॥ श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
पा᳒न्तामा᳒वोअ᳒न्धा॑सः । इ᳸न्द्रा॑माभिप्रा᳒गा॑यत । विश्वा᳒सा᳹हं॑शाता᳒क्रातुं । मंहीं॑ष्ठंचऋषाणीना᳒म् ॥ १ ॥
पान्तमा वोषीअन्ध साःति। इकन्द्रा माकाभिप्रागाया ताटुहातहातइश। विश्वासा हंकीच्शा ताकाक्रा तूंटाहातहातइश। मंकहाइष्ठा ञ्चाटीहातहातइश। र्ष णाटाइ नाखामौहो वाशि। उ ऊखापाश॥ १ ॥ पान्तमा ओषीअन्धसइ हातु। इथन्द्रामभाइप्र गाकूय ताटाइ हाता। विश्वा साकिहंशा ताटिच्क्रा तूटामि हाता। मंकहाइ ष्ठाचिञ्चाइ हाटि। र्ष णाटाच्ई नाकामि हाटाख्॥ २ ॥ पा न्ताणामाफवोखअन्ध साःशि। आइन्द्रामभा इषूप्र गाटायाखताण। वि श्वाटासाखहणम् । शातता क्रापातुशम् । मंहिष्ठ ञ्चकीथर्षा णाचाइश। नातमाटख्औहो वाशि। ओतकाःख॥ ३ ॥
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः गायत्री ॥
प्रा᳒वाइ᳹न्द्रा॑यामा᳒दा॑नं । ह᳒रीया॑श्वायगायता । साखा॑यस्सोमापा॑व्ने ॥ २ ॥
प्रावाइ न्द्राटीयामा दाखिनणम् । प्र वाटाइन्द्रा औपिहोश। याखमाप्लदाखनणम् । ह राटाअ श्वा औपिहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाटायास्सो औपिहोश। मा पोप्लाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा॥ ४ ॥ प्र वाटाइन्द्रा औपिहोश। याखमाप्लदाखनणम् । ह राटाआश्वा औपिहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाटायास्सो औपिहोश। मा पोप्लाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा॥ ५ ॥ प्रावा ईटियातईटयात। इन्द्रो ईटियातईटया याखामाप्लदाखनणम् । हारा ईटयातईटयातआश्वो ईटियातईटया याखागाप्लयाखताण। साखा ईटियातईटयातयास्सो ईटियातईटयात। मा पोपाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा॥ ६ ॥
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः गायत्री ॥
प्रा᳒वाइ᳹न्द्रा॑यामा᳒दा॑नं । ह᳒रीया॑श्वायगायता । साखा॑यस्सोमापा॑व्ने ॥ २ ॥
प्र वौकाहो वाटाइन्द्रा औकिहो वाटा। याखमाप्लदाखनणम् । ह रौकाहो वाकाआश्वा औकिहो वाटा। याखगाप्लयाखताण। स खौकाहो वाटायास्सो औकिहो वाटा। मा पोपाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा॥ ७ ॥ प्रा वाचाददा औटिहोतइन्द्रोददा औपुहोश। याखमाप्लदाखनणम् । हा रीचाददा औटिहोतआश्वोददा औपुहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाचाददा औटिहोतयास्सोददा औपुहोश। मा पोप्लाबा वाप्लाव्नोश। हा इशा॥ ८ ॥ प्रवप्र वाःती। इ न्द्राताएकन्द्राथया माकादायनाटम् । ह राताइहरिय श्वाटुचया गाकायायताट। साखा याभिस्सोत। मा पोप्लाबा वाप्लाव्नोप्ल। हा इशा॥ ९ ॥
॥ मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चांगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
वाया᳒मू॑त्वातादी॑दर्थाः । इ᳸न्द्रत्वायन्तस्स॑खायः । क᳸ण्वा॑उक्थे᳒॑भी॑र्ज᳒रन्ते ॥ ३ ॥
वयंवा यातीम् । ऊखत्वाशतादी दाखिर्त्थाःण। इन्द्रत्वा यषीन्तस्स खाखियाःप्ल। क ण्वाताऊपक्थेभिर्जरन्ते एप्लूहिया हाशि। होप्लइ ळाशा॥ १० ॥ वय मूखित्वातदिदा र्त्थाःशु। ऐही होटिइश। वायमुत्वात दिषूदर्त्थाइन्द्रत्वा यकून्तस्स खाटियाःत। काखण्वाःण। उक्थाइ भीकीर्जोपबाप्ल। र न्तातायाटाख्॥ ११ ॥
॥ श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
इ᳸न्द्राया॑माद्वा॑नेसूतं । पा᳒री॑ष्टोभन्तूनो᳒गी᳒राः । अर्का᳒मा᳒चन्तूका᳒रा᳒वाः ॥ ४ ॥
इन्द्रायमद्व नातूइश। सूतामि न्द्राषीयमद्व नेचीसू ताशाम् । पाचराइ ष्टोटिभातिच्न्तू नोचागि राःशा। अर्क माटिर्च्चातच्न्तूकका राटावाःखण्। ओपइ ळाशा॥ १२ ॥ ॥ इन्द्रायमद्व नेतूहातबुश। ओइ सूटितातम् । पारि ष्टोकिभान्तु नोटिहातइगा राःती। पारिष्टोभान्तु नोटूहातइगाइ राःटी। अर्क माटिर्च्चाखऔहो वाशि। एतन्तु काचारा वाःटाख्॥ १३ ॥ इन्द्रायमद्व नेषूसुतमिन्द्राय मोतूवात। द्वातनाइ सूपिताशम् । पारि ष्टोकिभाटहातहातन्तु नोटागाखइ राःणा। अर्कामा र्च्चाभिहातहातच्न्तुकका राटावाःखण्। ओपइ ळाप्ला॥ १४ ॥
॥ इरिम्बिठः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳒य᳒न्ताइन्द्रासो᳒माः । नीपू॑तोआ᳹धी॑बर्हीषि । ए᳸ही॑मास्या᳒द्रावा᳒पी᳒बा ॥ ५ ॥
अयन्त याती। द्रासो मोटिहो वाकाहोचइश। नी पूकातो आटाधीचब र्हाखाइ षीणा। आचई हिथामस्या द्राटिट्वाखऔहो वाशि। पिखबाश॥ १५ ॥ अयन्तइन्द्र सोतूहोतमाःत। नीपूतो आकीधीब र्हाटिइ षीटा। ऐ हाटाइमा स्याचिद्रा वाकापाइ बाटि। आइ हिषिमास्याद्र वाकीपाइ बाटि। पीखबाश॥ १६ ॥ अयन्तइन्द्र सोफूमोतनापइपू तोणिआ धीण्यबर्हि षीणि। नीपूतो आकीधीब र्हाटिइ षीता। ऐकहाइ माटीस्यातद्र वाकापापइ बात्रा। ईखहाश॥ १७ ॥
॥ मधछु न्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
सुरूपकृ᳒त्नूमूता᳒ये । सूदूघा᳒मीवागोदूहे । जुहूमा᳒सी॑द्यावी᳒द्यवि ॥ ६ ॥
सु रूता। पाचकृत्नु मूचित याचाइश। सुदू घाचिमिव गोटिदुह यातिआउ वाटि। ऊखपाश। जुहू माटिसीतद्य वीचाद्यवि यातिआउ वाटि। उ ऊखापाश॥ १८ ॥ सुरू हातिहातबुश। पकृत्नु मूटीच्ता याटाइश। सुदु घाचिमिव गोटिदुहाऐहीऐ हीतूच्। जु हौटाहुवाइ माटीसीटद्य वीचाद्य वीचाऐहीऐ हीतीच्॥ १९ ॥ सुरूपकृ त्नुतुमू तापायाणइश। ओ इषासुरूपकृ त्नु मूयूता याटाइश। ओ इषासुदुघामिवा गोयूदू हाटाइश। जु हूकाम सापाइद्यविद्यावै हीशू। जु हुटामा सीटाच्द्याकविद्य वीपिआबुहोआबुहो वाशृ। एतद्य वीताच्॥ २० ॥ सुरूप कृती। त्नु मूटाता याचाइश। सुदु घाकिमीटवा गोटाच्दूखहाइसुदु घाकुमाश। वा गोटाच्दू हाकाइश। जुहू माटिसीत। द्यापवीशद्याखवोप्ल। हा इशा॥ २१ ॥
॥ त्रिशोकः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आभित्वावृषभासूते᳒ । सूतं᳒सृजामीपीताये॑ । तृ᳒म्पा᳒व्याश्नूहीमा᳒दम्᳒ ॥ ७ ॥
अभित्वावृष भाषूसू ताताइश। सुतंसृ जाकीच्मी पाकाइ तायायाटइश। तृ म्पाकावाययाटश्नु हाताआउवा एभी। माखदशम् ॥ २२ ॥ अभित्वावृष भाषूसुते भ्यातिहातबुश। त्वातच्वृ षाकाभायसू ताटाइश। सूतंसृ जाकीच्मी पाकाइ तायायाटइश। तृं पाकाहोइवि याकीहोकथ्श्नुही माटिदाखणम् । ओपइ ळाप्ला॥ २३ ॥ अभित्वावृष भाषूसुतेसुतंसृ जोतूवात। मी पीकाताटयातइश। सु तंकासृ जाकाच्मीकपी ताटायातइश। तृटम्पातवाटट्याखऔहो वाशि। श्नु हीथामाटदाखम् ॥ २४ ॥
॥ कुसीदी काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
या᳒ई᳒न्द्रचा᳒मा॑स्सेष्वा । सो᳸मा॑श्चामू᳒षू॑तेसूतः । पीबे᳒द॑स्यत्वा᳒मी॑शिषे ॥ ८ ॥
या इथान्द्रापचमसेष्वाइ याशू। सो माकाश्चामूषु तेकीच्सूकतस्सोमश्च मूकुच्षुकताइ सूटिताःत। पाइ बाटिहातइदा स्योटिहातइश। त्वामी शाटिइ षाखाण्इश। ओपइ ळाशा॥ २५ ॥ ॥ यइन्द्रचा मातुसे ष्वाता। सोमश्चमूषु ताथूइ सुपाताःश। सोमश्च मूतीषूतताइ सूपिताःश। ओटइपिबेद स्योखुहाणइश। त्वमाइ शाखीणफप्ल्इश। षाखइश॥ २६ ॥
॥ शुनः शेप आजीर्गितः इन्द्रः गायत्री ॥
यो᳒गे॑योगेतावास्ता॑रं । वाजेवा᳒जे॑हवामाहे । साखा॑याइन्द्रामूता᳒ये ॥ ९ ॥
योगेयो गेषीतवस्ता रातीम् । वाजेवा जेकीह वाचाम हेकाच्साखा याटिईतन्द्राकमोपबाता योप्लि। हा इशा॥ २७ ॥ योगेयो गेषीतव स्तातिरातम् । वाजेवा जेकीह वाचाम हेकाच्हो वाटाहातइश। साखा याटिईतहो वाटाहातइश। न्द्रामू ताटियाखऔहो वाशि। उ ऊखापाश॥ २८ ॥ । योगेयो गेषीतवहाबु स्तातुरातम् । वाजेवा जेकीह वाटामाहा एकिहूवा औकिहोतवात। सा खाथाच्याकइन्द्र मूकिताया एकिहूवा औकिहोतवात। स खाकाय याटाहुवा औकिहोतवात। न्द्र मूकात येटाख्॥ २९ ॥
॥ मधछु न्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳸त्वे॑तानीषी॑दत । इन्द्रा॑माभिप्रा᳒गा॑यता । सा᳸खा॑यस्तो᳒मा॑वाहसः ॥ १० ॥
आ तूखाएतानि षीप्लीदाङताश। इथन्द्रामभाइप्र गाषुयतासा खाकीच्य स्तोकामवा औपिहोशम वाटाहाखसाःण। हायाईसा खाटुच्य स्तोकामवा औपिहोश। हि म्माटाहाखसोप्ल। हा इशा॥ ३० ॥