| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 45 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः बृहती ॥
ए᳒नावो᳒अग्नि᳒न्ना᳒मा॑सा । ऊर्जो᳹नापातामाहू॑वे । प्री᳒यञ्चेतिष्ठामारातिं᳹स्वाध्वारं᳒ । विश्वा॑स्यादूता᳸मामृत॑म् ॥ १ ॥
ए ना वो अ ग्नि न्नातूओ म साति। ऊ र्जो न पाकीता मायाहु वेटा। प्रा य न्चेचिति ष्ठाटामा र तिंचिसू आ ध्वा रांभि। वि श्वाचास्यायदूट। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१॥ ए ना वो अ ग्निषुन्ना म सातूहातबुश। ऊ र्जो न पाकीता मायाहु वेटाहातबुश। प्रा य न्चेचिति ष्ठाटामा र तिंचिसूटआ ध्वा रांभिहातबुश। वि श्वाचास्यायदूटहातबुश। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
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| 45 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
बृहती |
ए᳒नावो᳒अग्नि᳒न्ना᳒मा॑सा । ऊर्जो᳹नापातामाहू॑वे । प्री᳒यञ्चेतिष्ठामारातिं᳹स्वाध्वारं᳒ । विश्वा॑स्यादूता᳸मामृत॑म् ॥ १ ॥
ए ना वो अ ग्नि म्मेतून म साति। ऊकर्जो न पाटिच्ता माचाहु वेकाप्राटयातम् । चा इ तीचिष्ठा माकार तिंटाच्सू आकाध्वायराटम् । वि श्वाकास्यायदूट। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥ ए ना वो अ ग्नि न्नषूम स ऊ र्जो न पोतूवात। ता माचाहु वेकाप्राटयातम् । चा इ तीचिष्ठा माकाराटतींत। स्वाथध्वा रं वि श्व स्याटुदूत। ताचमा मृचाताकमि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
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भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः अग्निः बृहती ॥
शे᳒षेवा᳒ने॑षूमातृ॑षु । स᳒न्त्वामर्क्ता॑सइन्धते । आत॑न्द्रोहव्यं᳒वा॑हसिहाविष्कृताः॑ । आ᳒दि᳒द्देवेषु॑राजसि ॥ २ ॥
शे षे व नाफीइ षु मा तृ षूकु। सा न्त्वाकामा र्ताकाच्साकइ न्धाटातातइश। आ त न्द्रोकिच्ह व्यंचाव हाकासा इ हा वीटीष्काखर्ताःण। आ दि द्देकिवाचइश। षू रा जाटिजाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥५॥
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| 47 |
सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
बृहती |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः बृहती ॥
अ᳒द॑र्शीगातूवि᳒क्ता॑मः । यस्मि॑न्व्राता᳹न्याद᳒धुः᳒ । ऊपोषूजाता᳹मा ᳹र्यास्यावार्थानं । अ᳒ग्नि᳒न्ना॑क्षन्तूनोगीराः॑ ॥ ३ ॥
अ द र्शि गाषीतु वि त्त मातुएत। या स्मि न्व्राकीता न्याटाच्द धु रूकिपोयषू जाटाहातहातइश। ता माचार्याकस्या वाचार्धा नाकाम ग्नाकाइ न्न क्षाटिहातहा न्तु नो गीचीरा इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥६॥
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मनु वैवस्वत |
अग्निः |
बृहती |
॥ मनवुर्वैस्वस्तः अग्निः बृहती ॥
अग्नी᳒रूत्थेपूरो᳒हितः᳒ । ग्रावा॑णोबर्हीरा॑ध्वारे᳒ । ऋचा᳒या॑मिमरुतोब्रह्मणस्पते । देवंआ᳒वोवा᳒रेण्यम् ॥ ४ ॥
अ ग्नि रु क्थातीइश। पु रो हाखिइ ताःणा। ग्राकवा णोकाबचर्ही रा ध्वाखिराणइश। ऋ चा या मिषीम रु तो ब्र ह्माचुणायस्पा ताटाइश। दा इ वंटिआ वोटाच्वाकरोपबाप्लणा याप्लाम् । हा इशा ॥७॥ अ ग्नि रु क्था बु होतूहोतहातइश। पु रौ वा उ वोखुवा हि तःशि। ग्राकवा णोकाब र्हि रौकिवा उ वोखिवा ध्व रा इशी। ऋ चौटाहोतया मि म रु तोषुब्र ह्मा णायिस्पा ताटाइश। दा इ वंटिआ वोटाच्वाकरोपबाप्लणा याप्लाम् । हा इशा ॥८॥
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सुदीतिपुरुमीढावाङ्गिरसौ तयोर्वान्यतरः |
अग्निः |
बृहती |
॥ सुदीतिपुरुमी-ळावांगिरसौ अग्निः बृहती ॥
अग्नी᳹मीळिष्वा᳒वा॑से । गा᳒था॑भीश्शीरा᳒शो॑चिषं । अ᳒ग्निं᳒राये᳒पू॑रूमिढाश्रूतन्ना᳒राः॑ । अग्निस्सू॑दीताये᳹च्छार्दिः ॥ ५ ॥
अ ग्नि मीफिळि ष्वाखाऔणहोफवाश। अ व सेकिगा धा भीचिश्शीथराकशो चाटाइ षाताम् । अ ग्निं रा या इषपु रू माटिइ ढाता। श्रू त न्न रो अ ग्नि स्सूटूदीत। ता या इ च्छापीर्दीत्र। द क्षातायाटाख् ॥९॥
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प्रस्कण्वः काण्वः |
अग्निः |
बृहती |
॥ प्रस्कण्वः काण्वः अग्निः बृहती ॥
श्रूधि᳒श्रुत्कर्णावन्ही॑भिः । देवैरा॑ग्ने᳒सायावा॑भिः । आसी॑दतुबर्ही᳒षी॑मित्रो᳹अर्यामा । प्रात᳒र्या᳒वा॑भीराध्वारे᳒ ॥ ६ ॥
श्रु धीताश्रूपधि श्रु त्क र्ण व न्हि भा इःशृ। देकवै रा ग्नेकिसा या वाटिभीःत। आकसी द तु ब र्हि षिषूमि त्रो अ र्याटीमात। प्राकत र्याटावात। भाटइ राखाऔ हो वाशि। एतध्व रातायाख ॥१०॥
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सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
बृहती |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः बृहती ॥
प्रदै᳒वो॑दासोअग्निः । दे᳒वइन्द्रोनाम᳒ज्मा᳒ना । आ᳸नू᳒मातारं॑पृथिवींवीवा॑वृते । तस्थौ᳹ना ᳹का॑स्याशर्माणि ॥ ७ ॥
प्रषदै वो दा सो अ ग्नीःतू। देकव इ न्द्रोकिना म ज्मा नाचीम् । आ नू माटिच्ताकरंचपृ थि वींटिवि वा वृ ताचीइश। त स्थौ नाभिकात। स्या शकार्म णि इ ळाटिभाखण। ओपइ ळाशा ॥११॥
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मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिमध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
आधा॑ज्मो᳒आधा॑वादी॑वः । बृ᳒हातो᳹रो॑चानाद᳒धी॑ । आया᳒वा᳸र्धस्वा᳒तन्वा᳒गीरा᳒मामा । आजाता᳒सूकृतॊ॑पृणा ॥ ८ ॥
अ ध ज्मा ओ वातु। आचधा वाकादायइ वाःटा। बृ ह तो रो चाचुनायदा धिटा। आ यौ होकिऔ होतावात। वा र्ध स्वाचित न्वाथागाचइ रायम माटा। आ जा ता सौकीहो औ होतिवात। हाफहा उ वाति। कृ तो पृ णाखी ॥१२॥
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| 53 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
अग्निः |
बृहती |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः अग्निः बृहती ॥
काया॑मानोवा᳒नात्वं᳒ । य᳸न्मा॑त्ररा᳒ज॑गन्नापः᳒ । ना᳒ताक्ते॑अग्नेप्रामृ᳹षेनीवार्त्ता॑नं । य᳒द्दूरेस᳒न्नी᳒हाभूवः ॥ ९ ॥
का य मा नोफीव ना तु वाकीम् । यकन्मा तृटारा जा गकिन्नाखपाःण। न त त्त यातीग्नातइशप्र मृ षेटिहातइशनी वाटार्ताखनणम् । य द्दू राटिइ सातान् । इ हाकाच्भूकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१३॥ ए का याति। मा नोकाव नाकातूखवाप्लमो इ तूखीवा मु हु वा हा इशू। औटहोतइ य न्मा तृटीरा जा गकिन्नाखपाप्लआखपा उ हु वा हा इशू। औटहोतच्इ नाकात त्त याटिग्ना इ प्र मृटीषा इ नी वाटीर्ताखनाप्लआ न्ताखाना मु हु वा हा इशू। औटहोतच्इ य द्दू रेकीस न्नि हाटिभूखवाप्लआ भूखावा उ हु वा हा इशू। औटहोतयाटख्औ हो वाशि। ऊखपाश ॥१४॥
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कण्वो घौरः |
अग्निः |
बृहती |
॥ कण्वो घौरः अग्निः बृहती ॥
नित्वा॑माग्ने᳒मानू॑र्दधे । ज्यो᳒तीर्ज॑ना॑याशा᳒श्वा॑ते । दीदेथाक᳹ण्वऋताजातउक्षीतः । यन्ना॑मास्य᳹न्तीकृष्टायाः ॥ १० ॥
नि त्वा म ग्नातीइश। म नु र्दाखिधाणइश। ज्यो ति र्ज नाकीयाचशायश्वा ताटाइश। दीकदा इ था ककीण्वा ऋ त जाटीत ऊटाक्षाखइ ताःणा। य न्ना माटिस्यातन्ताटट्इ कृखाऔ हो वाशि। ष्टाखयाःप्ल ॥१५॥ हो वा इ नि त्वा मषूग्ने म नु र्द धे होतूवातइश। ज्यो ति र्ज ना यषुश स्व ते दा इ देचूथा क ण्वाकिऋ त जाटिओ त ऊटिक्षाखइ ताःणा। य न्ना माचिस्यातन्ताटट्इ कृखऔ हो वाशि। ष्टाखयाःप्ल ॥१६॥