| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 245 |
पुरुहन्मा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ पुरुहन्मा आंगिरसः इन्द्रः बृहती ॥
ना᳸की᳸ष्टंकर्माणानशात् । यश्चाका᳸रा॑स्सा᳒दावृधं । इ᳒न्द्रन्नाय᳹ज्ञैर्वि᳹श्वा᳹र्गू॑र्तामृ॑भ्वा॑सम् । आधृष्ट᳒न्धृष्णु᳒मोज॑सा ॥ १ ॥
न कि ष्टा ङ्काखीर्म्मा णा ना शाप्लीत् । य श्च का राखीस दाकाच्वृकधांपस दाप्लावृ धाताम् । इकन्द्राचन्न याचाज्ञै र्वि श्वा गूकीर्क्ता मृकाभ्वा सापान्ता मृफाभ्वा साताम् । आ धा रि ष्ट न्धाचुष्णु मोकाच्जा सापाष्णु मोप्लाज साखण्। ओपइ ळाप्ला ॥१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 245 |
पुरुहन्मा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
ना᳸की᳸ष्टंकर्माणानशात् । यश्चाका᳸रा॑स्सा᳒दावृधं । इ᳒न्द्रन्नाय᳹ज्ञैर्वि᳹श्वा᳹र्गू॑र्तामृ॑भ्वा॑सम् । आधृष्ट᳒न्धृष्णु᳒मोज॑सा ॥ १ ॥
न कि ष्ट ङ्क र्म्म णाषून श द्धोतिइश। य श्च का राखीसा दा वृ धाप्लीम् । आ इ न्द्राटिन्ना याटाज्ञै र्वि श्वा गू र्क्ता मायूभ्वा साटाम् । आ धृटाच्हो ष्टा न्ध्रखिहा ओ वाशि। ष्णु मोताजाटसाख ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 246 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि – मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
या॑ऋते᳒चीदभिश्री᳒षाः॑ । पूरा᳒जत्रु᳹भ्या॑आतृ᳒दाः॑ । स᳒न्धा॑तासंधींमा॑घावा॑पूरोवा᳒सूः । निष्क॑र्ता॑वी᳹ह्रूतंपू᳒नाः ॥ २ ॥
या ॠ ता इ चीखुदा भी श्री षाःप्ली। पु राटाजा त्रूटाभ्या आ तृ दाचीहो वाटाहातइश। स न्धाटाता साटान्धा इ मा घ वाटुपु रो वाचिसु र्हो वाटिहातइश। ना इ ष्काटिर्क्ता वीटाह्रु त म्पूकिना र्होटाहाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 247 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि – मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
आ᳸त्वासाहस्रा॑माशात᳒म् । युक्ता᳒राथेहीरण्याये॑ । ब्रह्मायू᳒जोहा᳒रा॑यिन्द्राकेशी᳒नाः । वाहन्तूसो᳒मापीतये ॥ ३ ॥
आ त्वा स हाती। स्रा माचाशायताटम् । यु क्ताचार थेकाच्हि र ण्य येचीब्र ह्माकायूयजोट। हा र य इकिचन्द्रा काक्यइ शायाइ नाःटा। वा हाकान्तूयसोटमाटपाखऔ हो वाशि। ताखयेश ॥४॥ औ होषाआ त्वा सा हातीएत। स्रा माचाशायतांपहाप्लहाङइश। यु क्ताकार थेकाहि र ण्य येकीच्ब्र ह्माकायूयजोपहाप्लहाङइश। हा र य इकीच्न्द्रा काकाइ शायाइ नाःपहाप्लहाङइश। वा हाचान्तूयसोपहाप्लहाङइश। मा पीकातापया उ हु वाप्लीहाप्लबुश। बाश ॥५॥ आ त्वा स ह स्र माषूश त माति। यु क्ता र थे हि र ण्य ये ब्र ह्म यू जोषोह र य इचीन्द्रा के हाटिशा इ नाटिहा उ वाति। वा ह न्तु सोचीम पौकाहोतहि म्माटा। त याताओपबाप्ल। ऊख ॥६॥ आ त्वा स ह स्रा माफश ताखामा त्वा सा हाशी। स्रा मा श त माटुइ हि योखिहाणइश। यु क्ताचार थेकाहि र ण्य येकीच्ब्र ह्माकायूयजोटआटइ हि योखिहाणइश। हा र य इकीच्न्द्रा काकाइ शायाइ नाटाआटइ हि योखिहाणइश। वा हाचान्तूयसोटआटइ हि योखिहाणइश। मा पी ताटियाखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 248 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः बृहती ॥
आमन्द्रै᳹रि॑न्द्राहा᳒री॑भिः । याही᳒मा॑यूरा॑रोम᳒भिः । मा᳒त्वा॑केचिन्नी᳹ये॑मुर्वि᳒न्ना᳒पाशी᳒नाः॑ । आतीधन्वेवतंई॑हि ॥ ४ ॥
आ म न्द्रै रातीइ न्द्र ह रि भातुइःश। याकही म यूकिच्राकरोकमा भापाइशर्म्मा त्वा काकिइ चीशात् । नी ये मूखिर्वीश। नाकपा शि नोचिती ध न्वेटिच्वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। वाखयाःप्ल ॥८॥ आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरि भाताइःश। याकही म यूचिराकरो म भाषिइ र्म्मा त्वा काटीइ चीतात् । नी येकामु र्वीकान्नाकपा शाटाइ नाःता। आ ता इ धाटीन्वेतच्। वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। व योताभीःख ॥९॥ आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरी भीःता। याकहि म यूचिराकरो म भी रा उ वाशू। मा त्वाटाच्केकचि न्नि ये मु र्विकुन्ना पा शि नो उ वाटू। आ तीटाध न्वेचाव तंताआ उ वाटि। ईखहिश ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 249 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ गौतमो (गौतमो वा) राहूगणः इन्द्रः बृहती ॥
त्वा᳒मंगप्रा᳒शं॑सिषः । देवा᳒श्शा॑वीष्ठमा᳒र्क्त्यम् । न᳸त्वा॑दन्यो᳒मा॑घावन्नस्तिमार्डीत । इन्द्रब्रा᳒वी॑मीतेवा᳒चाः॑ ॥ ५ ॥
त्व मा ङ्गाखिप्रा शं सी षाःप्ली। दा इ वाचिश्श वि ष्ट मा र्क्ताखुयणम् । न त्वा द न्योचीमा घ वचिन्नाटस्ति मा र्धाखिइ ताणा। आ इ न्द्राखिबृशवा औपाहोश। मीकतोपबाप्लवा च्योप्ला। हा इशा ॥११॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 250 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेध पुरुमेधावांगिरसौ इन्द्रः बृहती ॥
त्वा᳒मि᳒न्द्रायाशा᳒आ॑सि । ऋजीषीशावासस्पा᳒तिः । त्वंवृत्रा᳒णी॑हंस्यप्रातीन्ये᳒काई᳒त्पूरूः᳒ । आनूक्तस्चर्षाणिधृ᳒त्तिः ॥ ६ ॥
त्व मि न्द्राति। या शा य सीचीऋ जीकाषी श वाचिस स्प ताचिइश। त्वं व्र त्रा णीतीहं स्याता। प्रा ती ना येकीच्का ई त्पूकिरूभरा नूटाहो क्ता श्चाटिर्षाटट्णाखऔ हो वाशि। धाखर्क्तिःप्ल ॥१२॥ त्व मा इ न्द्राखीया शा य साप्लीइश। ॠकजा इ षीकिशाटवा साखाणफप्ल्। स्पाखतिःश। त्वंकव्र त्रा णीकिहं स्याचाप्रा तिचान्येशका ईचात्पु रू रा नाभीउ वोखावाश। क्ता श्चाटाउ वोखावाशर्ष णा इ धृ तिःप्लु। होप्लइ ळाशा ॥१३॥ हा बु त्व मि न्द्रातु। या शा याखिसी हा बुशि। ॠ जी षीखिशाशवा स स्पाखिती र्हा बुशि। त्वंकवृ त्राकाणी हं स्या हाभीबुश। प्रा ती नाखियेण। का ई त्पूपिरूप्लर्हाङबुश। आ नु क्तापिश्चाप्लर्हाङबुश। षाटणाखऔ हो वाशि। धाखर्क्तिःप्ल ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 250 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
त्वा᳒मि᳒न्द्रायाशा᳒आ॑सि । ऋजीषीशावासस्पा᳒तिः । त्वंवृत्रा᳒णी॑हंस्यप्रातीन्ये᳒काई᳒त्पूरूः᳒ । आनूक्तस्चर्षाणिधृ᳒त्तिः ॥ ६ ॥
हा बु त्व मि न्द्रातु। या शाचाय सीकाहो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हा बुशू। ॠ जीकाषी श वाचिस स्पा तिचिर्हो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हा बुशू। त्वं वृ त्रा णिकीहं स्याचाप्रा तीचान्येशका ईचात् पु रूकार्हो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हा बुशू। आ नु क्त श्च र्षा णिकूधृचतीकर्हो इ हो इ हो येपूहा बु हा बु हाप्लुउ वाशा। स्वकर्म हाःटाख् ॥१५॥ हो त्व मि न्द्राती। या शाचाय सीकाहो येटाहोख। ॠ जीकाषी श वाचिस स्पाचातिटर्हो येटाहोख। त्वं वृ त्रा णीकीहं स्याचाप्रा ती न्येचिका ईचात्पु रूकार्हो येटाहोख। आ नु क्तषिश्च र्षा णि धृ तीटुर्हो येटाहोखहा उ वाति। स्वकर्म याःटाख् ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 251 |
मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिमध्येआतिथी (मध्येआतिथिः) काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
इ᳒न्द्रामीद्देवातातये । इन्द्रं॑प्रायत्याध्वारे᳒ । इन्द्रंसामीके᳒वानी᳒नो॑हवामहे । इ᳒न्द्र॑न्धानास्यासा᳒ता᳒ये॑ ॥ ७ ॥
इ न्द्र मि द्दे व तातू। ता या इ न्द्र प्रा याकूती य ध्वाटिरातइश। आ इ न्द्राटिस मीकाके वा नी नोचीहा वा माटिहातइश। आ इ न्द्राटिधा ना स्य सोपीबाप्ल। ताखयेश ॥१७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 252 |
मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिमध्येआतिथी (मध्येआतिथिः) काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
ईमा᳒ऊ॑त्वापूरोवसो । गी᳒रो॑वर्धन्तूया᳒मा᳒मा॑ । पवाका᳹व॑र्णश्शू᳒चा᳒योवीप᳒श्ची᳒ताः᳒ । आभी᳒स्तोमै॑रनूषत ॥ ८ ॥
इ मा उ क्त्वा पु रोषूव सो गि र एतुगि राःता। वा र्ध न्तु याकीम माटापा व क व र्णातुश्शु च यो वीपीपाश। हिंटहिं श्चाखाइ ताःणा। आ भि स्तो मैकीर नूटाच्हू वाकाएकहो वाटा। षाकता औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१८॥ इ मा उ क्त्वाषीपु रो व सो हातुबुश। गी रोचाव र्धकान्तुचयायम माटाइ हाताहातहोचइ होखावाश। पाथवा क व र्णाकीश्शु च योकिइ हाताहातहोचइ होखावाश। वी प श्ची तोचीआ भि स्तो मैकीरि हाताहातहोचइ होखावाश। आ नू षाटिट्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१९॥ इ मा उ क्त्वा पु रोफूव साताबु गापाइ रो व र्ध न्तु याप्लूमाङमाश। पाथवा क व र्णाकीश्शु च योटिच्वी प श्चि ता औभूहोतआ औटाहोत। आ भि स्तो मैचीर नूटाच्हू वाकाएटहो वाका। षा ता औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 253 |
मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिमध्येआतिथी (मध्येआतिथिः) काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
ऊ᳒दूत्येमाधू॑मक्तमः । गीरस्तोमा॑सैरते । स᳒त्राजितो॑धानासाआक्षी॑तोतयः । वजय॑न्तोरा॑था॑इवा ॥ ९ ॥
उ दु त्ये माती। धूकम क्त माटिगा इ रा स्तोखीमाण। साकई र ता एभीसा त्रा जाखिइ तोशाधा ना साखियाण। क्षीकतो त योटिवा जा याखिन्ताःण। र था आखिइश। वात्रा ॥२१॥ उ दु त्ये माफीधु मा क्त माःकी। गी र स्तो मा स याटूई राटाता इशा। स त्रा जि तो ध नाटूसा या क्षि तोकीता योटा। वा ज य न्तो र थातूआ उ वाति। ईखवाश ॥२२॥ हातउ दु त्ये म धू माफूक्त मोखाहा इशा। गाचइ र स्तो माटीस याखाणफप्ल्इश। राखतेश। स त्रा जि तो ध नाकूसा या क्षि तोकीता याःखा। हातवा ज य न्तो र थाफूइ वोखाहा इशा। वा ज य न्तोकीर थाताच्ईकवा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 254 |
देवातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ देवातिथिः काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
या᳸था॑गौरो᳒आपा᳒कृ॑त᳒म् । तृ᳒ष्यन्ने᳒त्यवे᳒रि᳒णम् । आपि᳒त्वे॑नप्रापित्वेतू᳒या᳒मा᳒ग॑हि । क᳸ण्वेषूसू᳒साचा᳒पी᳒बा ॥ १० ॥
या था गौपिरो अ पा कृ ताशुम् । तृ ष्य न्ये तीकीया वे राटिइ णाताम् । आकपि त्वे नषिप्र पि त्वे तुचीया मा गाटिहीत। क ण्वेटाच्षूकसू साटाट्चाखऔ हो वाशि। पीखबाश ॥२४॥ ओ वा योखिवा या थाशि। गौ रोथाआचपा कृकाता मोखाहाप्लहातइश। तृ ष्य न्ने तीचीया वाचाइ रिशाणा मोखाहाप्लहा याखापीण। त्वे न प्र पि त्वे तूचूयाकमाचग हिशाओखहाप्लहातइश। क ण्वेटाच्षूकसू साटाट्चाखऔ हो वाशि। पि बाताईटख् ॥२५॥