| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 304 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेधे आंगिरसः इन्द्रः बृहती ॥
प्रा᳒ती॑वोदृश्याया᳒ती । उच्छन्ती॑दूहीता᳒दीवः । आ᳸पो॑माही॑वृणूतेचा᳹क्षू॑षाता᳒माः । ज्यो᳒तीःकृ॑णोतीसूना᳒री ॥ १ ॥
प्रा ता ईटिच्हायईटहा वोकाद र्शीथाया य तीटिया य तीटि। उ च्छा ईटिच्हायईटहा न्तीकादूथही ता दी वाटीआ दी वाःटि। आ पा ईटिच्हायईटहा मा हि व्र णु तेचूचाचक्षु षा त माटीआ त माःटि। ज्यो ताकाईटच्हायईटहाचकृ णोकाती सू ना रीटीओ ना रीपिण्। ओपइ ळाशा ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 305 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
उषाः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः उषा बृहती ॥
इमा᳹ऊ॑वा᳒न्दिविष्टयः । उस्रा᳒हा᳒वन्तेअश्विना । आ᳸यं᳒वा॑मंह्वाया᳒वा॑सेशचीवसू । वीशं॑वीशंही᳒ग᳒च्छा॑थः ॥ २ ॥
इ मा उ वाषीन्दि वि ष्ट याखुऐ हीप्ला। उ स्रा ह व न्तेषुअ श्वि नाखिऐ हीप्ला। अ यं वा म ह्व यषूव से श ची व सूखूऐ हीप्ला। वि शं वि शंषीही ग च्छ थाखीऐ हीप्ला। होप्लइ ळाशा ॥२॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 306 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
अश्विनौ |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः अश्विनौ बृहती ॥
कु᳒ष्ठःकोवा॑मश्विना । तपानो᳹दे॑वामार्क्त्याः॑ । घ्नाता᳒वा᳒मश्नायाक्षा॑पा॑माणोंशू᳒ना । इ᳒त्था᳒मूवा᳒द्वन्या᳒था॑ ॥ ३ ॥
कु ष्ठः को वाषीम श्वी नाति। ता पा नो देकीवा म र्क्ता याटीहो वाकाहाखइ घ्न ताखिवा माता। अ श्ना याटिहो वाकाहाखइ क्ष पाखिमा णाःता। अं शू नाटिहो वाकाहाखइ त्थाखामु वातादु वाटान्य थाखाऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 307 |
अश्विनौ वैवस्वतौ |
अश्विनौ |
बृहती |
॥ अश्विनौ वैवस्वतौ अश्विनौ बृहती ॥
आयं᳒वामा᳒धूमक्तमः । सू᳒तस्सो᳒मोदीवि॑ष्टिषु । तामा॑श्विनापीबतन्तीरो᳒अन्हं । धक्तं॑र᳒त्ना॑नीदाशू॑षे ॥ ४ ॥
अ याखाम यं वा म्म धूप्लीमा क्ताङामाःश। सू त स्सो मोटीदि विकाष्टि षुटाओटहाखओ हाता। ता मा श्वि नाषीपि ब त न्ती रो अकून्ह्या मोटाहाखओ हाता। ध र्तांचारायत्नाटओटहाखओ हाता। नी दा शूटिट्षाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥४॥
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ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 308 |
प्रस्कण्वः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ प्रस्कण्वः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
आत्वासो᳹मा॑स्याग᳒ल्दा॑या । सा᳒दाया᳹चन्नाहं᳒ज्या । भू᳒र्णिं᳒मृग᳒न्नासा᳒वा॑नेषुचुक्रुधं । कै᳸शा॑नन्नयाचिषात् ॥ ५ ॥
आ त्वा सो माती। स्या गा द्दाटिट्याखऔ हो वाशि। स दाटाया चकान्ना ह ञ्ज्याकिभू र्णाटाउ वोखावाश। मृ गकान्न स व नेचीषु चु क्रू धंकीच्क ई शाटिनातन्ना याचाचि षा दि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥
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| 309 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि-मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
अध्वर्यो᳹आ॑द्रावा᳒यात्वं᳒ । सो᳒मामिन्द्राः॑पिपासति । ऊ᳸पो॑नूनं᳒यूयूजे॑वृ᳹षाणाहा᳒रि । आचा᳒जगा᳒मा॑वृत्राहा᳒ ॥ ६ ॥
आ ध्व र्यो अ द्राफुव या तु वाकीम् । सो माचामि न्द्राःथापी बाकासायतीट। ऊ पो नूचिनंकयु यु जेकिच्वृ षाकाणायहा रीटा। आकचा जाटागात। मा वृचात्राकहा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥६॥
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| 310 |
देवातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ देवातिथिः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
आ᳒भीषादस्ता᳒दा॑भा॑रा । इ᳒न्द्रज्यायःकानी॑यसः । पुरोवा᳒सूहिमाघावन्बभू᳒वी॑था । भारेभरेचाहा᳒व्याः॑ ॥ ७ ॥
आ भी ष त स्त दातूहातबुश। भा रा इ न्द्रा ज्याकुयः का नी याटिसाःत। पू रोकाव सु र्हि म घ वकून्ब भू वाटिइ थाता। भा रा इ भाटीरेत। चा हाचाव्या इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥७॥
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| 311 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
यादिन्द्राया᳸वा॑तस्त्वं । एता᳹वा॑दाह᳒मीशी᳒या । स्तोतारामी᳒द्दधिषेरदावसो । ना᳸पा॑पात्वा᳒यारंसिषः ॥ ८ ॥
या दि न्द्रापिया व त स्त्वाकम् । ए ता व दषीह मी शी या स्तो ताटूरा मीतत् । दा धि षेकिच्राकदा वाटासातबुश। ना पा पाटित्वात। या रौकावा उ वोखिबांप्लसा इ षोप्लि। हा इशा ॥८॥ या दि न्द्राफिया व ताखिस्त्वशम् । आ इ ताटिवा दाटाह मीकाशी याथाओ वाका। स्तो ताटारा मीटात्द धि षेचिर दाकावा साकाओ वाका। ना पाटापा त्वाटाच्याकरोपबांप्लसा इ षोप्लि। हा इशा ॥९॥
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| 312 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
त्वा᳸मि॑न्द्राप्रातू॑र्तिषु । आ᳒भीविश्वा॑आसिस्पृर्धाः॑ । आशस्ती᳹हाज॑नीता᳹वृ॑त्रातूरा॑सी । त्व᳒न्तू॑र्यतरूष्यातः ॥ ९ ॥
त्व मि न्द्रोतिहा इ प्र तू र्क्ति ष्वोतूवात। आ भि वि श्वाकीच्आ साकाइ स्पायार्धाःट। आ श स्ति हाषीज नि ताकिच्वृ त्राकातूयरा साटाइश। तू वाचान्तूयर्याट। ता रूचाष्याकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
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| 313 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेध आंगिरसः इन्द्रः बृहती ॥
प्र᳸योरीरिक्षाओ᳒ज॑सा । दीवः᳹स ᳹दो॑ठ॑भ्यस्पा᳒री । न᳒त्वा॑विव्या᳒चारा᳒जाइन्द्रापार्थी॑वम् । आ᳒तीविश्वववक्षिथ ॥ १० ॥
प्र यो रि रि क्षषुओ ज सातिएत। दी वा स्स दोटीच्भ्य स्पा रि न त्वाषूवि व्या औकिहो वाका। चा रा जा औकीहो वाकाइ न्द्रा पा र्थि वाकुम ति वाटिइ श्वाताम् । वा वाकाक्षि था इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥११॥