| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 343 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ गौतमो राहूगणः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
गा᳒यन्तित्वागायत्रीणाः॑ । अ᳸र्चन्त्यर्का᳒मर्कीणाः । ब्र᳒ह्मा᳒णस्त्वाशतक्रतो । उ᳒द्वं॑शामीवयेमिरे ॥ १ ॥
गा याता। ओचन्ति त्वाताओपगा याप्लात्रातइ णाःता। अ र्चाताओचन्ति याताओपर्का माप्लार्कातइ णाःता। ब्र ह्माताओचण स्त्वाताओपशा ताप्लाक्राततातबुश। उ द्वाताओंचश माताओपव याप्लाइ मि राप्लिइश। होप्लइ ळाशा ॥१॥ गा या न्ति त्वोतीहा इ गा या त्रीखुणाःण। अ र्च न्त्य र्क मायुर्कीपणाःश। अ र्च न्ती योखीहाशर्क मा र्कीखिणाःण। ब्र ह्मा ण स्त्वा श तायूक्रापता बुशा। ब्र ह्मा ण स्तोखीहा इशा। श ता क्राखिताणबुश। उ द्वं श मी व यायूइ मीपारेश। उ द्व श मोखीहाणइश। व या इ माखीणफप्ल्इश। राखइश ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 343 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
गा᳒यन्तित्वागायत्रीणाः॑ । अ᳸र्चन्त्यर्का᳒मर्कीणाः । ब्र᳒ह्मा᳒णस्त्वाशतक्रतो । उ᳒द्वं॑शामीवयेमिरे ॥ १ ॥
गा या न्ति त्वाषीगा या त्रि ण यातु। अ र्च न्त्य र्क म र्कटूइ णाःता। ब्र ह्मा ण स्त्वाटीहोचइशशा ता क्राटितातबुश। उ द्व श मी व यायूइ मीपारेश। उ द्वं शाखिमीण। व याटाउ वाता। उ प्माटाइ रोखा। हात्रइश ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 344 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
इ᳒न्द्रंविश्वा॑अविवृधन् । समूद्रा᳒व्या॑चासंगीराः॑ । रा᳒थीता॑मंराथी᳒नां॑ । वाजानां᳒सात्पा॑तिंपा᳒तिम् ॥ २ ॥
इ न्द्र वि श्वाःती। अ वीटावृ धाचान् । सा मु द्राकिव्या चाटाच्सा ङ्गि राःचि। रा थीकात माताहा उ वाटिच्रा थाचाइ नाशाम् । वाचजा नांटासातत्पा तींकाप ति मि ळाटीभाखण्। ओपइ ळाशा ॥४॥ हो इ न्द्रं वि श्वाःतु। अ वीकावृ धा न्साथिमूटच्द्रायव्याटच संकागि राःचा। रायथीटच्तायमांटच्रा थाकाइ नाचाम् । वायजाचनांयसाटच्त्पा तींकापाटतीखण्म् । ओपइ ळाशा ॥५॥ इ न्द्रं वि श्वा अ वीषूवृ ध न्स मू द्राखुव्याण। चाकसा ङ्गीपाराःश। रा थीकाथ्ताकमाटऊटहो वाथाऊटच्रा थाचाइ नाशाम् । वाचजा नांथासाटऊटहो वाथाऊटत्पा तींकापाटतीखण्म् । ओपइ ळाशा ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 344 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
इ᳒न्द्रंविश्वा॑अविवृधन् । समूद्रा᳒व्या॑चासंगीराः॑ । रा᳒थीता॑मंराथी᳒नां॑ । वाजानां᳒सात्पा॑तिंपा᳒तिम् ॥ २ ॥
इ न्द्रं वि श्वा अ वीषूवृ ध न्न य्यातीहातइश। सा मूचाद्रायव्यांटच्चाकसाकङ्गायइ राटाअ य्याटाहातइश। रा थाचाइ तायामांटच्रा था इ नाकीम य्याटाहातइश। वा जाचानांयसाटच्त् पा ताकाइ म्पाटातीटम य्याटाहाखण्इ । ओपइ ळाशा ॥७॥ इ न्द्रं वि श्वा अ वीषूवृ ध न्न य्या दौ होखूवात्र। स मु द्र व्या च सकूङ्गा इ राटिअ य्याटादौटहोतवात। र थी त मांचीराकथाकइ नाटाम य्याटादौटहोतवात। वाचजा नांथासा त्प तीकिम्पा तीटाम य्य दौटिहोटवाःखण्। ओपइ ळाशा ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 344 |
मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
इ᳒न्द्रंविश्वा॑अविवृधन् । समूद्रा᳒व्या॑चासंगीराः॑ । रा᳒थीता॑मंराथी᳒नां॑ । वाजानां᳒सात्पा॑तिंपा᳒तिम् ॥ २ ॥
ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। इ न्द्रं वि श्वातीअ वीचावा र्धाटान् । स मु द्र व्यातीच सचाङ्गा इ राःटि। र थी त मांतीरा थाकाइ नाटाम् । वा जा नां सातीत्पा तींचापा तीटाम् । ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। ह या इ ह याखुओ हाफाओ हाफा। हो इ ळा हफिहो इ ळाफिप्ल्होखइ ळाशा ॥९॥ हा या येटिच्हाकया येटाह याताहातआपइ न्द्रं वि श्वाकीच्अ वीफावृ धातान् । सापमु द्रा व्या च सणुफ्ङ्गि राःता। रापथी ता मं र थीणुफ्नातम् । वापजा नां सा त्पा तींणुफ्प ताताइश। हा या येटिच्हाकया येटाह याताहातआपहो इ ळाफिहो इ ळाफिप्ल्होखइ ळाशा ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 345 |
जेता माधुच्छन्दसः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ क्शेता माधुछन्दसः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
ईमा᳒मिन्द्रासूतंपी᳒बा । ज्ये॑ष्ठमा᳹मार्त्य॑म्मादम्᳒ । शुक्र᳹स्या॑त्वाभ्याठ॑क्ष᳹रन् । धा᳹रा॑ऋतस्यासाद॑ने ॥ ३ ॥
इ म मापिइ न्द्राणा। सू तां पाटिट्इ बाखाऔ हो वाशि। ज्ये ष्ठा म माटीर्क्त्य म्म दंकिशु क्राता। स्य त्वाथाभीकया क्षाटाट्राखऔ हो वाशि। धाकराटॠ त स्य सा दाटुनेख ॥११॥ इ म मीणिफ्न्द्र सु तांखिपि बाशा। ज्येकष्ठा म माकिर्क्त्य म्म दंटिशु क्रा उ वोखीवाश। स्य त्वाकाभ्य क्ष र न्धा राषुउ वोखावाश। ॠ ता उ वोखीवाश। स्य सा द नाप्लीइश। होप्लइ ळाशा ॥१२॥ इ म मि न्द्राफीसु त म्पीणिबाफ। ज्येचष्ठा माकाम र्क्त्याकामायम्मा दाटामौटहौटहु वा औकिहोतवात। शु क्रा स्य त्वाचीभा याकक्षायराटनौटहौटहु वा औकिहोतवात। धा राथाऋ ताटाऔटहौटहु वा औकिहोतवात। स्या सा दाटिनाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१३॥ इ म मिपिन्द्र सु तं पि ब ज्ये ष्ठाशृम् । आचम र्क्ताकायायम्मा दाटाम् । शु क्रा सि याकीत्वा भि याटिक्षाखरणन् । धा राटाउ वोखावाश। आ र्क्ताटाउ वोखावाश। स्य सा द नाप्लीइश। होपइ ळाशा ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 346 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ गौतमो राहूगणः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
या᳒दि॑न्द्रचित्रमाह्याना᳒ । अ᳒स्ति᳸त्वादा॑तमद्रिवः । रा᳒धास्त᳒न्नोवि᳒दद्वसो । उ᳒भ᳒याहस्त्याभा॑रा ॥ ४ ॥
य दि न्द्रोतिहातइश। चीचत्रा माचाईटह नापाअ स्ति त्वा दाफीप्ल्होतइश। ता म द्राचिइ वोटारापध स्त न्नोणिवी दाफाप्ल्होतइश। वा सा उ भ याटुह स्ति याकिउ वाता। भा रोप्ला। हा इशा ॥१५॥ य दि न्द्र चि त्रषूमौ होतावा इ हाखिनाश। अ स्ति त्वा दाषीत मा उ वाकीआ उ वाकि। द्राखइ वाःप्ला। रा ध स्त न्नोषीवि दा उ वाकीआ उ वाकि। द्वाखसोश। उ भ या ह स्त याषूउ वाकाआ उ वाकि। भा रोप्ला। हाप्लइश ॥१६॥ या दि न्द्रापिचि त्राप्लामा इ हाखिनाणअ स्ताटाइ त्वा दाकिता म द्रा इ वोचुराथध स्त न्नोटिवीचद द्व साचिबुश। ऊ भाचाया हाटास्तापयाशभाखरोप्ल। हा इशा ॥१७॥ य दि न्द्र चि त्रषूमा ईफाह नाखास्तिश। त्वा दा त म द्रि वोषूरा ध स्ताटून्नोतवी वीटाद द्व साचिबुश। ऊ भाचाया हाटास्ता याटाभाटराखण्। ओपइ ळाशा ॥१८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 347 |
अत्रिर्भौमः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ अत्रिभर्गः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
श्रू᳒धीहा᳒व॑न्तीरश्याः॑ । इन्द्राय᳒स्त्वासापर्या᳒ति । सू᳒र्वी᳹र्या॑स्यागोमा॑तः । रा᳒या᳒स्पूर्धी॑माहं᳒आ॑सि ॥ ५ ॥
श्रु धीकाहा वांटाहा वाटान्ती र श्च्याःचि। इकन्द्र याटास्त्वतस पाटाहातर्या तीटायात। सु वी र्य स्यषीगो म तो राकीया स्पूटार्द्धीत। म हंटाय सि याखिण्। ओपइ ळाशा ॥१९॥ श्रु धी हा वाखन्ती र श्च्याःप्लि। इकन्द्रा य स्त्वा स प र्याकूता एटासु वी र्या स्याखीगोणमा ताःटा। रा या स्पू र्द्धीटीहातहातइश। म हं य सीप्ली। होप्लइ ळाशा ॥२०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 348 |
तिरश्चीराङ्गिरसः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ तिरश्चीरांगिरसः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
आ᳸सा॑वीसो᳒मा᳒इन्द्रते । शा᳒वी॑ष्ठधृष्णा᳒वाग॑हि । आत्वा॑॑प्रणत्विन्द्रियं । रा᳒जस्सू᳒र्यो॑नारश्मी᳒भीः ॥ ६ ॥
अ सा वि सो म इचून्द्रा तेफाश वा इ ष्ठाखीधृश। ष्णातवा गापाहिश। आ त्वा पृ णाटीहातक्तू वीटान्द्राखयणम् । रा ज स्सू र्यौकीवा उ वोखिवाश। न रा श्मि भीःप्ली। होप्लइ ळाशा ॥२१॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 349 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ गौतमो राहूगणः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
ए᳸न्द्रायाहिहारी॑भिः । ऊ᳒पा᳒कण्वा॑स्यसूष्ट्रतिं । देवा᳒आमू᳒ष्याशासातः । दीवं᳒याया᳒दिवावसो ॥ ७ ॥
ए न्द्र याखिहीशह ह री भाप्लीइःश। उ पाताक ण्वातास्याचसू ष्टूखातिणम् । दे वाताअ मूताष्या शाकासाखताःण। दा इ वकिय्य याताआ उ वाटि। दाखइ वाशावाखसोप्ल। हा इशा ॥२२॥ ए न्द्र या हीषीह रि भी रू हु वातूहातइश। ऊ पाकाक ण्वा स्याकिसु ष्टु ति मु हु वाटूहातइश। देकवा अ मूकिष्या शाकासाखताःण। दा इ व य्य याकुउ वाशा। दीखवाश। व सो हाप्लि। होप्लइ ळाशा ॥२३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 350 |
नीपातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ नोपातिथिः काण्वः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
आत्वागी᳹रो॑राथीरिव । अ᳸स्तु॑स्सूते᳒षू॑गिर्वणः । आभीत्वासामानूषत । गा᳸वो॑वत्सन्ना᳒धेना᳒वाः ॥ ८ ॥
आ त्वा गा इ रोखुरा थी री वाप्ली। अ स्तु स्सु तेचीषुकगियर्वा णाटाओखवाशप्ल्ओखवाण। अ भि त्वाकिच्सा माकानूयषा ताटाओखवाशप्ल्ओखवाण। गा वो वाभित्सातच्न्नाकधोपबाप्लना वोप्ला। हा इशा ॥२४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 351 |
तिरश्चीराङ्गिरसः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ तिरश्चीरांगिरसः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
ए᳒तोन्वी॑न्द्रंस्ता᳒वामा । शुद्धं᳒शुद्धे॑नासाम्ना । शुद्धै॑रुक्थै᳹र्वावृध्वां᳒सं । शुद्धैराशी॑र्वान्ममक्तु ॥ ९ ॥
ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीना साटाम्नात। शु द्धै रु क्थै र्वाकुवृ द्ध्वांटासातम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्म माखाऔ हो वाशि। तूख ॥२५॥ ए तो न्वि न्द्रं स्त वातूमात। शु द्धं शु द्धेकीनाचसाकओ म्नाटा। शु द्धा इ रूभीक्थातइ र्वाचावृ द्ध्वांखासणम् । शु द्धै राटिशीतर्वाचन्मा माचातू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥२६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 352 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
अनुष्टुप् |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः अनुष्टुप् ॥
योरा᳒यिं᳹वोरायिं॑तामः । योद्यु᳒म्नैद्यु᳒म्ना᳒वाक्तमः । सोम॑स्सूतस्सा᳒इ॑न्द्रते । अस्ति᳒स्वाधा॑पातेमा᳒दाः ॥ १० ॥
यो र यिं वो र याकूहातबुश। ताखमाःप्ल। यो द्यु म्नैषिद्यु म्न वा क्त माकुसो म स्सु त स्सा याटूहो इ न्द्र ताटीइश। आ स्ति स्व धा पा ताटूइ हो येटिम दोखाइ ळाप्ला ॥२७॥ यो र यिं वो र यिफून्त मोखाहा इशा। यो द्यु म्नै र्द्यु म्ना वाफूक्त मोखाहा इशा। सो म सु त स्स इफून्द्र तोखाहा इशा। अ स्ति स्वा धाचीपाकतेफम दोखाहाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥२८॥