| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 532 |
प्रतर्दनो दैवोदासिः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ प्रतर्दनो दैवोदासिः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
प्रा᳸से॑नानी᳒श्शू᳒रोअ᳒ग्रे᳒राथा॑नाम् । गव्य᳹न्ने॑तीह᳒र्षातेअस्या᳒से᳒ना॑भद्रान्कृण्वान्निन्द्राहावान्सा᳒खी॑भ्यः । आसोमोवा᳒स्त्रा॑राभासा᳒नी॑दक्ते ॥ १ ॥
होखवाशउ हु वा होखिवाण। प्रा से नाकिना इ श्शू रोटिअ ग्रा इ र थाखुनाशम् । ग व्य न्नेकिता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भा द्रा न्कृकिण्व न्नि न्द्रा हाकीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। आ सो मोकिवा स्त्राटार भ साकिनि दाखाक्तात्रइश। होखवाशउ हु वा होखीवा हाप्लाबुश। बाश ॥१॥ औ होफाओतवात। प्रा से नाकिना इ श्शू रोटीअ ग्रा इ र थाखुनाशम । ग व्य न्नेकिता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भा द्रा न्कृकिण्व न्नि न्द रा हाकीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। औ होफाओतवात। आ सो मोकिवा स्त्राटार भ सापिनि दाखा। क्तात्रइश ॥२॥ ओ होफाओतवात। प्राकसे नाथाना इ श्शू रोटीअ ग्रा इ रा थाखुनाशम । गकव्य न्नेथाता इ ह र्षा तेटुआ स्य सेखिनाश। भाकद्रा न्कृथाण्व न्नि न्द्रा हाटीवा न्सा खीखिभ्याःप्ल। ओ होफाओतवात। आकसो मोथावा स्त्राटार भ सापिनि दाखाणफप्ल। क्ताखइश ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 533 |
प्रतर्दनो दैवोदासिः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
| 534 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
| 535 |
प्रतर्दनो दैवोदासिः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ प्रतर्दनो दैवोदासिः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
प्रातेधा᳒रामा᳒धू॑मतिरसृगृन् । वा᳒रंय᳒त्पूतोअत्ये᳒ष᳒व्यम् । पा᳒वा॑मानापा᳹वा॑सेधा᳒मागोना॑म् । ज᳒ना᳒यन्सू᳒र्या॑मपिन्वोअर्कैः᳒ ॥ २ ॥
प्रा᳒गा॑यताभ्या॑र्चामादेवा᳒न् । सो᳒मं॑हिनोतामाहातेधाना॑॑या । स्वादुः᳒पा॑वातामा᳒तीवा᳒रामा᳒व्यम् । आ᳒सी॑दतुकालाश॑न्देव᳒इ᳒न्दूः॑ ॥ ३ ॥
प्राहि᳒न्वानो᳹ज॑नीतारो᳒दस्योः । रा᳒थोनवा᳒जं॑सानीष᳒न्ना॑यासीत् । इ᳒न्द्रं॑गच्छन्ना᳒यु॑धासंशी᳒शा॑नाः । वि᳒श्वा॑वा॑सूहा᳒स्ता॑योरादधा॑नः ॥ ४ ॥
हा बु होतिहा इशाप्र ते धा रा माभुधूचमाकता इ र सृ ग्राटुन् । हा बु होतिहा इ वा रंषीय त्पू तो आ तीचुया इ षी या व्याटुम । हा बु होतिहा इशाप व मा न पाचुव सेकाधा म गो नाटीम् । हा बु होतिहा इशाज न य न्सू र्याचुमाकपा इ न्वो अ र्का इःटू। हा बु होखिहाप्लबुश। बाश ॥४॥ प्रा गा य ताटीभ्या र्च्चाकाम देखावाशन् । सोकमं हि नो ताटीमा हा तेकिध नाखायाश। स्वाकदुः प वा ताटीमा ती वाकिर माखाव्यशम् । आकसी द तूकिका ल शा न्दापीइ वा याखिइश। न्दूःत्र ॥५॥ हा बु होतिहा इशाप्र हि न्वा नोषीज नि ता रोखीद सीखायोःप्ल। हा बु होतिहा इशार थो न वा जंषुस नि षाखिन्न याखासीशत् । हा बु होतिहा इशाइ न्द्र ङ्ग च्छषीन्ना यु धा सांखीशि शाखानाःप्ल। हा बु होतिहा इशावि श्वा व सुषीह स्त यो राखीद धाखानाःप्ल। द धाखानाप्लबुश। बाश ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 536 |
पराशरः शाक्त्यः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ पराशरः शाक्त्यः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ इन्द्रप्रमतिर्वासिष्ठः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
त᳒क्षद्या᳒दिमा॑नासावेना॑तोवा᳒क् । ज्येष्ठा॑स्यधर्मन्द्यूक्षोरानी॑के । आ᳸दी॑मायन्वा᳒रामा᳒वावाशानः᳒ । जुष्टंपा᳹तिं॑कालाशेगा᳒वइ᳒न्दुम् ॥ ५ ॥
ता क्षाफाद्या दीफाहोफइ म नाणिसा वे न तोफीवाफक् । ज्ये ष्ठाफास्या धाफाहोफर्म्मणद्यु क्षो र नीफीकाफइश। आ दीफामा याफान्होफइ व राणिमा वा व शाफीनाःफ। जू ष्टंफापा तींफाहोफइ ङ्क ल शे गाप्लुव इ न्दा बुशी। बाश ॥७॥ त क्षा द्या दाकीओपइ म नाणिसा वे न तोफीवातक् । ज्ये ष्ठा स्या धाकीओपर्म्मणद्यु क्षो र नीफीकातइश। आकदा इ मा याकीओपन्व राणामा वा व शाफीनाःत। जु ष्ट म्पा ताकीओपइ ङ्क ल शे गाप्लुव इ न्दा बुशी। बाश ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 537 |
इन्द्रप्रमतिर्वासिष्ठः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
| 538 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
| 539 |
कर्णश्रुद्वासिष्ठः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ पराशरः शाक्त्यः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ इन्द्रप्रमतिर्वासिष्ठः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ कर्णश्रुद्वासिष्ठः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
सा᳒कामु᳒क्षोमर्जयन्तस्वासा॑रः । दशधीरा॑स्याधीता᳒योधा᳒नूत्रीः । हा᳒रीःप᳒र्याद्रावार्जस्सू᳒र्या॑स्या । द्रो᳒ण᳒न्ननक्षेअत्योना᳒वाजी ॥ ६ ॥
इ᳸न्दू॑र्वाजी᳒पा॑वातेगो᳒न्योघाः । इ᳒न्द्रेसो᳒मस्सा᳒हाइ᳒न्वन्मा᳒दा॑य । ह᳒न्तीरक्षो॑बा᳹धा॑तेपरियारा॑तिं । वा᳒री॑वःकृण्व᳒न्वृ᳹ज ᳹ना॑स्या᳒रा᳒जा॑ ॥ ७ ॥
आ᳒धी᳒यादस्मिन्वा᳹जीनी॑वाशु᳒भाः । स्प᳸र्ध॑न्तेधी᳒यस्सू᳒रेनवी᳒शाः । आ᳒पो॑वृणा᳒नःपा॑वातेका᳒वी॑यान् । व्राजन्ना᳹प॑शुवा᳒र्थानायाम᳒न्मा॑ ॥ ८ ॥
सा काताम् । उ क्षोषाम र्ज य न्त स्वाकुसाटराःत। दा शाटाधी र स्य धी त योकूधा नूटात्रीःत। हा रीटाप र्य द्र व ज्जाकुस्सू र्याटास्यात। द्रो णाटाच्न्नाकन क्षे अ त्ये न वाटूहा उ वाति। जीख ॥९॥ सा क मु क्षातीएत। एतएपम र्ज य न्त स्वाषुसा रो द श धी रातूएत। एतएपस्य धी त योषीध नु त्रि र्ह रिः प र्यातूएत। एतएपद्र व ज्ज स्सू र्य स्यषूद्रो ण न्न नातीएत। एतएपक्षे अ त्ये न वा हाप्लूउ वाशा। जीख ॥१०॥ इ न्दूथार्वा जीटाच्पा व ते गो न्यो घाकूच्इकन्द्रा इ स्सोटिमाःत। स ह इ न्वषीन्म दा याकिच्हकन्ता इ राटिक्षाःत। बा ध तेषिप रि य रा तिंकुच्वाकरा इ पाः कृती। ण्वाथन्वृ ज नाटिस्या रापाजौ वा उ वो वाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥११॥ इ न्दु र्वा जी पषुव तौ हो औ हो वातूहातइश। गो न्यो घौकिवा उ वोखिवाश। इ न्द्रेकास्सो म स्सा हाकीइ न्व न्म दा यौकुवा उ वोखिवाश। हकन्ती र क्षो बा ध तेटूच्प रि य रा तौकुवा उ वोखिवाश। व रि वः कृकीण्व न्वृ ज नाटीस्या रापाजौ वा उ वो वाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१२॥ इ न्दु र्वा जीषीप व ते गो न्योतुघाःत। इ न्द्रे स्सो मषीस्स ह इ न्व न्म दातूयाश। ह न्ति र क्षोषुबा ध ते प र्य रातूतिशम् । व रि वः कृ ण्वषुन्वृ ज न स्य रातुजा रा जाखिऔ हो वाशि। एतस्या राटाजाख ॥१३॥ इ न्दु रौ हो वाषुहा ईतायात। वा जा उ वातीहा उ वाति। प वाकाते गोथान्यो घाकाउ वाताहा उ वाति। इकन्द्रा इ सो माकीस्स ह इ न्वकीन् । उ वाताहा उ वाति। माटट्दाखऔ हो वाशि। याखहकन्ताचइश। र क्षो बाथिधा ता इ पाकीउ वाताहा उ वाति। री याटाट्राखऔ हो वाशि। तीखम् । वा राचाइ वः कृकिण्व न्वृ जा नाकीउ वाताहा उ वाति। स्याटट्राखऔ हो वाशि। जाख ॥१४॥
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छन्दः (Chandas) |
| 539 |
कर्णश्रुद्वासिष्ठः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
आ᳒धी᳒यादस्मिन्वा᳹जीनी॑वाशु᳒भाः । स्प᳸र्ध॑न्तेधी᳒यस्सू᳒रेनवी᳒शाः । आ᳒पो॑वृणा᳒नःपा॑वातेका᳒वी॑यान् । व्राजन्ना᳹प॑शुवा᳒र्थानायाम᳒न्मा॑ ॥ ८ ॥
अ धी य दाती। स्मा इ न्वाटिजि नीकाच्वा शु भाःचि। स्पाकर्ध न्तेथाच्धी या स्सूकिराखई न वि शाःशी। आ पो पृ णा नःषुप व ता इ क वीटूयाकथ्न्व्रा ज न्न पा शुटुवा र्ध नापिया माखा। न्मात्र ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 540 |
नोधा गौतमः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ नोधा गौतमः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ मन्युर्वासिष्ठः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
महत्तत्सो᳒मोमाहीषा᳒श्चा॑कारा । आ᳒पां᳒यत्ग᳒र्भो᳒वृ॑णीतादेवा᳒न् । आद॑धादिन्द्रेपा᳸वा॑मानाओ᳒जाः॑ । आज॑नायत्सू᳒र्येज्यो᳒तीरि᳒न्दूः॑ ॥ ९ ॥
म ह त्त त्सो मोषुम हि षाचिश्चा का राटि। अ पांताय त्ग र्भोचिवृ णीकाच्ता दाकाई वाटान् । आ द धातिदि न्द्रेकाप व माचिना ओकाजोटअ ज नाकिय त्सूकार्येटज्योकति रिटान्दाकउ वाता। एतअ ज नाकिय त्सू र्येकिज्यो ति रि न्दूःखी ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 540 |
नोधा गौतमः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
महत्तत्सो᳒मोमाहीषा᳒श्चा॑कारा । आ᳒पां᳒यत्ग᳒र्भो᳒वृ॑णीतादेवा᳒न् । आद॑धादिन्द्रेपा᳸वा॑मानाओ᳒जाः॑ । आज॑नायत्सू᳒र्येज्यो᳒तीरि᳒न्दूः॑ ॥ ९ ॥
अ पा मी वे दू र्मषूय स्तौ हो औ हो वातूहातइश। तु रा णाखिहाशप्ल्हातहातइश। प्रा म नीचिषा ईपार ते सोणिमाफमा च्छाफाप्लहातइश। ना म स्य न्ता इषुरू प चाटिय न्तीकासफञ्चातहातहातआकच वि श न्तु शा तीचूरूकशफन्तांतहातहाखऔ हो वाशि। वातहाःटख् ॥१७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 540 |
नोधा गौतमः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
महत्तत्सो᳒मोमाहीषा᳒श्चा॑कारा । आ᳒पां᳒यत्ग᳒र्भो᳒वृ॑णीतादेवा᳒न् । आद॑धादिन्द्रेपा᳸वा॑मानाओ᳒जाः॑ । आज॑नायत्सू᳒र्येज्यो᳒तीरि᳒न्दूः॑ ॥ ९ ॥
औ हो हा अ योतुहातइश। पा वा प व स्वै नाकुवा सूटानीतऔटहोचइ हाकाईटयात। माकथ्श्च त्व इ न्दोषीस र सीकिप्र धाटान्वातन्वा औटहोचइ हाकाईटयात। बृ ध्न श्चि द्य स्यषुवा तोकाना जूटातींतऔटहोचइ हाकाईटयात। पु रूषामे ध श्चि क्त क वेकूना राटान्धातत् । औटहोचइ हाकाईटट्याखऔ हो वाशि। एतदी दि हीतिच् ॥१८॥ अ योताहा इ प वोतीहातइश। पा व स्वै नातीवा सूटानीतइ होकाइ हाकाईटयात। मां श्च त्व इ न्दोषुस र सीकिप्र धाटान्वातइ होकाइ हाकाईटयात। बृ ध्न श्चि द्य स्यषुवा तोकान जूटातींतइ होकाइ हाकाईटयात। पु रू मेषिध श्चि क्त क वेकुना राटान्धातत् । इ होकाइ हाकाईटट्याखऔ हो वाशि। एतदी दि याटिख् ॥१९॥ हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशहातओपवाशहा उ वाति। आ याचापा वाचाप व स्वैकिना व सूकिनी होकाच्इकहि याटाई होटाइ हाटाख। मांकथ्श्च त्व ई न्दोकीस र सि प्र ध न्वाकूइ होचाइ हि याटिइ होटाइ हाखा। बृ ध्नाचाश्चि द्याचास्य वा तोकिन जू ति मि होकुच्इ हि याटिइ होटाइ हाखा। हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशहातओपवाप्लहा उ वाति। पू रू मेकिध श्चि क्त क वेकुन रा न्धाकिदि होकाच्इ हि याटिइ होटाइ हाखा ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 541 |
मन्युर्वासिष्ठः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ नोधा गौतमः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥ ॥ मन्युर्वासिष्ठः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
आ᳒स॑र्जीवक्वारय्थेया᳒थाजौ᳒ । धीया᳹मानो॑क्ताप्राथामा᳹मा॑नीषा । दशस्वासा॑रोआधीसा॑नोअव्ये । मृज᳒न्ती᳒वहिंसा᳹द॑नेष्व᳒च्छा॑ ॥ १२ ॥
अ सा औभिहोत। जीकवा क्वाटार थ्या इ यापीथाश। जाखबुश। धि या औभिहोत। मा नो ताटिच्प्राकध मा मापिनीशषाख। द शा औभिहोत। स्वा सा रोटिच्धि सा नोपिआश। व्याखइश। मृ जा औभिहोत। न्ति वा न्हींटिच्साकद ना इ षूपीव च्छा बुशि। बाख ॥२१॥