शौनकः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ गृत्समदः शौनकः इन्द्रः गायत्री ॥
इन्द्रोअङ्गा᳒माहा᳒त्भाय᳒म् । आभीषाद᳒पा॑चुच्यवा॑त् । सहिस्थीरोवीच॑र्षणिः ॥ ७ ॥
इ न्द्रो अ ङ्गाती। मा हा त्भाटियातम् । आ भीकाषा दचापा च्यु च्याटिवाखत्स हाखाइ स्थि राःति। वीकचोपबा र्षा णाप्लिइश। र्हा इशा ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 203 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 204 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ भरद्वाजः (– शयुः) बार्हस्पत्यः इन्द्रः गायत्री ॥ ॥ भरद्वाजः (–) बार्हस्पत्यः इन्द्रः (इन्द्रापषूणौ) गायत्री ॥
ईमा᳒ऊ॑त्वासूते᳒सू॑ते । नक्ष॑न्ते॑गिर्वा᳒णोगीराः᳒ । गा᳸वो॑वत्सन्नाधे᳒नावाः॑ ॥ ८ ॥
इन्द्रानूपूषा᳹णा॑वायं । सख्या᳹या॑स्वस्ताये । हूवे᳒मावा᳒ज॑सातये ॥ ९ ॥
इ मा उ त्वाती। सू ताताइ सू ता इषीन क्ष न्ताटिइ गीखार्वा णोप्लगाखइ राःणा। गा वो वाभित्सातच्न्नाकधोपबा नाप्लावोप्ल। हा इशा ॥१०॥ इ न्द्रा नू पूती। षा णा वाटियातम् । सा ख्याकाय सू व स्ताटीयातइश। हु वेकामा वाटाच्जाकसोपबाप्लता योप्ला। हा इशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 205 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
ना᳸कीन्द्रात्वा᳒दू᳒क्ता॑रं । न᳒ज्या᳒यो॑अस्तिवृत्रहन् । न᳒क्येवंयाथात्व᳒म् ॥ १० ॥
न क्ये ना कीती। आचइ न्द्र त्व दु त्व राचून्नाकज्या योथाअ स्तापाइ वृशा। हिंटहिं त्राखाहणन् । न क्येटाव य्यापाथा । हिंपहिंशतूखवांप्ल। हा इशा ॥१२॥