| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 419 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ गाेतमाे राहूगणः इन्द्रः उष्णिक् ॥
ए᳒न्द्रा॑नोगधिप्रिया । सत्रा॑जितगोह्या । गीरि᳒र्न्ना॑विश्वातः॑पृथूःपा॑तीर्दीवः ॥ १ ॥
ए न्द्न नाःति। गकधि प्राटायाख। सा त्रा जि ताकीगो हाटायाखागि रा इ र्न्न वातिइश। श्वा ताः पातिर्त्थूः पाटाट्र्ताखऔ हो वाशि। र्दीखवाःप्ल ॥१॥ ए न्द्न नोफिग धि प्राणियाश। सा त्रा जि ताकीगो हायायौटहो वाताहातइश। गि रा इ र्न्न वौटीहो वाताहातइश। श्वा ताः पाटिर्त्थूःखऔ हो वाशि। पा ती र्दी वाःती ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 419 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
ए᳒न्द्रा॑नोगधिप्रिया । सत्रा॑जितगोह्या । गीरि᳒र्न्ना॑विश्वातः॑पृथूःपा॑तीर्दीवः ॥ १ ॥
य स्याताओपत्या च्छाताओंपब रप्लाम्मातदातइश। दि वोताओकदा साताओपय रप्लान्धातयातयाशन् । अ याताओंकस सोताओपमप्लइ न्द्रातातातइश। सु ताःताओःकपि बाताओपबाप्ल। ऊखपाश ॥३॥ य स्या त्य च्छांफीब र म्मा दाकीइश। दी वो दा साषीय र न्धा य न्ना यांकूच्साकसोखम इ न्द्रातितातइश। सूटताखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥४॥ य स्या त्या च्छांखीब र म्मा दाप्लीइश। दी वोटाच्दाकसा य रषिन्ध य न्न यांकीच्साकसोखम इ न्द्रातितातइश। सु ताकाओः पाटाट्इ बाखाऔ हो वाशि। ईखतिश ॥५॥ याफस्या त्याप्लाच्छ द्धो इ शं ब राखूम्म दा एप्लि। दी वो दा साषीय र न्ध यचीन्न यां साभिसोखम इ न्द्रा ताखीऔ हो वाशि। सूखताःप्लपि बोखाइ ळाशा ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 420 |
विश्वमना वैयश्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
यस्यत्य᳹च्छां᳹बरम्मा᳒दे॑ । दीवो᳒दा᳒सा॑यारन्धा᳒यन् । आयं᳒ससो᳒मा॑इन्द्रतेसूतःपीबा ॥ २ ॥
हा बु गृ णातीइश। त दा इ न्द्रोखीताणइश। श वाटाओ वाकाउ पा माखिन्देण। वा ता त या इषुय द्धं साटिइ वाखात्र मो ज सा शा चीशू। पा ताटाऔटहो वा हाखिऔ हो वाशि। द्यूखभीःप्ल ॥७॥
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| 421 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ नृमेध आंगिरसः इन्द्रः उष्णिक् ॥
गृणेता᳒दिन्द्रा॑तेशा᳒वाः॑ । ऊपा᳒मान्देवा᳒ता॑तये । यद्धं᳹सी॑वृत्र᳒मोज॑सा᳒शा᳒चीपते ॥ ३ ॥
गृ णे त दाखी। औ होखाइ न्द्र तेचिश वाःणा। उ पाचामा न्देथावा ताकाताटयाखइ य द्धांचिसि वातात्र मोकाज साचाशा चीचापाफ। ताखइश ॥८॥
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| 421 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
गृणेता᳒दिन्द्रा॑तेशा᳒वाः॑ । ऊपा᳒मान्देवा᳒ता॑तये । यद्धं᳹सी॑वृत्र᳒मोज॑सा᳒शा᳒चीपते ॥ ३ ॥
गृ णे त दौ होफुइ न्द्र तेशिश वाःका। उ पाचामा न्देटाच्वा ताकाता य उ पाचीमाटन्देथच्वा ताकाताटयातइश। य द्धं सीकिवृ त्र मोटिज साकाउ वाता। शाखचीप्लपाखता इ होखिइ ळाशा ॥९॥
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| 422 |
भरद्वाजो बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ भरद्वाजो बार्हस्पत्यः इन्द्रः उष्णिक् ॥
याइ᳒न्द्रासोमापाता॑मः । मा᳒द॑श्शवीष्ठाचे᳒ताती । ये᳒नाहंसिन्याटट्यत्रीणंता᳒मीमाहे ॥ ४ ॥
या इ न्द्र सोती। मा पाटाताखमाःण। मा द श्श वाषीइ ष्ठ चेकित ताचाइश। या इ नाटिहांखसीण। नी य त्रि णाकीन्ताचमीकमाफ। हाखइश ॥१०॥
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| 423 |
प्रगाथो घौरः काण्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ प्रगाथो घौरः काण्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
तूचेतूनाः᳹यात᳒त्सू॑नाः । द्राघी॑याआ᳹यू॑र्जीवा᳒से॑ । आ॑दि॑त्यासस्सम्महसाःकृणो᳒ता॑नः ॥ ५ ॥
तु चे तु नाषीय ता त्सूखिनाःण। द्रा घीकाय आखायूःण। जी वाचासा आ दिटित्या साटास्स म्म ह साःटी। कृ णो ताखि। नात्र ॥११॥
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| 424 |
पर्वतः काण्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ पर्वतः काण्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
वे᳒त्थाहि᳒नि᳒रिऋ॑तीनां । वज्रा॑हस्तापारिव्रा᳒जं॑ । आहा॑रहश्शुन्धूः᳹पा॑रीपादा॑मिवा ॥ ६ ॥
वे त्था हिषिनि ॠ ती नांती। वा ज्र हा स्ताकीपा रीकाव्र जा माकिहा राकाहा शुकान्ध्युः पा रीकिप दाटामाख। इ वात्रा ॥१२॥
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| 425 |
इरिम्बिठिः काण्वः |
आदित्यः |
उष्णिक् |
॥ इरिम्बिठः काण्वः आदित्याः उष्णिक् ॥
आ᳸पा᳸मी॑वा᳒मा᳒पस्री᳒धं । आ᳒पा॑सेधतदुर्मा॑तिं । आदी॑त्यासोयूयोतानानो᳒अं᳒हा॑सः ॥ ७ ॥
अ पा मी वा म पातू। स्री धा म प सेषुध ताकादु र्म्माटातीतम् । आ दीटात्या सोटाच्यूकयो त ना नाषीआ उ वाकिओपबांप्लहा सोप्ला। हाप्लइशा ॥१३॥
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| 426 |
विश्वमना वैयश्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
पीबासो᳒मा॑मिन्द्रा᳒मन्द॑तुत्वा । य᳸न्ते॑सूषा᳒वाहरिय्य᳒श्वाद्रिः᳒ । सोतु᳒र्बा॑हुभ्यांसू᳹यातोना᳒र्वा ॥ ८ ॥
पी बाता। सो म मि न्द्र मषुन्द तु त्वाटियकन्ते सु षा व ह र्याकूश्वाटद्रीःत। सोट तर्बा हु भीटियांतसू याटाट्ताखऔ हो वाशि। एतच्ना र्वाटाख् ॥१४॥ हा बु पि बाती। सो मा मि न्द्र मषुन्द तु त्वाकिद तु त्वाचियकन्ते सु षा व ह र्यायूश्वा द्रीटाश्वा द्रीःटा। सोकतु र्बा हु भ्यांकीसू य ताकिस्सू य तोकिनाटट्र्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥१५॥