| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 392 |
अवस्युरात्रेयः |
अश्विनौ |
पंक्तिः |
॥ अवस्युरात्रयेः अश्विनौ पङ्क्त्तिः ॥
आ᳒तेअग्नेइधीमही᳒ । घूमन्तं॑देवाआज᳒रं॑ । यद्धस्या᳒तेपानी॑यसी । सामी᳒द्दीदया॑तिद्याविईळंस्तोतृ᳒भ्यआ᳒भारा ॥ १ ॥
आपते अ ग्न इ धी माप्लूहाङइश। द्यू म न्त न्देतीच्वाकआटजचरा माता। य द्ध्या स्याभितातइशपा नीकायाखसीण। सा मी द्दि दकीय ताटाइ द्याचावि याता। ई षं स्तोटितृत। भ्यापयाशभाखरोप्ल। हा इशा ॥१॥ आ ते अ ग्न इ धीफूमा हाखाइ द्यु म न्ताप्लीन्देखवा आ ज रप्लीम् । य द्ध स्या ते प नी य सीषृस मि द्दि द य तातूइश। हिंटहि न्द्याखावीण। इ षं स्तोटितृशभ्यापयाश। हिंपहिंशभाखरोप्ल। हा इशा ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 393 |
वसुश्रुत आत्रेयः |
अग्निः |
पंक्तिः |
॥ वसुश्रुत अत्रेयः अग्निः पङ्क्त्तिः ॥
अग्निन्नस्वा᳒वृ॑क्तीभिः । हो᳒ता॑रन्त्वावृणीमहे । शीरं᳹पा॑वाका॑शोची᳒षंवीवोमादे । यज्ञे᳹षु॑स्तीर्णाब॑ऋहीषंवीवाक्षसे ॥ २ ॥
आ बु औफिहोतवात। अ ग्नि न्न स्वषीवृ क्ति भीःकिख्। आ बु औफिहोतवात। हो ता र न्त्वाषीवृ णी म हेकीख्। आ बु औफिहोतवात। शीकर म्पाथाच्वाकका शो चि षंकीवि वो माखिदाणइश। आ बु औफिहोतवात। य ज्ञा इ षु स्तीकुर्णा ब र्हि षांकीख्। आ बु औफिहोतवात। विचव क्ष सेखि ॥३॥ अ ग्निकान्न स्व वृ क्ति भिःकुइ ह इ हातीहातइश। हो ता र न्त्वाषीवृ णीकाम हेकाइ ह इ हातीहातइश। शीकर म्पाथाच्वाकका शो चि षंकीइ ह इ हातीहातइश। वि वो माखिदाणइश। इ ह इ हातीहातइश। य ज्ञा इ षु स्तीषुर्णा ब र्हि षंकीइ ह इ हातीहातइश। वाटइ वाखाऔ हो वाशि। क्षाखसेश ॥४॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 394 |
विमद ऐन्द्रः |
अग्निः |
पंक्तिः |
॥ विमद ऐन्द्रः (प्राजापत्यो वा, वसुकृद्वा वासुकः) अग्निः पङ्क्त्तिः ॥
माहे᳹नो॑अद्याबो॑धय । ऊ᳸षो॑राये᳒दिवी᳒द्माती । या᳒थाचि᳒न्नोआ᳒बो॑धयः । सत्या᳒श्रावसीवाय्ये᳒ । सू᳸जा॑तेअश्वा॑सूनृते ॥ ३ ॥
म हाखाइ म हो नोषीअ द्य बोप्लिधाङयाश। ऊ षो रा येकीच्दिकवि त्माटातीत। य था चीभिन्नोतआ बोकाधाखयाःण। स त्या श्राभिवातसि वाटाय्याखण्इश। सु जा तेभिआत। श्वापसुशनाखर्क्तोप्ल। हा इशा ॥५॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 395 |
सत्यश्रवा आत्रेयः |
उषाः |
पंक्तिः |
॥ सत्वश्रवा आत्रेयः उषाः पङ्क्त्तिः ॥
भद्र᳒न्नो᳒आपी॑वातय । मानोद᳹क्षा॑मूत᳒क्रातुं॑ । अथा᳒तेसख्ये᳹अ॑न्धासावी᳒वोमादे । रा᳒णागा᳒वोनया᳹वा॑सेवीवा॑क्षसे ॥ ४ ॥
भ द्र न्नोपिअ पि वा त याशु। मा नोटाद क्षा मू ताकीक्राखतूणम् । आचथा तेथास ख्येकाअ न्धा साटिवी वो माखिदाणइश। र णाटागा वोटाच्नाकय व सा इ वाटुट्इ वाखाऔ हो वाशि। क्षाखसेश ॥६॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 396 |
विमद ऐन्द्रः |
सोमः |
पंक्तिः |
॥ विमद ऐन्द्रः (प्राजापत्यो वा, वसुकृद्वा वासुकः) सोमः पङ्क्त्तिः ॥
कृ᳸त्वामाहं᳒आनूष्वाधः᳒ । भीम᳒आ᳒वा॑वृतेशा᳒वाः॑ । श्रीय्या᳹रिष्वा᳹उपाका᳒योः । नी᳒शीप्रीहा᳒रीवान्दधे । ह᳸स्ता᳒योर्वज्रा॑मायासम् ॥ ५ ॥
कृ त्वा म हंषीअ नु ष्वा धातीएत। भी माचाआ वाथाच्वृ ताकाइ शायावाःट। श्री याताऋ ष्वाताऊ पाकाकाखयोःण। नी शि प्री हाचीरी वाकान्दायधाटइश। ह स्ता योभिर्वातच्। ज्राकमोपबाप्लया सांप्ला। हा इशा ॥७॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 397 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
साघातँ᳹वृ॑षाणंरा᳒थं॑ । आधीतिष्ठाती॑गोवी॑दं । यःपात्रं॑हार्यो᳒जान॑म् । पूर्णा᳹मि॑न्द्राचि᳒के॑ततिः । यो᳒जान्विन्द्रातेहा᳒री ॥ ६ ॥
स घाफातं वृ ष णंफीर थाखाऔणहोफवाश। आकधी ति ष्ठाचिती गोकावायइ दाटाम् । यः पा त्रंकिहा रि योटिजाखनणम् । पूकर्णा मि न्द्रा चि केकुताखतीण। यो जा नूभिवातइ न्द्राटाट्ताखऔ हो वाशि। हाखरिश ॥८॥
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छन्दः (Chandas) |
| 398 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
अ᳒ग्निन्त᳹म्मन्ये᳒योवासूः॑ । अस्तंयय्य᳹न्ती॑धेना᳒वाः । अ᳒स्ता॑म᳒र्वतोआशा᳒वाः॑ । अस्तन्नित्या॑सोवाजी᳒नाः । ई᳸षं॑स्तोतृभ्यआ᳒भा॑रा ॥ ७ ॥
अ ग्नि न्त म्माखीन्ये यो वा सूःप्ली। अ स्तं य य्याटीन्ती धेटानाखवाःण। अ स्ता म र्वाटीन्ता याटाशाखवाःण। अ स्ता न्नि त्याटीसो वाटाजाखइ नाःणा। इ षं स्तो तृटीहा होखाहाणइश। भ्यापयाशभाखरोप्ल। हा इशा ॥९॥
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छन्दः (Chandas) |
| 399 |
वसुश्रुत आत्रेयः |
अग्निः |
पंक्तिः |
॥ वसुश्रुत अत्रेयः अग्निः पङ्क्त्तिः ॥
नतमं᳒हो॑ना᳹दू॑रीतं । देवा॑सोआष्टामा᳒र्क्त्यं । सा᳒जो᳒षा॑सोयामर्यामा । मित्रोनाय॑न्तीवा᳹रूणोआ᳒तिद्वी᳒षाः ॥ ८ ॥
न त मं हो न दुषूरि त मि य इ यातूहातइश। दा इ वा सोकीअ ष्टा मा र्क्त्याकुमि य इ याटिहातइश। सा जो ष सोकीय म र्या माकीइ य इ याटीहातइश। मा इ त्रो नाकीया न्ति वाटिरूखणाःत्र। आथति द्वीटाषाःख ॥१०॥