| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 447 |
त्रसदस्युः |
इन्द्रः |
द्विपदा विराट् |
॥ त्रसदस्युः इन्द्रः द्विपदा विराट् ॥
आ᳸चे॑त्याग्नी᳒श्ची᳒की॑तिः । ह᳒व्यावाण्णासू᳸मा᳒द्रा॑थः ॥ १ ॥
अ चे तीति। अ ग्नि श्ची काटीइ तीतार्हाटव्यातवाटट्ण्णाखऔ हो वाशि। सू मा द्राटिथाःख ॥१॥ अ चे ति याती। ग्ना इ श्चाषिइ का इ तीटीर्हौ हो औटिहोत। ह व्या वाटिट्ण्णाखऔ हो वाशि। एतच्सू मा द्राटिथाःख ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 448 |
त्रसदस्युः |
इन्द्रः |
द्विपदा विराट् |
॥ त्रसदस्युः इन्द्रः द्विपदा विराट् ॥
अ᳒ग्नेत्व᳒न्नो॑अन्ता॑मः । ऊता᳒त्राता᳒शीवो᳒भू॑वोवारूत्थ्याःठ॑ ॥ २ ॥
ओतग्नातइश। त्व नोपायाशहि म्मा न्ताखिमाःप्ल। ऊ त त्रा ता शि वोकूभू वाःखा। शि वो भु वापीवा रोप्लाबा था योप्लि। हा इशा ॥३॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 448 |
त्रसदस्युः |
इन्द्रः |
द्विपदा विराट् |
अ᳒ग्नेत्व᳒न्नो॑अन्ता॑मः । ऊता᳒त्राता᳒शीवो᳒भू॑वोवारूत्थ्याःठ॑ ॥ २ ॥
अ ग्नौ हो इ त्वौ होतूइश। न्नोतआ न्ता माकिआ उ वाटि। ऊखताशत्रा ता उ वोखीवाण। शि वो भू वाःटीख् ॥४॥
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| 448 |
त्रसदस्युः |
इन्द्रः |
द्विपदा विराट् |
अ᳒ग्नेत्व᳒न्नो॑अन्ता॑मः । ऊता᳒त्राता᳒शीवो᳒भू॑वोवारूत्थ्याःठ॑ ॥ २ ॥
अ ग्ने तू वाखीन्नो अ न्ता माःप्ली। ऊ त त्रा ताषीशि वो भु वोकीव रा बु हौकीहा होखाबाप्लथा योप्ला। हा इशा ॥५॥
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| 448 |
त्रसदस्युः |
इन्द्रः |
द्विपदा विराट् |
अ᳒ग्नेत्व᳒न्नो॑अन्ता॑मः । ऊता᳒त्राता᳒शीवो᳒भू॑वोवारूत्थ्याःठ॑ ॥ २ ॥
अ ग्ने हो इ तू वाखून्नो अ न्ता माःप्लु। उ ताटाहो वाथाऔटच्होयइ त्रा ताटिशि वोखाणफप्ल्। भूखवाःप्ल ॥६॥
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| 449 |
पृष्ध्रः काण्वः |
अग्निः |
द्विपदा गायत्री |
॥ पृषध्रः काण्वः अग्निः द्विपदा विराट् ॥
भा᳒गोनाचित्रः । अग्निर्मा᳒हो᳒नां । द᳸धा॑तीरा᳒त्नम् ॥ ३ ॥
भा गाःता। ना चि त्रोषिअ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। ती राटात्नाखम् ॥७॥ भ गो न चि त्राःतु। अ ग्नि र्म होटीनातन्दाटट्धाखऔ हो वाशि। एतच्ती राटात्नाखम् ॥८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 450 |
बन्धु सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लौपायना वा |
अग्निः |
द्विपदा विराट् |
॥ बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लोपायना वा अग्निः द्विपदा विराट् ॥
वि᳸श्व॑स्यप्रस्तो॑भा । पूरो᳒वासन्या᳹दीवेहा᳒नूनम् ॥ ४ ॥
वि श्व स्याति। प्र स्तो भाकिपु रो वा साटीन्य दि वेति। हाकनू नाटाट्माखऔ हो वाशि। धाखनशम् ॥९॥ औ हो इ वि श्व स्यातू। प्र स्तो भाटिपु रौ हो वातीहातइश। वा साटाच्न्याकदि वेकाहा नू नाटिट्माखऔ हो वाशि। धाखर्माश ॥१०॥
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देवता (Devata) |
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| 451 |
बन्धु सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लौपायना वा |
इन्द्रः |
द्विपदा गायत्री |
॥ बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लोपायना वा इन्द्रः द्विपदा विराट् ॥
ऊषा᳒आपा᳒स्वासुष्टा᳒माः । सं᳒वा॑र्तयतिवार्क्तानिं᳹सूजाता᳒ता॑ ॥ ५ ॥
उ षा अ पाती। स्वाकसु ष्टाखामाःण। सं वाटार्क्ताकय ति वाटिर्क्ताखनीणम् । सूटट्जाखऔ हो वाशि। एतताटताख ॥११॥
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| 452 |
बन्धु सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लौपायना वा |
इन्द्रः |
द्विपदा गायत्री |
॥ बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लोपायना वा इन्द्रः द्विपदा विराट् ॥
इमा॑नूकं॑भू᳒वा॑नासिषधेम । इन्द्रा॑श्वावि᳒श्वे॑चादेवाः᳒ ॥ ६ ॥
इ मा नू क म्भूतुव नाता। सीकष धाटाई माकाउ वाता। ईखहाश। इथन्द्रा श्च वा इकुउ वाता। ईखहाश। च देकावाटट्याखऔ हो वाशि। वीखशाःप्ल ॥१२॥
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| 453 |
संवर्त आङ्गिरसः |
उषाः |
द्विपदा विराट् |
॥ सम्वर्त आङ्गिरसः उषाः द्विपदा विराट् ॥
ऊर्जा᳒मित्रोवारू॑णोपिन्वा᳒ताईळाठ॑ । पी᳸वा॑रीमीषं॑कृणू॑हीना॑इन्द्रा ॥ ७ ॥
ऊ र्जाता। मि त्रो वा रू णः पिकून्वा त आटिइ ळाता। पि बा री मि ष ङ्कृषूणु ही न आ इ न्द्राखूउ वाता। ऊखपाश ॥१३॥
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| 454 |
भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः |
विश्वेदेवाः |
द्विपदा विराट् |
॥ भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः विश्वेदेवाः द्विपदा विराट् ॥
विस्रूतायो᳹या ᳹था॑पा᳒था॑ । इन्द्रत्वद्य॑न्तूरातायाः॑ ॥ ८ ॥
वि स्रू वि स्रूती। ता याटास्ता याटाय थाकापा थाःचा। आ इ न्द्राटित्वा द्याटाच्न्तूकरोपबाप्लता योप्ला। हा इशा ॥१४॥
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| 455 |
आत्रेयः |
विश्वेदेवाः |
द्विपदा त्रिष्टुप् |
॥ आत्रेयः विश्वेदेवाः द्विपदा विराट् ॥
आया᳹वा ᳹जं॑देवा᳒ही॑तंसनेम᳒ । मा॑देमाश्शा᳒ता᳒हीमासूवी᳒राः॑ ॥ ९ ॥
अ या वा जातीम् । दा इ वाकिच्ही तंचास नेखामाश। मा दे माकिश्शा ताचाहि म्माटाश्शाकता हाटाट्इ माखाऔ हो वाशि। सू वीकाराःटख् ॥१५॥
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| 456 |
कवष ऐलूषः |
विश्वेदेवाः |
द्विपदा गायत्री |
॥ कवत्र ऐलूवः विश्वेदेवाः द्विपदा विराट् ॥
इन्द्रोवि᳒श्वास्यराजति ॥ १० ॥
इ न्द्रोखावि श्व स्य राप्लीज तीशा। होखइ ळाशा ॥१६॥ इ न्द्रोटाच्होयइ वाटाइ श्वाचा। स्या राकाच्ज ती हो वाती। होखइ ळाशा ॥१७॥