| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 63 |
श्यावाश्वः अथवा वामदेव |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ श्यावाश्वो वामदेवो वा अग्निः त्रिष्टुप् ॥
आजू॑होताहविषा॑मर्जयध्वं । नीहो᳒ता॑रंगृहा᳒पा॑तिंदधिध्वम् । ईळा॑स्पातेनामा॑सारा᳒ताहा॑व्यं । सपर्यातायाजतम्पस्त्याठ॑नाम् ॥ १ ॥
आ जु हो ताती। ह वि षा म र्ज याटूचध्वांयवाट। नि हो ता रषीङ्गृ हा पा ति न्द धाटूचइचध्वांयवापइ ळाखास्पा ताताइश। ना म साचिरा ता हाटिओ व्याटाम् । सा प री याकीता या ज तकीम्पापस्त्यो बाप्ला। ओ नाप्लाम् । हा इशा ॥१॥
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| 64 |
उपस्तुत वार्ष्टिहव्य |
अग्निः |
जगती |
॥ उपस्तुतो वाहिष्ठव्यः अग्निः जगती ॥
चित्र᳒इच्छीशो᳒स्ता᳒रुणास्यावक्षा᳒थाः॑ । न᳒यो᳒माता᳹रा॑वन्वे᳒तीधा᳒ता॑वे । अ᳒नुधा᳒याद᳒जीज॑नाद᳒धा॑चीदा᳒ । वावक्षस्सद्योमा॑हीदूत्याटट्यञ्चा᳒र॑॑न् ॥ २ ॥
ओ इषाचि त्र इ च्छा इ शोयूस्त रु णापिस्या वा क्षाकिथाःफ। ओ इ न यो मा ता रायूव नु वापिइ ती धा ताकीवेफ। ओ अ नु धा यायुद जी ज नापीद धाचाचीकदाफ। ओषइ व व क्ष सा द्योयूमा हीटाद्यू त्या न्चाखिरात्रन् । दु त्य न्च र न्माटुहीख ॥२॥ चि त्राताएत। एतएपइ च्छि शो स्त रू ण स्य व क्ष थषेक्ष थो ही ही ही यातूहातबुश। एतएपन यो मा त रा व न्वे ति धा तषेवे त वे ही ही ही यातूहातबुश। एतएपअ नू धा य द जी ज न द धा चिषैदा चि दा ही ही ही यातूहातबुश। एतएपव व क्ष स्स द्यो म हि द्यु त्य न्च रषैन्च र न्ही ही ही यातूहा उ वाति। एतऋ तूटाख् ॥३॥
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बृहदुक्थो वामदेव्यः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ बृहदुक्तो वामदेव्यः अग्निः त्रिष्टुप् ॥
ईद᳒न्ताएकं॑पारा᳹ऊ॑ताएकं॑ । तृतीये॑नज्योती॑षासं᳒वीशस्वा । सं᳒वे᳒शान᳹स्तन्वेटट्यचारू᳒रेधि । प्रियो॑देवा᳒नां॑पा॑रामेज᳒नित्रे ॥ ३ ॥
ओखहाशप्लहातहातइश। ई द न्त आ इ कांटूपा रा ऊकित एखाकशम् । तृ ती ये न ज्योटुती षाचासं वी शाखिस्वाश। संकवे श ना स्ताटीन्वे चाकारु रेखाधिश। ओखहाशप्लहातहातइश। प्रि यो दे वा नांटुप र मापिइ जा नाखिइश। त्रात्रइश ॥४॥
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| 66 |
कुत्स आङ्गिरसः |
अग्निः |
जगती |
॥ कुत्स आंगिरसः अग्निः जगती ॥
इमं᳒स्तोमामर्हातेजाता᳒वेदसे । राथा॑मी᳹वा᳒संमा॑हेमामा॑नीषा᳒या । भ᳒द्रा᳒हीनःप्रामा॑तीरस्यासंसादि । अग्ने॑सख्येमारी॑षामावायन्ता᳒वा॑ ॥ ४ ॥
इ मं स्तोखिमाशम र्हा तेखिजाण। ता वेकाद सेचाहो येटार था मीखिवाशस म्मा हेखिमाण। मा नीकाष याचाहो येटाभ द्रा हीखिनःशप्र मा तीखिराण। स्या संकास दीचाहो येटाअ ग्ना इ साखिख्याणइश। मा रा इ षाखिमाण। वा यकान्त वाटाव होखइ ळाशा ॥५॥
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| 67 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः त्रिष्टुप् ॥
मूर्धानंदीवोआ॑रातिं᳹पृ॑थिव्याः᳒ । वैश्वा᳒नारा᳒मृतआ᳒जाता᳒म᳒ग्निम् । काविं᳒सम्म्राजमा᳹तीथि॑ञ्ज॑ना॑नां । आ᳒स᳒न्नापा॑त्रञ्जनयन्तादेवाः ॥ ५ ॥
मू र्धा होतिहातइश। न न्दाखाइ वाःणा। आ र ता इ म्पृ थीटूव्याकवैथश्वाषन र मृ त आ जाकूता माटाग्नीतम् । का विं स म्म्राषीज मा ति था इकुन्ज नाटनातम् । आकस न्ना पा त्रटीन्ज न यापिन्ता दाखाइश। वाःत्र ॥६॥ हो वा इ मू र्धा होतूहातइश। न न्दाकाइ वोटाआ रा तिंकिपृ थीखाव्याःप्ल। इ होकाइ हाकाइटया वैथाश्वाषन र मृ त आ जाकूत माखाग्निशम् । इ होकाइ हाकाइटया काथाविं स म्म्रा जाकीमा ति थिकिन्ज नाखानाशम् । इ होकाइ हाकाइटयाकआथस न्ना पा त्रंकीजा ना यकिन्त देखावाःप्ल। इ होकाइ हाकाईटयाखाऔ हो वाशि। ईख ॥७॥
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| 68 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः अग्निः ॥
वित्वा᳒दापो᳒नापा᳒र्वातस्यापृष्ठात् । उक्थे᳒भी॑रग्नेर्जनयन्तादे᳒वाः᳒ । तन्त्वा᳒गीरा॑स्सू॑ष्टू॑तायो॑र्वाजयन्ति । आ᳒जि᳹न्नागीर्वावाहो॑जीग्यूरा᳒श्वाः ॥ ६ ॥
वि त्व दोतिहातइश। आ पो न प र्व ताकूस्या पाटारि ष्ठातात् । उ त्थे भी र ग्नेषुज ना य न्ताकीदाटइ वाःता। त न्त्वा गी रषीस्सु ष्टु त यो वाकुज याटान्तीत। आकजि न्न गा इ र्व वाटूहोतजा इ ग्यूटिट्राखऔ हो वाशि। अ श्वाःटाख् ॥८॥ हाफया या इ दी वोखुहा इ वि त्वाशीत् । आ पोकाना पाकार्वा त स्य पाखीरि ष्ठाशात् । हाफया या इ दि वोखुहा इ उ क्था इशु। भी रा ग्नेटिजा ना यकिन्त देखावाःप्ल। हाफया या इ दी वोखुहा इ त न्त्वाशी। गी राकास्सु ष्टू त यो वाकुज याखान्तिश। हाफया या इ दी वोखुहा या जिशिम् । ना गा इ र्व वाटुहोत। जा इ ग्यूटिट्राखऔ हो वाशि। अ श्वाःटाख् ॥९॥
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वामदेवो गौतमः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ वामदेवो गौतमः अग्निः ॥
आ᳒वोरा᳒जानमध्वर᳹स्या॑रूद्रं᳒ । हो᳒ता॑रंसत्याया᳒जंरो᳒द॑॑स्योः । अग्निंपूरा᳒तानाइत्नो᳒राचिक्तात् । हिरण्यरूपामा᳒वा॑सेकृणुध्वम् ॥ ७ ॥
आ वो रा जाती। न म ध्वा र स्य रूखूद्रशम् । हो ताकराचम् । सषत्य य जं रो द सीखूयोःप्ल। अ ग्निंचापू राचात न इ त्नो रा चीखूक्ताशत् । हि रचाण्य रू पाटिम व सापिइ का र्णूखि। ध्वात्रम् ॥१०॥
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वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः ॥
इन्धेरा᳒जासामर्यो᳹नामो॑भिः । यस्याप्रा᳹ती॑कामा॑हूतङ्घृतेना । नारो᳒हव्येभीरीडतेसाबाधाः । अ᳒ग्नी᳒राग्रामूषा᳒सा᳒माशोचि ॥ ८ ॥
इ न्धाताओपइ हाणाबु हा बु हा बुशुरा जा स म र्यो नषूमो भी यो भी यो भीःतू। य स्याताओपहाणबु हा बु हा बुशुप्र ती क मा हु त ङ्घृ ताषैइ ना इ ना इ नातू। न राताओपहाणबु हा बु हा बुशुह व्ये भी रि ढ ते सषृबा धा बा धा बा धाःतू। अ ग्नाताओपहाणबु हा बु हा उ वातू। अ ग्राचामू ष साटिम शोकाउ वाता। चीख ॥११॥ हा बु हो वाकीहा बु हो वाकीहा बु हो वाकी। इ न्धे रा जाषीस म र्योचिनाकमोकभीटयो भीटायो भीःटा। य स्य प्र ति कषुमा हु त ङ्घृकूताकइ नाटाआ इ नाटिआ इ नाटि। न रो ह व्ये भीषुरी ढ तेचिसाकबाकधाटबा धाटबा धाःटा। हा बु हो वाकीहा बु हो वाकीहा बु हो वाकी। अ ग्नि रा ग्राचीमू ष साटिम शोकाउ वाता। चीख ॥१२॥
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| 71 |
त्रिशिरास्त्वाष्ट्र |
अग्निः |
त्रिष्टुप् |
॥ त्रिशिरास्त्वाष्ट्र्ः अग्निः त्रिष्टुप् ॥
प्रा᳒केतुना॑बृहाता᳹यात्य᳒ग्निः᳒ । आ᳒रो॑दसी॑वृषाभो᳒रो॑रवीति । दीवा᳒श्चीद᳒न्तादूपामा᳒मू᳒दानाट् । आ᳒पा᳒मूपास्थे॑माहीषो᳒वावर्धा ॥ ९ ॥
प्रा के तु नाकीबृ ह ता याकीती य ग्ना इषीहो इ हो वाकीहोचइश। आ रोथाद साचाइश। वृ षा भो रोकीरा वि ता इषीहो इ हो वाटीहोचइश। दीकव श्चि दा न्ताकीदू पा माकिमु दा नाषिढ्ढो इ हो वाकीहोचइश। अ पाचामु पा स्थेकिमा ही षोकिवा व र्ध हो इषुहो इ हो वाकीच्हायउ वाटा। देतदि वाटाख्म् ॥१३॥ हा हा यौ हो वाषुइ प्राखाकेण। तु नाकाबृ ह ता या ति याखूग्निःप्ल। हा हा यौ हो वाषुआखरोण। द साचाइ वृ ष भो रो र वीखूतिश। हा हा यौ हो वाषुइ दीखावाःण। चि दा न्ताभिदू पा माकिमु दाखानाशट् । हा हा यौ हो वाषुआखपाणम् । उ पा स्थेभिमा हि षोकिवा वाखार्धाश। हा हा यौ हो वाषुहाखऔ हो वाशि। एतदि वाटाख्म् ॥१४॥
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| 72 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
त्रिपाद विराड् गायत्री |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः त्रिपदाविराटगायत्री ॥
अग्निन्नारो᳒दीधितिभिरारण्योः॑ । ह᳒स्ता॑च्युतञ्जनयतप्राशस्तम् । दूरेदृशङ्गृहा᳒पा॑तीमाथव्युम् ॥ १० ॥
हा बु हा बुषीहा वा ग्नीतीम् । न रो न रोषीन रो दीकिधि ति भीकिर राताण्योःच। हा बु हा बुषीहा बु हातिस्तातत् । च्यु ता न्चु ताषीन्चु ता न्जकिना या त प्राकीशातस्तचम् । हा बु हा बुषीहा बु दूतिरातइश। दृ शा न्दृ शाषीन्दृ शा न्गृकिहा प ती माकीथातव्यूचम् । हा बु हा बुषीहा उ वाति। ईख। ॥१५॥ हा बु हा बुषीहा वा ग्नीतिम् । न रो दीतिधी ति भीकिर राताण्योटण्योटण्योःच। हा बु हा बुषीहा बु हातिस्तातत् । च्यू ताचान्जकना या त प्राकीशातस्तंटस्तंटस्तचम् । हा बु हा बुषीहा बु दूतिरातइश। दृ शा न् गृकीहा प ती माकीथातव्यूंटव्यूंटव्यूचम् । हा बु हा बुषीहा उ वाति। ईख ॥१६॥