| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 551 |
ययातिर्नाहुषः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ ययातिर्नाहुषः पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
आ᳒भी᳒प्रीया᳒णी॑पवातेचानो॑हितः । ना᳒मा॑नीयह्वो᳒आ᳒धीयेषूवा᳒र्धा॑ते । आ᳒सू᳒र्यास्यबृहा᳒तो᳒बृहन्ना᳒धी । रा᳒थं᳒विष्व᳒ञ्चमऋहद्वीचाक्षाणः᳒ ॥ १ ॥
आ भी प्रीखियाशणी पा वाखिताणइश। चाकनो हि तोटिना मा नीखियाशह्वो आ धीखियेण। षूकव र्ध ता एभिआ सू रीखियाशस्या बृ हाखिताःण। बृकह न्न धा एभीर थां वाखिइ श्वांशाचा मा रूखिहाणत् । वि चाताआ उ वाटि। क्षाखणाःप्ल ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 551 |
ययातिर्नाहुषः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
आ᳒भी᳒प्रीया᳒णी॑पवातेचानो॑हितः । ना᳒मा॑नीयह्वो᳒आ᳒धीयेषूवा᳒र्धा॑ते । आ᳒सू᳒र्यास्यबृहा᳒तो᳒बृहन्ना᳒धी । रा᳒थं᳒विष्व᳒ञ्चमऋहद्वीचाक्षाणः᳒ ॥ १ ॥
एतआ भीचाप्रीकयाफ। ओतणी पा वाचिता एताच नो हीचिता एताना माचानीकयाफ। ओतह्वो अ धीचिया एता। षु व र्धाचिता एता। आ सूचारीकयाफ। ओतस्य बृ हाचिता एताबृ हाचान्नाकधीफ। एतरा थांचावीकष्वाफ। ओतञ्च मा रूचिहा देता। वि च क्ष णाःप्लु। होप्लइ ळाशा ॥२॥ अ भ्यौ हो वा हा इषूप्रि या णीति। पा वा ताकिइ चाखानोण। हि तो नाटिमा नि य ह्वोकीअ धि यातिइशषू वाचार्धा ताचाइश। आटसू रि याकिस्य बृ हा तोचीबृ हचान्नाकधाचइश। रा थं वा इ ष्वा ञ्चाकूम रू हाकिद्वि चाताआ उ वाटि। क्षातणाःटख् ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 551 |
ययातिर्नाहुषः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
आ᳒भी᳒प्रीया᳒णी॑पवातेचानो॑हितः । ना᳒मा॑नीयह्वो᳒आ᳒धीयेषूवा᳒र्धा॑ते । आ᳒सू᳒र्यास्यबृहा᳒तो᳒बृहन्ना᳒धी । रा᳒थं᳒विष्व᳒ञ्चमऋहद्वीचाक्षाणः᳒ ॥ १ ॥
आकभि प्र या णिकीच्पा व ता इशीहो इ हो वाकीहो एपाच नो हि ता हा इ हो वा हा इशै। ना माथानि या ह्वोकिच्आ धि या इशीहो इ हो वाकीहो एपाषु व र्ध ता हा इ हो वा इशे। आ सूथारि या स्यचिबृ ह तोशिहो इ हो वाकीहो एपाबृ ह न्न धी हा इ हो वा हा इशै। रा थंकावि ष्वा ञ्चाकिच्मा रू हाकिद्धो इ हो वाटीहो एपावि च क्ष णाःषीहा इ हो वाप्लीहा उ वाशि। वाकजी जी गीकवातच् ॥४॥ आकभि प्रि या णीकीप व ता इ चाकुनो हि ताशिहो वाकाहोचइश। ना माथानि या ह्वोकिअ धि या इ षूकुव र्द्ध ता इ हो वाकूहोचइश। आ सूथारि या स्याकिबृ ह तो बृकीह न्न धीशिहो इ हो वाकीहोचइश। रा थंकावि ष्वा ञ्चाकिम रू हा द्वीकीच क्ष णा होकीवा होटाट्वाखऔ हो वाशि। वाकजी जी गीकिवा वि श्वाकिध नाटानीख ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 551 |
ययातिर्नाहुषः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
आ᳒भी᳒प्रीया᳒णी॑पवातेचानो॑हितः । ना᳒मा॑नीयह्वो᳒आ᳒धीयेषूवा᳒र्धा॑ते । आ᳒सू᳒र्यास्यबृहा᳒तो᳒बृहन्ना᳒धी । रा᳒थं᳒विष्व᳒ञ्चमऋहद्वीचाक्षाणः᳒ ॥ १ ॥
अ भ्योतावात। प्री या णिषिप व ता इ च नोकूहा इ ताःटि। ना मा नि य ह्वोषुअ धि या इ षूकुव र्ध ताटिइश। आ सू र्य स्यषीबृ ह तो बृ हकुन्ना धीटा। रा थां वाखिइ ष्वाशाञ्च मातारू हाटाद्वा इ चाटिक्षाख। णाःत्र ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 552 |
मनुः सांवरणः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ मनुः साम्वरणः पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
आचोद᳒सो᳒नोधन्वन्त्विन्दा॑वः । प्रस्वाना᳹सो॑बृहा᳒द्देवे᳒षूहा᳒रा॑यः । वी᳒चीदश्नाना᳒ईषा᳒योआ᳒रा॑तयः । अर्योना॑स्स᳒न्तुसानीषन्तुनोधी᳒याः ॥ २ ॥
अ चोकादा सोटानोकथ्धाचनु वाटान्तूतइ न्द वाःचि। प्र स्वाथाना सोटाबृ ह द्दाचिइ वेटाषूतहा र याःचि। वी ची दाचिश्नाटनाकथ्इ ष योटिआतरा त याःचि। अ र्योथाना स्साटान्तू साचाना इ षाटिन्तूतनो धी याकिच्बुश। बाटख् ॥७॥ आ चोकादा सो नो ध न्वाखुन्तु वि न्द वाःशी। प्र स्वाकाना सो बृ ह द्दे वाचूख्इ षू ह र याःशु। वा इ ची द श्नाचुनाकच्इ ष योखिअ रा त याःशी। आ र्योकान स्स न्तुषिस नी ष न्तूकीनोफधी याप्लाबुश। बाश ॥८॥ हा बु होतिहा अ चो दाकीसो नोथानु वाखान्तुशइ न्द वाःचि। हा बु होतिहा इ प्र स्वाकीना स्सोथाच्बृकहा द्देकावाखइ षुशाह र याःखि। हा बु होतिहा इ वि चि द श्नाचूनाकइ ष योखिआकरा त याःखि। हा बु होतिहा अ र्योचिन स्सकाच्न्तूकसाचनि षाखान्तु नो धि या बुशु। बाख ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 552 |
मनुः सांवरणः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
आचोद᳒सो᳒नोधन्वन्त्विन्दा॑वः । प्रस्वाना᳹सो॑बृहा᳒द्देवे᳒षूहा᳒रा॑यः । वी᳒चीदश्नाना᳒ईषा᳒योआ᳒रा॑तयः । अर्योना॑स्स᳒न्तुसानीषन्तुनोधी᳒याः ॥ २ ॥
अ चोताहातइश। दा सो नोषिध नु वा न्तु विकुन्दा वाःटा। प्र स्वा ना सोषीबृ ह द्देकिवा इ षूकिह र याःटि। वि चोखाहा इशाद श्नोखाहा इशाना इ ष यो अ रोखूहाणइश। ता याकाअ र्योखाहा इशान स्सोखाहाशन्तु सा नीखिषाणम् । तु नाटाउ वाता। धीखयाःप्ल ॥१०॥ अ चौ होतिवात। दा सो नोषिध नु वा न्तु विकान्दा वाःट। प्र स्व ना सोषीबृ ह द्दे वा इ षुकुहा रा याःटि। वा इ चीटिदाखश्नाशना इ षाखियोशहो अ रा ताखीयाःण। होतआ र्योटानाखस्साशन्तु सा नीखिषाण। हो न्तु नो धाखी। याःत्र ॥११॥ अ चौ हो वातीहातइश। दा सो नोषिध नु वा न्तु विकुन्दा वाःटा। प्र स्वा ना सोषीबृ ह द्दे वा इ षूकूहा रा याःटि। वाटइ चीतादाटश्नाखनाणइ ष यो अ राफुतातयाःत। आटर्योतनाटस्साखन्तूणस नी षाफिन्तु नो धाखि। याःत्र ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 553 |
अम्बरीषो वार्षागिरः ऋजिष्वा भारद्वाजश्च |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ अम्बरीषो वार्षागिरः ऋजिष्वा भारद्वाजश्च पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
ए᳒ष᳒प्र᳒कोशेमाधू॑मंअचिक्रदत् । इन्द्रस्याव᳹ज्रो॑वापू᳹षो॑वापू᳒ष्टा॑मः । आ᳒भीमृत᳹स्या॑सूदूघा॑घृतश्रूताः॑ । वाश्रा᳒अ᳒ऋषन्तीपाया॑साचाधे᳒ना᳒वाः॑ ॥ ३ ॥
एकष प्र को शेटीच्माकधू मंटाअ चा इ क्राखीदाणत् । इ न्द्रा स्य वा ज्रोटुचवाकपू षांटाव पु ष्टाखिमाःण। अ भा इ मृ ता स्यांटूच्सूकदू घाटाघृ ता श्चूखिताःण। वाकश्रा अ र्षा न्तीटीपाकय साटाच धा इ नाखी। वाःत्र ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 554 |
रेभसूनू काश्यपौ |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ रैभसूनू काश्यपौ पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
प्रो᳒आ॑यासिदिन्दूरिन्द्रा॑स्यानिष्कृ॑तं । साखासख्यु॑र्नाप्रा᳒मीनातीसङ्गीर॑म् । म᳒र्या॑यिवायुवातीभि॑स्सामऋष᳒ति । सो᳸मः॑काला᳹शेशाता᳒या॑मानापाथा ॥ ४ ॥
प्रोतअ या साचिइ दिफान्दू रि न्द्रा स्याटीनि ष्कृ ताचिम् । स खाकास ख्युकार्न्न प्र मि ना ताभुइ स ङ्गि राचीम् । म र्याथाइ वाकायु वाशाति भा इ स्साभीम र्ष ताचिइश। सोथमः क ला शेकीश त या माभीना पाचाथाचबुश। बाटख् ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 554 |
रेभसूनू काश्यपौ |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
प्रो᳒आ॑यासिदिन्दूरिन्द्रा॑स्यानिष्कृ॑तं । साखासख्यु॑र्नाप्रा᳒मीनातीसङ्गीर॑म् । म᳒र्या॑यिवायुवातीभि॑स्सामऋष᳒ति । सो᳸मः॑काला᳹शेशाता᳒या॑मानापाथा ॥ ४ ॥
प्रोतअ या साचिइ दिथान्दू रि न्द्रा स्याटीनि ष्कृ तांपिसा खाचासाकख्यूफर्न्न प्राचामिकनाफति स ङ्गाखिइ रशाम् । म र्याथाइ वाकायु वाशाति भा इ स्साभीम र्ष ता एपीसो माःचाकाकलाफशे शाचाताकयाफम ना पाखि। थात्र ॥१५॥ प्रो अ याखिसीणत् । इ न्दु रि न्द्रापीस्याशनि ष्कृकातंफसा खाचासाकख्यूफर्न्न प्र मि नापुतीशस ङ्गीकारफम् । म र्याचाईकवाफयु वा ति भा एपुसाशम र्षाकाताफइश। सो माःचाकाकलाफशे श त याटीम ना पाखि। थात्र ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 554 |
रेभसूनू काश्यपौ |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
प्रो᳒आ॑यासिदिन्दूरिन्द्रा॑स्यानिष्कृ॑तं । साखासख्यु॑र्नाप्रा᳒मीनातीसङ्गीर॑म् । म᳒र्या॑यिवायुवातीभि॑स्सामऋष᳒ति । सो᳸मः॑काला᳹शेशाता᳒या॑मानापाथा ॥ ४ ॥
प्रो अ या सी दि न्दुषूरि न्द्रा स्य नि ष्कृ तांतूकृ ताखाम् । स खाताओपण्स ख्यु र्न्न प्र मि नाषूति स ङ्गि रांतीगि राखाम् । म र्याताओपण्इ व यु व ति भिषूस्स म र्ष तातीइ ष ताखिइश। सो माताओपण्क ल शे श त याषूम ना पाखि। थात्र ॥१७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 554 |
रेभसूनू काश्यपौ |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
प्रो᳒आ॑यासिदिन्दूरिन्द्रा॑स्यानिष्कृ॑तं । साखासख्यु॑र्नाप्रा᳒मीनातीसङ्गीर॑म् । म᳒र्या॑यिवायुवातीभि॑स्सामऋष᳒ति । सो᳸मः॑काला᳹शेशाता᳒या॑मानापाथा ॥ ४ ॥
ओ वाथाइ याचा। प्रो अ या सी दि न्दुषूरि न्द्रापास्या नीचाष्कृ ताफाम् । सा खा स ख्यु र्न्नषुप्र मि नापिती सचाङ्गीकरफम् । म र्य इ वषीयु व ति भा एपुसा मचार्षाकताफइश। ओ वाथाइ याचा। सो मः क ला शेयुश त याटिम ना पाखि। थात्र ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 555 |
प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ प्रजापतिर्वैश्वामित्रो वाच्यो वा पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
धर्ता᳒दीवाः᳒पा॑वातेकृत्वि᳒योरासाः॑ । द᳸क्षोदेवा᳒नामानुमा᳒द्यो॑नृभिः । हा᳒री॑सृजानोअ᳒त्योनसत्वा॑भीः । वृ॑थापाजांसि॑कृणूषे᳹नादीष्वा ॥ ५ ॥
ध र्क्ता दाकिइ वाखाअ वा एङि। प व तेचिकृकत्वि यो राकिसाखअ वा एङि। द क्षो दाकिइ वाखाअ वा एङि। नाचम नु माकिच्दि यो नृकिभाखइशअ वा एङि। हा रा इ स्साकीर्जाखअ वा एङि। नो अ त्योकिच्ना सा क्वाकिभाखअ वा एङि। वृ था पाकिजाखअ वा एङि। सि कृ णु षातीइ नाकादा इ षूकिवाखअ वा एप्लि। होप्लइ ळाशा ॥१९॥ ध र्क्ता बु होतीहोतहातइश। दी वः प व ताचुइ कृथाऔटहोतहातहातइश। त्वि योचारा सोचाद क्षोचादाथइ वा औटिहोतहातहातइश। ना मा नु माकीदी यो नृ भाकीइ र्हा राचिइ स्साचार्जाथऔटहोतहातहातइश। नो अ त्योकिना स क्वा भाकीइ वृ थाचिपाथजा औटाहोतहातहातइश। सि कृचाणूथषा औटाहोतहातहातइश। न दी षूकिवाकऔटहोतहातहाखऔ हो वाशि। एतच्ना दीकाषू वाटाख् ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 556 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
वृ᳒षा॑मातीनां᳒पा॑वतेवीचाक्षाणः᳒ । सोमोअह्रां॑प्रा᳒तारीतो᳹षा ᳹सान्दीवाः᳒ । प्राणा᳒सिन्धू॑नांकाला᳒शंअचि᳒क्रद॑त् । इन्द्र॑स्या᳒हा᳹र्द्या॑वीशा᳹न्मा॑नीषीभिः ॥ ६ ॥
वृ षाकामा तीटानाकथ्म्पा व ताटिएतवी च क्षाचिणाकएख। सो मोथाअ न्हाटाम्प्रा ताचारा इ ताटिएतउ ष सा न्दीचीवाकएख। प्रा णाथासा इ न्धूटिनांकथ्का ला शंटिएतअ चि क्राचिदाकदेख। इथन्द्रा स्याटाहाटर्द्या वा इ शाटीनेतम नी षीचिभीकरेखण्। ओपइ ळाशा ॥२१॥ वृ षाटाम ताटाई ना म्प व तेकुवी च क्षाटिणाःत। सो मोटाअ न्हाटाम्प्र त री तोकीषा सा न्दाटिइ वाःता। प्रा णाटासा इ न्धटिना ङ्क ल शंकीआ चि क्राटिदातत् । आ इ न्द्राटिस्या हाटाद्या वि शकिन्मा नी षाटिइ भाखाण्इःश। ओपइ ळाशा ॥२२॥ वृ षा म ती नांकुप व ताकिइ वायाइ चापाक्षा णाःता। सो मोकाअ न्हाकाम्प्र त रीकितो षायासापन्दि वाःका। प्राकणा सि न्धूकिच्नाकङ्क ल शंटिअ चापाइ कृ दातित् । आ इ न्द्रा स्याकीहा र्द्या वि शकीन्मायनापइ षीशाभाणबुश। बाख ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 557 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
आ᳸सा॑वीसो᳒मो॑आरूषो᳒वृषाहा᳒रिः॑ । रा᳒जे॑वादस्मो᳒आभी᳒गा᳒आ॑चिक्रदत् । पुनानो᳒वारामा᳹त्ये॑ष्वव्या॑म् । श्येनो᳹नयो ᳹निंघृता᳹व॑न्तामा᳒सा॑दत् ॥ ७ ॥
अ साकावि सो मोकिच्आकरू षोपावृ षाशाह राताइःश। रा जेथाव दा स्मोकिच्आकभी गापाचीप्लकृ दाकात् । पु नाकानो वा राकिच्माकति धा एपिषी याप्लाव्य याताम् । श्ये नोथान यो नीकिच्ङ्घृकत वापान्त मा स दाप्लीत् । होप्लइ ळाशा ॥२४॥ आ सा वीखिसोशमो आ रूखिषाःण। वाकर्षा ह रा एभीरा जे वाखिदाशस्मो आ भीखिगाण। आकचि क्र दाटित्पू ना नोखिवाशरा मा तीखियेण। षीकअ व्य यांटिश्ये नो नाखियोशनी ङ्घा र्क्ताखिवांण। त मातासाटट्दाखऔ हो वाशि। देतदी वीटाख् ॥२५॥ अ सा वि सो मोषुअ रु षो वृ षा ह रातूइःश। रा जे व द स्मो अषूभि गा अ चि क्र दातू। पु ना नो वा रषुम त्य ष्य व्य यातुम् । शे य नो न यो निंषूघृ त वातिन्त मातासाटट्दाखऔ हो वाशि। एतदी वीटाख् ॥२६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 558 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
| 559 |
सिकता निवावरी |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥ ॥ सिकता निवावरी पवमानः सोमः जगती ॥
प्रा᳒देव᳒मा᳒च्छामाधूमन्ताइन्दा॑वः । आसी॑ष्यदन्तागावाआ᳒ना᳒धेनावाः । बर्ही॑षादो॑वाचाना᳹व॑न्ताऊ᳒धा᳹भिः । परिस्रू᳹ता॑मुस्रीया॑निर्णीज॑न्धिरे ॥ ८ ॥
त्रिरा॑स्मैसप्ता᳒धेना᳒वो॑दुदुह्रिरे । सत्या᳒माशीरंपारामे᳒व्यो॑मनि । च᳒त्वारिन्यो᳒भुवा॑नानीनिर्णीजे । चा᳒रूणिचक्रेया᳒दृतैरा॑वार्धत ॥ ९ ॥
प्रा देता। वा म च्छा म धु मकूच्न्ताकआटइकथ्न्दा वाःटा। आचसि ष्याखादकन्ताथगा व आटिच्नाकधाटच्इ ना वाःचि। ब र्हि षाखिदाःण। वा चाचाना वा न्ता ऊटीच्धाकभा इः पाकिरि स्रूखातणम् । उ स्रि या नि र्णि जषून्धा इ रा एटीधा इ राखिऔ हो वाशि। धातइ राटाख्इश ॥२७॥ त्रापइ र स्मै स प्तषुधे न वो दु दौ होप्लूह्राङइ रा इशि। स त्या मा शी रषुम्प र मे व्योकीमा नीटा। च त्वा र्य न्याषीभु व ना नि निकुर्णा इ जाटिइश। चा रू णाखिइ चाणा। क्रेकअ द्रु ताटिइशरा वाटा। र्द्धाखतात्र ॥२८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 560 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
इन्द्रा॑यसोमासू᳹षूतःपा᳒री॑स्रवा । अपा᳒मी॑वाभवातुराक्षा॑सासाहा । माते᳒रासा᳸स्यमत्सतद्वा॑यावीनाः॑ । द्रावी॑णास्वन्ता᳒ईहा᳒सन्त्वि᳒न्दा॑वः ॥ १० ॥
इ न्द्रा य सोकीम सु षु ताःखीपा रीचास्राकवाफ। आ पा मीकिवा भ व तु राखुक्षा साचासाकहाफ। मा ताकाइ र स स्यषीम त्स ताखिद्वा याचावीकनाःफ। न्द्रा वाचाइशण स्व न्त इ हषुस न्त्वा इ न्दाखू। वाःत्र ॥२९॥ इ न्द्रा य सो म सु षुषृतः प र्यौ हो इ स्रातूवात। आ पा मी वाषीभ व तु र क्ष सायूसापहाश। मा ते र स स्यषुम त्स त द्व यायुवीपनाःश। द्राखवीप्लणाखस्वाणन्ता ईकाह साटाहोटन्तु वा इ न्दाखी। वाःत्र ॥३०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 561 |
सिकता निवावरी |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ सिकता निवावरी पवमानः सोमः जगती ॥
अञ्ज᳒तेव्यठ॑ञ्जतेसा᳒म॑ञ्जते । क्रातुंरिहन्ती॑मध्वाभ्या॑ठ॑ञ्जते । सि᳒न्धोरुच्छ्वासे᳒पाताय॑न्तामुक्षाणं॑ । हिरण्यपावाःपाशू᳒मप्सू᳒गृ᳸भ्णते ॥ ११ ॥
अकञ्ज ताकाइ व्य ञ्ज ता इषुस म ञ्ज ताटीइश। क्र तुंकारि हा न्तीकिम ध्वा भ्यकिञ्जा ताटाइश। सि न्धोथारू च्छा सेकिप त याकिन्ता मु क्षा णाटीम् । हि रकाण्य पा वाःकिप शु मा प्सूकीगृ ब्णा ताचिबुश। बाटख् ॥३१॥ अ ञ्जाताहोचत याताहो इ व्यकिञ्ज तेचासा मचाञ्जकताफइश। क्र तुंताहोचइशरि हाताहोटन्ति म ध्वाखिभी यचाञ्जकताफइश। सि न्धोतार्होचउ च्छ्वाताहो सेकाप त याखिन्ता मूचाक्षाकणफम् । हि राताहोचण्य पाताहो वाःकाप शु म प्सु गृ भ्णाखू। तात्रइश ॥३२॥ हा व ञ्जाति। तापइशव्य ञ्ज तेणिस म ञ्जचिता एटाहि याताएटहि याखाहा बु क्रा तुशीम् । रापइ हणान्ति म ध्वा भ्य ञ्जचुता एटाहि याताएटहि याखाहा बु सा इ न्धोःशु। ऊपच्छ्वा सेणाप त य न्त मु क्षाचूणा मेटाहि याताएटहि याखाहा बु हा इ राशु। ण्यापपा वाःणाप शु म प्सु गृ भ्णाचून्ता एटाहि याताएटहि याखाहाप्लबुश। होप्लइ ळाशा ॥३३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 562 |
वसुर्भारद्वाजः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ वसुर्भारद्वाजः पवमानः सोमः जगती ॥
पावि᳹त्र ᳹न्ते॑वी᳒ता॑तंब्रह्मणस्पते । प्राभु᳹र्गा᳹त्राणीप᳒र्येषिविश्वा᳒ताः । आ᳒ता॑प्ततानुर्नाता᳒दामो᳒आश्नुते । श्रूता᳒साइ᳹द्व ᳹हन्तासन्तादा॑शता ॥ १२ ॥
पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकुहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। प्रा भु र्गा त्राटीच्णीकप र्येटाषी वि श्व ताचीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। अ त प्त त नूकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहातइश। श्र ताकास इ द्व हकीन्त स्स न्त दा श ताकूहु वेटाहु वेटाहो वाटाहातहाखऔ हो वाशि। अ र्को देटिवा नांटाप रा मेचिव्योटमाखन् ॥३४॥ पा वि त्र न्तेकीवि त तंकिब्र ह्म ण स्प तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। प्रा भु र्गा त्राकीणी प र्येकिषी वि श्व तोकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। अ त प्त त नुकुर्न्न त दाकिमो अ श्नु तेकीच्हू वाकाऔटहो वाटा। श्र ता स इ द्व हकून्त स्स न्त दा श ताकूहू वा औटिहोटवाखऔ हो वाशि। अ र्क स्य देकिवाःकच्प रा मेचिव्योटमाखन् ॥३५॥