| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 284 |
मेध्यः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेध्यः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
ई᳒ताऊती᳹वो॑आज᳒रं॑ । प्रे᳒हेता᳒रामा᳒प्रा॑हितं । आशू᳹ञ्जे᳹ता॑रंहोता॑रंराथी᳒तामं । आ᳒तूर्तन्तूग्रीयावृ᳒धम् ॥ १ ॥
इ त ऊ तीती। वोतओ जाटारा मौटाहोतवा औटाहोतवात। प्र हे ताथिच्राकम प्रा हीभिता मौटाहोतवा औटाहोतवात। आ शु ञ्जेकिताथरं हा इ ताटीरा मौटाहोतवा औटाहोतवात। रा था ईषित म म तू र्ताटून्तूत। ग्री यातावाटट्र्धाखऔ हो वाशि। स्तु षेताच् ॥१॥ इ त ऊ तिषीवो आ जातिरातम् । प्र हेकाता र म प्रा हि ताषूमु हु वाटिहो आकाशु न्जे ता रंषीहे ता र मु हु वाटूहोचइश। र थिकात माटाम तू र्क्ताखिन्तूण। ग्री यातावाटट्र्धाखऔ हो वाशि। स्तोतषाखइश ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 285 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेधे आंगिरसः इन्द्रः बृहती ॥
मोषु᳒त्वा᳒वाघा᳹ताः॑चाना । आ᳒रे᳒आस्मिन्नी᳒री॑रमन् । आ᳒रा᳒त्ता᳒द्वासाधा॑मा᳹द॑न्नाआ᳒गहि । ईहा᳒वासन्नूपा॑श्रुधि ॥ २ ॥
मो षु त्वा वाती। घा तापाणफप्ल्। श्चाखनाश। आकरे अ स्मि न्नि री र मकन्नाचरायक्ता द्वाटा। सा ध मा दाटीन्ना य गकिह्या इ ह वा साटुन् । ऊ पाकाश्रू धीकाइ ळाटाभाखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥ मो षु त्वा वा घाषुता च ना एती। आ रे अ स्मिषीन्नि री र मटीन् होकवाथउ उ वाटिऊट। आचरायक्ता द्वाटासा ध मा दांटीहोकवाथउ उ वाटिऊट। ना या गाखिहीण। आ इ ह वा सकुन्ना उ वोखिवाण। ऊ प श्रूटिधीखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 286 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
सू᳒नोता॑सो᳒मा᳒पाव्ने । सो᳒मामि᳒न्द्रा॑यावज्रीणे । पा᳒चा᳒तापक्तिरावा॑सेकृ॑णुध्वमित् । पृ᳹णन्नि᳹त्पृणातेमायाः॑ ॥ ३ ॥
सु नो त सो म पा व्नातुएत। सो म मि न्द्राकीहो वाटाहातच्याकव ज्राटाइ णाताइश। प च ताकिच्प क्ता इ र व सेकूच्कृ णूकाध्वायमीटद्धातइश। पृ णाचान्नायइ त्पृटाहातइश। णा ता इ माटीयाःखण्। ओपइ ळाशा ॥५॥ सु नो त सो म पाफूव्ना उ वोखिवा इ या हा इशु। सो म मि न्द्राटीहु वे हु वेटीहो या वायिज्रि णाटाइश। प च ताचिप क्ता इ र व सेटूकृ णूकाध्वायमीटद्धातइश। पृ णाचान्नायइ त्पृटाहातइश। णा ता इ माटीयाःखण्। ओपइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 287 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
य᳒स्सा॑त्राहा᳒वीच᳒ऋषणिः । इ᳒न्द्रन्तंहू᳸माहेवायं᳒ । सा᳒हा॑स्रमन्योतुविनिर्म॑णसत्पते । भा᳸वा॑सामात्सू॑नोवृधे᳒ ॥ ४ ॥
य स्स त्रा हाषीवि च र्ष णि रि द्रंफूतां हूखामा हे व यप्लीम् । इ न्द्र न्तं हूकीमा हे वाटियातम् । सा ह स्र म न्योषुतु वि नृकिम्णा स त्पाटितातइश। भा वा साटिमातत्सू नोचावृ धा इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 288 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भरद्वाजः (शयुः) बार्हस्पत्यः इन्द्रः बृहती ॥
शा᳒चिभिर्नश्शची᳒वसू । दीवान᳒क्तंदिशस्यतं । मा᳸वां॑रातिरूपा॑द᳒सात्कादा᳒चा᳒ना । अस्म᳒द्रा᳒तीःकादाचाना᳒ ॥ ५ ॥
श ची भि र्न्नाफीश्श ची व सूकी। दि वा न क्तषीन्दि श स्य त म्माटुवांकराकति रु प द साचुत्काकदा च ना स्माशी। द्रा तीः क दोपीबाप्ल। चाखनाश ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 289 |
परुच्छेपो दैवोदासिः |
इन्द्रः |
बृहती |
| 290 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ पुरुच्छेपो देवोदासिः इन्द्रः (शिवनौ) बृहती ॥ ॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः बृहती ॥
यादाकादा᳹चामीढूषे॑ । स्तोता᳒जरेतमार्क्त्याः॑ । आदीद्व᳒न्दे᳒तावारुणंवीपा᳒गीरा॑ । धक्ता᳒रंवि᳒प्रा᳒तानाम् ॥ ६ ॥
पाहि᳒गाया᳹न्धा॑सामा॑दे । इ᳒न्द्रा᳸यमेधियातिथे । य᳸स᳸म्मिश्लोहर्यो॑र्यो॑हीरण्या᳒या । इन्द्रोवज्री᳹हीरण्या᳒या ॥ ७ ॥
य दा क दाती। चाटट्माखऔ हो वाशि। ढूखषेश। स्तो ता ज रेकीत मा र्क्त्याकिआ दी द्व न्दषीत वा रू णांखीवि पाखागि राता। ध र्क्ताटारं विटा। व्राटट्ताखऔ हो वाशि। नाखम् ॥९॥ य दा क दा च मातूहातबुश। ढू षाटाइ स्तो ताटिज राताइशत मा र्क्त्याःचि। आ दी द्व न्दौ होटुहोटहातहातइशत वाटारूखणणम् । वि पाकागि राकाध र्क्ता रं वि यौकुहोटहातहातइश। व्र ताकाना मि ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥ या दाणाका दाणाचा मीफाढू षा इ स्तोखीताण। ज राताइशता मा र्क्तायियाःट। आ दी द्व न्दाकीई त वाटिरूखणणम् । वी पाफागि रौ वा उ वोखुवाश। ध र्क्ता रंफिवि यौ वा उ वोखुवाश। व्र ता नांप्लि। होप्लइ ळाशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 290 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
| 291 |
मेध्यातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मध्येआतिथिः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
पाहि᳒गाया᳹न्धा॑सामा॑दे । इ᳒न्द्रा᳸यमेधियातिथे । य᳸स᳸म्मिश्लोहर्यो॑र्यो॑हीरण्या᳒या । इन्द्रोवज्री᳹हीरण्या᳒या ॥ ७ ॥
ऊभा᳹यं᳒श्रृणा᳒वा॑चनः । इ᳸न्द्रो॑अर्वा᳒गीदं᳒वा᳒चाः । सत्रा᳹च्या᳹मा॑घावा᳒सो᳒मा॑पीतये । धीया᳹श्शावी॑ष्ठआग॑मात् ॥ ८ ॥
पा ही गा याती। न्धा सा माटिदातइश। आ इ न्द्रा य मेकुच्धीकया ताटाइ थाताइश। य स्स म्मि श्योटीह र्यो र्यो हा इ रायूण्या याःटा। इ न्द्रो वाभिज्रितच्हीकरोपबाप्लण्या योप्ला। हा इशा ॥१२॥ पा ह्ये पा हीती। गा याथान्धा सातामाटदातइश। इ न्द्रा य मेकीचधीकया ताटाइ थाताइश। य स्स म्मि श्योटीह र्यो र्यो हा इ रायूण्या याःटा। आ इ न्द्रो वाभीज्रीतच। हीकरोपबाप्लण्या योप्ला। हा इशा ॥१३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 291 |
मेध्यातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
ऊभा᳹यं᳒श्रृणा᳒वा॑चनः । इ᳸न्द्रो॑अर्वा᳒गीदं᳒वा᳒चाः । सत्रा᳹च्या᳹मा॑घावा᳒सो᳒मा॑पीतये । धीया᳹श्शावी॑ष्ठआग॑मात् ॥ ८ ॥
उ भ यं श्रु णषुव च नातिएत। आ इ न्द्रोटिच्अ र्वाताच्गीकदं व चाकिहो वाटाहातइश। स त्राटाच्या माचाक्घ व सो मा पाटुहा इ ताखियाणइश। धी या श वि ष्ट याटुहोचइश। ग मा दौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 292 |
भर्गः प्रागाथः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भगः प्रागाथः इन्द्रः बृहती ॥
माहे᳒चा᳒ना᳒त्वा॑आद्रीवः । पा᳹रा॑शुल्काया॑दीयसे । ना᳒साह᳹स्रा॑यानायू᳒ता॑वज्रिवः । ना᳒शा᳒ता॑याशतामघ ॥ ९ ॥
म हे च नोतीवात। त्वा द्राखाइ वाःणा। पा राचाशु ल्काकाच्या दाकाइ यायासापइशना साप्लाह स्राता। या ना यू ताकीया वाकाज्रायइ वोपाना शाप्लता याता। शापताशमाखघोप्ल। हा इशा ॥१५॥ म हे च नाखीत्वा आ द्री वाःप्ली। पा राचाशु ल्काथाया दाकाइ यायासाटइश। ना स ह स्राकीया ना यू ता या वायूज्री वाःटा। ना शा ताटियात। शा ता माटिघाखऔ हो वाशि। मा हो वी शेटीच् ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 293 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि –मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
व᳒स्यठ॑इन्द्रासिमेपीतूः᳒ । ऊताभ्रा᳒तूरा᳒भु॑ञ्जतः । मा᳒ता᳒चा॑मेछदयथास्सामा᳒वासो । व᳒सुत्वाना᳒यारा᳒धा॑से ॥ १० ॥
व स्यं इ न्द्रा सि मेषूहा बु पि तूःती। उ ता भ्राखितूःप्ल। आ भु न्जा तौकीवा उ वोखिवाश। माकता चा मौकिवा उ वोखिवाश। छ द या था स्साकुमा वा सौकिवा उ वोखिवाश। वाकसू त्वा नौकिवा उ वोखिवाश। याकरोपबाप्लधा सोप्ला। हा इशा ॥१७॥