| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 371 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
विश्वाः᳒पृ᳒ता॑ना᳒आभीभू᳹ता॑रन्नाराः । साजू᳒स्ताता॑क्षुरिन्द्रं॑जजनु᳹श्चा॑राजसे । क्र᳒त्वेवा᳹रेस्थेमन्यामू᳹री॑मू᳒ता । उ᳒ग्र᳒मो᳒जी॑ष्ठन्तारा᳒स॑न्तारस्वीनम् ॥ १ ॥
वि श्वोताहातइश। पा र्क्त नाटिआ भि भूकित रकाच्न्नाकराःच। सा जूचास्ता त क्षूचिरा इ न्द्रकिन्ज जकानु श्च राचिजा सोपाहाणइश। क्र त्वौ हो इ वाकुरौ हो इ स्थेकीम न्याटामूखरीणम् । उ तोताहातइश। उ ग्रा मोपिजिशष्ठ न्ता राखिसणम् । ओ इ त राखिस्वी न मो वाशि। ओ इ जीखिवाश ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 372 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
अति जगती |
॥ रेभः कश्यपः इन्द्रः अति जगती ॥
श्र᳒क्ते॑दधामिप्राथामा᳹या॑मन्या᳒वे । आ᳒ह᳒न्यद्द᳒स्युन्न᳹र्यं॑वीवे᳒रापः । ऊ᳒भेयत्वा᳒रोद॑सीधावा॑तामा᳒नू॑ । भ्या᳸सा॑क्तेशू᳒ष्मात्पृथि᳒वी॑ची॑दद्रीवः ॥ २ ॥
श्र क्तेताहोतइश। द धाटाहोतमि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हतान्होतइश। य द दाटिहोत। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। उ भेताहोतइश। य त्वाटाहोतरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य साताद्धोतइश। ते शुकाहोथच्ष्माकत् । पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्। वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। ईख ॥२॥ श्र क्ताताइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हकान्न्य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेकारायपाटआ पाःटा। उ भाताइशय त्वाथारो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नुटा। भ्य साताक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्री वाकाएखहि याप्लाहाश। होप्लइ ळाशा ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 372 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
अति जगती |
श्र᳒क्ते॑दधामिप्राथामा᳹या॑मन्या᳒वे । आ᳒ह᳒न्यद्द᳒स्युन्न᳹र्यं॑वीवे᳒रापः । ऊ᳒भेयत्वा᳒रोद॑सीधावा॑तामा᳒नू॑ । भ्या᳸सा॑क्तेशू᳒ष्मात्पृथि᳒वी॑ची॑दद्रीवः ॥ २ ॥
आ योचावाटआ या योचिवाट। श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। आ योचावाटआ या योचिवाट। आपहशन्न्याखद दाण। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। आ योचावाटआ या योचिवाट। ऊपभा इशायाखत्वाण। रो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नूटा। आ योचावाटआ या योचिवाट। भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटटवाखऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्रि व औचिहोटहतच्म् ॥४॥ ई योचावाटई या योचिवाट। श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। ई योचावाटई या योचिवाट। आपहशन्याखद दाणा। स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। ई योचावाटई या योचिवाट। ऊपभा इशायाखत्वाणरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। ई योचावाटई या योचिवाट। भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्री व ईचियोटहतच्म् ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 372 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
अति जगती |
श्र᳒क्ते॑दधामिप्राथामा᳹या॑मन्या᳒वे । आ᳒ह᳒न्यद्द᳒स्युन्न᳹र्यं॑वीवे᳒रापः । ऊ᳒भेयत्वा᳒रोद॑सीधावा॑तामा᳒नू॑ । भ्या᳸सा॑क्तेशू᳒ष्मात्पृथि᳒वी॑ची॑दद्रीवः ॥ २ ॥
आतयातम् । श्रापक्ता इशा। दाखधाण। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। आतयातम् । आपहशन्याखद दाणा। स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। आतयातम् । ऊपभा इशायाखत्वाण। रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। आतयातम् । । भ्यापसाशक्ताखइ शूणा। ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्रि वोचाद्रीटवाःख ॥६॥ अ य य्याःति। श्र क्ताचाइशा। द धाथाच्। मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ य य्याःति। अ हचान्या द दाथिस्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःटा। अ य य्याःति। उ भाचाइशय त्वाथाच्रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। अ य य्याःति। भ्य साचाक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट् खऔ हो वाशि। हातहा उ वाति। द्री वाटाईख ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 372 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
अति जगती |
श्र᳒क्ते॑दधामिप्राथामा᳹या॑मन्या᳒वे । आ᳒ह᳒न्यद्द᳒स्युन्न᳹र्यं॑वीवे᳒रापः । ऊ᳒भेयत्वा᳒रोद॑सीधावा॑तामा᳒नू॑ । भ्या᳸सा॑क्तेशू᳒ष्मात्पृथि᳒वी॑ची॑दद्रीवः ॥ २ ॥
औ होताहोतहातइश। श्राखक्ता इशा। दा धाफामि प्र था माफीय म न्याखिवेशय म न्याखिवाणइश। अ हणान्न्या द दाफिस्यु न्न र्यंफिवी वे राखिपोशवी वे राखिपाःण। उ भाणाइ या त्वाफिरो द सी धाफीव ता माखिनूशव ता माखिनूण। भ्य साणाक्ता इ शूफिष्मा त्पॄ थी वीफीची दा द्रीखिवोशचि द्र द्राखिइ वाःणा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। एतद्री वाकाईटहाख ॥८॥ श्र क्ता औटिहोतहोतहातइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हा औटिहोतहोतहातइश। य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेचारायपाटआ पाःट। उ भा औटिहोतहोतहातइश। य त्वाथाच्रो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य सा औटिहोतहोतहातइश। ता इ शूथिच्ष्माकत्पॄ थी वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। द्री व एचिद्री वाःटाख् ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 373 |
सुवेदा शैलूषिः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ सुवेदाः शैलूषिः इन्द्रः जगती ॥
सामेताविश्वा᳹ओज॑सापा᳹तिन्दीवः᳒ । य᳒ए᳒का᳹इ᳸त्भू॑रा᳒तीथिर्जना॑नाम् । सा᳒पूर्व्यो᳒नूता॑नामाजी᳒गीष॑न्तंवार्क्तानीरानूवावृताएकाईत् ॥ ३ ॥
स माताहातइश। आ इ त वि श्वाषुओ जा साकिप ति मोकिइ दि वापिहाप्लहाङइश। य आचाइ कायाईटत्भूचरा तिचाथि र्ज नाटिनांखहाप्लहाङइश। सा पू र्वी योटीनू ताकान माचाजि गाटाइ षाखान्हाप्लहाङइश। तंकवा र्क्तायानीटच्राकनु वाटावृ त आचिएटक याकाउ वाता। वृ धेताच् ॥१०॥ स मे त वि श्वा ओ ज साषृप ति मे पा तीतूम् । दि व याकिहौटहौटहोतवा ईटायात। य आतई कायाईटत्भूटरा तीथाथि र्ज नाटिनांकहौटहौटहोतवा ईटायात। सा पू र्व्योटिनू ताकान माचाजि गाचाइ षाकान्हौटहौटहौटहोतवा ईटायात। तंकवा र्क्तायानीटच्राकनु वाटावृ ताचाआचयेटक याकाउ वाता। म हेताच् ॥११॥ स मे त वि श्वा ओ ज साषृप ति मे पा तीतुम् । दा इ वायियाटऔटहौटहोतवा ओ मोचिवाश। य आचाइ कायाईटत्भूचरा तीचाथि र्ज नाटिना औटाहौटहोतवा ओ मोचिवाश। सा पूचार्वाययोटनू ताकान माचाजि गाटाइ षा न्हौटिहौटहोतवा ओ मोचिवाश। तं वाकार्क्तायनीटच्राकनु वाटावृ त आचिएटक याकाउ वाता। ध र्माटाणेख ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 374 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः जगती ॥
ईमेताइन्द्रातेवा॑यंपूरूष्टुत । येत्वाराभ्याचारामसिप्रभूवसो । नाहित्वादन्योगीर्वाणोगीरस्साघात् । क्षोणीरीवप्रातीताद्धरीयानो᳒वा᳒चाः॑ ॥ ४ ॥
इ मे त याती। न्द्रा ते व य म्पु रूटूष्टू ताटा। ये त्वा र भ्यषीच रा म सि प्र भूटूवा साटाबुश। ना हि त्वा द न्योषुगि र्व णो गि राटुस्सा घाटात् । क्षोकणी रि वषिप्र ति त द्ध र्य नोटूवा चापाव चा उ वो वाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१३॥ इ मे त याती। न्द्रा तेकाव य म्पु रू ष्टू ताकूयायइ त्वाटाच्। रायभ्याटच्। चा रा म सी प्र भूकूवा साटाबुश। नायहीटच्त्वायदाटच्न्यो गि र्व णोचीगि राकास्सा घाचात् । क्षोयणीटच्रायइ त्वाटाच्प्रा तीकात द्ध रीकिया नो वाटिचाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१४॥ इ मे तापिइ न्द्र ते व यंषुपु रू ष्टूप्लितोङवाश। ये त्वा रा भ्याटीच रा म सीखीप्रा भूचावा साफाबुश। ना हि त्वा दाटीन्यो गि र्वा णोखीगी राचासा घाफात् । क्षो णी रा इ वाटुच्प्रा ती त द्धाटीर्य नो वा चाःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 375 |
सव्यः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ सव्य आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥
चऋष॑णीधृ᳹तंम्माघावानाठ॑मुक्त्यं । इ᳒न्द्रंगीरोबृहातीरभ्यानूषत । वा᳒वृधा᳒नंपू॑रूहूतं᳹सूवृक्ती॑भीः । आ᳹मा॑र्क्त्यंजरा॑माणन्दीवे᳒दिवे ॥ ५ ॥
च र्ष णी धृ तांतुहातबुश। मा घ वाकिना मु क्थाटियातम् । इ न्द्र ङ्गी रोषुबृ ह ती राकीभ्या नू षाटितात। वा वृ धा नाटीम्पू रू हूटिच्तां सु वाटिर्क्ताखइ भीःणा। आ माटाच्र्ती याकाज र मा णाटीन्दापइ वेशादाखइ वोप्ला। हा इशा ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 376 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः जगती ॥
अच्छावाइन्द्रम्माता᳹यास्वर्यू᳒वाः॑ । स᳒ध्री᳒चीर्विश्वा॑ऊशाती᳒रा॑नूषत् । पा᳒री॑ष्वजन्ताज᳹ना ᳹यो॑याथापातिं । म᳒र्यान्ना᳒शुन्ध्यु᳒मा॑॑घा᳸वा॑नामूता᳒ये ॥ ६ ॥
अ च्छा व इ न्द्रषुम्म त य स्व र्यू वातूएत। स द्ध्री ची र्वि श्वषुउ श ती र नूकुषा ताटा। पा री ष्व ज न्तषुज न यो य थाकुपा ति म्टा। म र्य न्नाटिशूतन्ध्यू र्म्म घ वाटीन मूखाऔ हो वाशि। त याताच्ईख ॥१७॥ आपच्छा व इ न्द्र म्माप्लुत याःङा। सूकवा र्यू वाटिट्सापध्री ची र्वि श्वा ऊप्लुश तीःङा। आकनू ष ताटिपापरि ष्व ज न्ता जप्लुन याःङा। याकथा प ता एभीमापर्य न्न शु न्द्ध्यु र्म्माप्लुघ वाङा। नाकमू ताकायाचबुश। बाटख् ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 377 |
कृष्ण आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
जगती |
| 378 |
सव्यः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ कृष्ण आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥ ॥ सव्य आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥ ॥ सव्य आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥
आ᳒भि᳒त्यं᳒मेषंपू॑रुहूता᳒मृग्मी᳒यं । इन्द्रं॑गीर्भि॑र्मादतावस्वोअर्णा॑वम् । य᳒स्या᳒द्यावोना᳒वीचा᳹र॑न्तीमानू॑षं । भु᳒जे᳒मं᳒हीष्ठामाभी᳒विप्रा॑मर्चत ॥ ७ ॥
त्यं᳒सूमेष᳒म्मा॑हयास्व᳒र्वी᳒दं॑ । शा᳒तं᳹यस्या॑सूभूवाठ॑साक᳒मीरा॑ते । अ᳒त्यन्ना᳒वा᳒जं॑हवानस्यादंरा᳒थं॑ । ए᳒न्द्रं᳸ववृत्यामा᳒वा॑सेसू᳒वृक्तीभीः॑ ॥ ८ ॥
अ भि त्याखिम्मे ष म्पूप्लिरूङहूश। ता मृचाग्मा याटाम् । ई न्द्राताङ्गी र्भाताइ र्म द ता व स्वोचूअ र्णाकावा मोपाहाप्लहातइश। य स्य द्या वोचीन वि च रकीच्न्तीशमा नू षाकिमोपहाप्लहातइश। भु जे मं हि ष्ठ मषूभि वि प्र म र्च ताकूदु राटाति नाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१९॥ त्यं सूखामे ष म्माप्लिह याङा। सू व र्वाटिइ दाताम् । श तांताय स्य सूचिभु व स्साचिका माकाइ रायाताटइश। अ त्य न्न वा जंषूहा वाचान स्याकादांचरायथांट। आ इ न्द्रंकिच्व वृकात्या म व सा इ सूटूट्वृखऔ हो वाशि। क्तीखभीःश ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 379 |
सव्यः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ सव्य आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥ ॥ सव्य आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥
घृ᳒ता᳹वा॑तीभू᳒वानानामाभि᳒श्रीयाः । उ᳒र्वी॑पृथ्वी᳹माधूदु᳹घे॑सुपे᳒शा॑सा । द्या᳒वा॑पृथिवी᳒वारू॑णस्याध᳒र्मा॑णा । विष्का॑भितेआजरेभू᳒रिरेतसा ॥ ९ ॥
घृ त व ती भु वषूना ना म भातीइ श्रि याति। उ र्वी पृ थ्वी मषुधु दु घे सु पे शाकूसाच। द्या वा पृ थि वीषूव रू णा स्याकीध र्म्म णाचि। वा इ ष्क भीकीताचया ज रेकिभू रि राटिई त साकिउ वाता। इ न्दुकास्स मु द्र मू र्वीकुया वि भाकितीख ॥२१॥ घृ ताणावा ताफाइ भु व नाखीना म भा इ श्रि याशू। उ र्वी पृ थ्वी म धुषूदु घे सु पे श साटूहोचइश। द्या वा पृ थ्वीषीव रू णा स्याकीध र्म्म णाटिहोचइश। वि ष्का भाटिइ तेता। आ ज रेकिभू रि राचिई त साकिउ वाता। एतइ न्दुकासा मू द्र मू र्वीकुया वी भाकितीख ॥२२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 380 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
द्यावापृथिवी |
जगती |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः द्यावापृथिवी जगती ॥
ऊर्भे᳹या ᳹दिन्द्रारो᳒द॑सि । आपःप्रा᳒थोषा᳒ई॑वा । माहा᳒न्त॑न्त्वामाही᳒नां॑ । स᳒म्रा॑जन्वर्षाणीनां᳒ । दे᳒वी᳒जनीत्र॑यजीजनात् । भ᳒द्रा᳒ज᳒नीत्रयजीजना᳒त् ॥ १० ॥
उ भे य दि न्द्र रोतूद साताइश। आ पाटाप्रा थाकाइ षाताआ उ वाटि। ईखवाश। मा हा न्त न्त्वाटीम हा इ नांटीस म्रा औपिहोश। ज ञ्च ॠकिष णाताआ उ वा एभी। नातमाख। देकवी ज न त्र या जीयूजा नाटात्भ द्रा औपिहोश। जा नि त्रटिय जाताआ उ वाटि। एतज नाकादाख ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 381 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
महा पंक्तिः |
॥ मेधातिथिः काण्वः (मान्धाता यौवनाश्वः) इन्द्रः महापंक्तिः ॥
प्रा᳒मन्दीने॑पीतूमाद॑॑र्चातावा᳒चाः॑ । याःकृष्णागर्भा॑णीरा᳹ह॑न्नृजीश्वा॑ना । अव᳒स्यावो᳒वृ᳒षा॑णंव᳒ज्रा॑दक्षिणं । मा᳒रूत्व॑न्तंसख्या᳒या॑हुवेमही ॥ ११ ॥
प्र म न्दाखिइ ना इशिपि तु र्म दाखीर्चा ताचावा चाःफा। याः कृटाओखवाण। ष्णा ग र्भाचिनी रा हकिन्नृ जा इ श्वा नाटुअ व स्याखिवाःण। वृ षा णंकिवा ज्राकाद क्षाखाइ णणाम् । मा रौकावा उ वोखिवाश। त्व न्तं स ख्या यषुउ हु वाप्लिइ म हाप्लिबुश। बाश ॥२४॥