| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 499 |
मेधातिथिः काण्वः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः काण्वः पवमानः सोमः गायत्री ॥
आ᳒चिक्रादत्वृषाहा᳒रीः॑ । माहा᳒न्मित्रो᳹ना ᳹द॑र्शातः । संसू᳒र्येणदिद्युते ॥ १ ॥
अचिक्र दातीदा चीकाच्क्राकदाखदचिक्रदा देप्लु। वृषाह रातीइशवा र्षाकाच्हाकराखइवृषाहरा एप्लू। महान्मि त्रोतीमा हाकान्मिकत्रोखामहान्मित्रा एप्लु। नदर्श तातीना दकार्शाकताखनदर्शता एप्लु। संसू र्यातिइशसं सूकाच्रीकयाखइसंसूर्या एप्ल। णदिद्यु तातीइशणा दीकाच्द्यूकताखइणा दाशिइद्युता बूप्ली। बाश॥ १ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 500 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
आ᳒तेदक्षं॑मायोभू᳒व॑म् । व᳒न्ही᳒मद्या᳒वृ॑णीमहे᳒ । पा᳒न्तामा᳹पू॑रूस्पृह॑म् ॥ २ ॥
आतेद क्षातीम् । मयो भूभिवातम् । वन्हिमद्यावृ णीटूमाखहाणइश। पा न्ताकामा ईटायात। पूरू स्पृटिट्हाखऔहो वाशि। उ ऊखापाश॥ २ ॥ आते दाखिक्षांशमायो भूखिवणम् । वन्हिमद्यावृ णिफूम होखाहा इशा। पा न्ताटामातईटयातपूटट्रूखऔहो वाशि। स्पृखहशम् ॥ ३ ॥ आतेदक्षम्म योफूभु वांखाहा इशा। वन्हिमद्यावृ णीफूम होखाहा इशा। पा न्तायामाटपू रूकास्पृहामी ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा॥ ४ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 501 |
उचथ्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ उचथ्य आङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
अ᳸ध्व॑र्योआ᳒द्री॑भीस्सूतं । सो᳸मं॑पावी᳒त्रा᳒आ᳒नाया । पुनाही᳹न्द्रा॑यापा᳒ता॑वे ॥ ३ ॥
अध्व र्योपिआण। द्रिभाइ स्सूभीतांतसो मंकापाखवीण। त्रा आयाना याटा। पु नाटाही न्द्राखाऔहो वाशि। यापा ताटिवेख॥ ५ ॥ अध्व र्योषिऔहोअद्री भीःतु। सूचत मौटाहोतवातइशसो मंकापाखवीण। ओइत्रा यायीना याटा। पुना हाटिट्इ न्द्राखाऔहो वाशि। एतच्याकपा ताटावेख॥ ६ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 502 |
अवत्सारः काश्यपः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अवत्सारः काश्यपः पवमानः सोमः गायत्री ॥
ता᳒रत्सा᳒मन्दीधा॑वती । धा᳸रासूतस्या᳒न्धा॑सः । ता᳒रत्सा᳒मन्दीधावती ॥ ४ ॥
तरत्स मातीन्दीतधा वायाताटइश। धा राटासूखताण। स्या न्धाटाट्साखऔहो वाशि। तारत्समन्दी धाकुव तीखी॥ ७ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 503 |
निध्रुविः काश्यपः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ निध्रुविः काश्यपः पवमानः सोमः गायत्री ॥
आ᳒पा॑वस्वा᳒साहास्री᳒णं । रा᳒यिंसो॑मासूवी᳒र्यम् । अस्मेश्रा᳒वां᳸सिधारया ॥ ५ ॥
आपव स्वाती। साचहस्रि णांटिहु वाटाइहु वाटिहोचइश। र यिंकासो माकासुवी र्यांटिहु वाटाइहु वाटिहोचइश। अ स्मैथाश्रवांसि धाकीरा याटाहु वाटाइहु वाटिहोटट्याखऔहो वाशि। ऊखपाश॥ ८ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 504 |
असितः काश्यपो देवलो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ असितः काश्यपो देवलो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
आनूप्रत्ना᳹सा॑आया᳒वाः॑ । पादन्ना᳒वी॑योअक्रमुः । रुचे᳒ज॑नान्तासूर्य॑म् ॥ ६ ॥
आनुप्र त्नाषीसआ यातिवाःत। पादन्न वीषीयोअक्र मूःची। रूचेजना न्तापुसूशहिम्मा एभि। रीखयशम् ॥ ९ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 505 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
अ॑र्षासोमा᳒धूमात्ता॑मः । आभीद्रो᳹णा॑नीरो᳒रूवात् । सी᳒दन्यो᳒नौवा᳒नेष्वा ॥ ७ ॥
आ र्षाचाइ हाशा। सोमाद्यु माटीक्ता माचाइ हाशा। आ भाचाइशइ हाचा। द्रोणानि रोटीच्रूकवाचदि हाशा। सीकदाचनि हाशा। योनौव नाटीच्इशषू वाचाइ हाशा॥ १० ॥ आ र्षाकाहातबुश। सोमद्युमक्त मोषूअभि द्रोटिणातनिरो औभिहोतरू वाटात्सीदाउ वाती। योनौ वापिनेशहिम्मा एभि। षूखवाश॥ ११ ॥ अर्षासोमाद्यु माफूक्त मोखाअर्षासो माशी। द्युमक्त मोकीअभि द्रोकिणाटहातहातइश। नी रोचारूव त्साकिइदन्यो नौटीहातहातइश। वानाइ षुटीवाखण्। ओपइ ळाशा॥ १२ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 506 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ कश्यपो मारीचः पवमानः सोमः गायत्री ॥
वृ᳒षा॑सोमाधूमंआ॑सी । वृषा᳒देवावृ᳒षाव्रा॑तः । वृषाध᳒र्मा॑णिदध्री᳒षे᳒ ॥ ८ ॥
वृषासो माती। द्यू मंचाआयसाटइश। वृषादाइ वोटुहातइशवा र्षाकाव्राखताःण। वृषाध र्माकीइटयात। णाइ दकिद्रिषाइ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा॥ १३ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 507 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ कश्यपो मारीचः पवमानः सोमः गायत्री ॥
ईषे᳒पा॑वा᳸स्वाधा᳒रा॑या । मृज्या᳒मा॑नोमानीषी᳒भिः॑ । इ᳸न्दो॑रूचा᳒भीगा᳒ईहि ॥ ९ ॥
इषेप वाती। स्वधार यौकीहोवा हाखिऔहो वाशि। मृज्यमा नोकीमनीषी भीःटीख्। इ न्दोचारूकचाफभिगा औशिहोवा हाखिऔहो वाशि। उपई(किहीख॥ १४ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 508 |
असितः काश्यपो देवलो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ असितः काश्यपो देवलो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
मन्द्राया॑सोमाधा᳒रा॑य । वृषा॑पवस्वदे᳒वा᳒युः । अव्यावा᳒रे॑भिरास्मायुः ॥ १० ॥
मन्द्रया सोती। माधार याषीवृष पाटिवातच्। स्वाकदाइ वाटियूःत। अव्या वाटिट्राखऔहो वाशि। भिरस्म यूःतीच्॥ १५ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 509 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः गायत्री ॥
आया᳒सोमसूकृत्या᳒या । माहा᳒न्सन्नाभ्या॑वर्धथाः । म᳸न्दा॑नाइ॑द्वृषायसे ॥ ११ ॥
आ याणाफ्सोखमसूकृत्य याशु। माहान्सन्नाभ्य वाटूर्द्धाखथाःण। मायन्दाटनायईटद्वृषा याखि। सात्रइश॥ १६ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 510 |
जमदग्निर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ जमदग्निर्भार्गवः पवमानः सोमः गायत्री ॥
आया᳒वीचर्षणीर्हितः᳒ । पावा॑मानस्साचे॑तति । हिन्वाना᳹आ᳸प्यंबृहात् ॥ १२ ॥
आखबुहौहोवा हाषुअयावि चाशी। र्षणाइ र्हाटीइ ताःखा। आखबुहौहोवा हाषुइपवमा नाःशु। साचाइ ताटीताखइश। आखबुहौहोवा हाषुइहिन्वान याशु। पि यौटाहौहा होखिबाप्लबृ हाप्लात् । हा इशा॥ १७ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अयास्य आङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
प्राणा॑इन्दोमाहेतू᳒नाः॑ । ऊर्म्मि॑न्नाबिभ्रादर्ष॑सि । आभिदेवं᳒आयास्याः॑ ॥ १३ ॥
प्रणइ न्दोफीऐहीऐ हीखीयाश। माहेतुन ऐटुही ऐटहीटयात। ऊकर्म्मिन्नबि भ्रषीदर्षसी ऐटूऐहीऐ हीखीयाश। आभाइ दाटीट्इ वंखाऔहो वाशि। आ याटास्याःख॥ १८ ॥ प्रणइ न्दोफीइ याखाईखयाश। माहेतुनइ याटूईटयात। ऊकर्म्मिन्नबि भ्रषीदर्षसी याटीईटयात। आभाइ दाटीइ वंखाऔहो वाशि। एतच्आकयाटस्याःख॥ १९ ॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ आमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
अपध्नन्पा॑वाते᳒मृधाः॑ । आ᳒प᳸सो᳒मोआ᳒राब्णः᳒ । गच्छन्निन्द्रा॑स्यनिष्कृतम् ॥ १४ ॥
हो ईखायाप्लहो ईखायाईयाहा इशु। अप घ्नाटिन्पाखहो ईखायाप्लहो ईखायाईयाहा इशु। वाताइ माटीट्र्द्धाखऔहो वाशि। अप सोकिमोअ राटिवि ण्णाःखाहो ईखायाप्लहो ईखायाईयाहा इशु। गच्छ न्नाटिइ न्द्राखाहो ईखायाप्लहो ईखायाईयाहा इशु। स्यानाइ ष्काटीट्र्क्ताखऔहो वाशि। ईख॥ २० ॥