| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
॥ अनानतः पारुच्छेपिः पवमानः सोमः अत्यष्टिः ॥
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चाता। ते जाथाताचमायन्धा साटा। दि वि स त्भू म्याषुद दाकाउ ग्रं शाटिर्म्मात। माटट्हाखऔ हो वाशि। उ प्श्राखावाःप्ल ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चा तेपिजाण। ता मा न्धापिसाण। दि वा इ सापीत्भूण। मि याचाद दाशाउ ग्रं शापिर्म्माण। मा हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। वाखइश ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
हा हा उ च्चा ते जातू। हातहातइ त माटिन्धाखसाण। दि वि स त्भू मि यायूदापदेश। उ ग्रं शाखिर्म्माण। ओंचओंटम होखाबाप्लश्रा वोप्लाहा इशा ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
ऊपच्चा ते जाशिप्ल्त मौ हो न्धाङीसाश। दि वि स त्भू मि यायूदापदेश। उ ग्रं शाखिर्म्माण। म हाटाउ वा इ श्राखीवोप्लहा इशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चा ते जाती। ता म न्धा साटीओ मो वाकि। दि वि स त्भूकुच्मि याकादायदेटओ मो वाकि। उ ग्रांचाशायर्म्माटओ मो वाकि। माटट्हाखऔ हो वाशि। श्र वाताईटख् ॥५॥ उ च्चा ते जाती। ता म न्धाटिसात। दि वि स त्भूकीमी या दाटिदातइश। ऊ ग्रांटाहातइ श र्म्मोटिहातइश। म हाकाहो इ श्राटिट्वाखऔ हो वाशि। ग्वाखभीःप्ल ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चा ते जा त मातू। न्धा साटाओ मो वाकि। दि वि स त्भूकुमि याकादायदेटओ मो वाकि। उ ग्रंचाश कयर्म्माटओ मो वाकि। म हा इ श्राटीट्वाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चा ते जाषीत म न्धातिसात। दि वि स त्भू म्याषुद दाकाउ ग्रं शापिर्म्माण। म हा इ श्राखीवात्र ॥८॥ उ च्चा ते जाषीत म न्धातिसात। दि वि स त्भू म्याटुदा दाथाउ ग्रं शाटिर्म्मात। म हाटाहो वाथाऔटच्होयइ श्र वाटिहो वाथा। औटच्होयइ याटाच्होकइ योखावात्र। ऊख ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चाखाऔ होता। ते जाटात माखाणफप्ल्। न्धाखसाश। दि वि स त्भू म्याषुद देकाआथउ ग्रं शाटिर्म्मात। मा हीचाश्रा वाकाऔटहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१०॥ उ च्चा ते जाषीत म न्ध सा दोतुहा इ दोतिहातएत। दि वि स त्भू म्याषुद देकादोटहातइ दोटाहातएत। उ ग्रं शाटिर्म्मातदोटहातइ दोटाहातएत। मा हि श्राटिवाःखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चाणाते जाणाफ्त माखान्धा साशा। दी वा इ सापीत्भूणम्याटद दाटाओटवातओटवातउ व उ वाटीहोचइश। उ ग्रं शाटिर्म्मातओटवातओटवातउ व उ वाटीहोचइश। मा हीचाश्रा वोटाट्याखऔ हो वाशि। य यु रेखि ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 467 |
अनानतः पारुच्छेपिः |
पवमानः सोमः |
अत्यष्टिः |
उच्चा॑ते॑जातमन्धा᳸सा᳒ । दिविसा᳒त्भूम्याद॑दे । उग्रं᳒शर्म्मा᳒माहिश्रा᳒वाः ॥ १ ॥
उ च्चा ताखिइ जा त म न्ध साशू। दी वाचाइ सायात्भूटमि याटाद दाताइश। उ ग्रंचाशकर्म्माच। माकहाटइ श्र वाकिउ वाखा। स्तौतषेख ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
॥ परुच्छेपो दैवोदासिः अग्निः अत्यष्टिः ॥
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
स्वा दा इ ष्ठा याकुमा दा इ ष्ठा याकु। पा वा स्व सोकीमा धा राटियात। इ न्द्रा या पाकी। ता वा इ सूटीताःखण्। ओपइ ळाशा ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
स्वाथदि ष्ठ याटिइ याटाइ या म दिकीष्ठा याटा। पाचवा स्व सोटिइ याटाइ या म धाकीरा याटा। इ न्द्राथाय पाटाइ याटाइ याचा। ता वा इ सूटीताःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१५॥ स्वाथदि ष्ठ यौ हो वाकुइ याकाम दि ष्ठा याटी। पाचव स्व सौ हो वाकुइ या म धाकीरा याटा। इ न्द्राचाय पौ हो वाकीइ याचा। ता वा इ सूटीताःखण्। ओपइ ळाशा ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
ओ इ स्वाखिदीण। ष्ठ याकामा दिथाष्ठा याटाउ वोखावाश। पा वा स्व सोकीच्मा धाकारा याटाओ ईखान्द्राश। याटपाखऔ हो वाशि। त वे सु ताःतीच् ॥१७॥ उ हु वा इ स्वाखुदीण। ष्ठ याकामा दीयाष्ठा याटाऔ होखावाश। पा वा स्व सोकीमा धाचार याखाउ हु वा इ न्द्रा या पाशृ। ताटट्वाखऔ हो वाशि। सूखताःप्ल ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
स्वा दाताइ ष्ठा यातिम दि ष्ठा याती। पा वाटास्वाखसोशम धा र याती। आकइ न्द्राखाया पा हा बुशीत वाप्लाइ सु ताप्लिबुश। बाश ॥१९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
स्वा दि ष्ठ या म दि ष्ठ या प व स्व सोषौम धा र या इ न्द्रातूय पाता। ता वाटाऊटताचवाकऊटत वा उ वाखीऔ हो वाशि। सूखताःप्ल ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। स्वा दा इ ष्ठ याकुमाखदीशओ इ माखिदीण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। ष्ठाकया प वाकिस्वाखसोशओ स्वाखासोण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। माकधा र याकिईखन्द्राशओ ईखान्द्राण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहातइश। याकपा त वाकिइ सूखाताशओ इ सूखिताःण। औ हो हिं भा एकुहि याताहातहाखऔ हो वाशि। ईख ॥२१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 468 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
अग्निः |
अत्यष्टिः |
स्वा॑दी॑ष्ठायामा᳒दी॑ष्ठाया । पा᳒वा॑स्वसोमाधारा॑या । इ᳸न्द्रा॑यापा᳒तावेसूतः᳒ ॥ २ ॥
स्वा दि ष्ठ या म दातूइ ष्ठ याति। पा वाटास्वाटसोतम धाटाराचयाश। आटइ न्द्रातायाटपा त वाटिहा उ वाति। सूखताःप्ल ॥२२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 469 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
वृ᳒षा॑पवास्वधा᳒रा॑या । मा᳒रूत्वा॑तेचमात्सारः᳒ । विश्वा॑दधा॑नओज᳒सा ॥ ३ ॥
वृ षा प वाती। स्व धाकारा याटाच्माकरूटत्वा ता इ चा म त्साटूराःत। वा इ श्वा दाटीट्धाखऔ हो वाशि। ना ओ जाटिसाख ॥२३॥ वृ षाताहातबुश। पाखवाशस्वा धा राखियाण। माखरूप्लत्वाखताशइ चा म त्साखीराःण। वा इ श्वाकिच्द धाकानाटट्ओखऔ हो वाशि। जाखसाश ॥२४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 469 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
वृ᳒षा॑पवास्वधा᳒रा॑या । मा᳒रूत्वा॑तेचमात्सारः᳒ । विश्वा॑दधा॑नओज᳒सा ॥ ३ ॥
वृ षा प व स्वषुधा रातायात। मा रु त्वा ताटीइ चाचाम त्साखाराःण। वि श्वाचादायधाटन ओताजापसोप्ल। हा इशा ॥२५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 469 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
वृ᳒षा॑पवास्वधा᳒रा॑या । मा᳒रूत्वा॑तेचमात्सारः᳒ । विश्वा॑दधा॑नओज᳒सा ॥ ३ ॥
आ इ वृ षाती। पा वा ईटिच्हायऔटहोथस्वा धा राटियात। मा रू त्व तेटीहातइशचा माचात्सायरापहा इ वि श्वा द धा हा बु न ओ ज सा हा बुशौ। ओ वाणाफ्ओखवा ओ वाशि। अ स्मे रा याकीऊ ताटाश्र वाःखा ॥२६॥ वृ षा पा व एखुहि याणा। स्व धाटारा याखाऔकहो वाशा। मा रूपाऔकहो वाथा। त्वा ते चा मायीत्सापराःश। औटच्होययेटऔ होखावात्र। वि श्वाचाद धाकाच्नाकओ जाटासाख ॥२७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 469 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
वृ᳒षा॑पवास्वधा᳒रा॑या । मा᳒रूत्वा॑तेचमात्सारः᳒ । विश्वा॑दधा॑नओज᳒सा ॥ ३ ॥
वृ षा पा वाटीहौ हो औटिहोत। स्वा धा रा याटीहौ हो औटिहोत। मा रू त्वा तेटीहौ हो औटिहोतचा मा त्सा राटीहौ हो औटिहोत। वि श्वा दा धाटीहौ हो औटिहोत। ना ओ जा साटीहौ हो औटिहोखण्। ओपइ ळाशा ॥२८॥ वृ षा पा वाटीऔ हो औ होखीवाश। स्वा धा रा याटीऔ हो औ होखीवाश। मा रू त्वा ताटीऔ हो औ होखीवाश। चा मा त्सा राटीऔ हो औ होखीवाश। वि श्वा दा धाटीऔ हो औ होखीवाश। ना ओ जा साटीऔ हो औ होचीबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 469 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
वृ᳒षा॑पवास्वधा᳒रा॑या । मा᳒रूत्वा॑तेचमात्सारः᳒ । विश्वा॑दधा॑नओज᳒सा ॥ ३ ॥
औ होताहोतहा इ वृ षाती। पाकव स्व धा रा याटुमाचरूकत्वाखताणइश। ओ इ चा माटिचाकम त्साखाराःण। औ होताहोतहा इ वि श्वाती। द धाटानाखओशजा साखाऔ हो वाशि। ओ इ ज्व राखी ॥३०॥ वृ षा बु होतीहोतहातइश। पाकव स्व धा रा याटुमा रूटात्वाखताणइश। च माताच्ओ चाकाम त्साखाराःण। वि श्वा बु होतीहोतहातइश। द धाटानाखओशजाटसाखऔ हो वाशि। ओ इ जूखिवाश ॥३१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 470 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः पवमानः सोमः गायत्री ॥
यस्तेमा᳒दोवा᳒रे॑ण्यः । तेना॑पावस्वा᳒न्ध॑सा । देवावीरा॑घशंसाहा᳒ ॥ ४ ॥
य स्ताताइश। मा दो वा राटीउ वोखावाश। णीखया स्ता इ नाशी। पा वा स्वा आटीउ वोखावाश। न्धाखसा दा इ वाशी। वा इ रा घ शाटुउ वोखावाश। साखहाश ॥३२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 470 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
यस्तेमा᳒दोवा᳒रे॑ण्यः । तेना॑पावस्वा᳒न्ध॑सा । देवावीरा॑घशंसाहा᳒ ॥ ४ ॥
य स्ते म दाःती। व राताइ णी यातिस्ता इ ना पा वाटुस्वा आतान्ध साता। दा इ वा वाकीइ राखाहा बुशा। घ शांप्लास हाशा। होप्लइ ळाशा ॥३३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 470 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
यस्तेमा᳒दोवा᳒रे॑ण्यः । तेना॑पावस्वा᳒न्ध॑सा । देवावीरा॑घशंसाहा᳒ ॥ ४ ॥
य स्ताताओ इ माखिदाःण। वा रा इ णा याटुउ वोखावाशहा उ वोखिवाशहातइश। ता इ ना पाकीवा स्वाकाआ न्धा साटिउ वोखावाशहा उ वोखिवाशहातइश। दा इ वा वा इ राटुउ वोखावाशहा उ वोखिवाशहातइश। घाटट्शाखऔ हो वाशि। स होताराचयि ष्ठाःटाख् ॥३४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 470 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
यस्तेमा᳒दोवा᳒रे॑ण्यः । तेना॑पावस्वा᳒न्ध॑सा । देवावीरा॑घशंसाहा᳒ ॥ ४ ॥
य स्ते मा दोखीवाशइ याप्ला। रा इ णायियाःट। ता इ नाकिपा वाकास्वा औटाहोकवा हाथान्धा साटा। दा इ वाचिवाटइ राखाऔ हो वाशि। घ शं स हातीच् ॥३५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 470 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
यस्तेमा᳒दोवा᳒रे॑ण्यः । तेना॑पावस्वा᳒न्ध॑सा । देवावीरा॑घशंसाहा᳒ ॥ ४ ॥
य स्ता इ मापीदो व रे णी याःशु। ता इ ना पाकीवाचस्वा आकान्धायसाट। दा इ वाटिवा इ राटिघाकशोपबांप्लसा होप्ला। हा इशा ॥३६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 470 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
यस्तेमा᳒दोवा᳒रे॑ण्यः । तेना॑पावस्वा᳒न्ध॑सा । देवावीरा॑घशंसाहा᳒ ॥ ४ ॥
य स्ते म दो व रे णि यातूएत। तेकना प वषिस्वा न्ध सा देकीवा वी रापिहाणइश। घा शाकाउ वाकासा हाकाउ वाका। उ ऊखापाश ॥३७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 471 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
ति᳸स्रो᳒वाचाऊदीरते । गा᳒वो॑मिमन्तीधेना᳒वाः॑ । हा᳒री॑रेतीका᳒नीक्रदत् ॥ ५ ॥
ति स्रो वा चाःती। उ दाचाउ दाताआ उ वा एभी। राखते गा वो मि माशु। ती धाकाइ ति धातिआ उ वा एभी। नाखवो ह रि रे तिशुक नाचाइ क नातिआ उ वाट। क्राखदाशत् ॥३८॥ ति स्रो वा चाःती। उ दा इ रापीतेश। गा वो मि मा न्ति धायूइ नापावाःश। हा रि रे त्योखीहाणइश। काटटनाखऔ हो वाशि। क्राखदाशत् ॥३९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 471 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
ति᳸स्रो᳒वाचाऊदीरते । गा᳒वो॑मिमन्तीधेना᳒वाः॑ । हा᳒री॑रेतीका᳒नीक्रदत् ॥ ५ ॥
ति स्रोथावा चोप्लाहाचउ दीकारा ताचाइश। गा वोथामि माप्लाहाचन्ती धेकान वोकाह रशारा इ तोपिहाणइश। का ना इ क्राटीटदाखऔ हो वाशि। अ स्मा भ्यकिङ्गाततु वि क्त माखीम् ॥४०॥ ति स्रो वा चाषीउ दी र तो वातुहातइश। गा वो मि मातीन्ती धेकानाखवो ह रि रे तिशु। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्राखदाशत् ॥४१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 471 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
ति᳸स्रो᳒वाचाऊदीरते । गा᳒वो॑मिमन्तीधेना᳒वाः॑ । हा᳒री॑रेतीका᳒नीक्रदत् ॥ ५ ॥
ति स्रोणवा चाणाफ्उ दीखार ता इशि। गा वो मि माकीच्न्ती धाकाइ नायावाटहो वाटाहातइश। हा राचाइ रायाइ तीटाहो वाटाहातइश। का ना इ क्राटीट्दाखऔ हो वाश। दीखशाःप्ला ॥४२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 471 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
ति᳸स्रो᳒वाचाऊदीरते । गा᳒वो॑मिमन्तीधेना᳒वाः॑ । हा᳒री॑रेतीका᳒नीक्रदत् ॥ ५ ॥
ति स्रो वा चाफीउ दी र ताकीइश। गाकवो मि मकिन्ती धे न वोषीह रि राटिइ तीता। का नौटाच्हू वाकाएटहो वाका। क्राटट्दाखऔ हो वाशि। हातओ वाटाओ वाटाख् ॥४३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 472 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
इन्द्रा॑येन्दोमा᳹रू᳒त्वा॑ते । पा᳸वास्वामा᳒धूमक्तमः । अर्का᳒स्यायो᳒नीमा᳒सादः॑ ॥ ६ ॥
इ न्द्रा ये न्दातीबुश। मा रूकात्व ताकाइ पा व स्व माटुधु म क्त माःची। आथर्का स्या योटिच्नी मा साटिट्दाखऔ हो वाशि। इ षो वृ धेटीच् ॥४४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 472 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
इन्द्रा॑येन्दोमा᳹रू᳒त्वा॑ते । पा᳸वास्वामा᳒धूमक्तमः । अर्का᳒स्यायो᳒नीमा᳒सादः॑ ॥ ६ ॥
आखइ न्द्राशाप्ल्याखइ न्दोणा। मा रू त्वाकिताखइश। पाखवाशप्ल्स्वाखमाण। धू मा क्ताकिमाःख। आखर्काशप्ल्स्याखयोण। नी मा साकिदाःख ॥४५॥
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| 472 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
इन्द्रा॑येन्दोमा᳹रू᳒त्वा॑ते । पा᳸वास्वामा᳒धूमक्तमः । अर्का᳒स्यायो᳒नीमा᳒सादः॑ ॥ ६ ॥
इ न्द्राकाये न्दोकाहो औकहोतवात। मा रू त्व तेकहो औकहोतवात। पाचवा स्व माटिहो औकाहोतवात। धूचम क्त माटिहो औकाहोतवात। आथर्का स्या योटिहो औकाहोतवात। नि माकास दाटाहो औकाहोतवाखण्। ओपइ ळाशा ॥४६॥ इ न्द्रा ये न्दो एतुम रूता। त्वा ता इषाप वा स्व म धूकुम क्ताटामातच्हू वाकएटहोतवात। आ र्का स्याटियोतच्हू वाकएटहोतवात। नी मा साटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥४७॥
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| 472 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
इन्द्रा॑येन्दोमा᳹रू᳒त्वा॑ते । पा᳸वास्वामा᳒धूमक्तमः । अर्का᳒स्यायो᳒नीमा᳒सादः॑ ॥ ६ ॥
इ न्द्रा ये न्दोषीम रू त्व त ओतुहातइश। प वा स्वाकिम धु म क्त माकुओटहाखओखहाण। आ र्काथास्या योटा। नाटइ माखाऔ हो वाशि। उ प्साखादाःप्ल ॥४८॥
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| 472 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
इन्द्रा॑येन्दोमा᳹रू᳒त्वा॑ते । पा᳸वास्वामा᳒धूमक्तमः । अर्का᳒स्यायो᳒नीमा᳒सादः॑ ॥ ६ ॥
इ न्द्रा ये न्दोतीहातबुश। मा रू त्व तेटीहातबुश। पा वा स्व माकीहातबुश। धू मा क्त माटीहातबुश। आ र्का स्य योटीहातबुश। नि माटाहोखबाप्लसा दोप्ला। हा इशा ॥४९॥ इ न्द्रा ये न्दोतीवा ओतावात। मा रूकात्व ता उ वाकीआ उ वाकि। पा वाकास्व मा उ वाकीआ उ वाकि। धू माकाक्त मा उ वाकीआ उ वाखिअ र्का हा बु स्य यो हा बुशृ। नी मा उ वाकीहोपबाप्लसा दोप्ला। हा इशा ॥५०॥ इ न्द्रा ये न्दोषीम रू त्वातितातइश। प वा स्व मकीधूशमाचक्तायमापअ र्क स्य यो नि मा हा बुशृ। सा दोप्ला। हा इशा ॥५१॥
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| 473 |
त्रित आप्तयः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ त्रित आप्त्यः पवमानः सोमः गायत्री ॥
अ᳸स॑व्यंशुर्मा᳒दाय । अ᳸प्सु᳒द᳒क्षोगीरीष्ठाः । श्ये᳒नो᳒नयोनीमा᳒सा॑दत् ॥ ७ ॥
आ साता। व्यंकशु र्म्माताआ उ वाटि। दाखया प्सु दा क्षाःशी। गि राताआ उ वा एभी। ष्ठाःख। श्ये नोकानाटयोत। नि माताआ उ वाटि। साखदाशत् ॥५२॥ अ सा वि याती। शु र्म दाटिच्याकप्सु द क्षोषिगा इ रि ष्ठाःकी। श्या इ नोयिना योटाच्नीकमोपबाप्लसा दाप्लात् । हा इशा ॥५३॥ अ साफाव्या उ वोखिवाश। शुकर्म्म दा याटिउ वोखावाश। आ प्साटाउ वोखावाश। द क्षो गि रा इ ष्ठाटूउ वोखावाश। श्येकनो न यो नि मा साटू। दाखत् ॥५४॥ अ साफाव्यौ वा उ वोखीवाश। शुकर्म दा यौकिवा उ वोखिवाश। आ प्सूफाद क्षौ वा उ वोखुवाश। गी रा इ ष्ठौकीवा उ वोखिवाश। श्ये नोफान यौ वा उ वोखुवाश। नी मा सा दौकीवा उ वोखिबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥५५॥
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| 473 |
त्रित आप्तयः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
अ᳸स॑व्यंशुर्मा᳒दाय । अ᳸प्सु᳒द᳒क्षोगीरीष्ठाः । श्ये᳒नो᳒नयोनीमा᳒सा॑दत् ॥ ७ ॥
अ सा व्यु हु वातुहातइश। अंकशु र्म दा या प्सु द क्षोषृगि रि ष्ठा उ हु वाटूहोचइश। श्याकइ नोतानाटयोखऔ हो वाशि। नी मा साटिदाचत् ॥५६॥ अ सा व्यं शुषीरौ हो वातिहातइश। म दाटाच्या प्सु द क्षोषीगि रि ष्ठाःकि। श्या इ नोयिना योटा। नाटइ माखाऔ हो वाशि। उ प्साखादाशत् ॥५७॥ इ हाताओ वापाइ हा अ सा व्यंषुशु र्म दा ये हाशु। आ प्सु द क्षो गि रिकूष्ठाःखणफप्ल्। ईखहाश। श्येकनो न योटिनि माखाणफप्ल्। ईखहाश। आटस दाखाणफप्ल्त् । ईखहाश ॥५८॥ अ साखाव्यं शुप्लार्म दाखाया हा बुशि। आ प्सु दाखिक्षाःण। गि रा इ ष्ठोपीहाणइश। श्या इ नो नाभीयोत। ना इ माटिहाखण्इश। सापदाप्लत् । हा इशा ॥५९॥
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| 474 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ कश्यपोः मारीचः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳸वा॑स्वदक्षासाधा॑नः । देवे᳹भ्यः॑पीता᳒ये॑हरे । मारू᳹त्भ्योवाया᳒वेमा᳒दाः॑ ॥ ८ ॥
प वा स्वाफिदौ होफाऔ होफावातहातइश। क्षा साथाच्धाकनाटऔ होताऔ होतावातहातइश। देकवेथभ्यः पा इ त येकुच्हाकराटऔ होताऔ होतावातहातइश। मा रू त्भ्योचिवाटऔ होताऔ होतावातहातइश। याटट्वाखऔ हो वाशि। माखदाःप्ल ॥६०॥ प व स्व द क्षषूसा ध न ओतीवात। देकवे भ्यः पी त याटुहो इ ह राटीइश। मा रू त्भ्योचिवाटऊपय वोप्लाबा मा दोप्लि। हा इशा ॥६१॥
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| 475 |
जमदग्निर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ जमदग्निर्भार्गवः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पारीस्वानो᳹गीरीष्ठाः᳒ । पावी᳒त्रेसोमो॑अक्षरात् । मा᳒दे॑षुसार्वाधा᳒आसि ॥ ९ ॥
पा रीतास्वा नो गी रि ष्ठाःचु। प वाटाइ त्रेखासोकमोथअ क्षा राटित् । म दा इ षूकीसा ईटायातर्वाकधोपबाप्लआ सोप्ला। हा इशा ॥६२॥ प र्ये पा रीती। स्वा नो गि रि ष्ठाःचुप वाटाइ त्रेखासोकमोथअ क्षा राटित् । म दा इ षू साटुहातर्वाटट्धाखऔ हो वाशि। एतआ सीटाख् ॥६३॥ पा रीफास्वा नोफागाखइ रि ष्ठाःशि। पा विचात्रेकसो मोकाअ क्षा राकित्पा वि त्रेकिसो मोटाअ क्षाखाराणत् । ओ इ म दौकीवाखओखवा षु वाशि। साथर्वा धा य सा इ माटूट्दाखऔ हो वाशि। एतच्षु साकार्वा धा याटिसीख ॥६४॥ औटहो इ हाचिहाकच्हा होकायौटहोखवाश। प रा इ स्वाखीनोशगी राखाइ ष्ठाःणा। प वा इ त्रेखीसोशमो अ क्षाखिराणत् । म दा इ षूखीसाशर्वा धा याखिसीण। औटहो इ हाचिहाकच्हा होकायौटहोखवात्र। एतऊ पाटाख ॥६५॥
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| 475 |
जमदग्निर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पारीस्वानो᳹गीरीष्ठाः᳒ । पावी᳒त्रेसोमो॑अक्षरात् । मा᳒दे॑षुसार्वाधा᳒आसि ॥ ९ ॥
प र्ये स्वा नाःती। गाटइ रि ष्ठाःचिइ याटाच्हा हाथाउ वाटाहोचइश। पा वि त्रेकिसो मोटाअ क्षा राचित् इ याटाच्हा हाथाउ वाटाहोचइश। म दाटाइ षूकासाच। हा हाथाउ वाटाहोटर्वाकधोपबा आ सोप्लि। हा इशा ॥६६॥ प यौ हो वा हा इषूस्वा नाःता। गाटइ रि ष्ठाःचि। इ याटाच्ओखहाशप्ल्हातइश। हा हाथाओ वाकाओ वाका। पा वि त्रेकिसो मोटाअ क्षा राचित् । ओखहाशप्ल्हातइश। हा हाथाओ वाकाओ वाका। म दाटाइ षूकासाच। ओखहाशप्ल्हातइश। हा हाथाओ वाकाओ वाकार्वाकधोपबा आ सोप्लि। हा इशा ॥६७॥
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| 476 |
दृढच्युत आगस्त्यः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ दृढच्युत आगस्त्यः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳸रि॑प्रीया᳒दीवाः᳒कावीः᳒ । वा᳒यां॑सिनप्त्यो᳒र्हितः । स्वानै᳒र्यातीःकावी᳒क्रातुः ॥ १० ॥
प रि प्रि याषीदि वः का वीःती। वा यां सि न प्त्योषुर्हि ता स्वाकिनै र्याटातीत। आ याकाउ वा इ याशीईटयात। का वीःचाक्रा तोटाट्याखऔ हो वाशि। ईख ॥६८॥ प रि प्रि याफीदि वःशाक वाकाइःश। व याटाच्हाकउ वां सिकिन प्त्यो वा र्हीकीताःच। स्वाकनै र्याटातीत। हु वाकाहो वाकाहो वाकाहु वाटाईटयात। का वीःचाक्रा तोटाट्याखऔ हो वाशि। ईतयाटख्म् ॥६९॥