| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 314 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नोधाः गौतमः इन्द्रः बृहती ॥
आ᳒सा॑वीदेवङ्गो॑ऋ᳸जीका᳸मन्धाः॑ । न्य᳒स्मिन्नि᳒न्द्रोजनु᳒षेमूवोच । बो᳒धा᳒मसित्वाहर्यश्वार्यज्ञैः । बो᳒धा॑नस्तोमाम᳹न्धा॑सामा᳒दे॑षु ॥ १ ॥
अ सौताहो वाताहा वीखादेश। वा ङ्गो ऋ जीकीक माखान्धाःप्ल। नि यौताहो वाताहा स्मीखानिश। द्रो जा नू षेकीमु वोखाचाश। बो धौताहो वाताहा माखासिश। त्वा हा री याकीश्व याखाज्ञैःप्ल। बो धौताहो वाताह नाखास्तोश। मा म न्धाकिसाखमा दाखाइश। षूत्र ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 314 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
आ᳒सा॑वीदेवङ्गो॑ऋ᳸जीका᳸मन्धाः॑ । न्य᳒स्मिन्नि᳒न्द्रोजनु᳒षेमूवोच । बो᳒धा᳒मसित्वाहर्यश्वार्यज्ञैः । बो᳒धा॑नस्तोमाम᳹न्धा॑सामा᳒दे॑षु ॥ १ ॥
आ इ हिटिआ इ हिटिए हि या उ वोखुवाप्लहातइश। अ सा वि दे व ङ्गोचूऋ जीकाच्काकम न्धोटाअ न्धोटाअ न्धाटाउ वोखवाप्लहातइश। न्य स्मि न्नि न्द्रोचीज नु षेकिच्मूकवो चाटीवो चाटावो चाटाउ वोखावाप्लहातइश। बो धा म सि त्वाचुह रि याकिच्श्वाकया ज्ञैःटार्या ज्ञैटार्य ज्ञाटाउ वोखावाशहातइश। बो धा न स्तो माचुम न्धा साकिच्माकदा इ षूटिदा इ षूटिदे ष्वाटाउ वोखावाशहातइश। आ इ हिटिआ इ हिटिए हि या उ वोखुवाप्लहाखऔ हो वाशि। ईख ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 315 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
यो᳒नीष्टइन्द्रासा᳒द॑नेयकारी । ता᳒मा᳒नृभीः᳸पू᳸रूहूत᳒प्राया॑हि । आ᳒सोयाथा᳒नोवीता᳒वृधा॑श्चीत् । ददो॑वा᳒सू॑नीमामा᳹दश्चासो᳒मैः ॥ २ ॥
यो नीःता। त आ इ न्द्राटीसा दा नाकिय काखारी ता माशि। नृ भा इः पू रू हूकूता प्र याखिही आ साःशि। य था नोभिआ वी ताकिवृ धाखाश्चि दा दाःशि। व सू नि मीभीम दापाश्चा सोखा। मात्रइःश ॥३॥ योचनि ष्ट आखिइ न्द्र स द ना इ हो वाशृ। आ काकाराखइ त मा नृ भि र्हो वाशृ। पू रूकाहूखता प्र याखिही हो वाशि। आ सोकाय थाखानो वि ता हो वाशु। वाकर्ध श्चाखाइ त्द दो व सू हो वाशृ। ना इ मा मा दभुश्च सोखामै र्हो वाशि। होप्लइ ळाशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 316 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
आ᳸द॑दरुत्सामा᳹सृ॑जोविखानि । त्वा᳒मर्णावान्बल्बधानंआराम्णः । मा᳒हा᳒न्ता॑मिन्द्राप᳹र्वातंवीयद्वाः । सृ᳒ज᳒द्धाराआ᳒वाय᳹द॑दानावान्हन् ॥ ३ ॥
अ द र्द रूतीत् । स म सृ जोकीच्वीकखा निकात्वा म र्णाटिवातन्ब ल्बचाधा नंथाआ रा म्णाःभि। मा हा न्ताटिमितन्द्र प र्व तंकीवीकया द्वाकासृ जा द्धाटिराःत। अ व य द दाकुच्नाकवाटन्हाखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥ अ द र्द रू त्स म सृ जाःतृ। वी खा नि त्व म र्णाषूवा न्ब ल्ब धा नंकुआ राटाम्णाःत। मा हा न्त मिषन्द्र प र्व तंकीवि याटाद्वाःत। स्र जा द्धाटिरातअ व य द दाकुच्नाकवोटयाखऔ हो वाशि। हाखन् ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 317 |
गातुरात्रेयः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ गातरात्रयेः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
सुष्वाणा᳒सा॑इन्द्रा᳸स्तुमा᳒सीत्वा । सनिष्य᳒न्ता॑श्चीत्तुविनृम्णावा॑जं । आनो॑भरासूवीतं᳹य ᳹स्याकोना᳒ । ताना᳒त्मनासह्यामात्वो᳒ताः॑ ॥ ४ ॥
सु ष्वा णा साःती। इ न्द्रा स्तु म सीखुत्वाश। स नि ष्य न्त श्चिषुक्तू न्वि नृ म्णा वाखुजशम् । आखनोशभ रा उ वोखीवाण। सु वि त य्य स्यषुको ना ता ना त्म नातू। स ह्या माखितू वोखा। ताःत्र ॥७॥ ओतहोतहो इ सूखिष्वाण। णा साकाइ न्द्रा स्तु म सीखुत्वाश। ओतहोतहो इ साखिनीणष्य न्ता श्चीभितू वी नृ म्णा वाखुजशम् । ओतहोतहो आखानोणभ राकासु वि त य्य स्य कोखूनाश। ओतहोतहो इ ताखिनाणत्म नाकास ह्य मापितू वोखा। ताःत्र ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 318 |
पृथुर्वैन्यः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ पृतवु्न्यः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
ज᳒गृ᳒ह्यातेद᳒क्षीणमिन्द्राहा᳒स्तं॑ । वसूया᳒वो॑वसूपातेवा᳒सूनां । वि᳒द्या᳒हि᳒त्वागो᳒पा᳒तिंसूरागो᳒नां । अस्म᳹भ्य॑ञ्चित्रं᳒वृ᳒षाणंरायि᳒न्दाः᳒ ॥ ५ ॥
ज गृ ह्मा ते द क्षि ण मो हा ओ हातेएत। इ न्द्र हाटिस्तातम् । व सूकाय वो वायिसू पापाता इ व सू नांशुओतहातएत। वि द्मा हि त्वा गोयुपा तिंपाशू र गो नांशीओतहातएत। अ स्मा भ्य ञ्चा इ त्रांटूवा र्षाचाणं राकायिफन्दाशओतहातएत। रा या इ न्दाटूउ वाता। ऊखपाश। औकहो औकाहो वापाहा उ वाशि। ईख ॥९॥ ज ग्र ह्मा ते द क्षिषूण मौ हो औ हो वातूहातइश। इ न्द्र हाखिस्तशम् । व सूकाय वो वायिसू पापाता इ व सू नौशुवा उ वोखिवाप्लहातइश। वि द्मा हि त्वा गोयुपा तिंपाशू र गो नौशीवा उ वोखिवाशहातइश। अ स्म भ्य ञ्चा इ त्रांटूवा र्षाचाणंकरा यिंफादौ वा उ वोखीवाप्लहाखऔ हो वाशि। ईख ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 318 |
पृथुर्वैन्यः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
ज᳒गृ᳒ह्यातेद᳒क्षीणमिन्द्राहा᳒स्तं॑ । वसूया᳒वो॑वसूपातेवा᳒सूनां । वि᳒द्या᳒हि᳒त्वागो᳒पा᳒तिंसूरागो᳒नां । अस्म᳹भ्य॑ञ्चित्रं᳒वृ᳒षाणंरायि᳒न्दाः᳒ ॥ ५ ॥
हो येटाहो येटाहो येटा। ज गृ ह्मा तेथीद क्षि णा मिकीच्न्द्राकहा स्तांटाहा स्तांटाहा स्ताटाम् । व सू य वोषीव सु प तेकीच्वाकसू नांटासू नांटासू नाटाम् । वि द्मा हि त्वाकीच्गो प तिं शूकीच्राकगो नांटागो नांटागो नाटाम् । अ स्म भ्यकिञ्चि त्रं व्र ष णंकूच्राकया इ न्दाटिआ इ न्दाटिआ इ न्दाःटि। हो येटाहो येटाहो याटावाखऔ हो वाशि। ईख ॥११॥ हा बु हा बु हातुबुश। ओ हो हो वाकीओ हो हो वाकीओ हो हो वाकी। ज गृ ह्माकिता इ दाकिच्क्षीकणाखमि न्द्र ह स्त न्द्र ह स्त न्द्र ह स्तशेम् । व सूकाय वो वाटिच्सूकपाखता इ व सू नां व सू नां व सू नाशोम् । वि द्मा हि त्वा गोकुच्पाकतींखशू र गो नां र गो नां र गो नाशेम् । अ स्म भ्य न्चा इ त्रांटूच्वा र्षाचाणंखर यि न्दा र यि न्दा र यि न्दाःशे। हा बु हा बु हातुबुश। ओ हो हो वाकीओ हो हो वाकी। ओ हो होटिट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१२॥ आ बु हो आ बु होषूआ बु होतिवा औटाहो औटाहोतवात। ज ग्र ह्माकिता इ दाकिच्क्षीकणाखमि न्द्र ह स्त न्द्र ह स्त न्द्र ह स्तशैम् । व सूकाय वो वाकिच्सूकपाखता इ व सू नां व सू नां व सू नाशोम् । वि द्मा हि त्वा गोकुच्पाकतींखशू र गो नां र गो नां र गो नाशैम् । अ स्म भ्य न्चा इ त्राटूवा र्षाकाणंखर यि न्दा र यि न्दा र यि न्दाःशै। आ बु हो आ बु होषूआ बु होतिवा औटाहो औटाहोटटवाखऔ हो वाशि। ईख ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 319 |
सप्तगुरांगिरसः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ सप्त्तगुरांगिरसः इन्द्रः (इन्द्रो वैकुण्ठः) त्रिष्टुप् ॥
इ᳒न्द्रन्ना᳹रो॑नेमा᳒धी॑ताहवन्ते । यत्पार्यायू॑ना᳹ज॑न्तेधीयस्ताः᳒ । शू᳒रोनृ᳹षा॑ताश्रावा॑साश्चका᳒मे । आ᳒गो᳒मा॑तीव्रा᳸जे᳹भाजात्व᳒न्नाः॑ ॥ ६ ॥
इ न्द्र न्नाखिरोशने मा धाखिइ ताणा। हा व न्ताटिइ य त्पा राखीयाशयू ना जाखिन्ताणइश। थि या स्ताटिशू रो नाखि र्षाशता श्रा वाखिसाःण। चा का माटिइ या गो माखीतिशव्र जा इ भाखीजाण। तू व न्नाटिउ वाता। एतऊ पाटाख् ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 320 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
वायाःसूपर्णाऊपासे᳒दूरिन्द्रं । प्रीयामेधा᳒र्षायोना᳒धा॑मा᳹नः । आपध्वान्तामूर्णहिपूर्धी॑चाक्षुः । मुमूग्धाटट्यस्मान्नीधाये॑वाबदध्नान् ॥ ७ ॥
व यो हातिहातबुश। सू प र्णाषिउ प से दू राचुइ न्द्रंकाप्रि य मे धाषीऋ षा योकिनाकधा माटानाःत। आ प ध्वा न्तषीमू र्णू हि पूकीर्धी चाटाक्षूःत। मूचमु ग्धि योटिहोतआ स्माटान्नि ध येपिवा बाखा। ध्नात्रन् ॥१५॥
| Global # |
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 321 |
गौरिवीतिः शाक्त्यः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ गौिरवीितः शाक्ः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
नाकेसूपर्णा॑मूपा॑यत्पा॑त॑न्तं । हृ᳒दा᳒वेन॑न्तोअभ्या᳒चा॑क्षतत्वा । हिर॑ण्यपा᳸क्षंवारूणस्यादूतं᳒ । यामास्यायो᳒नू॑शाकूनं᳹भूरण्यूम् ॥ ८ ॥
आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। ना के सु प र्णाषुमु प या त्प तकुन्तं प तकिन्त मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। हृ दा वे न न्तोषुअ भ्या चाकिक्ष त त्वाटिक्ष त त्वौटिहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। हि र ण्य प क्षंषुव रू णा स्य दूकुतं स्य दूकित मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। या म स्य यो नौषुश कु नां भु रकुण्युं भु रकिण्यु मौटाहो वाथाऊट। आ या म याकीय मौटाहो वाथाऊट। वाटच्हायउ वाटा। एतदि व मेकिदि व मेकिदि वाटाख्म् ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 322 |
वेनो भार्गवः |
वेनः |
त्रिष्टुप् |
॥ वेनो भागर्वः वेनः त्रिष्टुप् ॥
ब्र᳒ह्मा॑जज्ञानं᳹प्राथामंपुरास्ता॑त् । वीसीमातस्सूरुचोवेनआ॑वात् । सा᳒बुध्न्याऊ॑पामाआस्याविष्ठाः । साताश्चा᳹योनी᳒मा᳒साताश्चावी᳒वाः ॥ ९ ॥
ब्र ह्मा ब्राटिह्मात। ज ज्ञा नंचिप्रा था मंकिपु रा स्ताभित् । वी सा इ वाटिइ सीता। म त स्सु रूकीचो वेथान आ वाभित् । सा बू साटिबूत। ध्न्या उ पाचिमाकआटस्य वा इ ष्ठाःभी। सा ता स्साटिताःत। च यो नी मा साचुता श्च वाकिइ वाःपाण्। ओपइ ळाप्ला ॥१७॥ हु वेटाहातइ हु वेटिहातइ हे षाटियात। ब्र ह्म ज ज्ञाकीनांटप्रा था मंकिपु राखास्ताशत् । वी सी म ताकीस्सु रू चो वेकीन आखावाशत् । सा बु ध न्या उकुप मा आकिस्य वाखाइ ष्टाःप्ला। सा त श्च यो नीकुमा साकात श्च वीखिवाःप्ल। हु वेटाहातइ हु वेटिहातइ हे षाटियाखऔ हो वाशि। एतऋ त म मृ त मेकूऋ त म मृ त मेकूऋ त म मृ ताटुख्म् ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 323 |
बुहस्पतिर्नकुलो वा |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ बृहस्पतिकुलो वा इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
आपू॑र्व्यापूरूता᳹मा॑न्यस्मै । माहे᳒वीराया॑तावा᳹सेतूराया॑ । वीरप्सीनेवज्रीणेशन्ता॑मानी । वा᳒चां॑स्यास्मयस्थावी॑रायतक्षुः ॥ १० ॥
आ पू र्व्या बु होतूहोतहातइश। पू रू त मा नि याखूस्मैश। मा हे वी रा याटुता वा साकिइ तु राखियाश। वि र प्शी नाखीइ व ज्रि णे शाखुन्त माखानिश। वा चां स्या स्माटीइ स्था वी राकीय ताखाक्षूःप्ल। स्थ वि रा य त क्षुषूस्थ वि राखिया ताखाक्षूःत्र। स्था वी राकियाकता क्षूःखा ॥१९॥