| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 255 |
भर्गः प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भर्गः प्रागाथः इन्द्रः बृहती ॥
श᳒ग्धूटट्यषूशा॑चीपते । इन्द्रावि॑श्वा᳒भीरू᳸तीभिः । भा᳒गन्न᳹हित्वा॑याशा᳒सं॑वासूवी᳒दम् । आनू॑शूराचा᳒रा॑मसि ॥ १ ॥
श ग्ध्यू षूति। शा चा इ पाचीताकईखन्द्राश। वि श्वाथाच्भी रू ती भाकीइ र्भाखागशम् । न हि त्वा याचीशा संचावा सूकावाखइ दशाम् । आ नू शूटिट्राखऔ हो वाशि। च राटाम सीखा ॥१॥ श ग्ध्यू षौ होफीश ची प ताकीइश। आ इ न्द्रं वि श्वा भी रूषूती भी र्भ गा न्नाटूहीत। त्वा याचाशा संकावा सूटाहातइ वा इ दाटीम् । आ नू शू र च राषूउ वाकाओपबाप्लमा सोप्ला। हा इशा ॥२॥ श ग्ध्यू षु शा चीफुप ताखाइ श ग्ध्यु षूशी। शा चा इ पा ताटुइ हि माखिहाणइश। आ इ न्द्रं वि श्वाकुचभी रूकाती भी राटिइ हि माखिहाणइश। भा ग न्न हीषीत्वा या शा संकीच्वा सूकावी दा माटिइ हि माखिहाणइश। आ नूचाशूयराटइ हि माखिहाणइश। चा रा माटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 256 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ रेभः कश्यपः इन्द्रः बृहती ॥
या᳸इ॑न्द्राभू᳒जआ᳒भा॑रा । स्वठ॑र्वंआसू॑रेभ्यः । स्तोता᳒रामिन्मा॑घवन्नस्यावा॑र्धया । ये᳒चत्वे॑वृक्ता᳒ब॑र्हीषः ॥ २ ॥
या याताहो इखान्द्राश। भूचजा आकाभायराट। सु वाताहा र्वं याचिसू राकाइ भायायाःट। स्तो ताटाहातच्राकमि न्म घ व न्न स्याचूवायर्धा याटा। या इ चाटिहातइश। त्वे वृचाक्ता ब र्हाटिइ षाःखाण। ओपइ ळाशा ॥४॥ या इ न्द्र भु जा आटूभातराःत। स्व र्वंथाच्आटसू रेटाभाखयाशहा होखाहाणइश। स्तो ताथाच्रा मा इ न्माचीघ वकान्ना स्य वाटिर्धाखयाशहा होखाहाणइश। येकच त्वाकाइ वृताहा होखाहाणइश। क्ता ब र्हाटिइ षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥५॥ या इ न्द्र भु जषुआ भ र उ हु वातूहातइश। स्व र्वंथाच्आटसु रेटाभ्याचउ हु वाटिहातइश। स्तोकता र मि न्म घ वषून्न स्य वायिर्धा याटाच्उ हु वाटिहातइश। येचच त्वाटाइ वृताच्उ हु वाटिहातइश। क्ताचब र्हाटाइ षाःखाण्। ओपइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 257 |
जमदग्निर्भार्गवः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ जमदग्निभागर्वः मित्रावरुणादित्याः बृहती ॥
प्रा᳒मित्रा᳒यप्रार्यम्णे॑ । सा᳒चात्थ्याठ॑मृतावसो । वरु᳒त्थ्येटट्य᳒वा᳹रूणेछन्द्यंवा᳒चाः॑ । स्तोत्रं॑रा᳒ज॑सुगायता ॥ ३ ॥
प्र मि त्रा य प्रातुहातबुश। आटर्य म्नाचाइ स चाटिहोकथ्धि यौटाहु वा र्ताटिव साचाबुश। व रौटाहोकथ्धी यौटाहू वा इषिव रू णे छा न्दीकुयं व चाःचि। स्तो त्रांटाहो इ राटिजौटहू वा सूकिगा या ताटिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥७॥ प्र मि त्रा य प्रौ होतूवात। अ र्य म्णा बु होकुच्औकहो वाका। सा चा थ्य मृकीता वाचासा बु होकिच्औकहो वाका। वा रू थ्ये व रू णेचूछकन्दी यं वाकिचा बु होकिच्औकहो वाका। स्तोकत्रं राकाजा बु होकिच्औ हो वा । सूकगा याकाता बु होकिच्औकहो वाःपाण्। ओपइ ळाशा ॥८॥ प्र मि त्रा यषीप्रा र्य म्नोतिवा ओतावात। सा चाचाथ्य मृचाता वायासाटबुश। वाटरूतथाटयातइ व रू णेकीच्छकन्दा यांटाहातइ व चोटिआत। स्तोकत्रं राकाज सु गाचिय त स्तोटित्रातम् । राकजचसूकगौटहोतओपबा या तोप्ल। हा इशा ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 258 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथिः काण्वः (मध्येआतिथिः काण्वः) इन्द्रः बृहती ॥
आ᳒भी᳹त्वा॑पूर्वापी॑तये । इ᳒न्द्रास्तो॑मेभीरायावाः । समी᳒चीना᳹साऋभा᳒वस्सा᳒मा᳒स्वरन् । रुद्रागृ॑णन्तापूर्व्यम् ॥ ४ ॥
अ भि त्वा पू र्वषुपी त ये आ भीफुत्वा पूखार्वा पी त याप्लीइश। इ न्द्रा स्तो मैथीच्भि राकाय वोचाभी राकायायवाटओ मो वाकि। स मी ची नाषीसा ॠ भा वाचीस माकास्व राटान् सा माचास्वायराटनो मो वाकि। रु द्राचागृ णकाच्न्ता पूकार्वा याटाच्न्ता पूचार्वाययाटमो मोकावाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१०॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 259 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेध पुरुमेधावांगिरसौ इन्द्रः बृहती ॥
प्रा᳒वाइ᳒न्द्रा॑यबृहा॑ते । मारूतोब्र᳒ह्मा॑र्च्चता । वृत्रंहा᳒नातिवृत्रा᳒हाशाता᳒क्रा॑तुः॑ । व᳒ज्ज्रे॑णाशाता᳒पा॑र्वणा ॥ ५ ॥
प्र व इ न्द्रा यषुब्र ह ते प्र वाःतु। इ न्द्राथाच्या बृचाहायतेटओ मो वाकि। म रू तो ब्रचीह्मा आकार्चायताटओ मो वाकि। वृ त्रं हा नाटीती वृ त्रचिहाटओ मो वाकि। शा ता क्रा तुकीर्वाखज्रेण। ण शाताहातहात। त पा र्व णाप्ली। होप्लइ ळाशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 260 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
| 261 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेध पुरुमेधावांगिरसौ इन्द्रः बृहती ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
बृहा᳒दिन्द्रा॑यगायत । मारू॑तोवृ᳒त्राहन्ता॑मं । ये᳒नज्यो᳒तीरा᳒ज॑नयन्नृता᳒वृधाः॑ । देव᳒न्देवा᳒याजा᳒ग्रवीम् ॥ ६ ॥
इन्द्राक्रा᳹तुं॑नआ᳒भा॑रा । पिता᳒पुत्रे᳒भ्योया᳒था । शिक्षा॑णोअस्मिन्पु॑रुहूताया᳒मा॑नी । जी᳒वाज्ज्योती॑रशीमहि ॥ ७ ॥
स न्त्वाचाहि न्वथाच्न्ती धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भीःटी। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वाचाहि न्वथान्ती धा इ ताटीइ भी स्ताटिइ भाखाऔ हो वाशि। संचश्र व सेखि ॥१२॥ स न्त्वा रि णकीच्न्ती धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भीःटी। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वा रि णकीच्न्ती धा इ ताटीइ भि स्ताटिइ भाखाऔ हो वाशि। वीचश्र व सेखि ॥१३॥ स न्त्वाकाता ताचाक्षु र्धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भिःटि। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वा ता ताचाक्षु र्धा इ ताटखइ भी स्ताटिइ भाखाऔ हो वाशि। स त्याचाश्र व सेटिख् ॥१४॥ स न्त्वा शि शकीच्न्ती धाकाइ तायाइ भीटास्ता इ भीःटी। बृ हाकादि न्द्राथाच्या गाकायायताटया ताटा। म रू तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटन्ता माटाम् । ये न ज्योचिति र ज न यकुच्न्नृ ताकावायर्धाटवा र्धाःटा। दे वकान्दे वाथाच्या जाकागृयवीटङ्गृ वीटाम् । स न्त्वा शि शकीच्न्ती धा इ ताटीइ भी स्ताटि इ भाखाऔ हो वाशि। श्र व सेटिख् ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 261 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
| 262 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ रेभः कश्यपः इन्द्रः बृहती ॥
इन्द्राक्रा᳹तुं॑नआ᳒भा॑रा । पिता᳒पुत्रे᳒भ्योया᳒था । शिक्षा॑णोअस्मिन्पु॑रुहूताया᳒मा॑नी । जी᳒वाज्ज्योती॑रशीमहि ॥ ७ ॥
माना॑इन्द्रापारा॑वृणात् । भा᳒वा॑नस्साधामाद्याः॑ । त्व᳹न्ना॑ऊतीस्त्वामिन्ना॑आप्यं॑ । मानाइन्द्रापा᳒रा॑वृणात् ॥ ८ ॥
इ न्द्रा औभिहोत। क्र तुचान्ना आकाभायराट। पि ता औभिहोत। पु त्रेथाच्भी योकायायथाट। शि क्षा औभिहोत। णो अ स्मि न्पु रू हूकूता याकामायनीट। जी वा ज्योटिताखऔ हो वाशि। अ शी म हीखी ॥१६॥ इ न्द्र क्र तुफीन्न आ भ राकी। पि ता पु त्रेकीभी यो य थाषीशा इ क्षा णोटीआत। स्माकइ न्पु रु हूकीताचयायमा नीटाऔटहौटहू वा औकिहोतवात। जी वा ज्यो याटितीःत। अ शी माटिहाखइण। ओपइ ळाप्ला ॥१७॥ इ न्द्र क्र तु न्न आफूभ रा उ वोखीवाश। पि ता पु त्रेखाभी योचाया थाप्ला। हातपि ता पु त्रे भि योचूयाकथापहा बु शा इ क्षा णो आशृ। स्मा इकान्पु रू हूकित याचामा नीपाहा बु जी वा ज्यो तीःशू। आकशोपवा मा होप्लि। हा इशा ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 263 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथिः काण्वः (मध्येआतिथिः काण्वः) इन्द्रः बृहती ॥
वा॑य᳒ङ्घात्वा॑सूता᳒वन्तः । आ᳒पोना᳒वृक्ताब॑र्हिषः । पा᳒वी᳒त्रास्याप्रस्रा᳒वा॑णेषुवृत्रहन् । पा᳸रीस्तोता᳒रा॑आसते ॥ ९ ॥
मा न इ न्द्राती। प रा वापिर्णाशत् । भा वा न स्सा ध मायूदीपयाःश। त्व न्न ऊ तीषीस्त्व मि न्न आयुपीपयाशम् । मा न इ न्द्राकीप रा वृकिणातआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१९॥ मा न इ न्द्रा पा राफूवृ णाखान्मा न इ न्द्राशी। पा रा वाटिर्णातत् । भा वा न स्स धाकुमा दाटायाःत। त्व न्न ऊ तीटीस्वा मि न्नाटिआ पि याचिम् । मा नाताइ न्द्राता। पा रा वाटिर्णाखआणत् । ओपइ ळाशा ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 263 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
वा॑य᳒ङ्घात्वा॑सूता᳒वन्तः । आ᳒पोना᳒वृक्ताब॑र्हिषः । पा᳒वी᳒त्रास्याप्रस्रा᳒वा॑णेषुवृत्रहन् । पा᳸रीस्तोता᳒रा॑आसते ॥ ९ ॥
व य ङ्घाखित्वा सु ता व न्ताःशु। आ पो न वृ क्ताकुबाटर्हि षाकाउ वाता। पा वि त्र स्याचीप्र स्राचावा णाचाइश। षू वृ त्राटिहातन्पाटरीतस्तो ता र आकीसापतात्रइश। आचर्षश ॥२१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 263 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
वा॑य᳒ङ्घात्वा॑सूता᳒वन्तः । आ᳒पोना᳒वृक्ताब॑र्हिषः । पा᳒वी᳒त्रास्याप्रस्रा᳒वा॑णेषुवृत्रहन् । पा᳸रीस्तोता᳒रा॑आसते ॥ ९ ॥
औ हो वा इ व य ङ्घ त्वाषृसु ता व न्त औ होतूवात। औ हो वा या पो वृ क्त ब र्हि षःषेप वा इ त्रापीस्याश। प्र स्र व णे षु वायूत्रापहाशन् । औ होतावातऔ हो वा इ प रि स्तो र आ स तेषोप रा इ स्तोटीतात। र आकासाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२२॥ व य ङ्घ त्वोतीहा इ सु ता व न्तोतूवात। आ पो न वृ क्ताकुबाचर्हायइ षाटाहो वाटाहातइश। पा वि त्र स्यकीप्र स्र व णेकीच्षू वाकात्रायहाटन्हो वाटाहातइश। प राचाइ स्तोयाताटहो वाटाहातइश। र आ साटिट्ताखऔ हो वाशि। दीखशाःश ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 264 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भरद्वाजः (शयुः) बार्हस्पत्यः इन्द्रः बृहती ॥
यादिन्द्रा॑ना᳹हू॑षीष्वा । ओजो॑निम्णं᳹चा॑कृष्टीषु॑ । य᳒द्वाप᳒ञ्चा॑क्षीतीनां᳒द्युम्नमाभा॑रा । सत्रा᳹वि ᳹श्वा॑नीपौं᳒ठ॑स्यम् ॥ १० ॥
औ होताहोतहा आ इ हि वातुयातम् । घाखत्वाशसू ता वाखिन्तोशआ पो नाखिवृण। क्ताकब र्हि षाकिऐकहा याखाइ हिशापा वि त्राखिस्याशप्र स्रा वाखिणेण। षूकवृ त्र हाकिनै हा याखिइ हीशापा री स्तोखिताण। र आ साखितात्रइश। आखभिश ॥२४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 264 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
यादिन्द्रा॑ना᳹हू॑षीष्वा । ओजो॑निम्णं᳹चा॑कृष्टीषु॑ । य᳒द्वाप᳒ञ्चा॑क्षीतीनां᳒द्युम्नमाभा॑रा । सत्रा᳹वि ᳹श्वा॑नीपौं᳒ठ॑स्यम् ॥ १० ॥
ओतहा इ य दि न्द्र नाषूहु षी षूतिवात। ओ जोटानृ म्णाटाञ्चाककृ ष्टि षुचिऐटही आ इ हीशीहोकवाथच्उ उ वोचिइश। य द्वाटाप ञ्चाटाक्षि तीटानाशमै हीटाऐटही आ इ हीशीहोकवाथच्उ उ वोचिइश। द्यु म्न मा भ राकुऐटही आ इ हीशीहोकवाथच्उ उ वोचिइश। सा त्राटावा इ श्वाटिच्नी पौंकास्या ऐ हीटिआ इ हीकिहोकवाथच्उ उ वोटिट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥२५॥