| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 81 |
गय आत्रेय |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ गय आत्रयेः अग्निः अनुष्टुप् ॥
अग्ना᳹ओजीष्ठामा᳒भा॑रा । धुम्नामस्माभ्या॑मधिगो । प्रा᳸नो᳸रा॑येपा᳒नीयसे । रत्सीवा᳹जायापन्थाम् ॥ १ ॥
आ ग्नाटाउ वोखावाश। ओ जीचाष्ठा मा भा राटाउ वोखावाश। द्युकम्न म स्माचिभ्य म ध्रि गोतीओ इ प्रा नाटीउ वोखावाश। राकये पा नीकिय सेताओ इ रा त्सा उ वोखावाश। वा जाथाच्याकपटन्धाखम् ॥१॥ अ ग्नेताहातबुश। ओ जी ष्ठा मायीभा राटाऔ होखावाश। द्यु म्न म स्म भ्या मायूध्री गाटाऔ होखावाश। प्रा नो रा ये पा नीयूया साटाऔ होखावाश। रा त्सीटावा जाटाच्याकपोपबाप्लन्धा यांप्ला। हा इशा ॥२॥
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| 82 |
वामदेवः |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ वामदेवः अग्निः अनुष्टुप् ॥
या᳸दीवीरो॑आनूष्यात् । अ᳒ग्नी᳒मि᳒न्धीतामार्क्त्याः । आ᳒जुह्वद्धेर्व्यमानूषाक् । शर्माभक्षितादै᳒व्य॑म् ॥ २ ॥
य दि वी रोषीअ नु ष्या द य्याखुईखयाश। अ ग्नि मि न्धी त मौचूहोटहातहो वाटार्त्याःत। आ जुटाबा क्ताटार्व्या माटानूखषाणत् । शकर्म भ क्षा इ ता दाटूहातइ वाताओपबाप्ल। व्याखम् ॥३॥
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भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः अनुष्टुप् ॥
त्वे᳒ष᳹स्ते॑धूमा᳒ऋण्वति । दिविसत्शुक्रआ᳒त॑तः । सू᳒रोनहिद्यूतात्वं᳒ । कृपापावा᳒कारो᳒चा॑से ॥ ३ ॥
त्वेकषा स्तेपाधू म ऋ ण्व ती हा बुशृ। दि वि स न्शूचीक्रा आकातायतापसू रो न हि हा बुशू। द्यु ताचातूयवापङ्कृ पा प वा हा बुशृ। का रो चाटिसाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥४॥
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भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः अनुष्टुप् ॥
त्वं॑हीक्षैता᳒व᳒द्या᳒शाः । अ᳸ग्ने॑मित्रो᳒नापा᳒त्या॑से । त्वंवि॑चर्षा॑णेश्रा᳒वाः॑ । वासो॑पूष्टिन्ना᳒पूष्यसि ॥ ४ ॥
त्वं हि क्षै त व द्यषूश इ य इ य्यातुहातइश। अ ग्ना इ मि त्रो नाकूपा त्याखासाणइश। ओ औकाहोखइ याप्लाहाणइश। त्वं वि चा र्ष णेकुश्राखवाःण। ओ औकाहोखइ याप्लाहाणइश। वा सोकाआपपु ष्टा इ न्ना पूकुष्याखसीण। ओ औकाहोखइ या हाप्लि। होप्लइ ळाशा ॥५॥
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| 85 |
द्वितः मृक्तवाहा आत्रेय |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ द्वितो भृगवुाहा आत्रयेः अग्निः अनुष्टुप् ॥
प्रा᳸ता॑रग्निःपूरूप्रीयः᳒ । वीश᳹स्तावेता᳒तीथिः । विश्वेयास्मिन्ना᳒मार्ये । हव्यंमर्ता॑साइन्धाते ॥ ५ ॥
प्रा त र ग्ना इः पूतूरू प्री याःति। वी शाकास्त वेटाता अ ति थातीइःश। वा इ श्वे याकीस्मि न्ना माटिर्ताखयाणइश। हा व्यांटाहो इ म र्ताटीहोकथ्सा इ न्धाटिताखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
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| 86 |
वसूयव आत्रेयः |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ वस्युव आत्रयेाः अग्निः अनुष्टुप् ॥
य᳸द्वाही॑ष्ठन्ता॑दग्ना᳒ये । बृहा᳒द॑र्चविभा॑वसो । माही॑षीवत्वा᳒द्रायिः । त्व᳸द्वा॑जाऊ᳒दी॑रते ॥ ६ ॥
य द्वा हि ष्ठ न्त दातू। ग्ना या इषिबृ ह द र्चा वीतुभा वाटासातबुश। मा हीटाषा इ वाटित्व द्र यि स्त्वा द्वाटूजाःत। ऊ दी राटिताखण्इ । ओपइ ळाशा ॥७॥ य द्वा हि ष्ठ न्त दषुग्न ये य द्वा हि ष्ठोतूवात। ता द ग्न या इषुबृ ह दाटिर्चातच्वीकभाचवा साचाबुश। म ही षाटिइ वातात्व द्र यी स्त्वा द्वाटुजाःत। ऊ दी राटिताखण्इ । ओपइ ळाप्ला ॥८॥
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| 87 |
गोपवन आत्रेयः |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ गोपवन आत्रयेः अग्निः अनुष्टुप् ॥
वी᳒शोवी᳒शोवोआ᳒ती॑थिं । वज᳒यन्ताःपूरूप्रीयम् । अ᳒ग्निं᳹वो॑दुर्यंवाचाः । स्तूषेशुषास्याम᳒न्मा॑भिः ॥ ७ ॥
वि शो वि शो हिं वोतूअ ति थाखिइशम् । वातचज यकान्ताः पूटारू प्रीपयाशम् । अ ग्निं वोटिदू रापायाशहि म्माचाइश। वातचातस्तूपषे हाणाइश। ओ होकावा इ शूखिषाणहि म्माचाइश। स्यातमातन्माखभा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥९॥
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| 88 |
पूरु आत्रेय |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ पूरुरात्रयेः अग्निः अनुष्टुप् ॥
बृ᳒ह᳹द्वा᳹योहीभा᳒ना᳒वे । अ᳸र्चा॑देवा᳒यअग्ना᳒ये । यंमित्र᳒न्नप्रा᳒शा॑स्तये । म᳒र्क्ता॑सोदधी᳹रे॑पूरः ॥ ८ ॥
बृ ह द्व याःती। ही भा नाटिवातइश। अ र्चा दे वा या ग्नाटूयातइश। य म्मि त्र न्न प्रा शायूस्ता याटाइश। म र्ता सोपिदाश। धी रोखाबाप्लपू रोप्ला। हा इशा ॥१०॥ बृ ह द्व योषीहि भा न वातीएत। अ र्चाचादे वाथाच्याकअ ग्नाटायातइश। य म्मि त्रकिन्न प्राकाशायस्ताटाइश। माकर्क्ता सोथाद धा इ रेयीपु राटाऔ हो हाखिऔ हो वाशि। वातहाःटख् ॥११॥
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गोपवन आत्रेयः |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ गोपवन आत्रयेः अग्निः अनुष्टुप् ॥
आ᳒ग॑न्मवृत्राह᳒न्तामं । ज्ये᳸ष्ठा॑मग्निमाना᳒वम् । यस्म॑श्रूतार्वन्नाक्षे । बृहाद॑नीका॑इध्याते ॥ ९ ॥
अ ग न्म वृती। त्रातह न्तापामशम् । ज्या इ ष्ठाकिमा ग्नि मा नापीवशम् । या स्माटाच्होकइ श्रुकात र्व न्ना क्षाषीइ बृ हाटूच्द्धोचया नीकाक याताआ उ वा एभी। ध्याखतेश ॥१२॥
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वामदेवः कश्यपो वा मारीचो मनुर्वा वैवस्वत अभौ वा |
अग्निः |
अनुष्टुप् |
॥ वामदेवः, कश्यपो वा मारीचो, मनुर्वा वैवस्वत, उभौ वा अग्निः अनुष्टुप् ॥
जाताः᳹पा᳒रे॑णाध᳒र्माणा । यत्सा᳒वृ᳹त्भी॑स्साहा᳒भू॑वः । पी᳒ताय᳒त्काश्या᳒पा॑स्याग्निः । श्रद्धा᳹माता॑मानूःकाविः ॥ १० ॥
जा ताःचाप रेटाच्णाकधा ईटाहाकथ्र्मा णा इटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्चकथ्ग च्छ थोकीय स्ताटावृ द्भिटासाकहा ईटाहाकथ्भू वा ईटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्चकथ्ग च्छ थाःकि। पि ता याटित्काकश्या पा ईटिहाकथ्स्या ग्ना ईटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्च ग च्छ था श्र द्धाकूमा ताथाच्माकना ईटाहाकथ्का वा ईटिहा योखानिशम् । यो नि मि न्द्राकीश्च ग च्छ थाःखी ॥१३॥