| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 294 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि –मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
इमइ᳒न्द्रायसुन्विरे । सो᳸मा॑सोदध्या᳒शिरः । तं᳒आ᳒मा᳒दा॑यवज्रहास्तापीता᳒ये । हा᳒रीभ्याय्याह्योकाआ ॥ १ ॥
इ माखाइ म इ न्द्रा य सुप्लून्वाङइ रा इशि। सो मा सो द ध्याषुशि राकास्तंखआ म दा यषीव ज्र ह स्त पीप्लुताङया इशा। ह राटाइ हो भ्या इ याटुओ इ हीकिओ काटाट्याखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 295 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
ईमा᳹इ॑न्द्रामा᳒दा॑यते । सो᳒मा॑श्चिकीत्राउक्थी᳒नाः॑ । माधोपावाना᳹ऊ ᳹पा॑नोगी᳒राः॑श्रुणु । रा᳸स्वा॑स्तोत्रा᳒या॑गिर्वणः ॥ २ ॥
इ म इ न्द्राफीम दा य ताकीइश। सो मा श्चि कि त्रषुउ क्थि नो मायीधोःटपायपाटना उ पा नो गि राःशु। शायर्णूटच्राकस्वा स्तोटात्रात। या गि र्वाटिणाःखण्। ओपइ ळाशा ॥२॥
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देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 296 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः बृहती ॥
आत्वाटट्यद्या᳹सा॑बर्दूघां॑ । हूवे᳹गा॑यत्रावे॑पसम् । इ᳸न्द्रं॑धेनुं᳒सूदू᳒घा॑म॑न्यामीष॑म् । ऊरू᳒धारामारंकृ॑तम् ॥ ३ ॥
आ त्वा द्या सातीब र्दु घातिम् । हू वे गाकिय त्र वे प संकुआ इ न्द्रा न्धटीनूत। सू दू घाचिमा नि याटिमाखइ षणाम् । ऊ रू धाटिरात। मा र ङ्काटिर्क्तांखण्। ओपइ ळाशा ॥३॥
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छन्दः (Chandas) |
| 297 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ विश्वामित्र इत्येके |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि-मध्येआतिथी काण्वौ, विश्वामित्र इत्यकेे इन्द्रः बृहती ॥
नं᳸त्वा॑बृह᳒न्तोअ᳒द्रा॑यः । वा᳒रन्त॑इन्द्रावीळावाः॑ । य᳒च्छि᳒क्षा॑सिस्तूवाते᳒मावातेवा᳒सू॑ । नाकीष्ट᳒दा᳒मी॑नातिते ॥ ४ ॥
न त्वा बृ ह न्तोतुअ द्रि याःति। वा र न्त इकीन्द्रा वी ळाटिवाःत। याचच्छियक्षा सिटास्तु व ता इ माटुच्वा तेचावा सूचा। ना कि ष्टाटिदात। मी ना ताटिइ ताखाण्इश। ओपइ ळाशा ॥४॥
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| 298 |
नोधा गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नोधा गौतमः इन्द्रः बृहती ॥
का᳒यीं॑वे᳒दस्सूते᳒सा᳒चा᳒ । पी᳸बन्तःकद्वायो॑दधुः । आयं᳒यःपू॑रो॑वीभीनत्यो᳒ज॑सा । मन्दा᳒नाः᳒शिप्री᳒य᳒न्धा॑सा ॥ ५ ॥
क ईं वे दाती। सू ताचाइ सायाचाट। पि ब न्तः क द्वा योयूदा धूःटा। आ यं यः पु रोषुवि भि न क्ता योयुजा साटा। मकन्दा नाटाश्शीत। प्राटयाखऔ हो वाशि। न्धाखसाश ॥५॥
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| 299 |
मेध्यातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथिः (मध्येआतिथिः) काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
यादिन्द्राशासो॑आव्रातं᳒ । च्यावा᳒यासा᳹द॑सस्पारी॑ । अस्मा᳹का॑मंशुर्म्मा॑धावन्पूरूस्पृहं᳒ । वसव्येटट्यआ᳒धी॑बर्हय ॥ ६ ॥
या दि न्द्रापिशा सो व्र ताशीम् । च्या व या साचीद साकास्पा रौकावातत्। अ स्मा का मौकीवातत्। अं शु र्माचिघ वकान्पू रू स्प हौकीवातत्। वा सा व्या यौकीवातत्। धीकबोपबाप्लर्हा योप्ला। हा इशा ॥६॥
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| 300 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः बृहती ॥
त्व᳸ष्टानोदै᳒व्यंवा᳒चाः॑ । पर्ज᳒न्योब्र᳹ह्मा॑ण᳒स्पा᳒तीः । पुत्रै᳹भ्रा᳹तृ॑भिरा᳹दीतीर्नूपातु॑नः । दुष्टा॑रन्द्रा᳹मा॑णंवा᳒चाः ॥ ७ ॥
त्व ष्टाखानो दै व्यं व चाःशु। प र्ज न्यो ब्रंकीह्मा ण स्पाटितीःत। पु तै र्भा त्रषीभि रा दी तिकीर्न्नू पा तूटिनाःत। दु ष्टा राटिन्त्रात। मा णं वाचिचाःखण्। ओपइ ळाशा ॥७॥
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| 301 |
वामदेवो गौतमः |
त्वष्टा, पर्जन्यः, ब्रह्मणस्पतिः, अदितिः |
बृहती |
॥ वामदेवो गौतमः बहुः बृहती ॥
कादा᳒चाना᳒स्तारी᳒रा॑सी । नेद्रं॑सश्वसीदाशू᳒षे । ऊ᳸पो॑पेन्नूमाघावन्भू᳒याइ᳒न्नूते । दा᳸नन्देवा᳒स्या॑प्रच्यते ॥ ८ ॥
क दा च ना स्तातुरी र सातिइश। ना इ न्द्रं साखीश्चाशसा इ दा शूखीषाणइश। उ पो पे न्नुषीम घ व न्भू याकुइ द्धोटाइ नूखाता इशा। दा न न्दाखिइ वाणा। स्या प्रोपाबाप्लच्या तोप्ला। हा इशा ॥८॥
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| 302 |
श्रुष्टिगुः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ श्रुष्टिगुः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
युंक्ष्वा᳒हीवृ॑त्रहन्तमः । हारी॑इन्द्रापारावा᳒ताः॑ । अर्वाची᳒नो᳒मा॑घावन्सो᳒मा॑पीतये । उग्रा᳹रि ᳹ष्वाभीरा᳒ग॑हि ॥ ९ ॥
आ इ हीटिआ इ हीटिहोचइश। युं क्ष्वा हि वृखीत्रा ह न्ताकिमाफ। हा री इ न्द्राकीच्पा राकावायतापअ र्वाखाची नाःता। मा घ व न्सोकिमा पा इ तायीयापउ ग्राचारि ष्वाता। भीपरो बाप्लागा होप्ला। हा इशा ॥९॥
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| 303 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मध्येआतिथिः (मेधातिथिर्वा) काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
त्वा᳒मीदा᳒ह्योना᳒राः । आ᳒पीप्यन्वज्ज्रिन्भू॑र्णा॑यः । सा᳸इ॑न्द्रस्तोमा॑वाहसाई᳒हा᳒श्रू॑धिः । ऊपा᳹स्वा᳹सा॑रामा᳒ग॑हि ॥ १० ॥
त्वाचमीकदाफाप्ल्हो इ हि योखीन रा एशि। आ पा इ प्यषीन्वा ज्रा इ न्भूकीर्णाखयाःण। साकइथन्द्र स्तो म वाटीहा साचाइकहा श्रू धाटिऔ होकावाफहाणइश। ऊ पा स्वा साटीऔ होकावाफहाणइश। रा मा गाटिहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१०॥