| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 575 |
द्वितः आप्त्यः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ द्वित आप्त्यः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ (शिखण्डिम्यावस्परसौ काश्यपौ वा) पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
पा᳸वा॑स्वामा᳒धू॑मक्तमः । इन्द्रा॑यसोमक्रातूवि᳹क्ता॑मोमा᳒दाः॑ । मा᳒हिद्युक्षा᳒तामोमा᳒दाः॑ ॥ १ ॥
पा वाता। स्वा मा धु मा क्ता माटूउ वोखावाश। ईखन्द्राश। य सो माकिक्राकतूकवि क्ता माभिमा दाटाओ इ मा हाटीउ वोखावाश। द्यु क्षाचात मोतामा दाःटा ॥१॥ प व स्व मा एतु। धु माकाक्त मा इकिन्द्रा य सोतिओ औकाहोतवात। मा क्रा तू वीटीत्तातओ औकाहोखत मोखामा दाःता। म हा इ द्यूटीट्क्षाखऔ हो वाशि। त मोतामाटदाःख ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 575 |
द्वितः आप्त्यः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
पा᳸वा॑स्वामा᳒धू॑मक्तमः । इन्द्रा॑यसोमक्रातूवि᳹क्ता॑मोमा᳒दाः॑ । मा᳒हिद्युक्षा᳒तामोमा᳒दाः॑ ॥ १ ॥
प व स्व म धु माषूइ हाता। क्ता मा इ न्द्रा यषुसो मः कृ तु वीकुक्त मो माटिदा इ हाति। म हा इ द्यूटीक्षा इ हाति। ता मो माटिदाःखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥ पाखव स्व म धू माप्लुक्ताङमाःश। आ इ न्द्रा य सो माटूक्राकतु वा इ त्तापीमोशमातदाःत। मा हि द्यु क्षा तापुमोशमाखदोप्ल। हा इशा ॥४॥ पा वा स्वापिम धूप्लाम क्ताखामाःण। इ न्द्रा य सो माटुचक्राकतु वा इ क्तापीमोशमातदाःत। म हा इ द्यु क्षा तापूमोशमाखदोप्ल। हा इशा ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 576 |
पर्वतनारदौ काण्वौ |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ द्वित आप्त्यः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ (शिखण्डिम्यावस्परसौ काश्यपौ वा) पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
आभि᳒द्युम्नं᳒बृहद्याशाः । ई᳒ळा॑स्पतेदीदीही᳒देवादेवायूं । वीको᳒शं॑माध्यामंयू॑वा ॥ २ ॥
अ भा इ द्युकीम्नाखम्बृ हा द्याकिशाःफ। इ ळा स्प तेकीदि दी हि देखीवाशदे वाकायूफम् । वी को शकिम्म द्ध्य मांकि। यूखवात्र ॥६॥ अ भ्ये द्यू म्नातीम् । बृ हाचाद्यायशाःट। इ ळा स्प ताषीइ दि दीकिहाखइ देशावा दा इ वाखीयुंशवि कौ वा उ वोखुवाण। श र्म्माकाद्ध्या मांताआ उ वाटि। यूखवाश ॥७॥ अ भि द्यु म्नषीम्बृ ह दि हाती। या शा इ ळा स्प तेषूदि दी हि देकीवा दे वाटियूतम् । वि कौ हो वातीहातइश। श र्म्माटाच्द्ध्या मंकायू वाकाइ ळा भाखिण्। ओपइ ळाशा ॥८॥ अ भि द्यु म्न म्बृतुह द्य शाःति। ईकळा स्प ता इ दि दीकूहि दा इ वाकीदे व यूचिम् । वी को श म्म द्ध्य मांटूच्होययूपवा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 577 |
पर्वतनारदौ काण्वौ |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ द्वित आप्त्यः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ पवमानः सोमः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतनारदौ काण्वौ (शिखण्डिम्यावस्परसौ काश्यपौ वा) पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
आ᳒सोतापा᳒री॑षिञ्चता । अश्व᳒न्न᳹स्तो॑मामप्तूरं॑राजस्तू॑रं । वनप्राक्षा॑मूतप्रूतम् ॥ ३ ॥
आ सो ता पाती। राटइ षाखाऔ हो वाशि। ञ्चाखताश। अ श्वथान्न स्तोकाम म प्तू रंकीर ज स्तुकिर मो एभिव नाताओ एटाप्र क्षाखाऔ हो वाशि। उ दाताप्रूटताखम् ॥१०॥ आ सो ता पाती। रि षिकाञ्च ताटाऊटहोकवाथऊट। अ श्वथान्न स्तोकाम म प्तु राटीऊटहोकवाथऊट। राचज स्तु राटिऊटहोकवाथऊट। वा न प्राचिक्षाटऊटहोकवाथऊट। उ दाताप्रूटताखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥११॥ आ सो ताटिपात। रि षा इ ञ्च ताटुअ श्व न्न स्तो म माकूप्तूखरंशर ज स्तूखिरं व नो हा बुशु। प्रा क्षा मूपिदाशहि म्मा एभि। प्रूखतशम् ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 577 |
पर्वतनारदौ काण्वौ |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
आ᳒सोतापा᳒री॑षिञ्चता । अश्व᳒न्न᳹स्तो॑मामप्तूरं॑राजस्तू॑रं । वनप्राक्षा॑मूतप्रूतम् ॥ ३ ॥
आ सो ता पातीरी षि ञ्च ताती। आ श्वाटाऔ होखावाश। न स्तोकाम म प्तु रंकीर ज स्तु रंषीहो इ व नाटीऔ होखावाश। प्र क्षाकामु दाताप्रूटताखम् ॥१३॥ आ सोखाऔ होताता पा रा इ षीयुञ्चा ताटाआ श्व न्न स्तो म माकूप्तूखरशम् । र ज स्तूखिरं व नो हा बुशु। प्रा क्षाकामु दाताआ उ वाटि। प्रूखतशम् ॥१४॥ आ सोणाताचपाफप्ल्हो रि षीखिञ्च ता एप्लि। आ श्वचान्न स्तोथाच्माचमायप्तू रटाम् । रा ज स्तू रंकीवाचनायप्रा क्षांटा। ऊपदांशप्रूखतांप्ल। हा इशा ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 578 |
अग्निश्चाक्षुषः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ अग्निश्चाक्षुषः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
एता᳒मुत्य᳹म्मा॑दच्यू᳒तं॑ । साहा᳒स्रा॑धारंवृषाभ᳹न्दी॑वोदूहं॑ । वि᳒श्वा॑वा᳹सू॑निबिभ्रा॑तम् ॥ ४ ॥
ए ताताम् । उ त्य म्म दाटीश्चूखतणम् । सा हा स्रा धाकीरं वा र्षा भांटीदी वोटादूखहणम् । वि श्वाटाहो इ हो इ वाटुसूत। नाटइ बाखाऔ हो वाशि। भ्राखतशम् ॥१६॥ ए त मू त्यतीम् । म दाताआ उ वाटि। च्यूखतशम् । सा हा स्र धाकीरं वृ षाकिभ न्दि वोटिदूकहांखवा इ श्वा व सूशु। नि बाकाआ उ वा एभी। भ्राखतशम् ॥१७॥ ए त मु त्य मेकुम दाता। च्यू तां स ह स्र धाषूरं वृ षा भकीन्दी वो दूटिहातम् । वा इ श्वाटिवा सुटाच्नीकबोपबाप्लभ्रा तांप्ला। हा इशा ॥१८॥ ए त मु त्य मोकुहा इषाम द च्यु त मोतुहातइश। सा हा स्राखिधाशरं वा र्षाखिभणम् । दी वो दु ह मोखुहाणइश। वि श्वाटाहो इ वाटिसूत। नाटइ बाखाऔ हो वाशि। भ्राखतशम् ॥१९॥ ए ताफामु त्य म्म दाखीच्यु तशाम् । सा हा स्र धाकीरं वृ षा भटीन्दी वोटाच्दू ह मोचिइश। वि श्वा व सू नि बाटूच्होकच्इ भ्राकात माताआ उ वाटि। उ ऊखापाश ॥२०॥ ए ताखामु त्य म्म दाप्लीच्यू तशाम् । सा हा स्र धाटीरां वृ षाचिभ न्दि वोटिओ वाका। दूपहाशम् । वि श्वा व सू नि बाटूआ एटा। भ्रापता मे हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥२१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 579 |
द्वितः आप्त्यः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
॥ द्वित आप्त्यः पवमानः सोमः उष्णिक् ॥
सा᳸सुन्वोयोवा᳒सू॑नां । यो᳒राया᳹मानेता᳒याइळा॑नां । सो᳒मोय᳒स्सू॑क्षीतीना᳒म् ॥ ५ ॥
सा सूता। न्वे योकावा सूटानातम् । यो राटाया मा नेचिताथया इ ळाटिनातम् । सोटमाःत। या स्सूकाक्षी तापाआ इ नांप्लि। हा इशा ॥२२॥ स सु हातिबुश। न्वे यो वा सू नांटुहातबुश। यो राचाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीहातबुश। सो मो या स्सूटीहातबुश। क्षि तीकाना मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 579 |
द्वितः आप्त्यः |
पवमानः सोमः |
उष्णिक् |
सा᳸सुन्वोयोवा᳒सू॑नां । यो᳒राया᳹मानेता᳒याइळा॑नां । सो᳒मोय᳒स्सू॑क्षीतीना᳒म् ॥ ५ ॥
स स्वे सा सूती। न्वे योकावा साताआ उ वाटि। नांख। यो राटाया मा नेचिताथया इ ळा नांटीसो मौ वा उ वोखुवाण। या स्सूकाक्षि ताताआ उ वा एभि। नाखम् ॥२४॥ स सू न्वे या एषुवा सूता। नाकयो रायायापमा नेकाताथया इ ळाटिनांखसो माःता। या स्सूकाक्षि ताखाणफप्ल्इश। नाखम् ॥२५॥ सा सू न्वेपियो व सू नाशीम् । योकराययापमा नेकाताथया इ ळापिनात्रम् । सो मोटाय स्सु क्षि तीकीनाखम् । सोटमाःख ॥२६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 580 |
गौरिवीतिः शाक्त्यः |
पवमानः सोमः |
ककुप् |
॥ गौरवीतिः शाक्स्यः पवमानः सोमः ककुप ॥
त्वंह्यांट्ट्यगदै॑व्या । पावा॑मानाजनी॑मानीधूमा᳒क्तामः । अ᳒मृता॑त्वा᳹या॑घो᳒षा᳒यान् ॥ ६ ॥
त्वं हि यातिम् । ग दा इ व्यषीप व मा न ज निचूमाकच्नि द्युकामाटक्ता माःटा। आ माटार्क्ता त्वाटायाकघोपबाप्लषा याप्ला। न्हा इशा ॥२७॥ त्वं हि यातिम् । ग दा इ व्यषीप व माकिनाकहो वाटाहातइश। ज नि माटिनीखद्यू मापार्क्तातमाःत। आ मा र्क्ताटिट्त्वाखऔ हो वाशि। य घोकाषा याटाख्न् ॥२८॥ त्वं ह्यं ग दाती। इ व्य प व मा नषूज नि माकिनि द्यू माटिक्ता माःता। आ मा र्क्ताटित्वातच्याकघोपबाप्लषा याप्लान् । हा इशा ॥२९॥ त्वं हा यांखिगा दा इ व्याप्लीम् । पा व माटिनाकथ्ज नि माटिच्नाकयेपद्यू मापाक्तातमाःत। आ मा र्क्ताभित्वातच्। याकघोपबाप्लषा याप्लान् । हा इशा ॥३०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 581 |
ऊर्ध्वसद्मा आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
ककुप् |
॥ ऊर्ध्वसद्मा आङ्गिरसः पवमानः सोमः ककुप ॥
एषस्या᳒धा᳒रा॑यासूतः᳒ । अव्यावा᳒रे॑भिःपवतेमादि॑न्तामः । क्रीळ॑न्नूर्मिरापा᳒मी॑वा ॥ ७ ॥
एकष स्य धा रा यायुसू ताःटा। अ व्याथाच्वाकरा इ भा इःषीप व ते म दिकुन्ता माःचा। क्री ळा न्नूटिर्म्मातइःश। आपपाशमाखइ वोप्ला। हा इशा ॥३१॥ एकषा स्यापधा र या सु ताःशु। अ व्या होभिइशवा रे भिःषिप व ते म दीयुन्ता माःटा। क्री ळाटाच्न्होयऊटर्म्मीःत। अ पाचामीकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३२॥ ए ष स्य धाफीर या सु ताःकी। अ व्याथाच्वाकरा इ भिः प वाकुतापइ म दीशिन्त माःका। क्री ळा न्नू र्म्मीषीर पा उ वाकीओपबाप्लमा इ वोप्लि। हा इशा ॥३३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 581 |
ऊर्ध्वसद्मा आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
ककुप् |
एषस्या᳒धा᳒रा॑यासूतः᳒ । अव्यावा᳒रे॑भिःपवतेमादि॑न्तामः । क्रीळ॑न्नूर्मिरापा᳒मी॑वा ॥ ७ ॥
ए षाःता। स्य धाकार याताआ उ वाटि। सूखताःप्ल। अ व्या वा रेषीभिः प व तेकीच्माकदि न्ताटामाःख। क्री ळा न्नूयिर्म्मीटर पाताहिंपबाश। मा इ वाटिख् ॥३४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 581 |
ऊर्ध्वसद्मा आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
ककुप् |
एषस्या᳒धा᳒रा॑यासूतः᳒ । अव्यावा᳒रे॑भिःपवतेमादि॑न्तामः । क्रीळ॑न्नूर्मिरापा᳒मी॑वा ॥ ७ ॥
ए षाताहातबुश। स्य धाकार याताआ उ वाटि। सूखताःप्ल। अ व्या वा रेषीभिः प व तेकीच्माकदि न्ता माःभि। क्री ळातान्हातबुश। ऊ र्म्मीकार पाताआ उ वाटि। मीखवाश। ॥३५॥ या उ स्रि याषीअ पि याकिआचन्ता र श्मा नीखी। नि र्गाताहातबुश। आ क्रकान्त दोताआ उ वाटि। जाखसाश। आ भि वृ जषीन्त न्ती षेकीग व्य म श्वि याटुख्म् । व र्म्मीताहातबुश। वा धृकाष्ण वाताआ उ वाटि। रूखजाश ॥३६॥