| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 177 |
देवजामयः इन्द्रमातरः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ देवजामय इन्द्रमातरः इन्द्रः गायत्री ॥
ईं᳒ख्या᳒यन्तीरापस्यू᳒वाः॑ । इ᳒न्द्रं॑जातामू᳒पासते । वन्वाना᳹साः॑सू᳒वी॑र्यम् ॥ १ ॥
ई ङ्ख्य य न्तीःती। अ पाटास्यू वाःटा। आ इ न्द्र न्जाकीच्ता मूचापायसा ताटाइश। वकन्वा नाटासाःत। सू वी र्याकिआ उ वाशि। वृ धेताच् ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 178 |
गोधा ऋषिका |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ गोधा ऋषिका इन्द्रः गायत्री ॥
ना᳒की॑देवाइनीमसि । न᳒क्या᳒यो॑पयामसि । म᳒न्द्रश्रु᳒त्य॑ङ्चरामसि ॥ २ ॥
न कि दे वाःती। ई ना इ नी मा साटूइशमा सीकायाखन क्या योशि। पा या प या मा साटूइशमा सीकायाखम न्द्र श्रु त्यशीम् । चा रा च रा मा साटूइशमा सीखायाण ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 179 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ दध्यङ्गाथर्वणः इन्द्रः गायत्री ॥
दोषो᳹आ ᳹गा॑त्ब᳒हा᳒त्गा॑या । द्धूमा॑द्गमाथर्वणा । स्तू᳹हिदे॑वंसा᳒वीता॑रम् ॥ ३ ॥
दो षो आ गातीत् । बृ ह द्गा यषीद्यु म त्गाटिमात। अ थचार्व ण स्तु ही यौटुहोखइ दे वातिम् । साकवोपबाप्लता रांप्ला। हा इशा ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 180 |
प्रस्कण्वः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ प्रस्कण्वः काण्वः इन्द्रः (अश्विनौ) गायत्री ॥
एषो᳒ऊषा᳒आ॑पूर्व्या । व्यूंठ॑च्छतीप्रीया᳒दीवः । स्तू᳒षेवा॑मश्विनाबृहा᳒त् ॥ ४ ॥
ए षो ऊ षाःती। आ पूकार्व्यु व्यू च्छ तीकीहो वाटाहातइश। प्री या दाटिइ वाखास्तु षाखाइ वा माति। श्वीकनोपबाप्लबृ हाप्लात् । हा इशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 181 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ गौतमो राहूगणः इन्द्रः गायत्री ॥
इन्द्रो॑दधीचो᳒अस्था᳒भिः॑ । वृत्रा᳒ण्य᳒प्रा᳒तिष्कृतः । जघा᳒ना॑नावा॑तीर्नावा॑ ॥ ५ ॥
इ न्द्रो द धी चोषुअ स्थ भि री याटुईटयात। वृ त्रा ण्यषिप्र ति ष्कृ त इ याटूईटयात। ज घा न नषीव ती र्न व इ याटूईटयाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥५॥ इ न्द्रो द धातीइ चो अ स्थाखीभीःण। वृ त्रा ण्य प्राकीति ष्कृ ताःचि। ज घा नाटिनात। व तीकाच्र्न्नाकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 182 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
इ᳒न्द्रे᳒हीम᳒त्स्य᳒न्धा॑सः । विश्वेभिस्सोमापा᳒वा॑भीः । मा᳹हं ᳹आ॑भी᳒ष्ठीरोज॑सा ॥ ६ ॥
इ न्द्रे हि मातीहातबुश। स्ती या न्धापिसाःश। वा इ श्वेचिभि स्सोथाहातमाकप र्वाखाभीःण। म हंटाआटभाखऔ हो वाशि। ष्टि रो जाटिसाख ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 183 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳒तू᳒नो॑इन्द्रवृत्रहन् । अस्मा᳒कामा᳒र्धामाग॑ही । माहा᳒न्मा᳹ही ᳹भी॑रुतीभीः॑ ॥ ७ ॥
आ तूखाऔ होप्लाआ तूखाऔ होप्ला। ना इ न्द्र वृ त्राटुहाकथ्न्न स्मा का माकीर्द्धा मा गाटिहीत। मा हाटान्मा हीटाच्भीकरोपबाप्लता इ भोप्लिहा इशा ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 184 |
वत्सः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वत्सः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
ओजस्ता᳒द॑स्यतिद्विषे । ऊ᳒भेया᳒त्सामा᳒वा॑र्क्तयात् । इन्द्राश्चर्मेवा॑रो᳒द॑सी ॥ ८ ॥
हाफहा उ वाति। ओ ज स्त दषीस्य ति द्वि षेकीख्। हाफहा उ वाति। ऊ भे य त्सा मषुव र्क्त याकिख्त् । हाफहा उ वाति। इ न्द्रा श्च र्मेकीच्वाकरो दाटासीख ॥९॥ ओ ज स्त दाफीस्य ति द्वि षाकीइश। ऊ भे य त्स म वषूर्क्त या दा इ न्द्रा श्चाटूट्र्म्माखऔ हो वाशि। एतच्वा रो दाटीसीख ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 185 |
शुनः शेप आजीगर्तिः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ शुनः शेप आजीर्गितः इन्द्रः गायत्री ॥
आया᳒मू॑तेसा᳒मा॑तसि । का᳒पो॑ताइवगर्भा॑धिं । वा᳒चस्ता᳒च्चिन्नओहसे᳒ ॥ ९ ॥
आ याणामू ताणाफ्इ साखामा त सा इशी। का पो ता इ वाकुगाचर्भायधीटम् । वा चाटास्ता चीटाच्न्नाकओपबाप्लहा सोप्ला। हा इशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 186 |
उलो वातायनः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ उलो वातायनः इन्द्रः (वायुः) गायत्री ॥
वातआ᳒वा॑तूभेषाजं᳒ । शंभूमा᳒योभूनोहृदे । प्राणआयूंषि॑तारि॑षात् ॥ १० ॥
वा त आ वा तु भातूइ ष जातिम् । शंकभू म योकिच्भू नोकाहृ दापाइ हाप्लाहाङइश। प्रा न आ यूं षिपुताशरि षा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१२॥