| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 35 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
बृहती |
॥ शय्युबार्हस्पत्यः अग्निः बृहती ॥
यज्ञा᳒याज्ञा᳒वोअग्ना᳒ये॑ । गी᳒रा᳒गी॑राचाद᳒क्षासे । प्र᳸प्रा᳒वाया᳒मामृ᳹त᳒ञ्जा॑तावेदसम् । प्रीयम्मित्र᳒न्ना᳒शंसिषम् ॥ १ ॥
य ज्ञा य ज्ञाती। वोतग्न याताई गी राटिगि राखाहाशप्लहातइ चाचाद क्षाखासाणइश। प्र प्राटाच्वाकय म मृ तषीन्जा ता वेयिदा साटाम् । प्री याचाम्मि त्राकिन्नाकिशं सि षा मेकीहि या औ हो औ होखूइ ळाप्ला ॥१॥ य ज्ञा य ज्ञाती। होतइ वोताग्ना याकाएखहि याणा। गी राकाच्गीचरा चाटादाचक्षा साचाइश। प्र प्राथाच्वा याचामाकमृ त न्जा ता वेटुदाखसणम् । प्री यचाम्मि त्रा न्नाकिशं सि षा मेकीहि या औ होखाइ ळाप्ला ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 35 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
बृहती |
यज्ञा᳒याज्ञा᳒वोअग्ना᳒ये॑ । गी᳒रा᳒गी॑राचाद᳒क्षासे । प्र᳸प्रा᳒वाया᳒मामृ᳹त᳒ञ्जा॑तावेदसम् । प्रीयम्मित्र᳒न्ना᳒शंसिषम् ॥ १ ॥
या ज्ञा या ज्ञाटीवो अ ग्ना याटीइश। गा इ रा गा इ राटूचा द क्षा साटीइश। प्र प्रा वा याटीच्माकमृ त न्जाकिता वेटादाखसणम् । प्राचयायम्मा इ त्रा न्नाचीशांयसाटइ षाखाण्म् । ओपइ ळाप्ला ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 35 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
बृहती |
यज्ञा᳒याज्ञा᳒वोअग्ना᳒ये॑ । गी᳒रा᳒गी॑राचाद᳒क्षासे । प्र᳸प्रा᳒वाया᳒मामृ᳹त᳒ञ्जा॑तावेदसम् । प्रीयम्मित्र᳒न्ना᳒शंसिषम् ॥ १ ॥
य ज्ञाणाय ज्ञाणावोफअ ग्नाखायाणइश। गा इ रा गी रा चाटूदा क्षापासा इशा। प्र प्राटाच्वाकय म मृ त न्जा तापूवाशहि म्माचाइश। दातसातम् । प्रा य म्मि त्रा न्ना शांकूसि षाकाबुश। बाख ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 36 |
भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः अग्निः बृहती ॥
पाहिनोअग्नाएका॑या । पा᳒ह्यूताद्वि᳒तीया᳒या । पा᳒हीगीर्भीस्तीसृ᳒भीरूर्जां॑पते । पाही᳹चातासृभी॑र्वसो ॥ २ ॥
पा हि नो आखीग्ना ए क याप्ली। पाचह्यु त चि ताचीइ यायायाट। पा ही गीटिर्भि स्ति सृ भी रूचुर्जांकपायताटइश। पा हीकाचा तौकाहोतवात। स्र भि र्वाटिसाखण्बुश। ओपइ ळाप्ला ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 36 |
भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
पाहिनोअग्नाएका॑या । पा᳒ह्यूताद्वि᳒तीया᳒या । पा᳒हीगीर्भीस्तीसृ᳒भीरूर्जां॑पते । पाही᳹चातासृभी॑र्वसो ॥ २ ॥
पा ही नोषिअ ग्न ए क यातुएत। पाकहा उ ताटिद्वि ता इ यापीयाश। पा हाटाइ गाखाइ र्भीःणा। ता इ सृ भी रूकुर्जा म्पा ताटिऔ हो औ होखीवाण। पापही हाचाइश। चाकता सृ भाटिऔ हो औ होखीवाण। वापसा वे हि या हाप्लु। होप्लइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 36 |
भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
पाहिनोअग्नाएका॑या । पा᳒ह्यूताद्वि᳒तीया᳒या । पा᳒हीगीर्भीस्तीसृ᳒भीरूर्जां॑पते । पाही᳹चातासृभी॑र्वसो ॥ २ ॥
पा हि नो अ ग्न एफूक यातापापह्यू त द्वी तीप्लीयाङयाश। पा हि गी र्भीषीस्ति सृ भि रू र्जा म्पाखूताणइश। पा हाचाइश। चाखता हा ओ वाशी। सृ भि र्व सोती। ऊटपाख ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 37 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
बृहती |
॥ शय्युबार्हस्पत्यः अग्निः बृहती ॥
बृ᳒हा᳒त्भी॑रग्नेरर्च्ची॑भिः । शुक्रेणा॑देवाशोची᳒षा॑ । भारा᳒द्वा॑जेसमीधा । नो᳒या॑विष्यारेवा᳒त्पा॑वकदीदिहि ॥ ३ ॥
बृ हा त्भीपिर ग्ने र र्च्चि भी र्हा बुशृ। शु क्रा इ णा देकुवा शो चि षाचीभा राकाद्वायजेटहो वाटाहातइश। स मीचाधा नोथायाचवीयष्ठि याटाहो वाटाहातइश। रे वाचात्पायवाटहो वाटाहातइश। का दी दिकिही इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥ बृ ह त्भी र ग्नेषुर र्च्चि भीतिरेत। शु क्रा इ णा देकुवा शो चि षाचीभाकराचद्वायजेटओ वाका। स मीचाधा नोथायाचवीयष्ठि याटाओ वाका। रे वाचात्पायवाटओ वाका। का दी दिकिही इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाप्ला ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 38 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अग्निः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अग्निः बृहती ॥
त्वय्या॑ग्नेस्वा᳒हुतः । प्रीया᳒सा᳒सन्तूसूरायाः॑ । यन्ता᳒रोयेमाघा᳹वा॑नोज᳒ना॑नाम् । ऊर्वन्दय᳸न्तागो᳒नाम् ॥ ४ ॥
त्व य्यापाग्ने स्वा हु ता हा बुशृ। प्रि या सा सचीन्तु सूकारा योचाय न्ताकारोययापईफमा घा वा नोफीज नातानातम् । ऊचर्वायन्द याटाहातच्न्ताकगो नाकामी ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 39 |
भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः अग्निः बृहती ॥
अग्नेजरी᳒तार्वीस्पातिः । तपानो᳒देवारक्षा᳒साः । अ᳒प्रो॑षिवान्ग्रहापा॑तिर्माहंआ॑सि । दी॑वा᳒स्पायू᳒र्दुरोणायुः ॥ ५ ॥
अ ग्ने ज रि त र्वि स्प तिषृरौ हो वा ए हि यातूहातबुश। त पाकानो देटावाचर क्ष साचिअ प्रोकाषायइ वाटान् । गा र्हा पा ताटीइ र्मा हंकियाखसीण। दी वाचास्पा यौकावा उ वोखिवाप्लहातहातइश। दु रो ण यूःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥११॥ अ ग्ने ज रि ता र्वीफूस्प तीतास्तापपा नो दे व र क्ष साःशू। ता पा नो दे वषुर क्ष सा अ प्रो षीटूवातन् । गृ हाचाप ता इ र्माचीहंकयाखसीण। ओखहाप्लहातहातइश। दी व स्पाचियूःट। ओखहाप्लहातहातइश। दु रोटाच्णाकयूःच। ओखहाप्लहा हाखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 40 |
प्रस्कण्वः काण्वः |
अग्निः |
बृहती |
॥ प्रस्कण्वः काण्वः अग्निः बृहती ॥
अग्नेवी᳒वा॑स्वादूषा᳒साः । चि᳒त्रं᳒रा᳒धोआ᳒मा॑र्क्त्याम्॑ । आदाशू᳒षेजातवेदोवा᳒हात्वम्᳒ । अद्या᳒देवं᳹ऊ॑ष᳸र्बुधाः ॥ ६ ॥
अ ग्ने वी वातीहातबुश। स्वाकदू षाटासातश्चा इ त्रांटिहातइ रा धोटिहातअ माटार्ताखयणम् । आचदायशु षेटा। जा ताचावे दोथाच्वा हाकातूयवाटम् । अ द्या हो इ दाटुइ वताम् । ऊकषा र्बुटाट्धाखऔ हो वाशि। हु वेतावा सूःटाख् ॥१३॥ अ ग्ने वि वषीस्व दु षातिसाःत। चि त्रं रा धोकीअ माकार्क्त्या माकादायशू षेटा। जा ताचावे दोथाच्वा हाकातूयवाटम् । अ द्या दाटिइ वताम् । ऊकषा र्बूटाट्धाखऔ हो वाशि। वि दातावा सूःटाख् ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 41 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
अग्निः |
बृहती |
॥ शय्युबार्हस्पत्यः (तृणपाणिः) अग्निः बृहती ॥
त्व᳸न्नाश्चित्रावूत्य । वा᳒सो᳒राधांसिचो᳒दया । अ᳒स्या᳒रायेत्वा᳒मा॑ग्नेरा॑थीरासी᳒ । वीदागा᳒धन्तूचेतूनाः ॥ ७ ॥
त्व न्नापाश्चि त्र ऊ त्याशी। वा सोचाराकधांचसि चोकादाययाटआ स्याकाराखयाणइश। त्वाचमा ग्नेकाच्रा थाकाइ रायासीटवी दाकागाखधणम् । तु चोताहातइश। तूकना औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 42 |
भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः अग्निः बृहती ॥
त्वा᳒मीत्सप्रा᳒था॑᳒असि । अग्नेत्राता᳒ऋताःकाविः । त्वांविप्रा॑सस्समीधानदीदिवः । आ᳒वीवासन्तीवेधासाः ॥ ८ ॥
हा बु त्व मिषीत्स प्र था य सि हातूबुश। अ ग्ने त्राचिताकॠ ताःकाक वापाइ र्हाप्लाहाङइश। त्वांचवि प्राकास स्साचामी धाकान दी दी वापीहाप्लहाङइश। आ वी वा सापीहाप्लहातच्न्तीकवोपबाप्लधा सोप्ला। हा इशा ॥१६॥ त्व न्त्वा मेति। इ त्साकीप्रा थाचाया सोकायाखसीण। अ ग्नेचात्राकताचॠ ताःचाका वाकाइः काखावीःण। त्वांचवि प्राकास स्सा मी धाकीनाचदी दी वोकिदाखइ वाःणा। आ वि वाकिसाटहातच्न्तीकवे धाटासाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 43 |
भर्गः प्रागाथः |
अग्निः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः अग्निः बृहती ॥
आनो॑आग्नेवायो᳒वृ᳒धं॑ । रायिंपा॑वाका॑शंस्यम्॑ । रास्वा॑चन᳒उपमातेपूरूस्पृहं॑ । सू॑नीं᳒तीसू᳒याशस्तरम् ॥ ९ ॥
आ नो अ ग्नेषीव यो वृ ध मेतुरा याखाइशम् । पातच्वा काकाशांयसाटयातम् । रा स्वाचाच न उ पाचीमा तेथापू रूयास्पृ हाटाम् । सू ना इ ता इ सूटूहातइश। या शाचास्ताकरा मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 44 |
सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
बृहती |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः बृहती ॥
यो᳒विश्वाद᳹यातेवासू॑ । हो᳸ता॑मन्द्रोजना॑नां । मा᳒धोर्नपात्राप्राथा᳒मान्यस्मै । प्रस्तो᳒मायन्त्वग्ना᳒ये ॥ १० ॥
यो वी स्वा दाखीया ते वा सूशी। हो ताटाम न्द्रोटाच्ज नाचानाशम् । मा धोटार्ना पाटात्रा प्र थ मा न्य स्मैचू। प्रा स्तोटामा याटाचन्तूकवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥१९॥ यो वि श्वा द य तेषूव सु हातिबुश। हो ताटाम न्द्रोटाच्ज ना ना मोचीवाकओ वाका। मा धोटार्ना पाटात्रा प्र थ मा न्य स्माचूओ वाकाओ वाका। प्रा स्तोटामा याटाच्न्तूकवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 44 |
सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
बृहती |
यो᳒विश्वाद᳹यातेवासू॑ । हो᳸ता॑मन्द्रोजना॑नां । मा᳒धोर्नपात्राप्राथा᳒मान्यस्मै । प्रस्तो᳒मायन्त्वग्ना᳒ये ॥ १० ॥
यो वि श्वा द य तेषूव स्वो हा ओ हातुएत। हो ताटामकन्द्रो ज नाकिना मोटाहातओटहा एखाम धोखार्न पाता। त्रा प्राकाथ माकान्नाचया स्माकाओटहातओटहा एखाप्रा स्तोखामा याताच्न्तूकवोपवोपबाप्लग्ना योप्ला। हा इशा ॥२१॥ यो वि श्वा द य ते व सूतूएत। हो ताचाम न्द्रो ज नाचीम्माकधोचर्ना पौ वातित्। त्रा प्र थ मा न्य स्मैचूप्राकस्तोतमा यौ वातित्। त्व ग्नाचाया इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२२॥