| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 117 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ शय्युबार्हस्पत्यः इन्द्रः गायत्री ॥
त᳒द्वो᳒गायासू᳒तेसा᳒चा । पुरुहूता᳒यासात्वा॑ने । शं᳒य᳒त्ग᳒वेनाशाकीने ॥ १ ॥
त द्वौ हो वाती। गा याटासु ता इखिचाण। पु रू हूकितातच्या साकात्वायनाटइश। श य्य दो औकीहो इ गाखिवाणइश। नाटट्शाखऔ हो वाशि। एतच्कीटनेख ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 117 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
गायत्री |
त᳒द्वो᳒गायासू᳒तेसा᳒चा । पुरुहूता᳒यासात्वा॑ने । शं᳒य᳒त्ग᳒वेनाशाकीने ॥ १ ॥
त द्वो गा याती। सु ताताइ स चातिपु रूटाहु ताखाहाशप्ल्हातइ याचास त्वाखानाणइश। शंकय त्गाटावेत। ना शौटाहौटच्हूकवोपबाप्लका इ नोप्लि। हा इशा ॥२॥ त द्वो गा यषीसु ते सा चातीएत। पु रु हूकिता य स त्वा नेकुपु रूचाहू ताथायाचसायत्वाटनाखइ शं याफित्गौ वा उ वोखीवाण। नापशाशकाखइ नोप्ला। हा इशा ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 117 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
गायत्री |
त᳒द्वो᳒गायासू᳒तेसा᳒चा । पुरुहूता᳒यासात्वा॑ने । शं᳒य᳒त्ग᳒वेनाशाकीने ॥ १ ॥
त द्वौ गा यषीसु ते सा चातीएत। पू रू हुकिता य स त्व ना इषूशं य त्गाटिवेत। ऐचहाययाटऐ हिता। ना शा काटिट्इ नाखाऔ हो वाशि। ईख ॥४॥
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| 118 |
श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
य᳸स्ते॑नूनंशा॑तकृतो॑ । इन्द्र॑घुम्नीता॑मो᳒मा᳒दाः॑ । ते᳸ना॑नूनम्मादे॑मदेः ॥ २ ॥
य स्ते नू नांफीश ता कृ ताकीबुश। इ न्द्र द्यु म्नीषीता मो माटिदाःच। तेकन नू नाभिम्मात। दा इ माटिउ वाता। देःख ॥५॥
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| 119 |
हर्यतः प्रागाथः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ हयतः प्रागाथः इन्द्रः (अग्निर्हवींषि वा) गायत्री ॥
गा᳒वाऊ᳒पा॑वादावाटे᳒ । माही᳒यज्ञास्या᳹रप्सू॑दाः । ऊ᳒भाक᳒र्णा॑हीरण्या᳒या ॥ ३ ॥
गा व ए गा वाःतु। उ पा व दातीवाटदाखऔ हो वाशि। वाखटेश। म ही याखिज्ञाण। स्य रातास्याटट्राखऔ हो वाशि। प्सुखदाशउ भा काखिर्णाण। हि राताहाटइ राखाऔ हो वाशि। ण्याखयाश ॥६॥ ओ इ गाखिवाःण। उ पाताच्वा दाकावा टाटाउ वोखावाश। मा हीचाय ज्ञाकास्या राताप्सू दाटाओ यूखाभाश। क र्णाटाउ वोखावाश। हि रकाण्य याटाख् ॥७॥
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| 120 |
श्रुतकक्षः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः (सुकक्षो वा) आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳒राम᳹श्व॑यगायता । श्रू᳸ता॑कक्षा᳒रंग᳒वे । आ᳒रामि᳹न्द्रा॑स्याधा᳒म्ने᳸ ॥ ४ ॥
अ राखाम श्वा य गाप्लीयाङताश। श्रू ता क क्षाटीरायङ्गा वाकाआखरणम् । हातहातइ न्द्रा स्यापिधाश। होकयेटम्नो याखाऔ हो वाशि। ईखतिश ॥८॥ अ र म श्वा यषूगा य त अ र म श्वोतूवात। या गाकायाचता श्रू ताकिक क्षाटाहातहातआ राकाङ्गाखवाणइश। आ रा मि न्द्राटीहातहातस्याकधाथम्ना औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९॥
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| 121 |
श्रुतकक्षः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः (सुकक्षो वा सुकक्षः) आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
त᳒मि᳒न्द्रं॑वाजयामसि । मा᳸हे॑वृत्रायाह᳒न्ता॑वे । स᳒वृ᳒षा॑वृषाभो᳒भू॑वात् ॥ ५ ॥
ता मि न्द्रांपिवा ज या म सिशु। मा हेचावृ त्राथाच्या हाकान्तायवेट। सा वाचार्षायवृट। षाकभोपबापबाप्ल्भू वाप्लात् । हा इशा ॥१०॥ ता मि न्द्रांपिवा ज या म सि हा बुशू। मा हेचावृ त्राथाच्या हाकान्तायवेटहो वाटाहातइश। सा वाचार्षायवृटहोटावातहा इश। षा भो भूटिट्वाखऔ हो वाशि। ए दातावा सूटाख् ॥११॥
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| 121 |
श्रुतकक्षः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
त᳒मि᳒न्द्रं॑वाजयामसि । मा᳸हे॑वृत्रायाह᳒न्ता॑वे । स᳒वृ᳒षा॑वृषाभो᳒भू॑वात् ॥ ५ ॥
त मि न्द्रंषिवा ज या म सीतुएत। म हाताहा इ वृ त्राचियाकहोचवाकहकन्त वेटाओ वाकाईटट्यात। ओ मो वा स हेकुवा र्षाटाओ वाकाईटट्यात। ओ मो वा वृकीषा भोटायाखऔ हो वाशि। भूखवाशत् ॥१२॥ औ हो वा इ हु वातूहो इ त मिकीन्द्रं वाखाजा याकामा सीफा। औ हो वा इ हु वातूहो इ म हेकीवृ त्राचाया हकान्ता वेफा। औ हो वा इ हु वातूहो इ स वाकीर्षाखवृण। षा भो भूटिट्वातदि ळाप्लाभा ए हि ळाप्ली। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
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| 122 |
देवजामयः इन्द्रमातरः ऋषिकाः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ देवजामय इन्द्रमातरः ऋषिकाः इन्द्रः गायत्री ॥
त्वा᳸मिन्द्राब᳒लाद᳒धी॑ । साहा᳒सा᳒जाता᳒ओ᳒ज॑सा । त्वं᳸सन्वृष॑न्वृषेद॑सि ॥ ६ ॥
हा बु त्व मि न्द्रातु। ब ला द धि हाकुबु हाताबुश। स हाकासा जाथाताटओ जा साभिहा बु हातिबुश। त्वांचसायन्वा र्षाटान्हा बु हातिबुश। वृ षा इ दाटीट्साखऔ हो वाशि। वृ धेताच् ॥१४॥ त्व मि न्द्रषिब ला द धीतीएत। स हाकासा जाथाताटओ ज साभिइ याकाहो इ याकिइ योखावाश। त्वांचसायन्वा र्षाटान् इ याकाहो इ याकिइ योखावाश। वृ षा इ दाटीट्साखऔ हो वाशि। म हेताच् ॥१५॥ त्व मि न्द्रं ब लाषूद धी स ह सातु। जा ताकाओ जाकासाखइ हो इ हाशी। त्वां साकाच्न्वाकर्षाखनि हो इ हाशी। वृ षा इ दाटीट्साखऔ हो वाशि। ईखहाश ॥१६॥
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| 123 |
गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ गोषूकश्वसूनूकाण्वायनाै इन्द्रः गायत्री ॥
यज्ञाइ᳒न्द्रा॑मवर्धयात् । य᳒त्भूमिंव्या᳒वा॑र्क्तयात् । चक्रा᳹णाओपाश᳒न्दीवि ॥ ७ ॥
य ज्ञ इ न्द्रषीम व र्धातियातत् । य त्भू मिं वा य वाटूर्ताखयाणत् । चाखक्राप्लणाखओण। पा शकाच्न्दीकवी च क्राकिच्णा ओकापा शाखाऔ हो वाशि। दीखविश ॥१७॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 124 |
गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ गोषूकश्वसूनूकाण्वायनाै इन्द्रः गायत्री ॥
या᳸दिन्द्राहं᳸या᳒थात्वं᳒ । ईशी॑यावा᳒स्वाए᳒काई᳒त् । स्तोता᳒मेगोसाखास्यात् ॥ ८ ॥
य दि न्द्रा हंषीय थौ हो औ हो वातूहा इ तु वातीम् । ईकशी या वाकिस्वा यौटाहु वाटाइ हु वाटिइ का ईटित् । स्तोकता मे गोटिसा खौटाहु वाटाइ हु वाटिइश। सा याटाद्धोटयाखऔ हो वाशि। अ ग्नि राकिहु ताःटाख् ॥१८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 124 |
गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ |
इन्द्रः |
गायत्री |
या᳸दिन्द्राहं᳸या᳒थात्वं᳒ । ईशी॑यावा᳒स्वाए᳒काई᳒त् । स्तोता᳒मेगोसाखास्यात् ॥ ८ ॥
आखबु हौ हो वा हा य दि न्द्रा हाशृम् । या था त्वा मैटीही ऐ हीतिच्। आ इ शीकिया वाकास्वा आ इ क इ दैटूही ऐ हीतिच्। ओटइ स्तो ताटिमा इ गोटिच्सा खाकासाटट्याखऔ हो वाशि। शु क्र आकिहु ताःटाख् ॥१९॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 125 |
मेधातिथि काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चांगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
प᳒न्यं॑पन्यामि᳒स्तो॑तरः । आ᳒धा॑वातामा᳒द्या॑या । सो᳸मं॑वीरा᳒यासूरा॑या ॥ ९ ॥
प न्य म्प न्यषीमि त्सो तातिराःत। प न्य म्प न्य मि त्सोयूतापराःश। आ धाकाव त मा द्याखीयाश। सो मंकावी राटाय शू राखि। यात्र ॥२०॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 126 |
मेधातिथि काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चांगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
ईदं᳒वासो᳒सूताम᳒न्धाः । पीबासूपू॑र्णा॑मू᳒दरं॑ । आनाभइन्द्रा᳒रीमाते ॥ १० ॥
इ दं व सातीबुश। सू त माटिन्धाःत। पी बाचासु पूकार्णा मु दाटिराखम नाखाभ याताईशन् । र रोप्लाबा मा तोप्लि। हा इशा ॥२१॥ ई दांणाफ्व सोखासू त म न्धाःशी। पी बा सूटिपूतर्णा मूटादाखरणम् । आटनातभाटयाचइटन् । र राटाहा उ वाति। मा तेटाख् ॥२२॥ इ दं व सोषीसु त म न्धातीएत। पी बाकासु पूकार्णाकमूकद रौटाहोतवात। पी बा सु पू र्णाचुमू द रौथिहोतवात। आ ना भाभिईतन् । र रि माचिता औटाहोखबाप्ल्। होप्ल्इ ळाशा ॥२३॥