| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अयास्य आङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सोती। माटट्धाखऔ हो वाशि। राखयाश। आ पो व सातीनोकअथर्ष स्या रा त्नाटीधाःत। यो ना इ माटीर्क्तातस्याटट्साखऔ हो वाशि। दाखसीश। उ त्सो देभिवोतहाटइ राखाऔ हो वाशि। ण्याखयाश ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सो मषुधा र याति। आ पो व साकीनोकअथर्ष स्योटाहातओटहातइश। अ राकात्ना धा योकिनि मृ त स्याचीसीथद स्योटाहातओटहातइश। उ त्सोचादायइ वाटाओटहातओटहातइश। हि र ण्याटियाखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥ पु ना न स्सोफीम धा र याकीआ पोटावा साटानोतअ र्ष सीचि। अ राटात्ना धाटायो नीथामा र्क्ताटास्यातसी द सीचि। ऊ त्सोटादा इ वोटिचहीकर ण्याटायाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सो मषुधा र या पो व सोतूवात। नो अ र्षकिस्या राकात्ना धा उ वाकीओटहातइश। योचनि मृ ता स्यचीसीथद स्यु त्सो देटीवा उ वाकिओटहातइश। ही र ण्याटियाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
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| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सोषीम धा होतिर याता। आ पो व साकीना या होटिर्षा सीटा। आ र त्न धा योषुनि मृ ताकिस्या सा होटिइ दा सीटि। ऊ त्सोटाच्होयइ दाटाइ वोता। हीकरोपबाप्लण्या योप्ला। हा इशा ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
इ याटाईटयात। पू ना न स्सोटीम धा राखियाण। आ पो व साकीनो अ र्षाटिसीत। आ र त्न धा योषुनि मृ ताकिस्या सि दाटिसीत। ऊकत्सो देथावो हाटाट्इ राखाऔ हो वाशि। ण्यातयाटख् ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
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| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सो म धाषूर या ओ हा ओ हातूए औटाहो औटाहोतवात। आ पो व साकीनोकअथर्ष स्योटाहातओटहातए औटाहो औटाहोतवात। आ राकात्ना धा योकिनि मृ ता स्याचीसीथद स्योटाहातओटहातए औटाहो औटाहोतवात। उ त्सोचादायइ वा ओटिहातओटहातए औटाहो औटाहोतवात। ही र ण्याटिट्याखऔ हो वाशि। स दोतावीटशाःख ॥७॥
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ऋषिः (Rishi) |
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| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
ओटहोयवा ओटाओटहोयवा ओटाओटहोकच्वाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। पु ना न स्सोकीम धा र याकीआ पो व साकीनोकअथर्ष स्या राटित्ना धा योकिनि मृकात स्याचासीथद स्यु त्सो देटीवाःच। ओटहोयवा ओटाओटहोयवा ओटाओटहोकच्वाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। एतहि रकाण्य याटाख् ॥८॥ ओतच्होचवाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। पु ना न स्सोकीमा धा र याकीपो व साकिनोकअथर्ष स्या राकित्ना धा योकिनि मृकाता स्य सीचिद सीखा। ओतच्होचवाकओ वाकाओटट्वाखऔ हो वाशि। उ त्सो देकिवो हि र ण्य याकुइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥९॥
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| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
आ यि पु नाती। ना स्सो माकिधा र या अ पो वा साकूओ नोकाअ र्ष सीचि। आ रा त्ना धाकीओ यो नि मृ त स्याकूसी द सीचि। उ त्सो दा इ वाकुओचइश। ही र ण्याटियाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥ पु ना न स्सोषीम धा हा बु होतुवात। रा यापापो व साटिन याखाणफप्ल्। र्षाखसीश। अ रापाऔकहो वाथा। त्ना धा योकिनि मृ ताटिस्य साखाणफप्ल्इश। दाखसीश। उ त्सोपाऔकहो वाथा। दा इ वोटिहि राखाणफप्ल्। ण्याखयाश ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
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| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सो मषुधा र याति। आ पो व सा नोकुअ र्षापासीश। आ र त्न धा यो निषूमृ त स्य सी द सातूऐ हीता। उ त्सो दाटिइ वोता। हि राताआ उ वाटि। एतण्य यातायाख ॥१२॥
| Global # |
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| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सो मषुधा र या एतुऔ होखावात्र। आ पोकाव साटान याखाणफप्ल्। र्षातसीटख्। आ र त्न धा यो नीषूमृ ता स्या साकीओ औपाहोश। दातसीटख्। उ त्सो औपिहोशदा इ वोचिहि राखाणफप्ल्। ण्यातयाटख् ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पु ना न स्सो मातुधा रापायाण। आ पो व सा नो अ र्ष स्या र त्न धाषौयो नि मृ ता स्य साटूइ द सातिओ हापाउ वाशा। उ त्सो दे वो हि राटूहातओ हापाउ वाशा। ण्याकया औटाहोखबाप्लहोप्लइ ळाशा ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
पूचनायनापसोशमाप्लधा राखायाण। आ पोकाव साकानटयाखणफप्ल्। र्षाखसीश। आ राकात्ना धा योकिनि मृ ताटिस्य साखाणफप्ल्इश। दाखसीश। उ त्सोटादा इ वोटिहि राखाणफप्ल। ण्याखयाश ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 511 |
अयास्य आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ १ ॥
हा उ वातिहा उ वातिहातहा उ वोखिवाप्लहातइश। पू ना नाखिस्सोशम धा राखियाण। आ पो वाखिसाशनो आ र्षाखिसीण। आ रा त्नाखिधाशयो ना इ माखीर्क्ताशस्या सि दाखिसीण। उ त्सो दाखिइ वोशाहा इ रा ण्याखीयाण। हा उ वातिहा उ वातिहातह उ वोखीवाप्लहाखऔ हो वाशि। एतआ तिकावि श्वाकानी दू रीकिता त रेकिमाख ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ आमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
प री तो षीती। ञ्च ताताआ उ वाटि। सूखतशम् । सो मोटाया ऊचाक्ता मंचाहा वीःचा। सो मो य ऊती। क्त मांताआ उ वा । हाखवीःश। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स्व न्त राची। द ध न्वा याःती। न र्योटाच्आचप्सु आताआ उ वाटि। न्ताखराश। सू षाचाव सोशामाकम द्रि भीःटिख्। सू षा व सोती। म माताआ उ वा । द्राखइ भीःप्ला ॥१७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
प रि तो षीती। ञ्च ता सूभिता मौटाहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। सो मोटाय ऊचाक्ता मंचाहा वीःचा। सो मो य ऊती। क्त मां हाभिवी रौटाहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्सचान्ता राचा। द ध न्व याःती। न र्योटाअ प्सुटाअ न्ताटारा औटाहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। सू षाचाव सो माकिमा म द्रि भीःटीख्। सू षा व सोती। म मा द्राभिइ भि रौटिहोतवा औटाहोतवा यीटायातयीटयाखहाप्लहा उ वाति। उ ऊखापाश ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
औ हो इषिप रि तो षीती। ञ्ज ताताच्सू त मौटिहो औ होतिच्वाकऔकहोखवाश। सो मोटाय ऊचाक्ता मंकाहा वि रौटीहो औ होतिच्वाकऔकहोखवाश। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स न्ताकिरा औटाहो औ होतिच्वाकऔकहोखवाश। सू षाचाव सो मा माचीद्रि भि रौटिहो औ होतिच्वाकऔकहोपवा उ हु वा हाप्लीबुश। बाश ॥१९॥ प र्ये प रीती। तोकषि ञ्च ताटिच्सू त मा उ वाप्लुहा बु हातिबु हो वाकि। सो मोटाय ऊचाक्ता मंचाहा वि रा उ वाफुहा बु हातिबु हो वाकि। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स न्ताकिरा उ वाटिहा बु हातिबु हो वाकि। सू षा वाटिसोतहा बु हातिबु हो वाकि। माचम द्राप्लइ भि रू हु वाप्लुहा बुशा। बाश ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
प रि तो षि ञ्च ताषूसु तं एति। सो मोचायाकउ क्ता मं हाकीवि र्दाखाधाप्लहातइश। न्वा यो न र्यो अ प्सुटूआ न्ता राकिसूखषाप्लहातइश। वा सोकामा मोपाबाप्लद्रा इ भोप्लि। हा इशा ॥२१॥ प रि तो षि ञ्च ताषूसु तं एतिएत। सो मोचायाकउ क्ता मं हातीवि र्दाखाधाप्लहातहातइश। न्वा यो न र्यो अ प्सुटूआ न्ता राकिसूखषाप्लहातहातइश। वा सोकामा मोपाबाप्लद्रा इ भोप्लि। हा इशा ॥२२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
प रि तो षि ञ्च ताषूसु तं इ हाती। सो मो यषिउ क्ता मं हाटीवी रि हाति। द धकान्वा यो न र्योषीअ प्स न्ताटिरा ई हाति। सु षा वाटिसो इ हाति। मा मा द्राटिट्इ भाखाऔ हो वाशि। ईखहाश ॥२३॥ इ हा प री तो षिषूञ्च ता सु तं इ हातू। सो मो यषिउ क्त मं हाटीवी रि हाकिउ वाशा। ऊखपाश। द धकान्वा यो न र्योषीअ प्स न्ताटिरा इ हाकिउ वाशा। उखपाश। सू षा वाटिसो इ हाकिउ वाशा। ऊखपाश। माचम द्राटाइ भी रि हाकीउ वाशा। उ ऊखापाश ॥२४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
प री तो षि ञ्च ताषूसु ताताम् । सोकमोकया उ क्ता मंकीच्हा वाकाइ र्दा धाटिउ वोखावाश। ऊखपाश। न्वा यो न र्योषीअ प्स न्ताटिरात। सू षा वाटिसोत। मा माकाद्रि भि रि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२५॥ प री तो षि ञ्च ताषूसु तं ओतिवात। सो मो यटिऊचक्ता मंचाहा वि र्द धाचीन्वाययोटहातहातइश। न र्योटाच्अ प्स्वचान्ता राचासू षाचावायसोटहातहातइश। मा माकाद्रि भी रि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
प री तो षि ञ्ज तातूसु ताताम् । सो मो य उ क्त मांटूट्हा वीःटा। द धकान्वा यो न र्यो अ प्साटूट्न्ता राटा। सू षा वाटिसोत। माकमोपबाप्लद्रा इ भोप्लि। हा इशा ॥२७॥ पा री तो षाटीइ ञ्च ता सु ताभुमै हिटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयात। सो मोटाच्य ऊकाक्ता मं हा वीभीरै हीटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयात। द धकान्वा यो न र्योटीच्अ प्स्व न्ता राभीऐ हिटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयात। सू षा व सोटीमाकम द्री भीभिरै हीटाऐ हीटाऐ हीटाऐचहि हो वाथिउ वाटाईटयाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥२८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
ऊ पाचाऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। प री तो षि ञ्च ताषूसु त मू पाचीऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। सो मो य उ क्त मंषूह वि रू पाचीऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। द ध न्वा यो न र्योषूअ प्स्व न्त रा ऊ पाचूऊचपाफउ पाताओपऊ पाचाऊकपाफ। सु षा व सो म मषूद्रि भि रू पाचीऊकपाफउ पाताओपउ प ऊखिपात्र। ऊखपाश ॥२९॥ हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा रि तो षि ञ्च ताकूच्सूकता मु पाटिख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सो मो य उ क्त मंकूच्हाकवि रू पाटिख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। द ध न्वा यो न र्योषूअ प्स्वकाच्न्ताकरा उ पाटिख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सु षा व सो माकूद्रीकच्भि रू पाटिख् ॥३०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 512 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
पा᳒रीतोषी॑ञ्चतासू᳒तं । सोमोयाऊ॑त्तामंहा᳒विः । दधन्वायो᳹न ᳹र्योअप्सू᳒आट्यन्तारा᳒ । सूषा᳒वासो᳒मामा᳒द्री॑भिः ॥ २ ॥
हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा रि तो षि ञ्च ताकूसू ताचामि हा उ पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सो मो य उ क्त मंकूह विचारि हा उ पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। द धा यो न र्योषुअ प्स्व न्त राचाइ हा उ पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सु षा व सो म माकूद्री भिकारि हा उ पाटीख् ॥३१॥ हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा री तोकिषि ञ्च ताटिच्सू तंकाश्र वोटाच्बृ ह दु पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सो मो याकिउ क्त मंकिच्हाकवि श्र वोटिच्बृ ह दु पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। द ध न्वा यो न र्योकूअ प्स्वटाच्न्ताकरा श्र वोटिच्बृ ह दु पाटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। सू षा वाकिसो म माटिच्द्रीकभि श्र वोटिचबृ ह दु पाटीख् ॥३२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 513 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (भरद्वाजो बार्हस्पत्यः) पवमानः सोमः बृहती ॥
आ᳒सो॑मस्वानो᳒अद्री॑भिः । तीरोवा॑राण्यव्या॑या । जनोना᳒पूरीचम्मुवोठ॑र्वीशद्धा᳒रिः । सादावा᳒नेषुद॑॑ध्रीषे ॥ ३ ॥
हा बु हा बुषीहा उ वाति। पा री तो षि ञ्च ताकूचसूकतं सो मोकिच्य ऊकाक्ता मंकाहा वि र्द धकीन्वा यो न र्योटीच्अ प्स्वचान्ता राचासू षा व सोटीख्। हा बु हा बुषीहा उ वाति। एतच्मा मा द्राटिइ भीःखा ॥३३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 513 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
आ᳒सो॑मस्वानो᳒अद्री॑भिः । तीरोवा॑राण्यव्या॑या । जनोना᳒पूरीचम्मुवोठ॑र्वीशद्धा᳒रिः । सादावा᳒नेषुद॑॑ध्रीषे ॥ ३ ॥
हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशप्ल्हातओपवाप्लहा उ वाति। पा रि तो षि ञ्च ताकूचसूकतं सो मोकिचय ऊकाक्ता मंकाहा वि र्द धकीन्वा यो न र्योटीअ प्स न्ता राचीसू षा व सोचीम माखा। हा उ वोखिवाशहा उ वोखिवाशप्ल्हातओपवाप्लहा उ वाति। द्रातइ भीःटाख्। ॥३४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 513 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
आ᳒सो॑मस्वानो᳒अद्री॑भिः । तीरोवा॑राण्यव्या॑या । जनोना᳒पूरीचम्मुवोठ॑र्वीशद्धा᳒रिः । सादावा᳒नेषुद॑॑ध्रीषे ॥ ३ ॥
आखसोण। माकस्वा नोथाअ द्रा इ भाटीउ वोखावाश। ति रो वा राटीणिचअ व्य याटिजा नाटाना पाटाउ वोखावाश। रि चा मु वोटीर्वीचशा द्ध रीटिस्सा दाटाउ वोखावाशवा नाटाउ वोखावाश। षु दा द्ध्रि षाप्लीइश। होपइ ळाशा ॥३५॥ हा वा सो म स्वातु। नो अ द्राखिइ भिशास्ती रो वाखिराण। णि याताआ उ वाटि। व्याखयाशज नो नाखिपूशरी चा मूखिवोःण। वि शाताआ उ वाटि। र्द्धाखरिशस्सा दा वाखिनेण। षु दाताआ उ वाटि। ध्रिखषेश ॥३६॥ आ सो म स्वा नोतुअ द्रि भातिइःश। ती रो वा राषीणि या व्यायियाट। ज नो न पूषीरि चा मूयिवोटर्वी शाकार्द्धायरीःट। स दाटाच्वा ना इ षूटीद ध्रि षोखिप्ल्इ ळाशा ॥३७॥ आ सो म स्वा नोषुअ द्रि भि स्ति रोफुवा राखाणी य व्य याप्ली। ज नो न पुषीरि च म्वो र्वि शाकुर्द्धा री रौटिच्हू वा एटिहो वाचा। सा दा व नेकीषू दौटाच्हू वा एटिहो वा होखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥३८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 514 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (कश्यपो मारीचः) पवमानः सोमः बृहती ॥
प्रा᳸सो॑मादेवा᳒वी॑तये । सिन्धुर्न्ना᳹पी॑प्येअ᳒र्णासा । अं᳸शोःपा᳒या॑सामादीरो᳒ना᳒जा᳒गृविः । अच्छाको᳒श॑म्माधुश्चू᳒त॑म् ॥ ४ ॥
प्र सो म दाती। इ वा वी तखीयाणइश। सिकन्धु र्न पाकिइ प्य यातिआ उ वाटि। र्णाखसाशअं शोः पाखियाण। साकम दा इ रोकीन जाताआ उ वाटि। ग्रखवीशरा च्छा कोखिशणम् । म धाताआ उ वाटि। श्चूचतशम् ॥३९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 514 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
प्रा᳸सो॑मादेवा᳒वी॑तये । सिन्धुर्न्ना᳹पी॑प्येअ᳒र्णासा । अं᳸शोःपा᳒या॑सामादीरो᳒ना᳒जा᳒गृविः । अच्छाको᳒श॑म्माधुश्चू᳒त॑म् ॥ ४ ॥
प्र सो म दे व वीफूत योखाहा इशा। सि न्धु र्न्न पि प्ये आफूर्णा सोखाहा इशा। आं शाटाउ वोखावाश। पा याटाउ वोखावाश। साफम दि रोणिन जाफाग्र वीखाहाणइश। आ च्छाटाउ वोखावाश। को शाटाउ वोखावाश। म धू श्चू ताप्ली। होप्लइ ळाशा ॥४०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 515 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (गोतमो राहूगणः) पवमानः सोमः बृहती ॥
सोमा᳒उष्वाण᳒स्सोतृ᳒भीः᳒ । आधीष्णू᳒भीरावी॑नां । अश्वा᳒ये॑वाहारी᳒ता॑यातीधा᳒रा॑या । मन्द्रा᳒या॑यातीधा᳒रा॑या ॥ ५ ॥
प्रा सो मापिदे व वी त या इशू। सा इ न्धू र्न्ना पि प्य अ र्णा सा अं शोः प यषौसा म दि रो न जौकूहोतहि म्माटा। ग्रटवीतरा च्छा को शं म धौकूहोतहि म्माटा। श्चू ता मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥४१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 515 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
सोमा᳒उष्वाण᳒स्सोतृ᳒भीः᳒ । आधीष्णू᳒भीरावी॑नां । अश्वा᳒ये॑वाहारी᳒ता॑यातीधा᳒रा॑या । मन्द्रा᳒या॑यातीधा᳒रा॑या ॥ ५ ॥
प्र सो म दे वषुवी त ये सि न्धूफुर्न्न पाखाऔणहोफवाप्ल। प्येकअ र्णा साटिच्हायउ वाटा। ऊखपाशअं शोः प या औ हो वा हा इशृ। साकम दि रोकिन जा गृकिवि र्हायाउ वाटा। ऊखपाशअ च्छा को शं औ हो वा हा इशृ। म धू श्चूखितात्रम् । ऊख ॥४२॥ प्र सो म दा इ वातूवी त यातिइश। सि न्धू र्न्न पा इ प्येचूअथर्णा साटाइ हाता। आं शोःटापाखयाशहा होखाहाणइश। साकम दि रोकिन जाटागॄ वी रि हाती। आ च्छाटाकोखशांशहा होखाहाणइश। म धू श्चूखितात्रम् । हेख ॥४३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 515 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
सोमा᳒उष्वाण᳒स्सोतृ᳒भीः᳒ । आधीष्णू᳒भीरावी॑नां । अश्वा᳒ये॑वाहारी᳒ता॑यातीधा᳒रा॑या । मन्द्रा᳒या॑यातीधा᳒रा॑या ॥ ५ ॥
हा बु सो माःती। उ ष्वाथाच्ण स्सो तृयिभीःट। आ धि ष्णु भीकीराचवायइ नाटाम् । आ श्वाटाऔटहोतये व ह रि ता याषूता इ धायिरा याटा। म न्द्रा याकियाखहा ओ वाशि। ती धा राटियाख ॥४४॥ सो म उ ष्वाखीण स्सो तृ भाप्लीइःश। आ धी ष्णु भीकीराकवी नाथामा श्व येपिवाण। हा रि ता या ति धायूरापयाश। म न्द्रा याखियाशताखइ धाणा। रा या औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४५॥ सो म उ ष्वा णषुस्सो तृ भि रेतीअ धीता। ष्णु भि रातिआ उ वाटि। वीखनाशम् । आटश्वातये व ह रि ता याकूति धाताआ उ वाटि। राखयाश। माटन्द्रातया याकाति धाताआ उ वाटि। राखयाश ॥४६॥ सो म उ ष्वा णषुस्सो तृ भि रेतीअ धीता। ष्णु भि र वीकीना मा श्व येकीवा ह रि ता याकुता इ धा र याकुम न्द्रा यौ वाशु। तिखधाश। रा या औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥४७॥ सो म उ ष्वा ण स्सो तृ भा इः रषैधि ष्णु भि र वी नातूम् । आ धि ष्णु भि र वीषूना मा श्व ये वा हाकूरी ता या तापीइ धाशा। र याताआ उ वाटि। माखन्द्राशया या तीखिधाण। रा याणाऔचहोकवाफ। होप्लइ ळाशा ॥४८॥ सो म उ ष्वा णषुस्सो तृचाभि रौटाहोतआपधि ष्णु भी र वी नाशूम् । आकश्व ये वा हाकीरि ता याथिच्तीकधा रा यौकिवा उ वोप्लिवाश। माकन्द्र या या तीपीधाशहिंच। राखयोप्ल। हा इशा ॥४९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 516 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (अत्रिर्भीमः) पवमानः सोमः बृहती ॥
तावाहंसो᳸मरारणा । सख्या᳒इ॑न्दोदीवेदीवे । पूरू᳒णी॑बभ्रोनीचा᳒र॑न्तीमा᳒मा᳒वा । पारीधीं᳒रा᳒तीतं᳒ई॑हि ॥ ६ ॥
त वा हं सोती। म राटाच्रा णाचार णाशा। स ख्य इ न्दो दि वाटूच्इशदि वाचाइ दि वेशि। पू रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति माटीमा वाचाअ वाशा। पा री धीं र ति तंकूइ हाटाट्इ हाखाऔ हो वाशि। ऊ उखापाश ॥५०॥ त वा त वाती। आ हं सो मषीरा र ण स ख्या इटून्दोतदि वा औभिहोतदा इ वेटि। पू रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति मायीमापवाश। प रा औभिहोत। धा इं र तीकीतोपबाप्ल। आ इ होप्लि। हा इशा ॥५१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 516 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
तावाहंसो᳸मरारणा । सख्या᳒इ॑न्दोदीवेदीवे । पूरू᳒णी॑बभ्रोनीचा᳒र॑न्तीमा᳒मा᳒वा । पारीधीं᳒रा᳒तीतं᳒ई॑हि ॥ ६ ॥
त वा हं सो मातुरा र णाति। स ख्या इखिन्दोशदी वे दाखिइ वेणा। पु रू णि ब भ्रो निषूच र न्ति माचिमा वापहा इ प रि धा इं राश्रृ। तीततोपबाप्लआ इ होप्लि। हा इशा ॥५२॥ त वा हं सो म रौ होतूर णाता। साचख्या इ न्दोटिदि वाखाणफप्लइश। दीखवेश। पू रूटाणा इ बाटिभ्रो नि च राटीन्ति माखाणफप्ल्। माखवाश। पा रीटाधा इं राटिति तंखाणफप्ल्। आखइ हिशा ॥५३॥ त वा हं सो मषीरा र ण सा ख्याफुइ न्दोखादि दे दि वा इशु। स ख य इ न्दोकीदि वे दाटिइ वेता। पू रू णि ब भ्रो निषूच रकान्ति मा माटिवात। पा रा इ धाटीइं राता। ती तंटाआटइ हाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥५४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 517 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (विश्वामित्रो गाथिनः) पवमानः सोमः बृहती ॥
मृ᳒ज्या᳒मा॑नस्सूहस्त्या᳒ । समुद्रेवा᳒चा॑मिन्वसि । रायिंपी᳒शं॑गंबहूलं᳹पू॑रूस्पृ॑हं । पावामानाभ्यर्षसि ॥ ७ ॥
मृ ज्य मा नाःती। सु ह स्ति यातीसा मूटाद्राखइ वाशाच मि न्व सातीइशरा यींटापाखइ शांशाग म्ब हु लांतीपू रूटास्पृखहणम् । पा व माचिना औपाहोश। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥५५॥ मृ ज्य मा नाःती। सू ह स्ताचियाटस मुचाद्रे वाथाचा मियान्वा सापाइ र याखिइं पि शांतिग म्ब हु लकीम् पूचरूयस्पृ हाटाम् । पा वा माटिट्नाखऔ हो वाशि। भ्य र्षाटासीख ॥५६॥ मृ ज्य मा नाःती। सूचह स्ति याचिसायमूटच्द्रायइ वाटाच मीकान्वा साचाइश। रायइंटच्पायइ शांटागकम्ब हु लंचिपू रू स्पृ हाचीम् । पायवाटच्मायनाटभाटयाखऔ हो वाशि। र्षाखसिश ॥५७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 517 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
मृ᳒ज्या᳒मा॑नस्सूहस्त्या᳒ । समुद्रेवा᳒चा॑मिन्वसि । रायिंपी᳒शं॑गंबहूलं᳹पू॑रूस्पृ॑हं । पावामानाभ्यर्षसि ॥ ७ ॥
मृ ज्याताएत। मा न स्सु ह स्ति याषूऔटहोत। सा मु द्रे वा च मिकून्व सा औभिहोत। रा यिं पि शंकीगंकब हु लंकिपू रू स्पृ हा औभुहोत। पा व माटिनात। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥५८॥ मृ ज्य मा नषीस्सु ह स्ते या वातूहातइश। सा मु द्रा इषीवा च मिटिन्वाखसीण। रा याखाइं पि शांतिगंकब हु लंकिपू रूयास्पृ हापापा वाखामा नाता। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥५९॥ मृ ज्य मा नाफीस्सु हशास्ति याका। स मूटाद्रे वाटाच माटाइ न्वा सीटि। रा यिं पि शांकीग म्ब हु लंकीपू रू स्पृ हा औभुहोत। पा व माटिनात। भीकयोपबाप्लर्षा सोप्ला। हा इशा ॥६०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 518 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (जमदग्निर्भार्गवः) पवमानः सोमः बृहती ॥
अभीसो᳒मा॑साआया᳒वाः॑ । पा᳸वन्तेमा᳒द्यम्मादं॑ । समुद्रा᳹स्याधीविष्टापेमानीषीणाः॑ । मत्सा᳒रासोमादच्यू᳒ताः ॥ ८ ॥
मृ ज्य मा न स्सु हातू। स्ति याटास मूटाच्होयद्रे वाटाहो चाथामि न्वा साचिइश। र याटाच्होयइं पी शाटिहो गंथाब हु लां पूकीरू स्पृ हाचिम् । प वाटाच्होयमा नाटाहो भीथाअ र्षा साकिआ उ वाटि। वाकजी जी गीकिवातच् ॥६१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 518 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
अभीसो᳒मा॑साआया᳒वाः॑ । पा᳸वन्तेमा᳒द्यम्मादं॑ । समुद्रा᳹स्याधीविष्टापेमानीषीणाः॑ । मत्सा᳒रासोमादच्यू᳒ताः ॥ ८ ॥
मृ ज्य मा न स्सु हषूस्त्या स मु द्रे वोतुवात। चा मि न्व सीकीरा यिं पि शाटीहाटहातहातङ्ग म्ब हु लंकीपू रू स्पृ हकीच्म् । पा वाकामा नाटाहातहातइश। भ्य र्षाटासाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥६२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 518 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
अभीसो᳒मा॑साआया᳒वाः॑ । पा᳸वन्तेमा᳒द्यम्मादं॑ । समुद्रा᳹स्याधीविष्टापेमानीषीणाः॑ । मत्सा᳒रासोमादच्यू᳒ताः ॥ ८ ॥
हातहा अ भीकिसो माथाच्सा आकायायवाःट। हातहा इ प व न्ते माचूदी याकाम्मायदांट। हातहा इ स मु द्र स्याषूधि वि ष्ट पेचीमाकच्नाकइ षायाइ णाःटा। हातहा इ म त्साकीरा सोथाच्मा दाकाच्यूयताःट। हातहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥६३॥ आ भि सोकिमाखस आ य वाःकी। प व न्तेकिम द्य म्म दा मा औटूहोतआ औटाहोत। सा मु द्र स्याकीधि वि ष्ट पेकीम णी षि णा औभुहोतआ औटाहोत। माथत्सा रा सोकिम द च्यु ता औभुहोतआ औटाहोखण्। ओपइ ळाशा ॥६४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 518 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
अभीसो᳒मा॑साआया᳒वाः॑ । पा᳸वन्तेमा᳒द्यम्मादं॑ । समुद्रा᳹स्याधीविष्टापेमानीषीणाः॑ । मत्सा᳒रासोमादच्यू᳒ताः ॥ ८ ॥
अ भि सो माती। स याताआ उ वाटि। याखवाः प व न्ता इ माशू। दी याताआ उ वाटि। माखदं सा मू द्रा स्याशू। धि वि ष्ट पेकीम नाकाआ उ वाटिएभ। षीखणो मा त्सा रा साःशु। म दाताआ उ वाटि। च्यूखताःप्ल ॥६५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 518 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
अभीसो᳒मा॑साआया᳒वाः॑ । पा᳸वन्तेमा᳒द्यम्मादं॑ । समुद्रा᳹स्याधीविष्टापेमानीषीणाः॑ । मत्सा᳒रासोमादच्यू᳒ताः ॥ ८ ॥
अ भि सो मा सषुआ होताय वाःता। प व न्तेकिम द्य म्म दंषीप व न्ते म दि यांटूच्होयइ माटादातम् । सा मु द्र स्याकीधिशवि ष्ट पे म नीकुच्षि णोकाम नाटाच्होयषाटइ णाःता। माथत्साशरा सो म द च्युकुतोशम दाटाच्होयच्यूटताःखण्। ओपइ ळाशा ॥६६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 518 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
अभीसो᳒मा॑साआया᳒वाः॑ । पा᳸वन्तेमा᳒द्यम्मादं॑ । समुद्रा᳹स्याधीविष्टापेमानीषीणाः॑ । मत्सा᳒रासोमादच्यू᳒ताः ॥ ८ ॥
औ हो वा अ भि सो मा सषृआ य व औ होतुवात। प वाटान्ते माखावात्र। द्यकम्म दं स मूटीद्र स्याखावात्र। धीचवि ष्ट पे म नीकुच्षि णाकऔटच्होयइ म त्साटिरा सोखावात्र। म दाताच्यू ताःटाख् ॥६७॥ अ भि सो मा सषुआ यातावाःत। प वाटान्ते माखावात्र। द्यकम्म दं स मूटीद्र स्याखावात्र। धि वि ष्टाकिपे म नी षी णोकुम त्साटारा सोखावात्र। म दाताच्यू ताःटाख् ॥६८॥ अ भि सो मा सषुआ यातावाःत। प वकान्ता इ मा दि यटुम्माखदणम् । सा मु द्र स्याकीधि वि ष्ट पा इषुम नाटाइ षाखाइ णाःणा। मा त्सा राकिसो माटाट्दाखऔ हो वाशि। च्यूखताःप्ल ॥६९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 519 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (वसिष्ठो मैत्रावरुणिः) पवमानः सोमः बृहती ॥
पा᳒वामानाअसृक्षता॑ । पावी᳒त्रामाती᳒धा᳒रा॑या । मारू᳒त्व॑न्तोमत्सारा᳹इन्द्रीया᳒हायाः᳒ । मेधा᳒माभि᳒प्रा᳒यां॑सिच᳒ ॥ १० ॥
अ भाटाइ सो माखिऔ होखास आफाय वाःका। प वाटान्ते माखाऔ होखाद्यकम्म दकाम् । स मूटाद्र स्याखाऔ होखाधि विफाष्ट पाकाइश। ओ इ माटिट्नाखऔ हो वाशि। षीखणाःप्ल। ऊखपाशप्ल्ऊखपाण। मा त्सा राकिसो माटाट्दाखऔ हो वाशि। च्यूखताःप्ल ॥७०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 519 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
पा᳒वामानाअसृक्षता॑ । पावी᳒त्रामाती᳒धा᳒रा॑या । मारू᳒त्व॑न्तोमत्सारा᳹इन्द्रीया᳒हायाः᳒ । मेधा᳒माभि᳒प्रा᳒यां॑सिच᳒ ॥ १० ॥
पु ना न सो म जाषूजा गृ वि र व्याःती। वा रैः पा रीयीप्री याःटा। त्वं वि प्रो अ भ वोषूगा इ रापिस्त माःता। मा ध्वाकाच्य ज्ञाकाम्माटट्इ माखाऔ हो वाशि। क्षाखणाःप्ल ॥७१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 519 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
पा᳒वामानाअसृक्षता॑ । पावी᳒त्रामाती᳒धा᳒रा॑या । मारू᳒त्व॑न्तोमत्सारा᳹इन्द्रीया᳒हायाः᳒ । मेधा᳒माभि᳒प्रा᳒यां॑सिच᳒ ॥ १० ॥
प व मा नषीअ सृ क्ष त प वातूइश। त्रा म ति धा र या म रू त्व न्तोषेम त्स रा इ न्द्रीटुयातचहा या माटिइ धाताम् । अ भा इ प्राटीट्याखऔ हो वाशि। सीखचाश ॥७२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 520 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
| 521 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः पवमानः सोमः बृहती ॥
पा᳒वा॑स्ववाजसा᳒ता॑मः । आ᳒भी᳸वि᳹श्वा॑नीवार्याः । त्वंसा॑मुद्रःप्रा॑थामेवि᳒धर्मन् । देवे᳒भ्यासोममात्सा᳒रः ॥ ११ ॥
इन्द्रा॑यापावातेमा᳒दाः॑ । सो᳸मो॑मारू᳒त्वा॑तेसूतः᳒ । साहा᳒स्रा॑धारोअत्या᳒व्याम᳒र्ष॑ति । तामि॑मृजन्त्यायावाः ॥ १२ ॥
प व स्व वा ज साषूइ हाता। ताखमाःप्ल। आ भि वि श्वाकीच्नीकन वा र्या स्त्वं साटीट्मूखऔ हो वाशि। द्राः प्र थाकिमेचवी ध र्मथिन्दा इ वा इ भ्याटुट्स्सोखऔ हो वाशि। म म त्स राःतीच् ॥७३॥ इ न्द्रा या पाती। वा ताटाइ मा दाःटि। सो मो म रु त्व ताटूइ सू ताःटि। सा ह स्र धा रोषुअ त्य व्य माटुर्षा तीटा। त माटाइ मा र्जाटिच्न्तीकया याटावाःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥७४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 521 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
इन्द्रा॑यापावातेमा᳒दाः॑ । सो᳸मो॑मारू᳒त्वा॑तेसूतः᳒ । साहा᳒स्रा॑धारोअत्या᳒व्याम᳒र्ष॑ति । तामि॑मृजन्त्यायावाः ॥ १२ ॥
इ न्द रा य पाती। व तेकाम दाचास्सो मोथामा रूटाच्त्वाकते होटाइ सू ताःटि। सा ह स्रा धा रोषुअ त्य व्य मा र्षा ताटूउ वोखावाश। ऊखपाश। ता मी होटिइ मा र्जाटिच्न्तिकया याटावाःखण्। ओपइ ळाशा ॥७५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 521 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
इन्द्रा॑यापावातेमा᳒दाः॑ । सो᳸मो॑मारू᳒त्वा॑तेसूतः᳒ । साहा᳒स्रा॑धारोअत्या᳒व्याम᳒र्ष॑ति । तामि॑मृजन्त्यायावाः ॥ १२ ॥
इ न्द्रा या पाखीवा ता इ मा दाःप्लु। सो मो म रू त्व ताटूइ सूखाताःण। सा ह स्र धाकीरोशअ त्य व्य माटीर्षाखतीण। त मा औकिहो इ माखिर्जांणताटट्याखऔ हो वाशि। याखवाःप्ल ॥७६॥