| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 157 |
श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
पा᳒न्तामा᳒वोअ᳒न्धा॑सः । इ᳸न्द्रा॑माभिप्रा᳒गा॑यत । विश्वा᳒सा᳹हं॑शाता᳒क्रातुं । मंहीं॑ष्ठंचऋषाणीना᳒म् ॥ १ ॥
पा न्त मा वोषीअ न्ध साःति। इकन्द्रा माकाभि प्रा गा या ताटुहातहातइश। वि श्वा सा हंकीच्शा ताकाक्रा तूंटाहातहातइश। मंकहा इ ष्ठा ञ्चाटीहातहातइश। र्ष णाटाइ नाखामौ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥१॥ पा न्त मा ओषीअ न्ध स इ हातु। इथन्द्रा म भा इ प्र गाकूय ताटाइ हाता। वि श्वा साकिहं शा ताटिच्क्रा तूटामि हाता। मंकहा इ ष्ठाचिञ्चा इ हाटि। र्ष णाटाच्ई नाकामि हाटाख् ॥२॥ पा न्ताणामाफवोखअ न्ध साःशि। आ इ न्द्रा म भा इषूप्र गाटायाखताण। वि श्वाटासाखहणम् । शातता क्रापातुशम् । मं हि ष्ठ ञ्चकीथर्षा णाचाइश। नातमाटख्औ हो वाशि। ओतकाःख ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 158 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः गायत्री ॥
प्रा᳒वाइ᳹न्द्रा॑यामा᳒दा॑नं । ह᳒रीया॑श्वायगायता । साखा॑यस्सोमापा॑व्ने ॥ २ ॥
प्रा वा इ न्द्राटीया मा दाखिनणम् । प्र वाटाइ न्द्रा औपिहोश। याखमाप्लदाखनणम् । ह राटाअ श्वा औपिहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाटाया स्सो औपिहोश। मा पोप्लाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥४॥ प्र वाटाइ न्द्रा औपिहोश। याखमाप्लदाखनणम् । ह राटाआ श्वा औपिहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाटाया स्सो औपिहोश। मा पोप्लाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥५॥ प्रा वा ईटियातईटयात। इ न्द्रो ईटियातईटया याखामाप्लदाखनणम् । हा रा ईटयातईटयातआ श्वो ईटियातईटया याखागाप्लयाखताण। सा खा ईटियातईटयातया स्सो ईटियातईटयात। मा पोपाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥६॥
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| 158 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
गायत्री |
प्रा᳒वाइ᳹न्द्रा॑यामा᳒दा॑नं । ह᳒रीया॑श्वायगायता । साखा॑यस्सोमापा॑व्ने ॥ २ ॥
प्र वौकाहो वाटाइ न्द्रा औकिहो वाटा। याखमाप्लदाखनणम् । ह रौकाहो वाकाआ श्वा औकिहो वाटा। याखगाप्लयाखताण। स खौकाहो वाटाया स्सो औकिहो वाटा। मा पोपाबाप्लवा व्नोप्ला। हा इशा ॥७॥ प्रा वाचाद दा औटिहोतइ न्द्रो द दा औपुहोश। याखमाप्लदाखनणम् । हा रीचाद दा औटिहोतआ श्वो द दा औपुहोश। याखगाप्लयाखताण। स खाचाद दा औटिहोतया स्सो द दा औपुहोश। मा पोप्लाबा वाप्लाव्नोश। हा इशा ॥८॥ प्र व प्र वाःती। इ न्द्राताएकन्द्राथया माकादायनाटम् । ह राताइ ह रि य श्वाटुचया गाकायायताट। सा खा याभिस्सोत। मा पोप्लाबा वाप्लाव्नोप्ल। हा इशा ॥९॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 159 |
मेधातिथि काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चांगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
वाया᳒मू॑त्वातादी॑दर्थाः । इ᳸न्द्रत्वायन्तस्स॑खायः । क᳸ण्वा॑उक्थे᳒॑भी॑र्ज᳒रन्ते ॥ ३ ॥
व यं वा यातीम् । ऊखत्वाशता दी दाखिर्त्थाःण। इ न्द्र त्वा यषीन्त स्स खाखियाःप्ल। क ण्वाताऊपक्थे भि र्ज र न्ते एप्लूहि या हाशि। होप्लइ ळाशा ॥१०॥ व य मूखित्वा त दि दा र्त्थाःशु। ऐ ही होटिइश। वा य मु त्वा त दिषूद र्त्था इ न्द्र त्वा यकून्त स्स खाटियाःत। काखण्वाःण। उ क्था इ भीकीर्जोपबाप्ल। र न्तातायाटाख् ॥११॥
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| 160 |
श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आंगिरसः इन्द्रः गायत्री ॥
इ᳸न्द्राया॑माद्वा॑नेसूतं । पा᳒री॑ष्टोभन्तूनो᳒गी᳒राः । अर्का᳒मा᳒चन्तूका᳒रा᳒वाः ॥ ४ ॥
इ न्द्रा य म द्व नातूइश। सू ता मि न्द्राषीय म द्व नेचीसू ताशाम् । पाचरा इ ष्टोटिभातिच्न्तू नोचागि राःशा। अ र्क माटिर्च्चातच्न्तूकका राटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥ ॥ इ न्द्रा य म द्व नेतूहातबुश। ओ इ सूटितातम् । पा रि ष्टोकिभा न्तु नोटिहातइ गा राःती। पा रि ष्टो भा न्तु नोटूहातइ गा इ राःटी। अ र्क माटिर्च्चाखऔ हो वाशि। एतन्तु काचारा वाःटाख् ॥१३॥ इ न्द्रा य म द्व नेषूसु त मि न्द्रा य मोतूवात। द्वातना इ सूपिताशम् । पा रि ष्टोकिभाटहातहातन्तु नोटागाखइ राःणा। अ र्का मा र्च्चाभिहातहातच्न्तुकका राटावाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१४॥
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छन्दः (Chandas) |
| 161 |
इरिम्बिठिः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ इरिम्बिठः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳒य᳒न्ताइन्द्रासो᳒माः । नीपू॑तोआ᳹धी॑बर्हीषि । ए᳸ही॑मास्या᳒द्रावा᳒पी᳒बा ॥ ५ ॥
अ य न्त याती। द्रा सो मोटिहो वाकाहोचइश। नी पूकातो आटाधीचब र्हाखाइ षीणा। आचई हिथाम स्या द्राटिट्वाखऔ हो वाशि। पिखबाश ॥१५॥ अ य न्त इ न्द्र सोतूहोतमाःत। नी पू तो आकीधी ब र्हाटिइ षीटा। ऐ हाटाइ मा स्याचिद्रा वाकापा इ बाटि। आ इ हिषिमा स्या द्र वाकीपा इ बाटि। पीखबाश ॥१६॥ अ य न्त इ न्द्र सोफूमोतनापइ पू तोणिआ धीण्यब र्हि षीणि। नी पू तो आकीधी ब र्हाटिइ षीता। ऐकहा इ माटीस्यातद्र वाकापापइ बात्रा। ईखहाश ॥१७॥
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छन्दः (Chandas) |
| 162 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
सुरूपकृ᳒त्नूमूता᳒ये । सूदूघा᳒मीवागोदूहे । जुहूमा᳒सी॑द्यावी᳒द्यवि ॥ ६ ॥
सु रूता। पाचकृ त्नु मूचित याचाइश। सु दू घाचिमि व गोटिदु ह यातिआ उ वाटि। ऊखपाश। जु हू माटिसीतद्य वीचाद्य वि यातिआ उ वाटि। उ ऊखापाश ॥१८॥ सु रू हातिहातबुश। प कृ त्नु मूटीच्ता याटाइश। सु दु घाचिमि व गोटिदु हा ऐ ही ऐ हीतूच्। जु हौटाहु वा इ माटीसीटद्य वीचाद्य वीचाऐ ही ऐ हीतीच् ॥१९॥ सु रू प कृ त्नुतुमू तापायाणइश। ओ इषासु रू प कृ त्नु मूयूता याटाइश। ओ इषासु दु घा मि वा गोयूदू हाटाइश। जु हूकाम सापाइ द्य वि द्या वै हीशू। जु हुटामा सीटाच्द्याकवि द्य वीपिआ बु हो आ बु हो वाशृ। एतद्य वीताच् ॥२०॥ सु रू प कृती। त्नु मूटाता याचाइश। सु दु घाकिमीटवा गोटाच्दूखहा इ सु दु घाकुमाश। वा गोटाच्दू हाकाइश। जु हू माटिसीत। द्यापवीशद्याखवोप्ल। हा इशा ॥२१॥
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छन्दः (Chandas) |
| 163 |
त्रिशोकः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ त्रिशोकः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
आभित्वावृषभासूते᳒ । सूतं᳒सृजामीपीताये॑ । तृ᳒म्पा᳒व्याश्नूहीमा᳒दम्᳒ ॥ ७ ॥
अ भि त्वा वृ ष भाषूसू ताताइश। सु तं सृ जाकीच्मी पाकाइ तायायाटइश। तृ म्पाकावाययाटश्नु हाताआ उ वा एभी। माखदशम् ॥२२॥ अ भि त्वा वृ ष भाषूसु ते भ्यातिहातबुश। त्वातच्वृ षाकाभायसू ताटाइश। सू तं सृ जाकीच्मी पाकाइ तायायाटइश। तृं पाकाहो इ वि याकीहोकथ्श्नु ही माटिदाखणम् । ओपइ ळाप्ला ॥२३॥ अ भि त्वा वृ ष भाषूसु ते सु तं सृ जोतूवात। मी पीकाताटयातइश। सु तंकासृ जाकाच्मीकपी ताटायातइश। तृटम्पातवाटट्याखऔ हो वाशि। श्नु हीथामाटदाखम् ॥२४॥
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| 164 |
कुसीदी काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ कुसीदी काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
या᳒ई᳒न्द्रचा᳒मा॑स्सेष्वा । सो᳸मा॑श्चामू᳒षू॑तेसूतः । पीबे᳒द॑स्यत्वा᳒मी॑शिषे ॥ ८ ॥
या इथान्द्रापच म से ष्वा इ याशू। सो माकाश्चा मू षु तेकीच्सूकत स्सो म श्च मूकुच्षुकता इ सूटिताःत। पा इ बाटिहातइ दा स्योटिहातइश। त्वा मी शाटिइ षाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥२५॥ ॥ य इ न्द्र चा मातुसे ष्वाता। सो म श्च मू षु ताथूइ सुपाताःश। सो म श्च मूतीषूतता इ सूपिताःश। ओटइ पि बे द स्योखुहाणइश। त्व मा इ शाखीणफप्ल्इश। षाखइश ॥२६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 165 |
शुनः शेप आजीगर्तिः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ शुनः शेप आजीर्गितः इन्द्रः गायत्री ॥
यो᳒गे॑योगेतावास्ता॑रं । वाजेवा᳒जे॑हवामाहे । साखा॑याइन्द्रामूता᳒ये ॥ ९ ॥
यो गे यो गेषीत व स्ता रातीम् । वा जे वा जेकीह वाचाम हेकाच्सा खा याटिईतन्द्राकमोपबा ता योप्लि। हा इशा ॥२७॥ यो गे यो गेषीत व स्तातिरातम् । वा जे वा जेकीह वाचाम हेकाच्हो वाटाहातइश। सा खा याटिईतहो वाटाहातइश। न्द्रा मू ताटियाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२८॥ । यो गे यो गेषीत व हा बु स्तातुरातम् । वा जे वा जेकीह वाटामा हा एकिहू वा औकिहोतवात। सा खाथाच्याकइ न्द्र मूकिता या एकिहू वा औकिहोतवात। स खाकाय याटाहु वा औकिहोतवात। न्द्र मूकात येटाख् ॥२९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 166 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः गायत्री ॥
आ᳸त्वे॑तानीषी॑दत । इन्द्रा॑माभिप्रा᳒गा॑यता । सा᳸खा॑यस्तो᳒मा॑वाहसः ॥ १० ॥
आ तूखाए ता नि षीप्लीदाङताश। इथन्द्रा म भा इ प्र गाषुय ता सा खाकीच्य स्तोकाम वा औपिहोशम वाटाहाखसाःण। हा या ई सा खाटुच्य स्तोकाम वा औपिहोश। हि म्माटाहाखसोप्ल। हा इशा ॥३०॥