| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 225 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आतीहीमन्यूषावीणं । सूषूवां᳒सामू᳒पै॑रय । अस्या॑रा᳹तौ॑सूतंपी॑बा ॥ १ ॥
अ ती हि माती। न्यू षाटावा इ णांटि। सू षू वांचिसाटचहोकउ पैयारा याटा। आ स्य राकिता बु सूटिताखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 226 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
का᳒दूप्रा᳒चे॑तसेमहे᳒ । वा᳸चो॑देवाया॑शस्यते । तदी᳹द्ध्या॑स्यावार्धा᳒नम् ॥ २ ॥
क दू प्रा चेचिताकसेफम हाताइ वापाचोशदे वा हा बु व चो दे वाशृ। या श स्याटिताखइ त दाखिइ धि याति। स्याकवोपवाप्लर्धा नांप्ला। हा इशा ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 227 |
मेधातिथि काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 228 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः, प्रियमेधश्चांगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥ ॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः गायत्री ॥
उक्थञ्चाना᳒शस्या᳒मा॑नं । ना᳸गो॑रा᳒यिरा᳒ची॑केता । ना᳸गा᳒यत्रं॑गीयामानम् ॥ ३ ॥
इ᳸न्द्रा॑उक्थे᳒भिर्म॑न्दीष्ठः । वा᳒जा॑नांचावा॑ज᳒प॑तिः । हा᳒रीवा॑न्सूतानांसाखा॑ ॥ ४ ॥
उ क्थ ञ्च नोतीहातइश। श स्य मा नाषीन्ना गो राटिच्इ राचाचि केखाताश। ना गा याटित्रांत। गीकया माटानाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥३॥ इ न्द्र उ क्थातीइशु। भ्यकर्म न्दा इ ष्ठोटीवा जा नाखिञ्चाण। वाचज पाचाति र्ह राटिई वाखान्सूण। ता नांकाच्साकखा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४॥
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| 229 |
मेधातिथि काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 230 |
दुमित्रः कौत्सः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः, प्रियमेधश्चांगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥ ॥ दुमित्रः (सुमित्रो वा) कौत्सः इन्द्रः गायत्री ॥
ब्र᳒ह्मा॑णादीन्द्रारा॑धा॑साः । पी᳒बा᳹सो ᳹मा॑मृतूंरा᳒नू । तवे᳹दु॑सख्या᳒मस्तृतम् ॥ ५ ॥
वा᳸यङ्घा॑तेआपी॑स्मसि । स्तोता᳒र॑इन्द्र᳸गिर्वणः । त्व᳒न्नोजिन्वसोमपः ॥ ६ ॥
ब्रा ह्म णा दीती। न्द्र राकाध साः पि बाकीसो माटामृ तूंकार नूचा। ता वेकादू साटाख्यापमाशस्ताखर्त्ताप्ल। हा इशा ॥५॥ व य ङ्घा तेफीअ पीशास्म साकाइश। स्तोकता र इ न्द्र गि र्व णाषृउ व उ वाटीहोचइश। तूचवायन्नो जीटाउ व उ वाटीहोकथ्न्वाशसो माटाट्पाखऔ हो वाशि। एतऊ पाटाख् ॥६॥
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| 231 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
| 232 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥ ॥ मेधातिथिः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आ॑याह्यू᳒पा॑नास्सू᳒तं । वा᳸जेभिर्मा॑हृ॑णीयथा । माहं᳹ईवा॑यूवा᳒जानि ॥ ७ ॥
का᳸दा᳒वासोस्तोत्रं᳹ह ᳹र्याताआ । आव॑श्मशा᳹रूधाद्वाः᳒ । दीर्घं᳒सूतं᳒वा᳒ता᳒प्या॑या ॥ ८ ॥
आ या हीति। ऊचपा नाचास्सू तंशाहो वाटाहातइश। वा जे भिकिमा हृ णीकिय थाताहो वाटाहातइश। मा हंचाई वा यु वाटीहो वाटाहातइश। जाटट्नाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥७॥ ओटच्होचइशका दाकाव सोफास्तो त्रांटाह र्य ताखियाश। ओटच्होचइशया वाकाश्मा शाफारू धा दूखिवाःण। ओटच्होचइशदी र्घंकासू तंफावा तापापी याखायात्र। ईख ॥८॥ का दाखाऔकहो वाथावा सो स्तो त्रांटीह र्य ताखियाश। अ वाखाऔकहो वाथा। । श्म शाकारू धा दूखिवाःण। दी र्घाखाऔकहो वाथा। सू तांटा। वा ताखापी याखा। यात्र ॥९॥ औचहो वा इशिका दा वाकिसोफस्तो त्रांटाह र्या ताखियाश। औचहो वा इशिया वाकाश्मा शाफारू धा दूखिवाःण। औचहो वा इशिदी र्घंकासू तंफावा तापापी याखायात्र। एतच् ॥१०॥
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छन्दः (Chandas) |
| 233 |
विश्वामित्रो गाथिनोऽभीपाद् उदलो वा |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ विश्वामित्रो गाथिनोऽभीपाद उदलो वा इन्द्रः गायत्री ॥
ए᳸न्द्रा॑पृक्षूका॑सूचीत् । नृम्णं᳒तानू᳒षू॑धेहिनः । स᳒त्रा᳒जिदुग्रापौंठ॑स्यम् ॥ ९ ॥
ए न्द्र पृ क्षुषीका सु चीतिदेत। नृ म्णाचात नूकाच्षू धाकाहायइ नाःटा। साचत्राशजि दूचाग्रा पाटापुं सि याकिउ वाता। ऊखपाश ॥११॥
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छन्दः (Chandas) |
| 234 |
मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः |
इन्द्र: |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः इन्द्र: गायत्री ॥
आ᳒यामेनंसचतां᳒सुतः᳒ । मन्दी᳒मिन्द्रा॑यामन्दी᳒ने । च᳒क्रिंवि॑श्वा॑नी॑चाक्रा॑ये ॥ १० ॥
अ य मे नंषीस च तांतिहातबुश। ओ इ सूटितोतम न्दि मिकिन्द्रा य माटिन्दाखइ नाणाइश। च क्रा इं वाटीट्इ श्वाखाऔ हो वाशि। नी चा क्राटियेख ॥१२॥