| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 265 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथिः (मध्येआतिथिः) काण्वः इन्द्रः बृहती ॥
सत्य᳒मित्थावृषेद॑सि । वृ᳒र्षा॑जूतिर्नोवीता । वृ᳒षाह्युठे॑ग्रश्रृण्वीषे᳸पा॑रावा॑ती । वृषोअर्वावा᳹ती॑श्रुताः᳸ ॥ १ ॥
स त्य मि त्था वृ षातूइ द सातिइश। वृ ष जू ति नोषुर्वि ताटावृ षाचाह्यु ग्राचाशायण्वि षाटाइ प राकिवा ताचाइश। वृ षो आटिर्वात। वा ता इ श्रूटीताःख। ओपइ ळाशा ॥१॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 266 |
रेभः काश्यपः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ रेभः कश्यपः इन्द्रः बृहती ॥
या᳒च्चाक्रासी॑पा॑रावा᳒ति । याद॑र्वावा᳒तीवृत्रहन् । आ᳒ता॑स्त्वागीर्भिद्युगदिन्द्राकेशी᳒भीः । सूता᳒वंआ᳒वी᳒वा॑सति ॥ २ ॥
य च्छा क्रा सीखीपा रा वा तीप्ली। या द र्वा वाटीच्ती वाकात्रायहाटन् । अ ताताऔटहोतवात। स्त्वा गी र्भिटिद्यु ग दिकिन्द्रा केयाशी भीःटा। सू ताचावंटआखआ औ हो वाशि। एतवि वाटास तीखा ॥२॥ य च्छ क्रा सिषीप रा व ति य दोतूवात। अ र्वाथाच्वा ताकाइ वायात्रा हापान्न ताखास्त्व गाताइश। भाकइ र्द्यु ग दिकीन्द्रा केयाशी भीःटा। सू ताटावंटट्आखऔ हो वाशि। वि वाटास तीखा ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
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| 267 |
वत्सः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वत्सः (वशोऽश्वयः) इन्द्रः बृहती ॥
आभीवो॑वीर᳹म᳒न्धा॑सामादेषुगाया । गीरा᳒माहावी᳒चे॑तसं । इ᳒न्द्रन्नामश्रू᳹त्यंशाकीनं᳹वाचोयाथा ॥ ३ ॥
आ भी वो वी रषुम न्ध साति। म देकाच्षुकगा याटागीकरा मा हाटिवी चेकाताखसणम् । इ न्द्र न्ना माती। श्रु त्यंकाशा काटाइ नाखामौ हो वाशि। व चोता। ऊटपाख ॥४॥
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| 268 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भरद्वाजः (शयुः) बार्हस्पत्यः इन्द्रः बृहती ॥
इ᳸न्द्रा॑त्रीधा᳒तू॑शाराणं᳒ । त्रीवा᳒रू᳒थंस्वस्ताये᳹ । छर्दिया॑च्छामाघा॑वा॑भ्या॑श्चामंह्य॑न्च । यावा᳹यादिद्यू᳒मे॑भ्यः ॥ ४ ॥
इ न्द्र त्रि धाफीतु शा र णाशीम् । त्री व रू थंषीस्व स्त याचिइ छ र्दि र्याटीच्छात। मा घ व त्भ्याकीश्चाकम ह्याटाञ्चात। याकव याटादीतद्यू मेकाभ्या औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥५॥
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| 269 |
नृमेध आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेधे आंगिरसः इन्द्रः बृहती ॥
श्रा᳒यन्ता॑ईवासूर्य॑ । विश्वे᳒दिन्द्रा॑स्यभक्षत । वासू᳒नीजातो᳹ज॑निमान्यो᳒ज॑सा । प्रा᳸ती॑भा॑ग᳒न्ना᳒दी॑धीमः ॥ ५ ॥
श्रा य न्त ई व सूषूओ रातायातम् । वि श्वाटाइ दि न्द्राटिस्य भाटाक्षा ताटा। वा सू नि जाकीतो ज नि माकीच्नी योकाजायसाट। प्रा ती भाकिग न्ना दीकिधी मः प्राटितीत। भा गा न्नापिदा हिशाम् । धि माताओपबाप्ल। हेख ॥६॥
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| 270 |
पुरुहन्मा आङ्गिरसः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ पुरुहन्मा आंगिरसः इन्द्रः बृहती ॥
ना᳒सीमादे॑वआपाता᳒त् । ईळन्दी॑र्घा॑योमर्क्त्याः । एता॑ग्वाचिद्या᳒एता॑शोयूयो᳒जाते । इन्द्रोहा᳹रीयूयो᳒जा॑ते ॥ ६ ॥
न सी माचिदेकवाफयाप्लहातहातइशपापत त्प तो वाशी। इ षं होटिइ दी र्घा होभीयोचमायर्क्त्याःट। आ इ त ग्वाटीचीतद्या याकाइ ता शोकियू यो उ वाकी। ऊखपाश। जा ताटाआ इ न्द्रोटि हा रीटाच्यूकयो जाटाजाटताखऔ हो वाशि। उ ऊखापाश ॥७॥
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| 271 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ नृमेधे- पुरुमेधाषांगिरसौ इन्द्रः बृहती ॥
आ᳒नोवि᳸श्वासुहा᳒व्यं॑ । इ᳸न्द्रं॑सामात्सू॑भूषत । ऊ᳒पाब्र᳹ह्णा॑णीसा᳒वा॑नानिवृत्रहन् । परमाज्यऋचीषमा ॥ ७ ॥
आ न ए वि श्वातु। सु हाटाओ व्याटाम् । आ इ न्द्रं स मा त्सूकूभू षा ताकिऊखपाशप्ल्हातहातइश। ब्र ह्माकाणी स व नाचीनी वृ त्र हाचीन्पाकरा माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥८॥ आ नो वि श्वा सु हातूहातव्यातम् । इकन्द्रं स मा त्सूकीभू षा ताकिऊ प ब्राटिह्मात। णी स व नाचीनि वृ त्र हाचीन्पाकर माटाज्याःत। आ र्चाटाहातइशषाकमा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥९॥ आ नो वि श्वा सु हातूव्यातम् । इ न्द्रं स मा त्सुषुभु षा ताचिऊ पाकाब्रायह्माट। णी स व ना निषुवृ त्र हाचिन्पा राकामायज्याःट। ऋ चि षाटिमाखण्। ओपइ ळाशा ॥१०॥
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छन्दः (Chandas) |
| 272 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
त᳸वेदि॑न्द्रावा᳒मंवा᳒सू । त्वंपू॑ष्यसिमाध्यामं । सत्रा᳒विश्वास्यापारामास्या॑राजसि । ना᳸कीष्ट्वा᳸गोषू॑वृण्वते ॥ ८ ॥
त वे दि न्द्राफीव मं व सूकी। त्वं पु ष्य सि माकुध्या मं सा त्राटीवाखइ श्वाणा। स्याकप रा म स्य राषुज सीकान कि ष्ट्वाखिगोण। षूटवृ ण्वाटातातइश। हो वाटाहोचइ हो वाटिच्हाकच्बुश। बाख ॥११॥
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| 272 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
त᳸वेदि॑न्द्रावा᳒मंवा᳒सू । त्वंपू॑ष्यसिमाध्यामं । सत्रा᳒विश्वास्यापारामास्या॑राजसि । ना᳸कीष्ट्वा᳸गोषू॑वृण्वते ॥ ८ ॥
क्वे य थाति। क्वेकद साटाऔ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाश। पु रूकात्रा चाकाइ द्धि तेकिम नाटाऔ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाशआ लाकार्षी यू ध्माकिख ज क्रशिदौ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाश। पु रकान्द रा प्र गाकीया त्राटाऔ हो वाकिऔ हो औकिहोखवाश। अ गातासाटइ षूखाऔ हो वाशि। प्सू शंटासाःख ॥१२॥ कू वा कू वाती। ई या था क्वेकीद साशाउ वा औटिहोत। पु रू त्रा चाकीइ द्धि तेकिम नाकाउ वा औटिहोत। आ लाकार्षि यू ध्माकिख ज कृशिदु वा औटिहोत। पु रकान्द रा प्र गाकीया त्राटाउ वा औटिहोत। अ गातासाटइ षूखाऔ हो वाशि। प्सूतशंटसाःख ॥१३॥ क्वे य थाति। कू वा इ दापीसीण। पु रू त्रा चीतीद्धी ताचाइ मापानाःण। आ ला र्षी यू ध्माकुख ज क्र द्धाटिउ वाता। पू र न्दापिराण। प्र गाकाया त्राटाच्अ गाकासाटइ षूखाऔ हो वाशि। प्सूख ॥१४॥
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| 273 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि-मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
क्वे᳸या॑थक्वे᳒दसि । पुरूत्रा᳒चिद्धितेमानाः । आलाऋषीयुध्मखजकृत्पुरन्दरा । प्रा᳸गा॑यत्राआ॑गासिषुः ॥ ९ ॥
व य मे नातीम् । आटइ दाखाऔ हो वाशिहीखयोश। अ पीचापे मेथाहा व ज्रि ण न्ता स्माकूऊ आटा। द्य स व नाषीइ सू तांयिभा राटा। आकनू नांटाभूत। षा ताकाश्रु ता इ ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१५॥ व य मे नातीम् । इ दाटाहा याःटा। आ पौ हो इ पेकुमौ हो इ हाकीव ज्रि णाचिम् । त स्माथाऊ आ द्याकिस व ना इ सूकुतं भ राशि। आकनौ हो नांकिभौ हो षाकिता श्रू ताकिआ उ वाटि। ऊखपाश ॥१६॥ व य मे ना मि दाफुही या उ वोखीवा इ या हा इशु। हु वे हो वाकीय पि पे मे हा वायूज्री णांटा। त स्मा ऊ आ द्यषुस व ना इ सू तांयूभा राटाइटयात। आकनू नांथाभूतच्षा ताकाश्रूपतात्रइश। श्राचवाटसाखइश ॥१७॥