| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 382 |
कुत्स आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ कुत्स आंगिरसः इन्द्रः जगती ॥
स्वादो᳒रित्था᳹वी॑षूवा᳒ताः । मा᳒धोः॑पिबन्तिगौर्याःठ॑ । या᳒इ᳒न्द्रे॑णासा᳒याववा॑रिः । वृष्णामाद॑न्तीशो᳒भा᳒था । व᳒स्वीरा᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ १ ॥
स्वा दो रि त्था वि षूफूव तोतामापधोः पि ब न्ति गौ र्याःश्रू। या इ न्द्रे णाकीसा या वाटिरीःत। वृ ष्णाचाम दकाच्न्तीकशो भाटाथात। व स्वाचाइ रायानूटस्वा राकाज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 383 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
इत्था᳒हीसो᳒माइ᳒न्मा᳒दाः॑ । ब्र᳸ह्मा॑चाका᳒रावा᳒र्धा॑नं । शावी॑ष्ठवाज्रिन्नो॑ज॑सा । पृ᳸थिव्या᳹नि ᳹श्शा॑शाआ᳒हिं । अर्चन्ना᳹नूस्वारा᳒ज्य॑म् ॥ २ ॥
इ त्था हि सोती। मा इ म्माटिदाःत। ब्र ह्मा चा काकीराचव र्द्धाटानातम् । शा वि ष्ठ व ज्रिकुन्नो जाटासात। पृ थि व्याकिनि श्श शाकिआ हीकाम र्च्चाचान्नायनूटच्स्वा रौ होचिवाकच्जीकय मोप्लाइ ळाशा ॥२॥ इ त्था हि सोफीम इ म्म दाःकी। ब्र ह्मा चा काकीरा व र्धाटिनाखम् । श वा इ ष्ठाखीवाशज्रि न्नो जाखिसाण। पृ थि व्याकिनि श्श शाकिआकही म र्च्चाकिन्हो इ नोटिहो इ स्वा राकीज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 384 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
इ᳒न्द्रोमा᳒दायवावृधे । शावा॑सेवृत्रा᳸हा᳒नृ᳒र्भीः॑ । त᳒मिन्माहा᳒त्स्वाजीषु । ऊतीमर्भेहवामहे । सा᳸वा᳸जे॑षुप्रा᳒नो॑विषात् ॥ ३ ॥
इ न्द्रो म दाती। य वा वाखिर्द्धा इशा। श व से वृकीत्र हा नृखिभीःप्ल। त मि न्म ह त्स्वा जाखूइ षूशा। ऊ ति म र्भेषीह वा माखिहा इ सा वाशी। जा इ षु प्र नोपुबाप्लवा इ षाप्लित् । हा इशा ॥४॥ इ न्द्रो म दाफीय वा वृ धाकीइश। श व से वृकीत्रा हाकानृयभीपस्ता मि न्मा हा त्साषुहा बु जा इ षुशु। ऊकति म र्भे ह वाटुच्माख। हा इ सा वाशी। जा इ षू प्र नोपुबाप्लवा इ षाप्लित् । हा इशा ॥५॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 384 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
इ᳒न्द्रोमा᳒दायवावृधे । शावा॑सेवृत्रा᳸हा᳒नृ᳒र्भीः॑ । त᳒मिन्माहा᳒त्स्वाजीषु । ऊतीमर्भेहवामहे । सा᳸वा᳸जे॑षुप्रा᳒नो॑विषात् ॥ ३ ॥
इ न्द्रो म दाफीय वा वृ धाकीइश। श व सेकिवृचत्रा हाटानृ भीकाराशऔ हो औटिच्होकवाटहाख। ता मि न्म ह त्स्वाटुजि षुकाआशऔ हो औटिच्होकवाटहाख। ऊकति म र्भेकिह वाटामा हाकाआशऔ हो औटिच्होकवाटहाख। सा वा जे षूयीप्रापनोश। वाखइ षाप्लात् । हा इशा ॥६॥ इ न्द्रो म दा य वाषूवृ धे श व से वृतू। त्रा हाचानृयभीःट। ता मिकान्म ह त्सुटिआ जि षुटिऊ तीकामाखर्भाणइश। ह वाटामा हाचाइश। सा वा जे षूयीप्रापनोश। वाखइ षाप्लात् । हा इशा ॥७॥
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छन्दः (Chandas) |
| 384 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
इ᳒न्द्रोमा᳒दायवावृधे । शावा॑सेवृत्रा᳸हा᳒नृ᳒र्भीः॑ । त᳒मिन्माहा᳒त्स्वाजीषु । ऊतीमर्भेहवामहे । सा᳸वा᳸जे॑षुप्रा᳒नो॑विषात् ॥ ३ ॥
इ न्द्रो ओतिप्म दाता। या वा वृ धे श वाटूसाखइ वृणा। त्रा हाटाऔ होतावातट्औ होखावा नृ भा इःशी। ता मि न्म हकीत्स्वा जि षू ति माटूर्भातइश। हा वाटाऔ होतावातट्औ होखावा म हा इशी। सा वा जे षु प्र नाटूऔ होतावातट्औ होखाबाप्लवा इ षाप्लित् । हा इशा ॥८॥ इ न्द्रोखाम दा य वाप्लीवाङर्द्धा इशा। श व से वृकीत्रा हाकानृयभीःपहा बु हौफिहोतवात। ता मि न्म ह त्सूकुवाटजि षूपाऊकति म र्भेकिहा वाकामायहेपहा बु हौफिहोतवात। सा वा जे षूयीप्रापनोशवाखइ षाप्लात् । हा इशा ॥९॥ ओ हाफाइ न्द्रोखाम दा य वाप्लीवाङर्द्धा इशा। श व से वृकीच्त्रा हाकानृयभीःपआ बु औफिहोतवात। ता मि न्म ह त्सूकुवाटजि षुपाआ बु औफिहोतवात। ऊकति म र्भा इ ह वौकूहो वाथामा हेटा। सा वा जे षुयप्रापनोशवी षा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
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| 385 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
इन्द्रातू᳒भ्या᳒मीद॑द्रीवः । आ᳒नु॑क्तंवज्रिन्वीर्यं॑ । यद्धत्यं᳒मायी᳹नं॑मृगम् । ता᳒वत्य᳒म्माययावा᳒धीः । अर्चन्ना᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ ४ ॥
इ न्द्र तु भ्यषीमि द द्री वातीएत। आ नु क्तं व ज्रिकुच्न्वी र्य्यकाय्य द्धाकात्यायम्माट। या इ न म्मृ गाकुच्न्ता वाकात्यायम्माट। या या व धीकीच्र र्च्चाकान्नायनूटस्वा राकाज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥
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छन्दः (Chandas) |
| 386 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
प्रे᳒ह्याभीठ॑हीधृष्णूहि᳒ । नातेवाज्रोनी᳒यंसते । इन्द्रानृम्णं᳹ही॑तेशावाः॑ । हानो॑वृत्र᳹ञ्ज ᳹या॑आ॑पः । अर्चन्नानू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ ५ ॥
प्रा इ हिटिच्आकभि हि धृ ष्णु हाकुऔटहोत। ना ताटाच्इ व ज्रोषिनि यं स ता औटुहोत। आ इ न्द्रोटिच्नृ म्णं हि तेषीश वा औटिहोत। हा नोटाच्वृ त्र न्ज याषीअ पा औटिहोत। आ र्च्चाटान्ना नूटास्वा राकाज्या मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१२॥
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छन्दः (Chandas) |
| 387 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
या᳒दूदीराताआज᳒याः॑ । धृ᳒ष्णा᳒वे॑धीयातेधानं॑ । युं᳒क्ष्वा᳹मा॑दच्यू᳒ताहा᳒री । कंहा᳒नःकं᳒वा᳒सौदधः । अस्मं᳹इ॑न्द्रावा᳒सौ॑दधः ॥ ६ ॥
य दु दी राफीत आशाज याःका। धृ ष्ण वे धीकीचया ताकाइ धायानटम् । युकङ्क्ष्वा म द च्यु ताटुहाखरीण। कंकह नः कं व साटुबु दाखाधाःण। अ स्मंताइ न्द्रातावा सौ दाटिधाःखण्। ओपइ ळाशा ॥१३॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 388 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
| 389 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥ ॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥ ॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
अ᳒क्ष᳒न्ना᳒मी॑मादन्ताही᳒ । आ᳸वा॑प्रियाआधूषत । अ᳒स्तो॑षातस्वाभा॑नवः । त्रिप्रान्नावीष्ठयामति । यो᳒जान्विन्द्रातेहारी॑ ॥ ७ ॥
ऊ᳒पोषू᳹श्रूणूहीगीराः॑ । मा᳸घा॑वन्माताथाइव । कादा᳹ना॑स्सू॑नृता॑वतः । काराई᳒दा॑र्थार्यासाइत् । यो᳒जान्वि॑न्द्राते᳒हा᳒री॑ ॥ ८ ॥
अ क्ष न्ना मीचीमाकदफन्त हीतायापव प्रि या धु ष ताशु। आ स्तोकाष त स्व भा न वोकूवि प्रा न्नाभिवीत। ष्ठा या म तीकीयो जा नूटिवातइ न्द्राटाट्ताखऔ हो वाशि। हाखरीश ॥१४॥ उ पो षु श्रु णु हीषूगि र एतिऔ होखावात्र। मा घ वकन्मा त थाटिइ वाप्लाक दाखान स्सुता। ना र्क्ताकाव तः क राकीइ द र्थाचियायसा ईपाद्यो जाखान्वाताइ न्द्राटाताखऔ हो वाशि। हाखरीश ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 390 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥ ॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
चन्द्रा᳹मा॑प्सूआ॑टट्यन्तारा । सूपर्णोधा॑वतेदीवि᳒ । नावो॑हीरण्यनेमयः । पा᳒दं᳒वि᳒न्द॑न्तीवीद्यूताः । विक्त᳹म्मेअस्य᳒रो᳒दसि ॥ ९ ॥
चकन्द्र मा या उ वाकुच्प्सूकआ न्ता रा उ वाकु। सुकप र्णो धा उ वाकुच्। वाकते दि वि न वोषुहा इ राकिच्उ वाका। ण्याकना इ मा या उ वाकूच्। पा दं वि न्दा उ वाकूच्न्तिकवि द्यु तोकिवि क्त म्मा या उ वाकू। स्या रोकादाटसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१६॥ च न्द्र मा याती। प्सूतआ न्तापाराश। सु प णो र्धाकीच्वाकताटइ दीचावि याता। न वोटाच्हि रकाण्य नेकाम यः पा दं वि न्दकून्ति वि द्यु तोपीहाणइश। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१७॥ च न्द्र मा याखीप्सूशअ न्त राप्लि। सू प णो र्धाकीच्वा ता इ दायीइ विटा। न वोटाच्ही रकाण्य नेकाम यः पा दंषीवि न्द न्तिकिवि द्यु ताःटि। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१८॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 390 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
चन्द्रा᳹मा॑प्सूआ॑टट्यन्तारा । सूपर्णोधा॑वतेदीवि᳒ । नावो॑हीरण्यनेमयः । पा᳒दं᳒वि᳒न्द॑न्तीवीद्यूताः । विक्त᳹म्मेअस्य᳒रो᳒दसि ॥ ९ ॥
च न्द्र मा य प्सु आतू। न्ता रा सु प णो र्धाकूच्वा ते दाटिइ वीता। न वोटाहोचइशहि रकाण्य नेकाम यःशापा दं वि न्द न्तिकुवि द्यु ताःटि। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥१९॥ च न्द्रौ हो मा य प्सुषूअ न्त रा ओ वातु। सु पकाणो र्धाकावा ते दा इ वा एटूहो वाकाहोखइ हु वोतिइश। ना वो हा इ र ण्यषूना इ मा याटीहो वाकाहोखइ हु वोतिइश। पा दं वि न्द न्तिषुवा इ द्यु ताटीहो वाकाहोखइ हु वोतिइश। वि क्त म्मे अ स्य रोषूदा सा एटिहो वाकाहोखइ हु वोखिवात्र। उ ऊखापाश ॥२०॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 391 |
त्रित आप्तयः |
विश्वेदेवाः |
पंक्तिः |
॥ त्रित आप्त्यः (कुत्स आङ्गिरसो वा) विश्वेदेवाः पङ्क्त्तिः ॥
प्रा᳸तिप्री॑यातामंरा᳒थं॑ । वृषाणंवासूवाहा॑नां । स्तोता᳒वा॑मश्विनावृ᳒षीः॑ । स्तोमेभिर्भूषातिप्राती । मध्वीमा᳒मा॑श्रुतंहा᳒वम् ॥ १० ॥
प्रापति प्र य त मंप्लुराङथाशम् । वाकर्ष णं वाकिसू वा हाटिनातम् । स्तो ता वाभिमातश्वि नाटावाखर्षीःण। स्तो मा भीःभीभू षाकाति प्राखातीण। म ध्वा इ माभीमात। श्रूपतांश। हाखआ वांप्ला। हा इशा ॥२१॥