| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 55 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः बृहती ॥
दे᳒वो᳒वो॑द्रविणोदाः । पूर्णां॑वी॑वाष्ट्वासी᳒च॑म् । उद्वा॑सिन्चा᳒ध्वामू᳒पा॑वापृणध्वं । आदीद्वो॑देवा᳒ओहते ॥ १ ॥
दे वोणफवोखद्र वि णो दाःशी। पूकर्णां वि व ष्ट्वाटीच्सीकच मू द्वायिसि न्चाटा। ध्वा मु पा वाटीपृ णाकाध्वा माचादीयद्वो देटा। वा ओचाह ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१॥
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| 56 |
कण्वो घौरः |
ब्रह्मणस्पतिः |
बृहती |
॥ कण्वो घौरः ब्रह्मणस्पतिः बृहती ॥
प्रैतू᳹ब्रह्माण᳒स्पा᳒तीः । प्रा᳒देव्येतूसूनृ᳒ता । अच्छावीरं᳹नर्यं॑पङ्तीरा॑धसं । दे᳒वा᳒यज्ञ᳒न्ना᳒यन्तुनः ॥ २ ॥
प्रै तू ब्राखिह्मा णा स्पा तीःप्ली। प्रा दा इ व्येटीच्तूकसू नृ ताकिअ च्छाटावाखइ रणाम् । न र्यं पतिच्न्ती राचाधायसाटम् । दे वाटायाखज्ञणम् । नाटयाखऔ हो वाशि। तूखनाःश ॥२॥
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| 57 |
कण्वो घौरः |
यूप |
बृहती |
॥ कण्वो घौरः यूपः बृहती ॥
ऊर्ध्वाऊषू᳹णा॑ऊता᳒ये॑ । तिष्ठा॑देवो᳹ना ᳹सा॑वीता । ऊर्ध्वोवा᳒ज॑स्यासानीता᳹यादन्जी᳒भिः॑ । वा᳒घा᳹त्भी॑र्वीभ्वाया॑महे ॥ ३ ॥
ऊ र्ध्व ऊ षु णाकुऊ तापायाणइश। ति ष्ठा दे वो न सःषूवि ता ऊ र्ध्वो वाटुजात। स्याचसाकनि ताकायाचदायन्जी भीःटा। वाकघाटत्भीकर्वींचभा या माटिहाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥३॥
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| 58 |
सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
बृहती |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः बृहती ॥
प्र᳸योरा॑येनीनीषते । म᳒र्तोयस्तेवासोदा॑शा॑त् । सावीरन्धाक्तेअ᳒ग्निउत्थाशंसी॑नं । इत्माना॑सहस्रापोषी᳒णम् ॥ ४ ॥
प्र यो रा याफीइ नि नी ष तातुइश। म र्क्तो य स्तेकीवा सो दा शा त्साकुवी राटान्धात। ता य ग्ने उ क्था शंकूसी नंथात्मा ना साटिहात। स्रा पो षाटिइ णाखाण्म् । ओपइ ळाशा ॥४॥
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| 59 |
कण्वो घौरः |
अग्निः |
बृहती |
॥ कण्वो घौरः अग्निः बृहती ॥
प्रावो॑यंभंपू॑रूणां᳒ । वीशा᳒न्दे॑वायातीनां । अग्निंसूक्तेभिर्वाचो॑भिर्वृणीमहे । यंसमीदन्याइ᳒न्धा᳒ते ॥ ५ ॥
प्र वाःता। य म्भं पु रूटीणातम् । वीकशा न्देटावा य ताटिइ नाताम् । अ ग्निं सू क्तेषीभि र्व चो भिकीर्वृ णी माटिहाताइश। यां साटामा इ दाटिन्या इकान्ध ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
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| 60 |
उत्कील कात्य |
अग्निः |
बृहती |
॥ उत्कीलः कात्यः अग्निः बृहती ॥
आया᳒मग्नी᳒सूवी᳒र्या॑स्या । ई᳒शेहिसौ᳒भा᳒गस्य । रायाई᳒शेस्वापत्यास्यागो᳒मा॑तः । ईशे॑हिवृ᳒त्राहा᳒थानाम् ॥ ६ ॥
अ य म ग्निषीस्सु वी र्य स्य हातुबुश। आ इ शेकिच्ही सौ भ स्याचुहो वाटाहातइश। रा य ईकिशे स्वा प त्याकीस्याकगोयमा ताटाहो वाटाहातइश। ईकशे हाटाइ वृताहो वाटाहातइश। त्रा हाचाथाथना मि ळाटाभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥६॥
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वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः बृहती ॥
त्वा᳸मा॑ग्नेगृहा᳒पा॑तिः । त्वं᳒होता॑नोआ᳸ध्वारे । त्वां᳒पो᳒ता॑विश्वावारप्रा᳒चे॑तः । य᳒क्षीया᳹सी॑चावार्यम् ॥ ७ ॥
त्व म ग्नेषिगृ ह प तातीइःश। त्वंकहो ता नोकिअ ध्व रा इ त्वा म्पोटूतात। वा इ श्वा वा राकुप्र चा इ ताभीऔकहोफवाप्लहाणइश। य क्षा इ याटीसीतहो वाटाहातइश। चा वा राटीयाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥७॥ त्व माखाग्ने गृ ह प ता इःशू। त्वंकहो ताकानो अ ध्व रेकीत्वापम्पो ताफाऔ होफाऔ होफावातहातइश। वा इ श्वा वा राकुप्र चा इ तापीऔ होफाऔ होफवातहातइश। य क्षा इ यायीसापऔ होफाऔ होफवातहातइश। चा वा राटियाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥८॥ त्व म ग्ने गृ हातुप तीःता। त्वं होखाताशनो अ ध्वाखिराणइश। त्वा म्पोखाताशवि श्वा वाखिराण। प्रा चे ताकिथ्य क्षा इ याटीट्साखऔ हो वाश। चा वा रीटियाखम् ॥९॥
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विश्वामित्रो गाथिनः |
अग्निः |
बृहती |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः अग्निः बृहती ॥
साखायस्त्वाववृमहे । दे᳒वंमर्ता᳒साऊता᳒ये । आ᳒पान्ना॑पातंसूभा᳹गं॑सूदंसा॑सं । सु᳒प्रा᳒तू॑र्तीमानेहा᳒सम् ॥ ८ ॥
स खा य स्त्वा बु होतूहोतहातइश। व वृ माखिहाणइश। देकव म्म र्क्ताटिहातस ऊटाताखयाणइश। अ पाचान्न पाखातशम् सु भ गौ वातीहातइशसू दंकासाखसणम् । सु प्रा तूटिर्क्तीतम् । आ ने हाटिसाखण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥१०॥