| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 409 |
ऋण त्रसदस्यू |
वाजिनः |
पुर उष्णिक् |
॥ ऋण – त्रसदस्यू वाजिनः पुरउष्णिक् ॥
इन्द्रा॑सूते᳒षुसो᳒मे॑षु । क्रातुं॑पुनीषाउक्त्थं । वीदे᳒वृधा᳒स्याद᳒क्षा॑स्यामाहं᳒हिषः᳒ ॥ १ ॥
इ न्द्राता। सू ते षु सो मेकुषू हो येटिहूसट्हो इ क्र तुंषीपु नि ष उ क्थ्यांचु। वी दाचाइ वायार्द्धाटस्यातद क्षापास्याश। म हंटाहि षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥१॥ इ न्द्राताहो इ ह वेकीहोचइशसु ते षु सो मे षु कृ तुंषृपु नी ष उ क्थ्याचूम् । वी दाचाइ वायार्द्धाटस्याकद क्ष स्याचि। मा हं हीफि। षाःख ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 409 |
ऋण त्रसदस्यू |
वाजिनः |
पुर उष्णिक् |
इन्द्रा॑सूते᳒षुसो᳒मे॑षु । क्रातुं॑पुनीषाउक्त्थं । वीदे᳒वृधा᳒स्याद᳒क्षा॑स्यामाहं᳒हिषः᳒ ॥ १ ॥
इ न्द्र सु ते षुषुसो मेताषूत। क्रा तूंटापू ना इ षाकीउ क्थ्यांचावी देकावा र्द्धाटास्याकद क्ष स्याचि। म हं हा इ षाःटु। म हंटाहि षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 410 |
ऋण त्रसदस्यू |
पवमानः सोमः |
द्विपदा विराट् त्रिपदा अनुष्टुप्पिपीलिकामध्या |
॥ ऋण – त्रसदस्यू पवमानः सोमः द्विपदा विराट् ॥
तमुवांठ॑भिप्रा᳒गा॑यत । पू॑रुहूतं᳒पू॑रूष्टुतं᳒ । इन्द्रं॑गी᳹र्भीस्ता॑वीषामा᳒वी॑वासता ॥ २ ॥
ताणमूफआ भि प्र गाखीय ताशा। पु रू हू तं पू रूटूष्टू ताटाम् । इ न्द्राटाच्ङ्गा इ र्भीकिस्ता वि षाटिमात। वी वा साटिट्ताखऔ हो वाशि। ओखकाःप्ल ॥४॥ ताणमूफअ भि प्र गाचीय ते दाशिम् । पु रू हू ता म्पु रूटूष्टू ताटाम् । आ इ न्द्र ङ्गीटीच्र्भि स्त वि ष माकुच्वी वाकासायताट। आ इ न्द्राकिङ्गाखइ र्भीताच्स्ताकवि षाटामात। वाटइ वाखाऔ हो वाशि। स त एखि ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 410 |
ऋण त्रसदस्यू |
पवमानः सोमः |
द्विपदा विराट् त्रिपदा अनुष्टुप्पिपीलिकामध्या |
तमुवांठ॑भिप्रा᳒गा॑यत । पू॑रुहूतं᳒पू॑रूष्टुतं᳒ । इन्द्रं॑गी᳹र्भीस्ता॑वीषामा᳒वी॑वासता ॥ २ ॥
हा बु त मू अ भीतू। प्र गाकाय ता हाभिबुशपु रू हूखितणम् । पु रूकाष्टु तां हाभिवि न्द्रा ङ्गाखिइ र्भीताच्स्ताकवि षापामाफहाणबुश। वि वा साखितात्र। दीखविश ॥६॥ ता मूफाअ भीणाफप्ल्हो इ प्र गाखीय ता एप्लि। पु रू हूभितातम्पु रू ष्टुभितातम्पु रूटाष्टुखतणम् । इ न्द्रा ङ्गीभिर्भातच्इशस्त वा इ षाभीमात। वी वाभिसातवि वाटासाखताण। आ इ न्द्र ङ्गीकीर्भातच्इ स्त वि ष मा वि वाटृवातहातस ताटाउ वोखावाश। ऊख ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 411 |
नारदः काण्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ नारदः काण्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
तन्तेमा᳒दं॑गृणीमसि । वृ᳒षा॑णंप्रक्षु᳹सासा॑हिं । ऊलोकाकूत्नू᳒माद्रीवो᳒हारिश्रीय॑म् ॥ ३ ॥
त न्ते म द ङ्गृ णिटूमा सीचा। वृ षा णं पृ क्षु साटूचसाकहाचइशम् । ऊ लो का कृ त्नुषुम द्राटाइ वोताहाटरीतश्राटयाखण्म् । ओपइ ळाशा ॥८॥ त न्ते म दषीङ्गृ णी म सीतीएत। वृ षा औकिहोखणं प्र क्षु सायीस हीशाम् । ऊ लो औकिहोखक कृ त्नु म द्रि वाःशु। हाकरोपबाप्लश्रा यांप्ला। हा इशा ॥९॥ ताणन्तेफप्ल्हो इ म दांखीगृ णी म सी एप्लु। वृ षा होटिणं प्र क्षु सायीसा हिंटा। ऊ लो क कृ त्नुषुम द्रि वो हायीरीटच्श्रीकया मौपाहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१०॥ त न्दे म दांफीगृ णी म साकीइश। वा र्षा णं प्र क्षूकुसा साटाहींतहो वाटाहातइश। ऊ लो काटिकृतहो वाटाहातइश। त्नु मा द्राटिट्इ वाखाऔ हो वाशि। हाचरि श्री याटिख्म् ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 412 |
गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ गाेषूक्त्यश्वसूक्तिनाै काण्वायनो इन्द्रः उष्णिक् ॥
य᳒त्सो᳒मा॑मिन्द्रावि᳒ष्णा॑वे । यद्वा॑घात्रीता᳒आप्त्ये᳒ । यद्वा᳹मा॑रूत्सूम᳹न्दसेसमिन्दुभिः ॥ ४ ॥
औचहोययौटहोखवाश। य त्सो म मीखीन्द्रा वी ष्णाकिवाफइश। औचहोययौटहोखवाश। य द्वा घ त्रीखीता या प्तीकियाफइश। औचहोययौटहोखवाश। य द्वा म रूखीत्सू म न्दकिसाफइश। औचहोययौटहोखवात्र। सा मि न्दुटिभीःख ॥१२॥ हा यो हा य त्सोषुम माता। न्द्राटट्वाखऔ हो वाशि। ष्णाखवेश। य द्वाटाघा त्रीकात आचाप्ती येकाय द्वा म रू त्सु माटूहो न्द साटिइश। स माटाहो येटान्दु भि रोखिइ ळाशा ॥१३॥ य त्सो म मि न्द्रषुवि ष्णातावातइश। य द्वा घ त्रीषीत आ प्ता याचीइश। य द्वा म रू त्सू मचून्दा सोपाहाणइश। साटट्माखऔ हो वाशि। एतन्दु भीःटाख ॥१४॥ य त्सो म माफीइ न्द्र वी ष्ण वाकुइश। । य द्वाटाघचत्री ताचाआ प्तेकाय द्वा माटिरूतत् । सू माटान्दाखसाणइश। सातट्माखऔ हो वाशि। न्दुखभिःप्ल ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 413 |
गोषूक्त्यश्वसूक्तिनौ काण्वायनौ |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
| 414 |
पर्वतः काण्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ गाेषूक्त्यश्वसूक्तिनाै काण्वायनो इन्द्रः उष्णिक् ॥ ॥ पर्वतः काण्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
ए᳒दुमा᳹धोर्मा॑दिन्ता॑रं । सि᳒ञ्चा᳹ध्व॑र्योअ᳒न्धा॑सा । ए᳒वा᳒हीवीर᳒स्ता᳒वा॑तेसादा᳒वृ॑धः ॥ ५ ॥
ए᳒न्दूमिन्द्रा॑यसिञ्चत । पी᳒बातासोम्यम्माधू॑ । प्रारा᳒धां॑सिचोदयतामहीत्वाना ॥ ६ ॥
ए दूफामा धोफार्म दाखाइ न्ताखारशम् । सिकञ्चा ध्व र्यो अ न्ध साटूधाखसाण। एकवा हि वी राषीस्त व ताटिइ वाखाताणइश। स दा वाखि। र्धाःत्र ॥१६॥ ए दु म धौ होपुर्म दि न्त राकीम् । सि ञ्चा होभिअ ध्व र्योटिअ न्धा साभि। आ इ वायिहि वीटाराचस्त व ताचिइश। स दाटाच्वृवृधा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१७॥ ए न्दु मिफिन्द्राफाय सीखाञ्च ताशा। पि बाटात सोचाम्य म्मा धूकिप्रा रा धांटिसीत। चो द य तायीमापहीश। त्वा ना औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 415 |
विश्वमना वैयश्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥ ॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
ए᳒तोन्विन्द्रंस्ता᳒वा॑मा । सा᳸खा॑यस्तोम्यन्ना᳒रं॑ । कृष्टिर्यो᳹विश्वा॑अभ्यास्ते᳒काई᳒त् ॥ ७ ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। सा खाकाच्य स्तोटाम्याखणफप्ल्। ना र मा कृ ष्टीषुयो र्वि श्वाचि। आ भि या स्त्याटीइ का ईटित् । आखऔ हो वाशि। ऊख ॥१९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 416 |
विश्वमना वैयश्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥ ॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
इ᳸न्द्रा॑यासामा॑गाय᳒ता । वि᳒प्रा॑याबृहातेबृहा᳒त् । ब्र᳒ह्माकृ᳒ते॑वीपश्ची᳒तेपानस्या᳒वे ॥ ८ ॥
इ न्द्रा य साती। मा गा य ताकिवा इ प्राचिया बृटाहा तेकाबृ हाचात्ब्र ह्मा कृ तेटीच्वीकपा श्चाटाट्इ ताखाऔ हो वाशि। पाचन स्य वेटिख् ॥२०॥ इ न्द्राखाय सा म गाप्लीयाङताश। वा इ प्राकिच्या बृटाह ताखाणफप्ल्इश। बृखहाशत् । ब्रथह्मा कृ तेटिच्वी पा श्चि तेटीओ इ पाटिट्नाखऔ हो वाशि। स्याखवेश ॥२१॥ औकहो औ हो औकीहोखवात्र। इ न्द्राटाच्याकसा म गाटियाकता वि प्राटिया बृचाहाकते बृकाहाशत् । ब्रथह्मा कृ तेटिवीचीपा श्चि तेटि। औकहो औ हो औकीहोखवात्र। एतपाचन स्य वेटिख् ॥२२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 417 |
विश्वमना वैयश्वः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ विश्वमना वैयश्वः इन्द्रः उष्णिक् ॥
यए᳒काई᳒द्वीद᳒या॑ते । वा᳒सूमर्क्ता॑यादाशू᳒षे॑ । ई᳸शा॑नोअ᳒प्रातिष्कुता । इन्द्रो᳹अङ्गा ॥ ९ ॥
याखएप्लकाखइ द्वी द याखीताणइश। वाचसु म र्क्ताटिहातया दाकाशूखषाणइश। आ इ शाकिनो अ प्रा ताटीहा इ ष्कृखिताःण। आ इ न्द्रोकिअ ङ्गाटाट्याखऔ हो वाशि। ईखन्द्राःप्ल ॥२३॥ य ए क इ दि हातूहातइश। वी द य ता इषुव सु माटिर्क्तातच्या दाचाशू षा इशि। ई शा नोभिआतप्राकति ष्कृ ताकिआ उ वाटि। ईखन्द्राःप्ल। अकङ्गा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२४॥ य ए क इषीद्वि द यातितातइश। वा सु म र्क्ता यापुदा हिंशा। शूतषातइश। आ इ शाकिनो अ प्र तीचीष्कृ ताःका। आ इ शा नोयीअ प्र ताचिइश। ष्कृतताःत। आ इ न्द्रोकिअ ङ्गाटाट्याखऔ हो वाशि। ईखन्द्राःप्ल ॥२५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 418 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
उष्णिक् |
॥ नृमेध आंगिरसः इन्द्रः उष्णिक् ॥
सा᳸खा॑य᳒आ᳒शी॑षामहे । ब्रह्मे᳒न्द्रा॑यावज्रीणे । स्तूषा᳒ऊ॑षूवोनृतामा॑याधृष्णा॑वे ॥ १० ॥
स खा य यातीहातबुश। शि षाखाम हे हा बुशी। ब्र ह्माखाइ न्द्रा हा बुशी। या व ज्र णा स्तु त ऊ षुटॄहातइश। वो नृ त माटीहातच्याकधा र्ष्णाटाट्वाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२६॥ स खा य या शि षा म हे ब्रषेह्मे न्द्रा य व ज्रि णोतूवात। आ इ तिटिवातहो वाटाहातइश। स्तु ष ऊचिषुपवो होप्लाहाङइश। ना र्क्तामामातहो वाटाहातयाचधा र्ष्णाटाट्वाखऔ हो वाशि। ईख ॥२७॥ साफखा य याणिशि षा माफिहाखइशब्र ह्मे न्द्रा य व ज्रिप्लूणोटहाङइश। स्तु ष ऊचिषू वोकाना र्क्ता माकियाखधृप्लहातहाचइ वोकाना र्क्ता माकियाखधृप्लहातहाचइ ष्णा वाटिऔ होताऔ होतावातहाकथ्धृ ष्णा वाटिऔ होताऔ होतावातहातहाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥२८॥