| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 324 |
सुहोत्रो भारद्वाजः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ सुहोत्रो भारद्वाजः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
आ᳒व॑द्रप्सो᳹अं॑शूमा᳒तीमतिष्ठात् । इया᳒नः᳒कृष्णो᳒दशा᳹भीस्साहा᳒स्रैः॑ । आवक्ता᳒मिन्द्र॑श्शच्या᳒धामन्तं । आ᳒पस्नीही॑तिंनृमा᳒णा॑आधद्राः᳒ ॥ १ ॥
आ वा द्राखिप्सोशअं शू माखितीणम् । आ ताकाष्ठाखदी या नाःखिकाशष्णो दा शाखिभीःण। सा हाकास्राखइ राशावा र्क्ताखामीशन्द्रा श्शा चीखियाण। धा माकान्ताखमा पा स्नीखिहीशति न्नृ माखिणाःण। अ धाटाद्राखऔ हो वाशि। आचध द्राःटाख् ॥१॥ अ व द्र प्सातीएत। अं शु म तिकीम ति ष्ठाटिदी या नाःचिका र्ष्णाःचा। दा शा भीकिसा हा स्रा येटीआ व क्ता मीचीन्द्राःक। श्शा च्या धा मकन्ताटम पा स्नी ही तीकुच्नृकम णापाअ धा द्राःप्लि। होप्लइ ळाशा ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 324 |
सुहोत्रो भारद्वाजः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
आ᳒व॑द्रप्सो᳹अं॑शूमा᳒तीमतिष्ठात् । इया᳒नः᳒कृष्णो᳒दशा᳹भीस्साहा᳒स्रैः॑ । आवक्ता᳒मिन्द्र॑श्शच्या᳒धामन्तं । आ᳒पस्नीही॑तिंनृमा᳒णा॑आधद्राः᳒ ॥ १ ॥
अ व द्र प्सोषीअं शु म तीचीमौटहोखऔ होता। आ तीकाष्ठा दौटाहोखऔ होता। इ या नः कृ ष्णाचुऔटहोखऔ होता। दा शा भी स्साकीह स्रैथारौटहोखऔ होता। आ वा क्ताचिमि न्द्राचाऔटहोखऔ होता। शा च्या धा म न्ताचुमौटहोखऔ होता। अ पा स्नि ही तिचुनौटहोखऔ होता। नृ माटाट्णाखऔ हो वाशि। आचध द्राःटाख् ॥३॥ अ व द्र प्सोषीअं शु म ती मेतुऔ होखावात्र। आ तापइ ष्ठात्रात् । इ या नाःचिकृ ष्णोचादा शा भीचिस्सा ह स्रैचिराकवाचक्ता माकाइ न्द्रोटाशा ची याकिध माखान्त म पा स्नि ही तिषूनृ मा णा ओ वाशु। अ ध द्राःतिच् ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 325 |
द्युतानो मारुतः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ द्युतानो मारुतः (तिरश्चीरांगिरसः) इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
वृत्रास्या᳒त्वश्वासाथादीषामाणः । विश्वेदेवा᳒आ॑जाहुर्ये᳒साखायः । मारू᳒द्धी॑रिन्द्रासख्य᳒न्ते॑अस्तु । आ᳒थेमा᳒विश्वाःपृ᳒नाजयासि ॥ २ ॥
हाकओटच्हाकओचहातहातच्इशवृ त्र स्य त्वाकीश्वा स था दीकीष माखाणाःप्ल। वि श्वे दे वाटीआ जाकाहु र्ये स खाखीयाःप्ल। मा रू त्भि रा इ न्द्राटूसा खी यकिन्तेखस्तुश। आ थे मा वा इ ष्वाःटूपा र्क्ता नाकिज याखासिश। हाकओटच्हाकओटहातहाखऔ हो वाशि। ओ औकाहोटच्औकहोख ॥५॥ हो येटाच्हा याकायेटह या औचिहोकवाफहातइशवृ त्र स्य त्वाचीश्वा स था दीकीष माखाणाःप्ल। वि श्वे दे वाटिआ जा हु र्येकीस खाखायाःप्ल। मा रू त्भि रा इ न्द्राटूसा खि यकिन्तेखस्तुश। आ थे मा वा इ श्वाःटूपा र्क्ता नाकिज याखासिश। हो येटाच्हा याकायेटह या औचिहोकवाफहाखऔ हो वाशि। ओ औकाहोख ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 326 |
द्युतानो मारुतः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ द्युतानो मारुतः (तिरश्चीरांगिरसः) इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
विधु᳹न्दद्रा॑णंसा᳒मा᳒नेबहूनां । यू᳒वा᳒नंस᳒न्तं॑पालीतो᳒ज॑गारा । दे᳒वा᳒स्या॑पाश्या॑का᳒व्यं॑मा॑हित्वा॑ । अ᳒द्या᳒मा᳒मारास्स᳒ह्य᳒स्सामा᳒ना ॥ ३ ॥
वी धूताम् । द द्रा द द्रा णांटुसा मा नाकिइ ब हूखिनां यु वाशि। नं सा नं सा न्ताटुपा ली तोकिज गाखारा दे वाशि। स्य पा स्य पा श्याटुका वी यकिम्म हीखात्वा द्याशा। म मा म मा राटुस ह्यापास्सा माखा। नात्र ॥७॥ आतआखहाप्लहातइशवीकधु न्द द्रा णांटीसा मा नाकिइ ब हूखिनाशम् । यू वा नं सा न्ताटुपा ली तोकिज गाखाराश। देकव स्य पा श्याटीका वी यकिम्म हीखात्वाश। आतआखहाप्लहात। अ द्या म मा राटूस ही यापिस्सा माखा। नात्र ॥८॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 327 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ बृहदुक्तो वामदेव्यः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
त्वंहत्यस्सप्त᳒भ्योजा᳒या॑मानः । अ᳒श᳒त्रुभ्योअभावश्श᳒त्रू॑रिन्द्रा । गू᳒ढे᳒द्या᳒वा॑पृथिवीअ᳒न्वा᳒विन्दः । वि᳒भूमा᳒द्भ्योभू᳒वा॑नेभ्योरा᳒ण᳒न्धाः॑ ॥ ४ ॥
औ हो इ त्वतीम् । ह त्याचास्स प्त भ्योकिजा य माकिनाःख। औ हो अ शाती। त्र भ्योकाअ भाकाव श्श त्रू रिकीन्द्राख। औ हो इ गू ढेतु। द्या वा प्र थि वीकुअ न्व विकिन्दाःख। औ हो इ वि भूतु। म त्भ्योकाभु व ने भ्योकीर णकान्धाःख ॥९॥ त्वोतहा इ ह त्यौशीवा उ वोखिवाण। स प्त भ्योकिजा य माकिना उ वाकिओ वापाअ शोशाहाङइश। त्र भ्यौ वा उ वोखुवाण। अ भा वकिश्श त्रू रिकिन्द्रा उ वाकिओ वापागू ढेशाहाङइश। द्यौ वा उ वोखुवाण। पृ थि वीकिअ न्व विकिन्दा उ वाकिओ वापावि भूशाहाङइश। म त्भ्यौ वा उ वोखुवाण। भु व नेकिभ्या उ वाकिओ वापार णा न्धाःप्लि। होप्लइ ळाशा ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 328 |
द्युतानो मारुतः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ द्युतानो मारुतः (तिरश्चीरांगिरसः) इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
मेळि᳹न्न ᳹त्वा॑वज्रीणं॑भृष्टीम᳒न्तं । पु᳒रूधा᳒स्मानं॑वृषाभंस्थीरा᳒प्सु॑नुं । का᳒रो॑ष्यर्यस्तारुषीर्दूवस्यूः । डन्दइन्द्र॑द्युक्षंवृ॑त्राहा᳒णंगृणीषे ॥ ५ ॥
मे ळीताम् । न त्वा व ज्रि णं भृकूष्टी माटान्तातम् । पू रूचाधाकस्मा नं वृ ष भंकुस्थी राटाप्सू नूताम् । का रोचाष्य र्य स्त रू षीटुर्दू वाटास्यूःत। आ इ न्द्रकिन्द्यु क्षं वृ त्रा हाटुट्णाखऔ हो वाशि। गृ णीकाषेटख् ॥११॥ मे ळि न्न त्वा वाखुऔ होता। ज्रा इ णंकीभृ ष्टा इ मौकीवातन्तंख। पु रूखाऔ होता। ध स्मा नं वृ ष भंकूस्था इ रौकिवातप्सुखनुशम् । का रोखाऔ होता। ष्य र्य स्त रु षा इषूर्दू वौकावाखस्यूःप्ल। इ न्द्राखाऔ होता। द्यु क्षं वृ त्रा हाटुट्णाखऔ हो वाशि। गृ णी षेखि ॥१२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 329 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वामदेवोः गोतमः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
प्रावो॑माहे᳹मा॑हेवृ᳒धे᳒भरध्वं । प्रा᳒चे॑तासेप्रासू᳸मातिंकृ॑णुध्वम् । वीशःपूर्वीप्रा᳒चा॑राचर्षाणिप्राः॑ ॥ ६ ॥
प्र वाःता। मा हेकामाकहे वृ धेचिभा रा धूभिवातम् । प्रा चा त साषीइ प्रा सूकिमाखतीणम् । कृ णू ध्वाचिमी हा वाखिइ शाःणा। पूटर्वीःतप्र चा राभिचातर्षा णाकाइ प्रा औटिहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१३॥ हाख। प्र वो म हा इ माखूहेशवृ धाणाफ्इ भ राखिध्वशम् । हाख। प्रा चे त सा इ प्राखूसूश। मा ताणाफ्इ ङ्कृ णुखिध्वशम् । हाख। वि शः पू र्वा इ प्राखूचाश। रा चाणाफ्र्षा णाखाइ प्राःप्ला। हाखबु हौ हो वा हाप्लुउ वाशा। ईख ॥१४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 330 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः ऋषिः विराट् ॥
शू᳒नं᳒हूवेमामाघा᳹वानामिन्द्रं । अ᳒स्मिन्भा᳒रेनृ᳹तामंवा᳒ज॑सातौ । श्रृण्वन्ता᳒मुग्रा᳒मूता᳹येसामात्सु᳒ । घ्नन्तं॑वृत्राणि॑संची᳒तन्धा᳒ना॑नी ॥ ७ ॥
शु नं हु वेषीम घ वा न मि न्द्रातूम् । अ स्मि न्भ रेषीनृ त मं वाकीज साटातौत। श्र ण्व न्त मु ग्रषुमू त येकिसा माटात्सूत। घ्न न्तां वाभिर्त्रातहो वाटाहातइश। नी सकान्जी त न्ध नाकीनीतहो वाटाहाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 331 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
ऊदुब्र॑ह्माणैरतश्रवस्या᳒ । इन्द्रंसामर्येमाहयावसिष्ठा । आ᳸यो᳸र्विश्वा॑नीश्रा᳒वासताताना॑ । ऊपश्रो᳒ता᳹मा᳒इवा᳒तोवा᳒चां॑सि ॥ ८ ॥
दी व याकिहो वाकाऔटहोतवाकथ्ऊ दु ब्र ह्मा णीटूऐ रा त श्र वाखुस्याश। इकन्द्रं स मा र्येटीमा हा याकिव सीखाष्ठश। आकयो र्वि श्वा नीटीश्रा वा साकित ताखानाश। दी व याकिहो वाकाऔटहोतवाकथ्ऊ प श्रो ता माटुइ व तोपिवा चांखा। सात्रइश ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 332 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
च᳒क्रं᳹याद॑स्यप्सू᳒आनिषाक्तं । ऊतो᳹ता ᳹द॑स्मै᳒म᳒ध्वी᳒चा॑च्छद्यात् । पृ᳒थि᳒व्या॑मा᳒तीषितंया᳒दूधाः । पायोगो᳹ष्वा᳹द॑धाओ᳒षाधीषु ॥ ९ ॥
च क्रं य द स्य प्सूषूआ नि नि ष क्तातुम् । ऊ तो त द स्मैषुम ध्वी च च्छाटीद्यातत् । पृ थि व्या मषीति षी तंकिया दूटाधाःत। पा यो गोटिषूतआ द धाटिओचषा धीथाषू इ ळाटिभाखण्। ओपइ ळाशा ॥१७॥