| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 167 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः गायत्री ॥
ईदं᳒ह्यन्वोज॑सा । सूतं᳒रा॑धानांपते । पीबा᳒त्वाटट्यस्या᳒गी॑र्वणः ॥ १ ॥
इ दा मेति। ह्य नूटाओ जा साभि। सू तंकारा धाकानाचम्पायताटइश। पी बा त्व स्या गीयुर्वा णाःपापी बाखातु वाता। स्याटगाखऔ हो वाशि। र्वाखणाःप्ल ॥१॥ इ दं ह्यातिऔ होता। नूकओ जाखासाण। सू तंकारा धाकानाटओं पाखाताणइश। पि बा त्व स्यापीगाप्लहाङइश। र्वापणा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥२॥ इ दं ह्य नूतीओ ज साति। सू तंकारा धाकानाचम्पायतौटहो वाताहातइश। पी बाचात्व स्या गाचिइ र्वायाणौटहो वाताहातइश। पि बा तु वौटीहो वाताहातइश। स्या गा इ र्वाटीट्णाखऔ हो वाशि। घृ ताताश्चू ताःटाख् ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 168 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
माहं᳹इ ᳹न्द्रा॑पूराश्चा॑नः । महित्वामा᳒स्तू᳒वज्री᳒णे॑ । द्यौर्ना᳒प्रा᳹थी॑नाशा᳒वाः ॥ २ ॥
म हं इ न्द्राःती। पू र श्च नोकीमायहीटत्वायमाटस्तूकव ज्रि णाचिइश। दाययूटर्णायप्राटथीकनाटशा वाःखाण्। ओपइ ळाप्ला ॥४॥ म हं हा इ न्द्राःतु। पूतरा श्चापानाःश। म हाटाइ त्वाखामाण। स्तु वौटाहौ हा होखिवा ज्री णा इशी। द्यौ र्न्ना प्र थीतीना श वाःति। द्यौ र्न्नाखाप्राण। थि नौटाहौ हा होखिबाप्लशा वोप्ला। हा इशा ॥५॥ म हं इ न्द्राःफीपू रा श्च नाःकी। मा हीथात्वाटट्मात। स्तुचव ज्राटाटट्इ णाताइश। द्यौकर्न्नाटटट्प्रात। थिकनाटशाटवाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
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| 169 |
कुसीदी काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ कुसीदी काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳒तूना॑इन्द्राक्षूम᳒न्तं॑ । चित्रं᳒रा॑भंसं᳒गृ॑भाय । माहा᳒हास्ती᳒द᳒क्षी᳒णेन ॥ ३ ॥
आ तू न याती। इ न्द्र क्षू माटीन्तातम् । चा इ त्रं रा भंटुहातइ स ङ्गृकिभा या मा हाटीह स्तोखाहाणइश। द क्षाटाच्इ णाकाइ नाचा। म हा हाटिट्स्ताखऔ हो वाशि। द क्षि णेकिनाटख् ॥७॥ आ तू नषिइ न्द्र क्षू मातीन्तातम् । चि त्रंटाराखभणम् । संकगृ भापायश। माटहातहाटट्स्ताखऔ हो वाशि। द क्षि णे नाखी ॥८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 169 |
कुसीदी काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
आ᳒तूना॑इन्द्राक्षूम᳒न्तं॑ । चित्रं᳒रा॑भंसं᳒गृ॑भाय । माहा᳒हास्ती᳒द᳒क्षी᳒णेन ॥ ३ ॥
आ तू नषिइ न्द्र क्षू मातीन्तातम् । चि त्रं रा भं स ङ्गृटूभाकयाथचिषत्रं रा भं स ङ्गृ औकूहो इ भाखियाण। ऐकहा इ म हा ह स्तीषूद क्षाटाहोचइश। औकहो वाकाहोपबा णाप्लाइ नोप्ला। हा इशा ॥९॥ आ तूणाना इणान्द्राफक्षु माखान्तशम् । चि त्रं रा भं स ङ्गृ भा या चाषेइ त्रं रा भं स ङ्गृकूईखहाप्लभाखयाण। ऐकहा इ म हा ह स्तीषूद क्षाटाहोचइश। औकहो वाकाहोपबाप्लणा इ नोप्लि। हा इशा ॥१०॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 170 |
प्रियमेधः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ प्रियमेध आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
आभिप्रा᳹गो ᳹पा॑तिङ्गीराः॑ । इन्द्रामश्चाया᳹था॑वीदे । सूनूंसत्या᳒स्यासा᳒त्पा॑तिम् ॥ ४ ॥
अ भ्ये आ भीती। प्रा गोकापा तीथाङ्गी राःटा। इ न्द्र म र्च्चा या थायूवि दापाइ सू नूतिम् । ओ इ स त्योपीहाणइश। स्याटसाखऔ हो वाशि। पाचतीटमेख ॥११॥ अ भ्ये आ भीती। प्र गो प तीकीङ्गि राःटा। इ न्द्र म र्च्चाटीयाखथाण। हिंटहिंतओपईणवी दाणाइ स नुंफिसा त्याफास्या साता। हिंटहिंतओपबाप्लपा ताप्लाइंश। हा इशा ॥१२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 170 |
प्रियमेधः आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
आभिप्रा᳹गो ᳹पा॑तिङ्गीराः॑ । इन्द्रामश्चाया᳹था॑वीदे । सूनूंसत्या᳒स्यासा᳒त्पा॑तिम् ॥ ४ ॥
आ भीफाप्र गोखाप तीखाङ्गि राःशा। इ न्द्र म र्च्चषीय था वि दा एटु। सू नुं सा त्याकीओपस्याशसाफत्पा ता इंशि। सू नुं सा त्याकीओपस्या सोप्लाबाप्लत्पा ताप्लाइशम् । हा इशा ॥१३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
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| 171 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
का᳒या॑नश्चित्रआ᳒भु॑वात् । ऊतीस्सा᳹दावृ॑धस्सा᳒खा॑ । का᳒या᳒शाची॑ष्ठयावृतः ॥ ५ ॥
क या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । ऊकता इ स दा वाकुर्ध स्साखाखाण। क या शाटिचातइश। ष्ठापयाशवाखर्तोप्ल। हा इशा ॥१४॥ हो वा इ हो वा इषूक या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । हो वा इ हो वा इषूऊ तीचास्सा दाकाच्वृ धाकास्सापखाश। हो वा इ हो वा इषूक याताश चाताइश। ष्ठा या वाटिट्र्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१५॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 171 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
का᳒या॑नश्चित्रआ᳒भु॑वात् । ऊतीस्सा᳹दावृ॑धस्सा᳒खा॑ । का᳒या᳒शाची॑ष्ठयावृतः ॥ ५ ॥
काणयाफन श्चाफाइ त्राखाया भु वाशित् । ऊ तीकास्सा दाकावृ ध स्स खा औकुहो हाताइ क याटिश चाताइश। ष्ठ यौ होतिहि म्माटावाटर्तोख। हात्रइश ॥१६॥ काणस्त्वाफस त्योफामाखदा नाशाम् । मं हि ष्ठोकिम त्स दकीन्ध सा औकिहो हाताइ दृ ढाटिचि दाता। रू जौ होतिहि म्माटा। वाटसोख। हात्रइश ॥१७॥ आणभीफषू णाफास्साखखी नाशाम् । अ वि ताकिज रा इ तृकीणा मा औकिहो हाताई शा तांटिभ वाता। सि यौ होतिहि म्माटा। ताटयोख। हात्रइश ॥१८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 172 |
श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः सुकक्षोः वा आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
त्या᳒मूवस्सत्रासा᳒हं॑ । विश्वा॑सूगीरिष्वा᳒यातम् । आच्या॑वयास्यूता᳒ये ॥ ६ ॥
त्य मू वाःति। स त्राथासा हाटाम् । वि श्वा सु गी रि षूटूआ या ताटिम् । आ च्या वाटिट्याखऔ हो वाशि। स्यूकत येटाख् ॥१९॥ त्याखमू व स्स त्रा सा ह म्मो वाशृ। वि श्वा सुषिगी रि ष्वा याटीताचम् । आ च्या वाटियात। सि यौटाहो वाखाहाणइश। ताखयोप्ल। हा इशा ॥२०॥
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| 173 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः इन्द्रः (सदसस्पतिः) गायत्री ॥
साद॑सस्पातीमा᳒त्भू॑तम् । प्री᳹य ᳹मि᳹न्द्रा॑स्याकाम्यं॑ । सा॑निंमेधा᳒मा॑या᳒सिषम् ॥ ७ ॥
सा दाता। स स्प ताचिई मायात्भू ताटाउ वोखावाश। प्रा याटाउ वोखावाश। आ इ न्द्रा स्या काकूमाखयात्रम् । सा नि म्मेचिधा म याटिसि षाखाम् ॥२१॥
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छन्दः (Chandas) |
| 174 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
एतेप᳹न्थाआथो॑दीवः । एभीर्व्या᳒श्वामै᳒राया । ऊता᳒श्रो॑षन्तूनोभुवाः ॥ ८ ॥
हा वा प्सू दाखीक्षाशआ प्सू दाखिक्षाःण। ए तेकाप न्थाथाच्आ थो दी वाःटी। हा वा प्सू दाखीक्षाशआ प्सू दाखिक्षाःण। ए भिकार्व्याथच्श्वा मा इ रा याटुहा उ ता श्रोखीषाणन् । तू नो भूटिट्वाखऔ हो वाशि। ईखतिश ॥२२॥
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| 175 |
श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः सुकक्षोः वा आंगिरसः (सुकक्ष आंगिरसः) इन्द्रः गायत्री ॥
भ᳒द्रं᳒भ॑द्रन्नआभा॑रा । ई᳒ळामूर्जं॑शतक्रतो । यादिन्द्रा॑मृढ᳒या॑सिनः ॥ ९ ॥
भ द्रं भातिद्रातम् । नाकआ भाटाराखइ षा मू र्जशीम् । शा ता क्राटिताखबू या दि न्द्रा मृशु। डाटयाखऔ हो वाशि। सीखनःश ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 176 |
बिन्दुः पूतदक्षो वा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ बिन्दुः पूतदक्षो वा आंगिरसः इन्द्रः (मरुतः) गायत्री ॥
अस्तीसो᳒मोआयं᳒सूतः । पी᳒ब᳒न्त्यस्या᳒मारुताः᳸ । उतस्वारो᳹जो॑अ᳒श्वीनाः ॥ १० ॥
अ स्ति सो मो अ यंषूसु तो अ स्ते आ स्तीतू। सो मो अ यं सु तःषूपि ब न्त्य स्या माफुरु तोखहाणइश। उ त स्व रा जोपुअ श्वा इ नोप्ली। हा इशा ॥२४॥