| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 477 |
असितः काश्यपो देवलो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 478 |
असितः काश्यपो देवलो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ असितः काश्यपो देवलो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
प्र᳸सो᳸मासोमादच्यू᳒ताः । श्रा᳒वा॑सेनोमा॑घो᳒नां॑ । सू᳒तावीद᳒थेअक्रमुः ॥ १ ॥
प्र᳒सो᳒मा॑सोवीपश्ची᳒ताः॑ । आ᳒पो॑नायन्ताऊर्म॑याः॑ । वाना᳒नी॑माहीषा॑ईवा ॥ २ ॥
प्र सो माखिसाःण। म द च्यूचिता औटाहोतवातइ श्र वाटिसाखइ नाःणा। ओ इ म घो नाटुम् । सू ता वाटिट्इ दाखाऔ हो वाशि। थे अ क्र मूःखी ॥१॥ प्र सो मा साःती। वा इ पा श्चीकीताशआचपोयना याटान्ता ऊ र्म योकीवाचनायनि माटाओ औकाहोत। हि षा ईचिवा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 479 |
श्यावाश्वः आत्रेयः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
| 480 |
त्रित आप्तयः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ (कविर्मेधावी) श्यावाश्वः आत्रेयः पवमानः सोमः गायत्री ॥ ॥ त्रित आप्त्यः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳒वा॑स्वेन्दोवृ᳹षा॑सूतः । कृ᳒धी᳹नोयाशासोजने । विश्वा᳒आप᳒द्वी᳒षो॑जहि ॥ ३ ॥
वृषाह्या᳹सी॑भानु᳒ना । द्यु᳒मन्तं॑त्वाहवामहे । पा᳒वा॑मानास्वर्दृ᳒श॑म् ॥ ४ ॥
प व स्वे न्दोफीवृ षाशासु ताःका। कृ धी नो य श सोषुज ना एपिवा इ श्वा या पाशु। द्वाटइ षाखाऔ हो वाशि। जाखहिश ॥३॥ वृ षा हि याती। सि भा नूभिनात। द्यु म न्त त्वा ह वायूमा हापाइ पा वाति। मा ना सु वोटीओपबाश। दृखशशम् ॥४॥ वृ षा हि याफीसि भा नु नाकी। द्यु म न्त न्त्वाटीह वा म हेकीहो वाकाऔटहो वाका। पा व माटिनाचसु व दृ शंटीहो वाकाऔटहो वाका। हू वोखाइ ळाप्ला ॥५॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 481 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥ ॥ भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
इ᳒न्दूः॑पविष्टाचे᳒तानः । प्रीयः᳹का॑वीना᳒म्मातिः । सृजद᳹श्वं॑राथिरिव ॥ ५ ॥
इ न्दूखारौ हो वा हा इ पा वीशृ। ष्ट चाटाई त नोखिहाणइश। हाकहो एटाहोटवात। प्री याः क वीकीना म्म ति रोपीहाणइश। हाकहो एटाहोटवात। सृ जाटाद श्वांखाहाणइश। हाकहो एटाहोटवात। राटथाखऔ हो वाशि। ईखवाश ॥६॥ इ न्दुः प वि ष्ट चेषूत नः प्रि यः क वातूइश। हिंटहि न्ना म्माखितीःण। सृ ज दापिश्वाशम् । हिंटहिंतराटट्थाखऔ हो वाशि। ईखवाश ॥७॥ इ न्दुः प वि ष्ट चे त नः प्रि यः क विषोना म्म तिं सृ जातुद श्वांता। ओ वाकाओ वाकाराटट्थाखऔ हो वाशि। ईखवाश ॥८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 482 |
भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥ ॥ भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा पवमानः सोमः गायत्री ॥
आ᳒सृक्षातप्रावाजी᳒नाः । गव्या᳒सोमा॑सोआश्वाया᳒ । शुक्रा᳒सो॑वीराया᳒शा᳒वाः᳒ ॥ ६ ॥
अ सृ क्षा ताखीप्राशवा जी नाःप्लि। ग व्याटासो माटासोतआ श्व याचि। शु क्राटासो वीटार याकाच्शाकव ओपाइ ळाशा ॥९॥ अ सृ क्ष ता प्रातुवा जी नाःति। ग व्या सो मा सोषुआ श्व याटिहोचइश। शु क्रातासो वाटाहोचइश। राकया शाटाट्वाखऔ हो वाशि। ग्वाखभीःश ॥१०॥ अ सृ क्ष तषीप्र वा जि न एखुग व्या सो माशी। सोतआ श्वापायाश। शु क्राटासोखवीण। राकयोपबाप्लशा वोप्ला। हा इशा ॥११॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 483 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳒वा॑स्वादेवा᳹आयूषा॑त् । इन्द्रं॑गच्छतूतेमादाः॑ । वायुमा᳹रो॑हाध᳒र्मा॑णा ॥ ७ ॥
पा वा स्वा देती। व यातावाटयाखऔ हो वाशि। यूखषा गा इ न्द्र ङ्ग च्छाशू। तु ताताइ तुटाताखऔ हो वाशि। माखदाःप्ल। वा यूंटाच्होयआटरोत। ह धाताहाटधाखऔ हो वाशि। र्म्माखणाश ॥१२॥ प व स्व दे वाफुऐ हि ऐ हीखीयाश। आ यु षा गैटीही ऐटाहीटयात। इ न्द्र ङ्ग च्छषीन्तु ते म दा ऐटुही ऐटाहीटयात। वा यू मा रोकीओ हाकाधोपबाप्लर्म्मा णोप्ला। हा इशा ॥१३॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 484 |
कश्यपो मारीचः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ कश्यपो मारीचः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳒वा॑मानोअजीजनात् । दीव᳒श्चि᳒त्रन्ना᳹तन्या॑तुं᳒ । ज्योतिर्वैश्वानारं᳒बृहा᳒त् ॥ ८ ॥
पा वाता। मा नो अ जीकीजाखनाणत् । दी वाचाश्चि त्राचान्न्य ता न्य तूशीम् । ज्यो ती र्वैकिश्वा नाटाराखऔ हो वाशि। बृखहाशत् ॥१४॥ प व मा नाःती। अ जा इ जापीनाशत् । दी वाचाश्चि त्रांटाहातहातइशना तकान्याखतूणम् । ज्योखतीशर्वाखइ श्वाणा। न रोप्लाबा बृ हाप्लित् । हा इशा ॥१५॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 485 |
निध्रुविः काश्यपः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ निध्रुविः काश्यपः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳸री॑स्वाना᳒साइन्दा॑वः । मा᳒दा॑याबर्ह᳹णा॑गीरा । मा᳒धो॑अर्षन्तीधारा॑या᳒ ॥ ९ ॥
पा रीता। स्वा ना स इ न्द वोषूम दा याचिब र्ह णाटिगि राखाम धोखाअ र्षाताम् । तीकधोपबाप्लरा योप्ला। हा इशा ॥१६॥ प र्ये पा रीती। स्वा ना स इ न्द वाषूउ वाटाहा उ वाटिहोकवाथइ याचा। म दा य ब र्ह णाषूगि रा उ वाटीहा उ वाटिहोकवाथइ याचा। मा धो अ र्ष न्तिषुधा र या उ वाटुहा उ वाटिहोकवाथइ योटाट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१७॥ पा रीफास्वा नाणाफ्साखइ न्द वाःशि। म दाटायाचब र्ह णाचिगीकरा म धो आटीर्षातन् । ऊ र्म्मि रि वाटीईटयात। ति धाकाच्राकया औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 486 |
अमहीयुराङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
गायत्री |
॥ अमहीयुराङ्गिरसः पवमानः सोमः गायत्री ॥
पा᳒रीप्रासी॑ष्यदत्काविः । सिन्धो॑रूर्म᳹वा᳒धि॑श्रीताः᳒ । कारूं᳒बि᳒भ्राट्यूरूस्पृ᳒ह॑म् ॥ १० ॥
प रि प्रा सीती। ष्या द त्काचिवीःट। सि न्धो रू र्म्मा वा धीयूश्री ताःटा। का रू म्बाटिट्इ भ्राखाऔ हो वाशि। पू रूतास्पृ हाटाख्म् ॥१९॥