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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 107 |
प्रयोगो भार्गवः |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ प्रयोगो भागर्वः (सोभिरः काण्वः) अग्निः उष्णिक् ॥
प्रमंही॑ष्ठायगायता । ऋताव्नेबृहाते᳒शुक्राशो॑चिषे । उ᳒प᳒स्तूता᳹सो॑अग्नाये ॥ १ ॥
प्र मं हाखिइ ष्ठा य गा य ताशू। ऋ ता व्नेटिच्बृ ह तेकिशु क्रापाशोशचातइ षाताइश। उ पा औपिहोशस्तु ता सोपिआशग्नाखयोप्ल। हा इशा ॥१॥ प्र मं हि ष्ठा य गातू। याचता ऋ ताटिव्नेटच्बृ हाकातायइ शूटाक्राकशो चाटाइ षाताइश। ऊ पाचास्तु तौटाच्हुकवा एटाहो वाका। साकवोपबाप्ल्ग्ना योप्ला। हा इशा ॥२॥ प्र मं हि ष्ठा या गाफुइ य्याखाईखयाश। याथता ऋ ता व्नेकीबृ ह ते शूटीक्रा शौटाहौटहु वाटीइ चा इ षाटीइश। उ पाकाहो इ स्तु ताकीहोकसोथअ ग्नाटायाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥३॥ प्र मं हि ष्ठा य गाषूय त प्र मं हि ष्ठोतूवात। या गाकाय ता ऋ ताटीव्नेखई बृ ह तेणीशु क्रा शोफिचातइ षाताइश। उ पौफाहो वाताहातइश। स्तु तौफाहो वाताहातइश। स ओप्लाबा ग्ना योप्लि। हा इशा ॥४॥
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सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः उष्णिक् ॥
प्र᳸सोअग्नेतावोतीभीः । सू᳒वीरा॑भिस्तारातीवा᳒जकर्म॑भिः । या᳒स्यत्वं᳒सख्यमा᳒वी᳒थ ॥ २ ॥
प्रा सोटाहातआ ग्नेटाहातइश। त वाताआ उ वाटि। तीखभीःप्ल। सू वीचाराशभि स्ता राचिती वाचाज ककार्मा भि र्याचिस्याटहातइश। त्वं सापाख्य मो बाप्लिवा इ थोप्लि। हा इशा ॥५॥
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सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः उष्णिक् ॥
तं᳒गूर्धायास्व᳒र्णारं । देवासो॑देवा᳹मा॑रातिन्द॑धन्विरे । देवात्रा᳒हव्या᳒मू॑हिषे ॥ ३ ॥
त ङ्गूणाफ्र्धा याखास्व र्णाप्लारोङवाश। देकवा सोचादेकवा मा रा ताटीइ न्द धाटिहो इ न्वाटिइ राताइश। देथवा त्रा ह व्य मूटुहातहातइश। हाटइ षाखाऔ हो वाशि। ऊखक् ॥६॥ त ङ्गू र्ध या स्व र्णातूरातम् । देकवा सोकादाकइ वा माचिरा ताटाइ न्द ध न्वि रा उ वा इशॄ। देखवाशप्ल्त्रातहापव्य मो बाप्लिहा इ षोप्लि। हा इशा ॥७॥ त ङ्गू र्ध या स्वौकुहो आ र्णातिरातम् । दे वाटासोखदेण। वा मा र ताटीइ न्दाखाधाप्लन्वाखइ रा इशि। हा होखाहाणइश। दे वाटात्राखहाण। व्य मू हाखिणफप्ल्इश। षाखइश ॥८॥
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प्रयोगो भार्गवः सौभरि: काण्वो वा |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ प्रयोगो भागर्वः सोभिरः काण्वो वा अग्निः उष्णिक् ॥
मानो॑हृ॑णिथाआ᳒तीथिं । वा᳹सूरग्निः᳒पू॑रूप्राशस्ता᳒एषः । या᳒सुहोता॑सूआध्वारः ॥ ४ ॥
मा नाःता। हृ णीकाथाटआ ति थिंकिवा सुटाराखग्निःश। पु रौफाहो वाताहातइशप्र शौफाहो वाताहातइश। स्त ओ बाप्लिआ इ षोप्लि। हा इशा ॥९॥ मा नोताहातबुश। हापर्णी थाणाआणति थिंफाप्ल्वा सु राखिग्नाणइःश। पू रोचाहा होचाइशप्राकशोथहा होकाथ्स्ता येपाषा ए हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
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सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः उष्णिक् ॥
भद्रो᳹नो॑अग्नि᳒राहूतः । भ᳒द्रा᳒रातिस्सू᳒भागभद्रो᳹आ॑ध्वारः᳒ । भद्रा᳹ऊतप्रा᳒शा॑स्तयः ॥ ५ ॥
भ द्रो नोफिओप्लहो अ ग्नि राखीहु ता एप्लि। भाकद्रा राथाताचइशसुकभ गाटाभ द्रोटाअ ध्वाखाराःण। भ द्रा ऊटितात। प्रापशाशस्ताखयोप्ल। हा इशा ॥११॥
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सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः उष्णिक् ॥
या᳒जी॑ष्ठं॑त्वाववृमहे । देवन्दे॑वत्रा᳹हो ᳹ता॑रामा᳒मा॑र्क्त्यम् । अस्या᳒यज्ञा᳹स्या॑सुक्रातु॑म् ॥ ६ ॥
या जीणाष्ठ न्त्वाफावाखवृ म हा इशी। देकव न्दे व त्रा हो ताटूराचम् । आ माचार्क्त्याकमा स्य या ज्ञाटी। स्यापसुशक्राखतूप्लम् । हा इशा ॥१२॥
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सौभरि: काण्व: |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ सोभिरः काण्वः अग्निः उष्णिक् ॥
ता᳒दग्नेद्युम्नामा᳒भारा । य᳒त्सासा᳒हासाद॑नेकञ्ची॑दत्री᳒णं । मन्यु᳒ञ्जना॑स्यादूढ्यम् ॥ ७ ॥
त द ग्ने द्यूफीम्ना मा भा रोचीवाश। य त्सा साटीहातसा दाटानातइश। कथञ्चि द त्राटिइ णाताम् । म न्यूकाञ्ज नाचास्य दूटाच्होयढापया मे हि याप्लीहाश। होप्लइ ळाशा ॥१३॥
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विश्वमना वैयश्वः |
अग्निः |
उष्णिक् |
॥ विश्वमना वैयश्वः अग्निः उष्णिक् ॥
य᳒द्वा᳒ऊविश्पा᳹तीश्शितः । सुप्रीतो॑मा᳒नुषोवीशे । विश्वेदग्निप्रा᳒तिर॑क्षांसिसेधति ॥ ८ ॥
य द्वा ऊपिवि श्प ति श्शि तःशु। सु प्री तोकिमा नु षोकिच्वी शेचावी श्वे दाटिग्नीःत। प्रा ति र क्षां सि सेकूच्धाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
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आ᳒या᳒मग्नि᳒श्रेष्ठातमः । आ᳒यं᳒वामाधू᳒मक्तमः । आयं᳒साहस्रासा᳒तमः । अ᳒स्मि᳒न्ना॑स्तुसूवीर्यम् ॥ ९ ॥
आ यंचाअ ग्नि श्रेचिष्ठाकत मोचाहोटच्आ यचाम् । वाटम धु म त्त मोकुहोटच्आ यचाम् । सा हाचास्रा साचात मोटाहोटच्आ यचाम् । अ स्मि न्ना स्तुकीसु वीकाथ्र्या मौटाहोत। ओपइ ळाशा ॥१५॥
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आ᳒दित्यः᳒शुक्रा᳒ऊ᳒दगात्पूरास्तात् । ज्यो᳸तिःकृण्वन्वी᳒तामो॑बाधामानः । आ᳒भा᳒स॑मानाप्रादीशो॑नूसा᳒र्वाः । भद्रस्या᳒कर्ता॑रूचायन्नाआगात् ॥ १० ॥
आ दि त्य श्शूती। क्राचउ द गा त्पु रु राखूस्ताशत् । ज्योकतिः कृ ण्वाकिन्वि त मो बा ध माखूनाःप्ल। आकभा स मा नाःटीप्रा दी शोकिनु साखार्वाःप्ल। भ द्र स्य काकीर्तातरू च यापिन्ना याखा। गात्रत् ॥१६॥