| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 235 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
आभित्वा᳒शू᳒र॑नोनुमः । आदू᳸ग्धाइवाधेना᳒वाः । ई᳒शा॑ना᳒मा॑स्याजग॑तःस्वदृशं । ईशा॑नमिन्द्रातस्थू᳒षाः॑ ॥ १ ॥
अ भि त्वा शूती। रा नो नूटिमातओ नूटामाःत। आ दु ग्धाकिइ वाचाधा इ नाटिवाखओ इ नाटिवाःत। आ इ शाकिच्न म स्य ज ग ताचूस्सू वाचाद्र शाकामो दृटाशातम् । आ इ शाकिन मिकान्द्रा त स्थूचिषाःकओ स्थूटाट्षाखऔ हो वाशि। स्थु षातास्थू षाःटाख् ॥१॥ आ भि त्वा शूखीरा नो नू माःप्ली। आ दु ग्धाचिइ वाकाधाटई नाटावाःत। आ इ शाकिन म स्य ज ग ताचूस्सु वाटाद्रखशाणम् । ईकशा नाटामीतद्रा ताचास्थु षा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 236 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भरद्वाजः (शयुः) बार्हस्पत्यः इन्द्रः बृहती ॥
त्वा᳒मि᳒द्धि᳒हा᳒वा॑महे॑ । सा᳒तौवा᳒ज॑स्याकारा᳒वाः॑ । त्वांवृ॑त्रे᳒ष्विन्द्रा॑सात्पातिन्ना᳒राः॑ । त्वांकाष्ठास्व॑र्वातः ॥ २ ॥
त्वा मि द्धीति। ह वाटामा हाचाआचऔकहो वा हा उ वाशु। ऊखपाश। सा तौ वाचिजकस्या काटारा वाटाआचऔकहो वा हा उ वाशु। ऊखपाश। त्वां व्र त्रा इ षूटुइथन्द्राटसाटत्पा तीकामाचऔकहो वा हा उ वाशु। ऊखपाश। ण र स्त्वाकिङ्काकथ्ष्ठा सु वाटिर्वा ताकाआचऔकहो वा हा उ वाशु। उ ऊखापाश ॥३॥ त्वा मि द्धि ह वा मषूहे सा तौ वा जोतुवात। स्याचकायरा वाःटा। त्वां व्र त्रा इ षूषुइ न्द्रा सा तकीत्पाचतीयन्ना राःटा। तू वा ङ्काटिष्ठात। सू व र्वाटिताःखण। ओपइ ळाप्ला ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 237 |
प्रस्कण्वः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ प्रस्कण्वः इन्द्रः बृहती ॥
आभी᳹प्रा᳹वास्सूरा᳒धा॑सम् । इन्द्रा॑मर्चाया᳹था॑वीदे । योज॑रितृ᳹भ्यो॑माघा᳒वा॑पूरो᳸वासूः᳹ । सा᳒हा॑स्रेणेवाशी᳒क्षा॑ति ॥ ३ ॥
अ भि प्र वाःती। सू रा धाटिसातम् । इ न्द्र म र्च या थायूवि दापाइ यो जाखिरि तृता। भ्यो म घ वा पू रोयूवा सूःटा। सा ह स्राटिट्इ णाखाऔ हो वाशि। वा शी क्षाटितीख ॥५॥ आ भा इ प्र वाटुस्सु रा धाखिसणम् । इ न्द्र म र्चा याटुट्थाखऔ हो वाशि। वीखदेश। यो ज रि तृ भ्योकुच्मा घ वाटिपु रोतावा सूःटाख्। स हाताश्रेकणे वाकाशा इ क्षाटिट्ताखऔ हो वाशि। सु भूकात येटाख् ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 237 |
प्रस्कण्वः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
आभी᳹प्रा᳹वास्सूरा᳒धा॑सम् । इन्द्रा॑मर्चाया᳹था॑वीदे । योज॑रितृ᳹भ्यो॑माघा᳒वा॑पूरो᳸वासूः᳹ । सा᳒हा॑स्रेणेवाशी᳒क्षा॑ति ॥ ३ ॥
अ भि प्र व स्सु राफूध साखाऔणहोफवाप्ल। आ इ न्द्रा माटीर्चा या थाचिवि दाटाओखहाणइश। योचज रीकातृ भ्योचामा घापावाशपु रोटावाखसूःण। सा ह स्रेफिणातइ वापाशाशहि म्मा इ क्षाटीट्ताखऔ हो वाशि। वाखसूश ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 238 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नोधा गौतमः इन्द्रः बृहती ॥
तंवो॑दस्मा᳹मृ॑तीषाहम् । वा᳒सो॑र्मन्दानमन्धा॑सा । आ᳒भी᳒वत्स᳒न्नस्वा᳒सारेषुधेना᳒वाः॑ । इ᳸न्द्रं॑गीर्भि॑र्ना॑वामहे ॥ ४ ॥
तं व ए दा स्मातुम् । ऋ तीकाषा हांचाहो वाकाओ औकाहोतइ हाता। वा सो र्म न्दाकीच्न म न्ध साकीओ औकाहोतइ हाता। आ भी व त्सकीन्न स्वा स रेटीषु धेचान वाटाओ औकाहोतइ हाता। । इ न्द्रंकाओ औकाहोतइ हाता। गी र्भा इ र्न्नाखीऔ हो वाशि। वा माटाहेख ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 238 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
तंवो॑दस्मा᳹मृ॑तीषाहम् । वा᳒सो॑र्मन्दानमन्धा॑सा । आ᳒भी᳒वत्स᳒न्नस्वा᳒सारेषुधेना᳒वाः॑ । इ᳸न्द्रं॑गीर्भि॑र्ना॑वामहे ॥ ४ ॥
तं वोणादाफस्माखमृ ती षाप्लिहो वाङा। वा सो र्म न्दाकीच्ना माक्यन्धायसाटआ भी व त्साकीओपना स्वाफस रेफाप्ल्षू धाचाइ नायावाःट। इ न्द्राकाङ्गायइ र्भिटार्न्न वातामाखणफप्ल्। हाखइश ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 238 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
तंवो॑दस्मा᳹मृ॑तीषाहम् । वा᳒सो॑र्मन्दानमन्धा॑सा । आ᳒भी᳒वत्स᳒न्नस्वा᳒सारेषुधेना᳒वाः॑ । इ᳸न्द्रं॑गीर्भि॑र्ना॑वामहे ॥ ४ ॥
तं वो द स्म मृ तीफूष हा उ वोखीवाश। वा सो र्म न्दाकीन मचान्धा साकाआ भी व त्स न्न स्वषूस रा इ षू धायुइ नापवाःश। ओ वा इकिन्द्र ङ्गाटाइ र्भीताच्न्न वातामापहात्रइश। भ गातायाटख् ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 238 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
तंवो॑दस्मा᳹मृ॑तीषाहम् । वा᳒सो॑र्मन्दानमन्धा॑सा । आ᳒भी᳒वत्स᳒न्नस्वा᳒सारेषुधेना᳒वाः॑ । इ᳸न्द्रं॑गीर्भि॑र्ना॑वामहे ॥ ४ ॥
तं वो द स्मा मृ तीफूष हांतावापसो र्म न्दा न मप्लुन्धाङसाश। आ भी व त्सषीन्ना स्वा सा रेकीच्षू धाकाइ नापावाःश। इ न्द्र ङ्गी र्भायीइ र्न्नापावाश। हिंटहिंतहिंटहिंख। न वा न वोप्लीवाप्लमा मोप्ला। हा इशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 238 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
तंवो॑दस्मा᳹मृ॑तीषाहम् । वा᳒सो॑र्मन्दानमन्धा॑सा । आ᳒भी᳒वत्स᳒न्नस्वा᳒सारेषुधेना᳒वाः॑ । इ᳸न्द्रं॑गीर्भि॑र्ना॑वामहे ॥ ४ ॥
तांपवो द स्मा मृ तीप्लुषाङहाशम् । वा सो र्म न्दाटीनाटम न्धापासाश। आटभीतव त्स न्न स्व स राषूइ षूयाधेकनाखवाःण। आटइ न्द्राता। गा इ र्भि र्न्नाकीवोपओ बाप्ला। माखहेश ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 239 |
कलि प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ कलिः प्रागाथः इन्द्रः बृहती ॥
ता᳒रो॑भिर्वोवीद᳒द्वा॑सुम् । इन्द्रंसाबा᳹धा॑ऊता᳒ये । बृह᳒त्गा᳒यन्तास्सूता᳒सो᳒मेआध्वारे । हूवे᳒भारन्नाकारीण॑म् ॥ ५ ॥
ता राःता। भाचइ र्वोकावि दाताआ उ वाटिद्वाखसुशम् । इ न्द्रांटाच्साचबा ध ऊकित येटाबृ हाचात्बृ हाताआ उ वाटा। गा यचान्ताकस्सू ता सोकिमे आचाध्वा रेचा। हु वे भाटिरातन्ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१३॥ ता राःता। भाचइ र्वोशावि दाताआ उ वाटि। द्वाखसुशम् । इ न्द्राटाच्सा बाचाध ऊकात येटाच्बृ हाचात्गाययाटन्त स्सू ता सोटीमेतआ ध्व राचिइश। हु वे भाटिरातन्ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 239 |
कलि प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
ता᳒रो॑भिर्वोवीद᳒द्वा॑सुम् । इन्द्रंसाबा᳹धा॑ऊता᳒ये । बृह᳒त्गा᳒यन्तास्सूता᳒सो᳒मेआध्वारे । हूवे᳒भारन्नाकारीण॑म् ॥ ५ ॥
त रो भि र्वोषीवि द द्वातिसूतम् । इ न्द्रातामि न्द्रंचास बाकाच्धाकऊचताययाटइश। बृ हातात्बृ ह त्गा य न्त स्सूतूत सोकाच्माचयायध्वा राटाइश। हू वाचाइशहू वे भ र न्ना काचूरि णा मि ळाटीभाखण। ओपइ ळाप्ला ॥१५॥ त रो भि र्वोषीवि दा ओ द्वा सूतुम् । इ न्द्रं स बाचीध ऊटाताखयाणइश। बृ हाचात्बृ हाताआ उ वाटि। गा य न्ताचिस्सू ता सोचिमे आचाध्वा रेचाहू वेकाहो इ भाटिरातन्ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 239 |
कलि प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
ता᳒रो॑भिर्वोवीद᳒द्वा॑सुम् । इन्द्रंसाबा᳹धा॑ऊता᳒ये । बृह᳒त्गा᳒यन्तास्सूता᳒सो᳒मेआध्वारे । हूवे᳒भारन्नाकारीण॑म् ॥ ५ ॥
त रोटाभि र्वो वि दाखीद्व सूशाम् । इ न्द्रं स बाचीधाटऊ ताचायाकओखवाशप्ल्ओखवाण। बृ ह त्गा य न्तःषुसू त सोकिमाचयायध्वा राटाओखवाशप्ल्ओखवाण। हू वा इ भ र न्नाचूकाकराखइ णणाम् । ओखवाशप्ल्ओखइ ळाशा ॥१७॥ ता रो भि र्वोटीवि दाखाद्व सूशाम् । इ न्द्रंचास बाकाच्धा ऊकाताययाटऔटहोतवा औटाहोतवात। बृ ह त्गा य न्तषुस्सू त सोचिमाकयायध्वा राटाऔटहोतवा औटाहोतवात। हू वाचाइ भायाराटऔटहोतवा औटाहोतवात। ना काचारि णा मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१८॥ त रो भा इ र्वोखुवी द द्व सूप्लीम् । इकन्द्रं स बाचिध ऊकाच्ताकयापइ बृ हाप्लित्गा यातान्तापसू ता सोणिमे आफाध्वातरातइश। हू वाचाइ भ रौकिवाखओखवाण। न का रि णांप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 240 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
ता᳒रा᳒णीरित्सी᳒षासती । वाजं᳒पू᳒रन्ध्यायूजा । आ᳒वाइन्द्रं॑पूरुहूत᳒न्ना॑मेगीरा᳒ । नेमि᳒न्तष्टे॑वासुद्रूव॑म् ॥ ६ ॥
त र णि रीतीत् । सि षा साखितीण। वाकजांचपु राचान्धि यातायु जाटाआ वाटाइखन्द्रणम् । पु रू हू ताचीन्न मेकागा इ राःटिना इ मिटिन्ताखष्टेण। वाकसु द्रू वाटिख्म् ॥२०॥ ता राताहातबुश। णी रि त्सीचीषा स ती हा याकुइ हा यातिइश। वा जंचापु रकाच्न्धी याचायुयजौटहो वाताहातइश। आ व इ न्द्रं प रुकूहू तथान्ना माकाइ गायाइ रौटाहो वाताहातइश। ने मिचान्त ष्टेकाच्वा साचाऔकहो वा हाखिऔ हो वाशि। द्रूखवशम् ॥२१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 240 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
ता᳒रा᳒णीरित्सी᳒षासती । वाजं᳒पू᳒रन्ध्यायूजा । आ᳒वाइन्द्रं॑पूरुहूत᳒न्ना॑मेगीरा᳒ । नेमि᳒न्तष्टे॑वासुद्रूव॑म् ॥ ६ ॥
त र णि रि त्सी षाफूस तीतावापज म्पु र न्ध्याप्लीयूङजाश। वा जं पु रषीन्ध्या यू जा वाटीइ न्द्रांखापु रु हू त न्न मेफूप्ल्गातइ राःता। नेकमा इ न्ताटिष्टेत। व सू द्रूचिवा मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२२॥ त र णि रि त्सी षाफूस तीतावापजं पु र न्ध्याप्लीयूङजाश। वा जं पु र न्ध्या यू जा व इ न्द्रषै पु रु हू त न्न माटेइ गा इ रा होकुवातउ उ वो इचीइश। ने मि न्त ष्टे व साचूउ वाकाओपबाप्लद्रू वांप्ला। हा इशा ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 241 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथिः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
पीबा᳸सू᳹तस्या॑रासी᳒नाः । मत्स्वा॑नइन्द्रागो᳒मा॑तः । आपिर्नोबोधीसा᳒धा॑मा᳹द्ये॑वृधे᳒ । अस्मंआ॑वन्तूते᳒धी᳒याः॑ ॥ ७ ॥
पि बाताच्सु त स्य र सि नाःचू। म त्स्वा नषिइ न्द्र गो म ताटुहोकइ याचा। आकपि र्न्नो बो धिषीस ध माकिद्ये वृ धाटिहोकइ याचा। अ स्मं आटिवात। न्तू ता इ धाटीट्याःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 241 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
पीबा᳸सू᳹तस्या॑रासी᳒नाः । मत्स्वा॑नइन्द्रागो᳒मा॑तः । आपिर्नोबोधीसा᳒धा॑मा᳹द्ये॑वृधे᳒ । अस्मंआ॑वन्तूते᳒धी᳒याः॑ ॥ ७ ॥
पि बा सु त स्य र सि नोतुहातबुश। म त्स्वा न इचीन्द्रा गो माटितो हा उ वोखीवाश। आकपि र्न्नो बोकिधी सा ध माकीद्ये वाटार्धे हा उ वोखीवाश। अ स्मं आ वचीन्तू ते धाटियो हा उ वोखीवाश। ईख ॥२५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 241 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
पीबा᳸सू᳹तस्या॑रासी᳒नाः । मत्स्वा॑नइन्द्रागो᳒मा॑तः । आपिर्नोबोधीसा᳒धा॑मा᳹द्ये॑वृधे᳒ । अस्मंआ॑वन्तूते᳒धी᳒याः॑ ॥ ७ ॥
पि बा सु तषीस्य र सि नो म त्स्वातूहातबुश। नाटाइ न्द्रा गो म तोटिहातबुश। आकपि र्न्नो बोकिच्धीकस ध माटिद्ये वृ धाटिहातइश। अ स्मंचाअ वाचाहा न्तु तेटिहोटयाखऔ हो वाशि। धि य ऊखि ॥२६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 242 |
भर्गः प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः इन्द्रः बृहती ॥
त्वं᳒ह्ये᳒हीचेरा᳒वे । वीदा᳹भा॑गंवा᳒सू॑क्तये । उद्वा॑वृष॑स्वमा॑घावन्ग॑वी᳒ष्टये । उदि᳒न्द्रो॑अश्वा॑मिष्ठ॑ये ॥ ८ ॥
तू वांणाफ्हाखए हि चे र वा इशू। वी दा भा गं व सूटूक्ता यापाउ द्वा वृ ष स्व मा घ वाशृन् । ऐकहा इ गाटिवि ष्ट याचिइश। ऊ दि न्द्रोषिअ श्व मा उ वाकुओपबा ष्टा योप्लि। हा इशा ॥२७॥ त्वं ह्ये ही चे रातुवातइश। वी दा भा गं व सूयूक्ता यापाउ द्वा वृ ष स्व मा घ वाशृन् । आचइ ही ओचिइशग वि ष्ट याटीइशया इ । ऊ दि न्द्रोटिआ श्व मीचिओंतओंचओखवाप्लष्टा योप्ला। हा इशा ॥२८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 243 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
मरुतः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः मरुतः बृहती ॥
ना᳒ही᳒वा॑श्वाराम᳒ञ्चाना᳒ । वासी॑ष्ठःपारीमं᳒सा॑ते । अस्माका॑माद्यामारूतस्सूते᳒सा᳒चा॑ । विश्वे॑पिबन्तूका᳒मी᳒नाः॑ ॥ ९ ॥
न हि वा श्चाखीरा म न्चा नाप्ली। हु वेटाहो वाकाइशव सि ष्ठःषिप रा इ मांयीसा ताटाइश। अ स्मा का म द्याषुम रू ताटिस्सू ता इ साखिचाण। वा इ श्वेकिहो इ पि बाकीहोकथ्न्तू का माटिट्इ नाखाऔ हो वाशि। जतनि त्राटाख्म् ॥२९॥ न हि वा श्चा रा मफून्न्च नाखाव सि ष्ठाःकि। हो इ हो इषीप रा इ मांयीसा तापाइशआ स्माफाका माफाद्या माफारू ताफासु ता इ साखिचाण। वा इ श्वेकिपी बटाच्न्तूककौटहोतमाटट्इ नाखाऔ हो वाशि। जतनि त्राटाख्म् ॥३०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 244 |
प्रगाथो घौरः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ प्रगाथो घौरः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
माची॑दन्यद्वी᳒शंसता । सा᳸खायोमा᳒रि॑षण्यत । इ᳸न्द्रामित्स्तो᳸ता᳸वृषाणंसा᳹चा॑सूते᳒ । मुहू॑रुत्थाचाशंसत ॥ १० ॥
मा चि द न्य दोतुहातइश। वि शां साखिताण। सा खा योटिच्होयइ मा औपिहोश। रा इ षाकिउ वाकाण्या ताकाउ वाका। इ न्द्र मि त्स्तो ताषुवृ ष णा औपीहोश। सा चाकाउ वाकासू ताकाउ वाका। मु हू रु त्था औपुहोश। चा शा औकिहो वाकाहोखबांप्लसा तोप्ला। हा इशा ॥३१॥