| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 542 |
कण्वो घौरः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ कण्वो घौरः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
पूरो᳒जी॑तीवोअ᳒न्धासः । सूता᳒या॑मादयित्ना᳒वे । आपश्वा᳒नंश्नथिष्टना । साखा॑योदीर्घाजिठ॑ह्व्यम् ॥ १ ॥
पु रो जि तीती। वो अ न्धाखिसाःण। सू ता य माटीद याताआ उ वा एभि। त्नाखवेश। आ प श्वा नंटीश्न थाताआ उ वा एभि। ष्टाखनाश। सा खा यो दीटीर्घ जाताआ उ वाटि। ह्वीखयशम् ॥१॥ पू रो जि तीती। वोतआ न्धापासाःश। सू ताकाच्याकमाटऊटहो वाथाऊट। दातया इ त्नापिवेश। आचप श्वाथानाटऊटहो वाथाऊट। श्नातथा इ ष्टापिनाश। साचखा योथादाटऊटहो वाथाऊट। र्घाटट्जाखऔ हो वाशि। एतह्वी याटाख्म् ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 542 |
कण्वो घौरः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
पूरो᳒जी॑तीवोअ᳒न्धासः । सूता᳒या॑मादयित्ना᳒वे । आपश्वा᳒नंश्नथिष्टना । साखा॑योदीर्घाजिठ॑ह्व्यम् ॥ १ ॥
पु रो हातिहा बु जाखिइ तीणा। वोतआ औकाहो अ न्धाखिसाःण। सू ताचाऔकहोखया मा हा ओ वाशु। दाचइ त्ना वाकिऊकपाख। आ प श्वा नं श्न थायूइ ष्ठापानाश। सा खाचाऔकहोखयो दा हा ओ वाशु। र्घाकजि ह्व्य मूटिपाख ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 542 |
कण्वो घौरः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
पूरो᳒जी॑तीवोअ᳒न्धासः । सूता᳒या॑मादयित्ना᳒वे । आपश्वा᳒नंश्नथिष्टना । साखा॑योदीर्घाजिठ॑ह्व्यम् ॥ १ ॥
पु रो जि ती वोषुअ न्ध स उ वातुहातइश। सू ता य मा दषुइ त्न व उ वाटूहोचआ प श्वा नंषीश्न थि ष्ठ न उ वाटूहोचइश। साचखा योथादा इ र्घाकिजि ह्वाखायात्रम् । सू वृ क्ति भीकीच्न्नृकमा द नं भ रेटुषु वाताच् ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 542 |
कण्वो घौरः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
पूरो᳒जी॑तीवोअ᳒न्धासः । सूता᳒या॑मादयित्ना᳒वे । आपश्वा᳒नंश्नथिष्टना । साखा॑योदीर्घाजिठ॑ह्व्यम् ॥ १ ॥
पू रोचाजीयतीपवोप्लअ न्धा स एखीहि याणा। सू ता य मा दाकुइ त्न वाटिए हि याटि। आ प श्वाकिनं श्नापाथीशष्टातनात। ऐकहाटए हि याटि। स खाकायो दा इ र्घापीजीशह्वाखयाप्लम् । हा इशा ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 542 |
कण्वो घौरः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
पूरो᳒जी॑तीवोअ᳒न्धासः । सूता᳒या॑मादयित्ना᳒वे । आपश्वा᳒नंश्नथिष्टना । साखा॑योदीर्घाजिठ॑ह्व्यम् ॥ १ ॥
पु रो जि तीषीव या ओ न्धातूसाःत। सू ता य मा दापुयाशहि माटाट्। त्न वेटाच्आ प श्वा नंकीश्न धि ष्ट नाती। सा खापाउ वाशा। योटदी र्घाटाजीतह्वीकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 543 |
पराशरः शाक्त्यः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ पराशरः शाक्त्यः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
आयंपूषा᳒रायि᳒र्भागाः᳒ । सोमाः॑पूनानोअ॑र्ष॑ति । पाति॑र्वि᳹श्वा॑स्याभू᳒म॑नः । व्यख्यद्रोद॑सीऊभे ॥ २ ॥
अ यंकापू षौ हो इ राकुयि र्भ गाःचि। सो मः पु नातीनो आटार्षाख। तात्रइश। पा तिकार्वि श्वौ हो स्याकीभूचम नाःशा। व्य ख्य द्रोतिदा सीटाऊख। भात्रइश ॥७॥ अ यं पू षाषीअ यं पू षातू। राकयि र्भ गाचिस्सो माःथापू नाटानोकअथर्ष ताचाइश। पा ति र्वाचिइ श्वाटाओ स्या भूयिमा नाःटा। ओ इ व्य ख्याटीद्रोत। दा सीकाऊ भा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥ आ यंचापूकषाफप्ल्हो इ र यिखीर्भ गा एप्लि। सोतमः पु नाटिन याखाणफप्ल। र्षाखतिश। पा ति र्विचिश्व स्य भू म नाःटुख। व्य ख्याटाद्रोत। दा सी उटिभाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 544 |
प्रस्कण्वः काण्वः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ प्रस्कण्वः काण्वः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
आह॑रीयातायाधृ᳒ष्णावे । धा᳒नु॑ष्टन्वन्तीपौंठ॑स्यम् । शु᳒क्रावीय्यन्त्या᳒सू᳒रायानिर्णीजे । वी॑पा᳒मग्रे᳒माहीयू᳒वाः॑ ॥ ३ ॥
आ हाथाआपवाण। री याकाताकय धृ ष्ण वेटीध नूकाओपवाण। ष्ट न्वकाच्न्ती पौं स्यंकिशु क्राताओपवाण। वि य न्त्य सु राटुय निचार्न्नि जेटावि पांताओपवाण। अ ग्रेचाम हीटायु वाःटाख् ॥१०॥ हातहातआ ह र्या ताकीयाखधृशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। ष्णाखवेश। हातहातइ धा नु ष्टा न्वकुन्तीखपौःशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। सीखयशम् । हातहातइ शु क्रा वि यकुन्ता य सु राटीयाखनीशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। र्न्नीखजेश। हातहातइ वी पाकिमा ग्राटाइ माखाहीशप्ल्हातहाखऔ हो वाशि। यूखवाःप्ल ॥११॥ आ ह र्य ता यषुधृ ष्ण वा यातु। धा नूचाष्टायन्वाटती पाकापुं सायायांट। शु क्रा वि यकीन्ता य सु राकीया नीकार्न्नाखइ जाणाइश। वी पाचामायग्राटइश। ओ इ मापिहीशयूखवोप्ल। हा इशा ॥१२॥ आफह रीणाया ताप्लाया धृफाष्णा वेखाध नू ष्ट न्वाशीन् । ति पातापुं स्यंथाशु क्रा वि यकीन्ता य सु राकीय ना उ वाशी। र्न्नीखजेश। वा इ वांटिहातआ ग्रेटाहातइश। मा हीचायूटवाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 545 |
कुत्स आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ कुत्स आङ्गिरसः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
पा᳒रित्यं᳹हा॑रीयातंहारीम् । बभ्रं᳒पु॑नन्तीवा᳒रे॑ण । यो᳒देवान्वि᳒श्वंइत्पारी॑ । मा᳒दे॑नासह᳒गच्छा॑ति ॥ ४ ॥
प रि त्यं ह र्य तंचूह रिंकापापरि त्यं औ होप्लीर्य तं ह राङीइशम् । ब भ्रं पु न न्ति वाकूरेथच्णा बापाअ भ्रं पु नौ हौप्लन्ती वा रेङिणाश। यो दे वा न्वि श्वंषुइ त्पाचारीकयोपदे वा न्वौ होप्लीइ श्वं इ त्प राङुइश। म दे नषिस ह ग च्छाचीतीकमापदे न सौ होप्लीह ग च्छा तोप्ली। हा इशा ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 546 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
॥ कश्यपो मारीचः पवमानः सोमः त्रिष्टुप् ॥
सूतासोमा᳒धूमक्तामः । सोमाइ᳒न्द्रा॑याम᳒न्दीनाः । पावी᳒त्रवन्तोअक्षरन् । देवा᳒न्ग᳒च्छन्तूवोमा᳒दाः॑ ॥ ५ ॥
सु ता सो माती। धू माताक्त माःतासो मा इकिन्द्रातय माताएतन्दि नातायाख। प वाचाइश। त्र वातान्त याताएतक्ष रकान्नाखदा इ वाचिन् । ग च्छातान्तु वाताएतम दातायाख ॥१५॥ सु ता सो मषीधु म क्त माःती। सो माटाइ न्द्राटाय माखाणफप्ल्। न्दीखनाःप्ल। पा वि त्र वाटीन्तो अ क्ष र न्दे वातून् । ग च्छाचान्तु वो माटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 546 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
सूतासोमा᳒धूमक्तामः । सोमाइ᳒न्द्रा॑याम᳒न्दीनाः । पावी᳒त्रवन्तोअक्षरन् । देवा᳒न्ग᳒च्छन्तूवोमा᳒दाः॑ ॥ ५ ॥
सु ता सो माखाधू मा क्ता माःप्ली। सोकमा इ न्द्रा य मकुन्दी नाःकापा वाटाउ वोखावाश। त्र व न्तो अ क्ष रषून्दे वातान् । ग च्छाचान्तु वो माटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥ सु ता सो म धू मषूक्त म स्सो मा इ न्द्रातू। य म न्दी नाः पायुवीटच्त्रायवाटन्तो अ क्ष र न्दाकुइ वा न्ग च्छाकीउ वाशा। तूखवाःप्ल। म दा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥ सु ता सो मषीधु म क्त म स्सो मातूहातबुश। इ न्द्राथायाचमायन्दि नाःटा। इ न्द्राथाहो य माटिन्दाखइ नाःणा। पा वि त्र वाकीन्तोटअ क्षा राभिन् । त्र वाताहो न्तोटाअ क्षाखारणन् । दे वा न्ग च्छचीन्तुकवोयमा दाःटा। दे वाथान्हो इ ग च्छोखीहाणइश। तूटट्वाखऔ हो वाशि। म दातायाटख् ॥१९॥ सु ता सोषिम धु म क्त मातुएत। सो मा इ न्द्राचीयाकमायन्दि नाटादा इ नाःटि। पा वि त्र वाकीन्तोटअ क्ष राटिन्क्षा राटा। दे वा न्ग च्छचीन्तुकवोयमा दाटामा दाःटा। दे वाथान्हो इ ग च्छोपीहाणइश। तूटट्वाखऔ हो वाशि। मा दाताईटख् ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 546 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
सूतासोमा᳒धूमक्तामः । सोमाइ᳒न्द्रा॑याम᳒न्दीनाः । पावी᳒त्रवन्तोअक्षरन् । देवा᳒न्ग᳒च्छन्तूवोमा᳒दाः॑ ॥ ५ ॥
सु ता सो माटीहा धुचाम क्ता माःटि। सो मा इ न्द्राटीहा य माचिन्दा इ नाःटि। पा वि त्र वाटीहाकन्तोथअ क्षा राटिन् । न्दे वा न्ग च्छाटीहातन्तु वोप्लाहोपबाप्लमा दोप्ला। हा इशा ॥२१॥ सू ताणासोचमाकफ्हातहा धूचाम क्ता माःपि। सो माफाइ न्द्राफाप्ल्हातहा य मचिन्दा इ नाःपि। पा वीणात्रा वाफाप्ल्हातहातन्तोथअ क्ष रापि। न्दे वाफान्ग च्छाफाप्ल्हातहातन्तू वोप्लाहोखबाप्लमा दोप्ला। हा इशा ॥२२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 547 |
अन्भीगुः श्यावाश्विः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ अन्भीगुः श्यावाश्विः पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
सोमाःपवन्ताइन्दा॑वः । अ᳒स्मा᳒भ्य॑ङ्गातुवित्ता॑मः । मित्रा᳒स्वाना᳹आ॑रेपा᳒साः॑ । स्वाध्या᳒ठ॑स्व᳒र्वीदः॑ ॥ ६ ॥
हा बु सो माःती। प वकान्दाटइ न्दा वाभिउ वाताहा उ वाति। अ स्माकाभ्य ङ्गाथातु वि क्ता माभीउ वाताहा उ वाति। मि त्राकास्वा नाथाआटरे पा साभिउ वाताहा उ वाति। स्वाफधि यातास्सूपवाशर्वाखइ दोप्ला। हा इशा ॥२३॥ सो माःफाप व न्त ईखीन्द वाःशा। अ स्मा भ्य ङ्गाकीतु वि क्ताकिमाःख। मा इ त्राटिउ वोखावाश। स्वाकना अ रेकिप साःटाख्। स्वातच्धि याःचा। सू व र्वाटिइ दाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥२४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 548 |
नहुशो मानवः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ नहुषो मानवः पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
आ᳒भी᳒नोवाजसा᳒तामं । रायीमऋ॑षाशातस्पृह॑म् । इ᳸न्दो॑साहास्रा॑भर्णा॑सं । तूविद्युम्नंवीभासा᳒ह॑म् ॥ ७ ॥
अ भि नो वाती। जाटट्साखऔ हो वाशि। ताखमशम् । र यि माटिर्ष शाकात स्पृ हाकिमि न्दो स ह स्र भाटूहो र्ण साटिम् । तु वि द्यु म्नं वि भाटूहो एटा। स ह मोखिइ ळाशा ॥२५॥ अ भि नो वाती। जा सा त मंकीरा यीचाम र्षाकाउ वाकाओटहातइश। श त स्पृचिहा मि न्दोटिच्साकहा उ वाटिओटहातइश। स्र भ र्ण सषीन्तु वा इ द्युटीट्म्नाखऔ हो वाशि। वि भातासाटहाखम् ॥२६॥ अ भीटाहो इ नोकिवा जा साशिहो ताखामशम् । र यिंटाहोकअचर्ष शाखाताशहो स्पृखाहशम् । इ न्दोटाहोचइशस ह स्राखिभाशहो र्णाखासशम् । तु वाटाहो इ द्युकिम्नं वि भा हो साखु। हात्रम् ॥२७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 548 |
नहुशो मानवः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
आ᳒भी᳒नोवाजसा᳒तामं । रायीमऋ॑षाशातस्पृह॑म् । इ᳸न्दो॑साहास्रा॑भर्णा॑सं । तूविद्युम्नंवीभासा᳒ह॑म् ॥ ७ ॥
आ भि नो वाकीओपज साप्लात माताम् । रा यि म र्षाकीओपश ताप्लास्पृ हाताम् । इकन्दो स हाकिओपस्र भाप्लार्ण साताम् । तू वा इ द्यु म्नाकुओंपवि भा स हाप्ली। बुश। बाश ॥२८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 548 |
नहुशो मानवः |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
आ᳒भी᳒नोवाजसा᳒तामं । रायीमऋ॑षाशातस्पृह॑म् । इ᳸न्दो॑साहास्रा॑भर्णा॑सं । तूविद्युम्नंवीभासा᳒ह॑म् ॥ ७ ॥
अ भि नो वौ होतुज सा त मातीम् । र यि म र्षौ होतुश त स्पृ हातीम् । इ न्दो स हौ होकुस्र भ र्णा सातीम् । तु वि द्यु म्नौ होकुवि भा स हातीम् । स ह न्तु वि द्यु म्नंषूवि भा हाप्लिउ वाशा। सा हाचामेटख् ॥२९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 549 |
रेभसूनू काश्यपौ |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ रैभसूनू काश्यपौ पवमानः सोमः बृहती ॥
आभी᳒ना॑वन्तेअद्रू᳒हाः । प्रीय᳹मिन्द्रा॑स्यका᳒म्यं॑ । वत्सन्नपू᳒र्वाआ᳒यूनि । जातं᳒रिहन्तीमा॑ताराः ॥ ८ ॥
आखभीण। ओ इषान व न्ता या दृयुहाःट। ओ इ प्रि यषीमि न्द्र स्य का मायुमा याटम् । ओ इ व त्स न्नषुपू र्व आ यूयीनीट। ओ इ जा तंषीरि ह न्ति मोपीबाप्ल। ताखराःप्ल ॥३०॥ आ भीफान व न्त याखीदृ हाःशा। प्री यातामि न्द्रातास्या काकामाखयाणम् । व त्स न्न पूतीर्वा आकायूखनीण। जा तंकाहो इ रि हाकीहोकथ्न्ती मा ताटिराःखण्। ओपइ ळाशा ॥३१॥ अ भि न व न्तषुअ द्रु हः ओतीहा इशा। प्रि य मि न्द्र स्य काषूमि य मोतिहा इशा। व त्स न्न पूतूर्वा यु न्यौ हो वातुहातइश। जा तं रि हाकीउ वाशा। न्तीखमाश। ता रा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 550 |
अम्बरीषो वार्षागिरः ऋजिष्वा भारद्वाजश्च |
पवमानः सोमः |
अनुष्टुप् |
॥ अम्बरीषो वार्षागिरः ऋजिष्वा भारद्वाजश्च पवमानः सोमः अनुष्टुप् ॥
प्रासुन्वानाय᳒आ᳒न्धा॑सः । मर्क्तोना᳹वा॑ष्टात᳒द्वा᳒चाः॑ । आपश्वा᳒ना॑माराधा᳒सं॑ । हाता᳒माख᳒न्नाभ्र᳒ङ्गवः॑ ॥ ९ ॥
प्रा सु न्वापिना य आ न्धा साःशु। मा र्क्तोथान वाटाष्ट त द्वाखिचाःण। आ प श्वाषिन म रा धातीसातम् । हा ता माटिघ न्न भ्र ङ्गाखी। वाःत्र ॥३३॥