| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 11 |
आयुङ्क्ष्वाहिः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ आयुन्ङ्क्श्वाहिः (ऋ विरूपांगिरसः) अग्निः गायत्री ॥
नामास्ते᳒अग्ना᳒ओज॑से । गृणन्तीदे᳒वा॑कृष्टायाः । आमै᳒रामित्रा᳒मर्दया ॥ १ ॥
न म स्तौ होतिग्नातइश। ओ जा साकिइ गृ णाटिन्ताखइ देणा। वाचकायरि ष्टा याःटि। आ मा इ राटीट्माखऔ हो वाशि। त्र म र्द याखी ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 12 |
वामदेवो गौतमः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः अग्निः गायत्री ॥
दूतंवो॑विश्वावे॑दसम् । हव्यावाहामामा᳒र्क्त्यम्॑ । याजीष्ठमृन्जसे᳒गीरा ॥ २ ॥
दूणतांफवोखवि श्व वे द साशुम् । हाथव्या वा हा म माटुर्त्ताखयणम् । याचजि ष्ठ मृ ञ्ज सेटुहातइश। गीचरा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 13 |
प्रयोगो भार्गवः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ प्रयोगो भागर्वः अग्निः गायत्री ॥
ऊपात्वाजामायो᳒गीराः॑ । देदीशतिर्हा॑विष्कृताः । वायोरा॑नीकेअस्थिरन् ॥ ३ ॥
उ प त्वा जाती। म योटागी राःटा। ओ इ या यू र्दाषुइ दि श ती र्हातूवि ष्कृ ताःटि। ओकइ या यूटिच्र्वाकयो राटानीत। क या स्थाखिइ रात्रान् । अ श्वाथागाटवाःख ॥३॥ उ प त्वा जा मातुयो गी राःति। दाचइशदि शाकाता इ र्हा विटीष्काखर्ताःण। वा यो र नातीहा इ का याती। स्था इ राटिऔ होखावा इ ळाशि ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 14 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः अग्निः गायत्री ॥
ऊ॑पात्वाग्नेदीवे᳒दीवे । दो᳒षा॑वस्तार्धीयावायम्᳒ । ना᳒मोभा᳹र॑न्ताएमा॑सि ॥ ४ ॥
ऊ पा त्वापिग्ने दि वे दि वा इशू। दो षाटावा स्ताटार्द्धी याचावा यचाम् । ना मोटाभा राटाच्न्ताचएकमाटसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 15 |
शुनः शेप आजीगर्तिः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ शुनः शेप आजीर्गितः अग्निः गायत्री ॥
जरा॑बोधाताव्दीविड्ढी । वीशेवी᳒शेय॑ज्ञीयाया । स्तो᳸मंरुद्रायादृशीक᳒म् ॥ ५ ॥
जा राता। बो धाटाबो धाटाता द्वीचावि ढ्ढाचाइश। वी शेकावा इ शेटिय ज्ञोटाया याखाऔ हो वाशि। स्तो मंकारू द्रा य दृ शीकूकाचम् ॥६॥ ज रा बो धोतीवात। ताचद्वी वि ड्ढाचिइश। वी शा इ वाटीइ शेता। याथज्ञीशया या स्तोकिच्मांचरूयद्रापयाणदृश। शी कोखाइ ळाशा ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 16 |
मेधातिथिः काण्वः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ मेधातिथिः अग्निः गायत्री ॥
प्रातित्यञ्चा᳒रुमाध्वारं᳒ । गो᳸पी॑था᳒यप्रा᳒हू॑यसे । मा᳒रुद्भीरग्नाआग॑हि ॥ ६ ॥
प्रा ति त्यापिञ्चा रू म ध्व राशुम् । गो पीथाथा या प्राचिहुकयाखसाणइश। मा रूचात्भीकरा ग्ना याटिगचहा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 17 |
शुनः शेप आजीगर्तिः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ शुनः शेप आजीर्गितः अग्निः गायत्री ॥
अ॑श्वन्न᳒त्वावारा॑व᳒न्तम् । व᳸न्द᳹ध्याआग्नि᳒न्नामोभिः । स᳒म्म्रा᳒जन्तमाध्वाराणा॑म् ॥ ७ ॥
आ श्वाटाऔ होखावाश। ना त्वाटाऔ होखावाश। वा र व न्तंषीव न्द ध्यैति। आ ग्नाटाऔ होखावाश। न मो भिषिस्स म्म्रा ज न्तातुम् । आ ध्व राकिणा मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥९॥ अ श्व न्न त्वाषीवा र व न्तातीम् । व न्द ध्याषिअ ग्नि न्न मो भाचुइःश। सकम्म्रा जथाच्न्ता माचाध्व राखाऔ हो वा इखुहो हाणइश। औकहोटयाखऔ हो वाशि। णाखम् ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 17 |
शुनः शेप आजीगर्तिः |
अग्निः |
गायत्री |
अ॑श्वन्न᳒त्वावारा॑व᳒न्तम् । व᳸न्द᳹ध्याआग्नि᳒न्नामोभिः । स᳒म्म्रा᳒जन्तमाध्वाराणा॑म् ॥ ७ ॥
अ श्व न्न त्वा बु होतूहातइश। वा रा वाखिन्तंशव न्दकाध्योपहाणइश। अ ग्ना इ न्न मापुऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वाखिभीःण। सकम्म्रा जथान्ता मा ध्व रापीऔ हो वा इ होखुहाणइश। उ हु वापिणा मे हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 18 |
प्रयोगो भार्गवः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ प्रयोगो भागर्वः अग्निः गायत्री ॥
और्वा᳒भृगूवच्छूचिम् । आप्नावा᳒नावादाहु॑वे । अग्निं᳹सामुद्रावाससम् ॥ ८ ॥
औ र्व भृ गु व दोचूहातइश। शोखचिशम् । आ प्ना वाटिनाकवा दाटाहु वाटाइ हु वा योचीइश। अ ग्नाटाइं सा मूटिच्सा मू ओचि। द्रा वाचासाकसातबुश। बाख ॥१२॥ औ र्व भृ गु वषुच्छु चि मेतिशु चिताम् । आ प्न वाकिनाचवा दाटाहु वाताइ हु वाटिइ हु वाटिएत। अ ग्ना इं साटीमूतसा मूटासा मूटाएत। द्राट्ट्वाखऔ हो वाशि। साचसाटमेख ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 19 |
प्रयोगो भार्गवः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ प्रयोगो भागर्वः अग्निः गायत्री ॥
अ᳒ग्नी᳒मिन्धानो॑माना॑सा । धी॑यंसचेतामा᳒र्त्याः॑ । अ᳒ग्नी᳒मिन्धेवीवा᳒स्वा॑भिः ॥ ९ ॥
अ ग्नि मिषिन्धा नो म न सौ हो औ हो वातेहातइश। धी यं स चे त मौटूहोटहातहो वाटार्त्याःता। अ ग्ना इ माटीट्इ न्धाखाऔ हो वाशि। वी वा स्वाटिभीःख ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 20 |
वत्सः काण्वः |
अग्निः |
गायत्री |
॥ वत्सः काण्वः अग्निः गायत्री ॥
आदी᳒त्प्रत्ना᳒स्यारे᳒ता॑सः । ज्योतिःपश्यन्तीवासा᳒रम् । पा᳒रोयातिध्या᳹तेदीवि᳒ ॥ १० ॥
आ दि प्र त्नाफीस्य रेशात साःका। ज्यो तिः प श्यषीन्ति वा साटिराचम् । पा रो याटिति ध्य ताचिइश। दि वि हो इ हो औकूहो औकाहो वापाहाप्लबुश। बाख ॥१५॥