| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 563 |
वत्सप्रिर्भालन्दः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ वत्सप्रिर्भालन्दः पवमानः सोमः जगती ॥ ॥ रेणुर्वैश्वामित्रः पवमानः सोमः जगती ॥
इन्द्राम᳹च्छा॑सूता᳒ईमे । वृ᳒षा॑णंयन्तूहारा॑याः । श्रूष्ठेजातासाइन्दावाःस्वर्वीदः ॥ १ ॥
इ न्द्र म च्छाती। सू ता ई माटीउ वोखावाश। वृ षाकाण य्यथान्तूटच्हाकर याटाउ वोखावाश। श्रू ष्टाचाइश। जा ता स इ न्दा वाःचू। सू व र्वाटिइ दाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥१॥ इ न्द्र म च्छाती। सू ता ई माटीइ ता ईटिमातइश। वृ षाकाण य्यथान्तूचहाकर याटाहाकराटयाःत। श्रु ष्टेकाजा ताथासाटइ न्द वाटिआ इ न्दा वाःती। सु व राटिख्औ हो वाशि। वि दोतावीटदाःख ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 563 |
वत्सप्रिर्भालन्दः |
पवमानः सोमः |
जगती |
इन्द्राम᳹च्छा॑सूता᳒ईमे । वृ᳒षा॑णंयन्तूहारा॑याः । श्रूष्ठेजातासाइन्दावाःस्वर्वीदः ॥ १ ॥
इ न्द्र मि न्द्राती। आचच्छाकसू तायाइ मेटाआ इ मेटि। वृ षाकान य्यथान्तु हाकार याटारा याःटा। श्रु ष्टेकाजा ताथासाटइ न्द वाटिदा वाःटा। सु व राकिख्औ हो वाशि। वि दोतावीटदाःख ॥३॥ इ न्द्र म च्छ सु ता इ मेषृवृ ष ण य्य न्तु हाफूहोतर यातायाःख। श्रु ष्टाकाउ वाकाजा ताकाउ वाका। स इ न्द वाचीस्सूकवाफप्ल्होत। र्वि दोखाइ ळाशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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| 563 |
वत्सप्रिर्भालन्दः |
पवमानः सोमः |
जगती |
इन्द्राम᳹च्छा॑सूता᳒ईमे । वृ᳒षा॑णंयन्तूहारा॑याः । श्रूष्ठेजातासाइन्दावाःस्वर्वीदः ॥ १ ॥
इकन्द्र मापाच्छा स्सूप्लाता ईखामाणइश। वृ षाचाण य्य न्तु हाकीराखयाःण। श्रु ष्टाचाइश। जा ता स इटीन्दाखवाःत्र। सु वातार्वि दाःटाख् ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 564 |
रेणुर्वैश्वामित्रः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ वत्सप्रिर्भालन्दः पवमानः सोमः जगती ॥ ॥ रेणुर्वैश्वामित्रः पवमानः सोमः जगती ॥
प्रा᳒धा॑न्वासोमा᳒जा᳒ग्र॑विः । इन्द्रा᳒ये᳒न्दोपा᳒री॑स्रव । धुम॑न्तंशुष्मामाभा॑रास्वर्वी᳒दम् ॥ २ ॥
प्र धकान्वा सौशाहो औकाहोचवाण। म जाकाग्र वीःटा। इ न्द्राथाये न्दौशाहो औकाहोखवाण। प रीचास्रा वाटा। द्यु मकान्तां शौशाहो औकाहोखवाण। ष्म माकाभा राटा। सु वकार्वि दौ हो औकीहोखवात्र। ऊखपाश ॥६॥ प्र धकान्वा सौ हो वाकीहो म जाकिग्र वीःटा। इ न्द्राथाये न्दौ हो वाकीहो इ प रीकीस्रा वाटा। द्यु मकान्तां शौ हो वाकीहो ष्म माकिभा राटा। सु वकार्वि दौ हो वाकिहोटट्वाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥७॥ औकहो औ होचिइशप्र धकान्वा सोटा। औकहो औ हो म जाकुग्र वीःटा। औकहो औ होचिइशइ न्द्राथाया इ न्दोटिच्। औकहो औ हो इ प रीकूस्रा वाटा। औकहो औ होचिइशद्यु मकान्तां शूटाच्। औकहो औ हो ष्म माकुभा राटा। औकहो औ होचिइ सूकावातर्वातट्इ दाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥८॥ हु वाटाइ हु वाटिहो इशाप्र धकान्वा सोटाम जाकाग्र वीःटा। इ न्द्राथाया इ न्दोटिपा रीचास्रा वाटा। द्यु मकान्तां शूटाष्मा माकाभा राटा। हु वाटाइ हु वाटिहो इशासूकवातर्वाटइ दाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥९॥ प्रा ध न्वापिसो म जा ग्र वीःशु। इ न्द्राटायाखइ न्दोणा। ओ इ पाटिरा इ स्रापिवाश। द्यु माटान्तांखशूण। ओ ष्म माटिभाखरात्र। सू वातार्वीटदाखम् ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 565 |
वेनो भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ वेनो भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
सा᳸खा॑यआ᳒नी॑षीदत । पु᳒ना᳒नायप्रा᳒गा॑यत । शी᳒शून्नाय᳒ज्ञैःपा᳒री॑भूषताश्रिये᳒ ॥ ३ ॥
स खाकाया याटाच्नी षी द त पु ना नाटृयातच्प्रा गाचाय ताशा। शि शु न्नाटियातज्ञैकथ्पा रा इ भूटीच्षाकता श्राटायाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥११॥ सा खा या याती। नी षी दाखिताण। पू नाटानाखयाणप्राटट्गाखऔ हो वाशि। याखताश। शि शु न्न या ज्ञैःचुप रीकाभू षाटाट्ताखऔ हो वाशि। श्रि येताच् ॥१२॥ स खा य याषीनी षी दाटितात। पु नाकाना य प्र गा य ता शि शु न्नाषेया ज्ञैः प राटीइ भू षाटितातश्राटयाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१३॥ ओतहा इ स खा य याषूनी षी दातितात। पु नाकानौ हो इ पु नाकुनौ हो एपिया प्रा या प्राशी। गाकय तौ हो इशीगाकय तौ हो एपीशा इ शूं शा इ शूशूम् । ना य ज्ञौ होतीइशना य ज्ञौ हो एपुपा रीतापा राखाऔ हो वाशि। एतच्भू ष त श्रि येतुच् ॥१४॥ स खाफाय या उ वोखीवाश। नी षा इ दा ताटुउ वोखावाश। पु नाकाना य प्र गाकीय ताताशा इ शाटिउ वोखावाश। ना य ज्ञैः पा रि भूटूषा ताटाउ वोखीवाश। श्रि येताच् ॥१५॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 566 |
गृत्समदः शौनकः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ गृत्समदः शौनकः पवमानः सोमः जगती ॥
तंवास्सखा॑योमादा॑य । पु᳒ना᳒नामाभी᳒गा॑यता । शीशून्ना᳒हव्यै᳒स्वादयन्तागू॑र्तीभिः ॥ ४ ॥
तांखवाशप्ल्स्साखखाण। योकम दाटायात। पू ना ना म भीकुगा याटाट्तात। शा इ शू न्नाकीह व्यैकास्व द याटिन्त गू र्क्त भाखीण्इःश। ओपइ ळाशा ॥१६॥ ओ इ तं व स्स खातू। योकम दा याभिउ वोखावाश। पू नाकान म भि गाटीउ वोखावाश। य ताशाउ वोखावाश। शि शु न्नाकिह व्यैकास्व द याटिउ वोखावाश। न्त गाशाउ वोखावाश। र्क्तीखभीःप्ल् ॥१७॥ तं व स्स खाषीयो म दातियात। पू नाकान म भि गाटीया ताचाशा इ शूटिचन्नाकहाखव्यैशस्व द यातिन्तापगूशर्क्ताखइ भोप्ला। हा इशा ॥१८॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 567 |
पवित्र आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ पवित्र आङ्गिरसः पवमानः सोमः जगती ॥
प्राणा᳹शी ᳹शूर्माही᳒नां॑ । हिन्व᳒न्नृता᳒स्यादी᳒धी॑तिं । वि᳒श्वापा᳹रीप्रीया᳹भु॑वाद᳹धाद्वीता ॥ ५ ॥
प्रा णाता। शाखइ शूशाप्ल्र्म्मा हाखाइ नाणाम् । हि न्वाटान्नाखर्क्ताण। स्यातदा इ धीपितिशम् । वा इ श्वाकिप रि प्रि याकीभु वाटाद ध द्वि ताखीण्। ओपइ ळाशा ॥१९॥ प्रा णा प्रा णाती। शा इ शूटिश्शा इ शूटिर्म्म हाताआ उ वा एभी। नाखम् । हिकन्व न्ना र्क्ताकिस्य दाताआ उ वा एभी। धीखतिशम् । वि श्वाकाप रि प्रि यातीआ उ वाटि। भूखवाशत् । अ धौटाहौटहु वा इ द्वाटीट्इ ताखाऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२०॥
| Global # |
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| 567 |
पवित्र आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
जगती |
प्राणा᳹शी ᳹शूर्माही᳒नां॑ । हिन्व᳒न्नृता᳒स्यादी᳒धी॑तिं । वि᳒श्वापा᳹रीप्रीया᳹भु॑वाद᳹धाद्वीता ॥ ५ ॥
प्रा णा शि शूःती। म हाटाइ न मौ होखीवात्र। हिकन्व न्नृ त स्यशीदी धि तिंकिवा इ श्वाकिउ वाकापा राकाउ वाका। प्रि याटाभु व द धाकीउ वाता। एतद्वि ताताच् ॥२१॥ प्रा णा होखिइ या हा इशी। शा इ शूटिच्र्म्म हा इ नाटीमाचबु होकाऔकहो वाका। हिकन्व न्नृ त स्यषीदी धि ता इ माटुबु होकाऔकहो वाका। वि श्वा वा राटीबु होकाऔकहो वाका। प्री या भूटिटवाखऔ हो वाशि। आचधा द्वि तातिच् ॥२२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 567 |
पवित्र आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
जगती |
प्राणा᳹शी ᳹शूर्माही᳒नां॑ । हिन्व᳒न्नृता᳒स्यादी᳒धी॑तिं । वि᳒श्वापा᳹रीप्रीया᳹भु॑वाद᳹धाद्वीता ॥ ५ ॥
प्रा णाफाहाप्लहो इ शाखिइशशूप्लर्हा होताइश। माकही नांटाहो वाकाहो एपा। हि न्वाप्लन्न ह हो याखीर्क्ताशप्ल्हा होताइश। स्या दीचाधि ताकाइं हो वाकिहो एपा। वी श्वाफाहाप्लहो इ पाखिरीशप्ल्हा ह होतिइश। प्री याचाभु वाटाद्धोकवाकहो एपा। आपधाशद्वाखइ तोप्ला। हा इशा ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 568 |
अग्निश्चाक्षुषः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ अग्निश्चाक्षुषः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
पावा॑स्वादेवा᳒वी॑तये । इन्द्रोधाराभीरो᳒जसा । आ᳒काला᳒शम्मा᳒धू॑मान्सोमनस्सदः᳒ ॥ ६ ॥
पा वा स्व दाटीइ वा वी ताखीयाणइश। इ न्दो धा राटीभी रो जाखिसाण। आ क ल श म्मा धूकूमाखन्सोण। मा न एचिमा नाःपास दा एप्लि। होप्लइ ळाशा ॥२४॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 568 |
अग्निश्चाक्षुषः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
पावा॑स्वादेवा᳒वी॑तये । इन्द्रोधाराभीरो᳒जसा । आ᳒काला᳒शम्मा᳒धू॑मान्सोमनस्सदः᳒ ॥ ६ ॥
प व स्व दातीच्इ वा वी त याषुइ न्दोकाधाकराखभि रो ज सा एप्लु। आ काटाहातला शाटाम् । मा धुटाहोतमा न्सोटाच्माकनोपबाप्ल। स्वा दोप्ला। हा इशा ॥२५॥
| Global # |
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 569 |
चक्षुर्मानवः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ चक्षुर्मानवः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
सो᳒माःपूनाना᳒ऊमींणा॑ । अ᳒व्यंवा᳒रंवी॑धा॑वती । अ᳸ग्रे॑वाचः᳒पावमानःकानी॑क्रदत् ॥ ७ ॥
सो मः पु नाती। न ऊकार्म्मी णाचाव्यंथवा रांटावि धाकाव ताचाइश। अ ग्रेथावा चाःटाच्पाकव माटाट्नाखऔ हो वाशि। क नीकाकृ द देति। ऊटपाख ॥२६॥ सो मः पू नाती। न ऊकार्म्मि णाकाउ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। अ व्यं वा रं वि धाटूव त्य ग्रातिउ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। वाकचःषप व मा नः क नाचूउ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। क्राखदाशत् ॥२७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 569 |
चक्षुर्मानवः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
सो᳒माःपूनाना᳒ऊमींणा॑ । अ᳒व्यंवा᳒रंवी॑धा॑वती । अ᳸ग्रे॑वाचः᳒पावमानःकानी॑क्रदत् ॥ ७ ॥
सो मः पु ना न ऊतू। र्म्मि णा व्यं वा रांकुवी धा वाटितीत। अ ग्रे वा चाःचीपा व मा नाःचीका नीकाक्राफदाखत् ॥२८॥ सो मः पु नाषीन ऊ र्म्मि णाखुऐ हीप्ला। अ व्यं वा रांकीच्वि धाकाव ताखाऐ हीप्ला। अ ग्रे वा चःषीप व मा नाखीऐ हीप्ला। का नीता। क्र द दे हि या हाप्लू। होप्लइ ळाशा ॥२९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 569 |
चक्षुर्मानवः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
सो᳒माःपूनाना᳒ऊमींणा॑ । अ᳒व्यंवा᳒रंवी॑धा॑वती । अ᳸ग्रे॑वाचः᳒पावमानःकानी॑क्रदत् ॥ ७ ॥
सो मः पु नाषीन ऊ र्म्मीखिणाण। अ व्यं वा रंकीच्वी धाकाव त्य ग्राटिओ इ वाखिचाःण। प वाटाओ माखानाःण। क ना इ क्राखीणफप्ल्। दाखत् ॥३०॥ सो माःचापूकनाफप्ल्ओ न ऊखिर्म्मि णा एप्लि। अ व्यं वा रं वि धायूवापतीश। अ ग्रे वाखिणफप्ल्चाःतच्पाकव माटानाःत। काटट्नाखऔ हो वाशि। क्र द देखि ॥३१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 570 |
पर्वतनारदौ काण्वौ |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
| 571 |
पर्वतनारदौ काण्वौ |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
| 572 |
त्रित आप्तयः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ पर्वतनारदौ काण्वौ (शिखण्डिम्यावस्परसौ काश्यपौ वा) पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ त्रित आप्त्यः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
प्रापू॑नाना᳹या॑वेधा᳒से॑ । सो᳸मा॑यावा᳒चा॑उच्यते । भृ॑ति॑र्न्ना᳒भारा᳒मा᳹तीभि॑र्जुजो᳒षा॑ते ॥ ८ ॥
गोम॑न्नइन्दोअ᳒श्वा॑वात् । सूता᳒स्सू॑दक्षधनिवः । शूचि॑ञ्चाव᳒र्ण॑माधीगोषू॑धाराया ॥ ९ ॥
अस्मा᳒भ्यन्त्वावासूवी᳒दं । आभीवाणी॑रनूषत । गोभिष्टेव᳹र्णा॑माभी᳒वा॑सयामसि ॥ १० ॥
प्रा पु नापिना य वे ध सा इशू। हो इ हो इषीसो मा या वा चाटुउ च्या ताभिइश। भृ ति न्न भ राकुमा ति भाकिइ र्जू जो षाटीताखण्इश। ओपइ ळाशा ॥३२॥ प्र पु ना नौ होफुय वे ध साकीइश। सोकमा औकाहोखय व च उ च्य ता इशृ। भृ ता औकिहोखइ न्न भ राप्लीमा ति भाङिइःश। जु जोताआ उ वाटि। षाखतेश ॥३३॥ गो म न्नोफिप्ल्हो इ न्दोखिअ श्व वाप्लिदेश। सू तः सु द क्ष धायूनीपवाःश। शु चि ञ्च वाखीणफप्ल्र्णा म धि गोखीऔ होता। षु धाकाराकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३४॥ हा वा स्माति। भ्याखन्त्वाशवा सु वाखिइ दणाम् । अ भाटाइ वाखाणीशर ना उ वोखीवाश। षाखताश। गो भि ष्टेचिव र्णाथाच्मा भि वाटिस या म सिशी। होखइ ळाप्ला ॥३५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 573 |
मनुराप्सवः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ मनुराप्सवः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
पावा॑तेहरियातोहारिः । आतिह्वा᳹रां॑सीरं᳒ह्या । अभ्यर्ष᳒स्तोतृ᳹भ्यो॑वीरा᳒वद्या᳒शाः॑ ॥ ११ ॥
प व ते हाती। री याचातोटह रि रौकिच्होययौटहोखवाश। आ ति ह्व रांटीच्सीकरं ही याकिच्औशहोययौटहोखवाश। अ भ्य र्ष स्तो तृ भ्योकूवा औकाच्होययौटहोखवाश। राटट्वाखऔ हो वाशि। य शोताच्याकशाःटख् ॥३६॥ प वाखाप व ते हाशी। री याचातोटह रि रौकिच्होययौटहो औ होखि। आ ति ह्व रांटीच्सीकरं ह्याकाऔशहोययौटहो औ होखि। अ भ्यकार्ष स्तो तृ भ्योकीवा औकाहोययौटहो औ होखि। राटट्वाखऔ हो वाशि। य शोताच्याटशाःख ॥३७॥ प व ते ह र्य तोफूह रीतारापती ह्व रांप्लिसी रं ह्याङि। अ भ्य र्षापिस्तो तृप्लाभ्यो वाताइ राटाट्राखऔ हो वाशि। याखशाःप्ल ॥३८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 574 |
अग्निश्चाक्षुषः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ अग्निश्चाक्षुषः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
पारीको᳒श॑म्माधू᳹श्चूतं । सो᳒मः॑पूनानो᳒अ॑र्षति । आ᳒भी॑वाणीऋ॑षीणां᳹सप्ता᳒नु॑षत ॥ १२ ॥
प री कोखिशं म धु श्चू तंशु। सो मः पु नाकीनो अ र्ष ती हो एटूअ भि वाखिणफप्लणीतर् ऋचषी णाथाम् स प्ता नाटिउ वोखावाश। षाखताश ॥३९॥