| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 333 |
गौरिवीतिः शाक्त्यः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ गौिरवीितः शाक्ः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
त्या᳒मूषुवाजी᳒नन्देवा᳒जू॑तं । स᳒होवा᳒नं॑ता᳒रूता᳒रंराथा॑नाम् । आ᳒री॑ष्टनेमिंपृतना᳹ज॑माशू᳒म् । स्व᳒स्ताये᳒ता᳹क्ष्यामीहाहू॑वेम ॥ १ ॥
त्य मू षूखिवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । अ रि ष्ट नाखीइ मींशापृ त नाखिज माखाशूशम् । स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्रम् ॥१॥ इ य इ यातीहा इ त्य मु षुषुवा जि नाखिन्देखव जूखातशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स होकावा नथान्ता रू ताकिरं र थाखिनाशम् । इ य इ यातीआकरि ष्ट ना इ मिंटुपा र्ता नाकिज माखाशूशम् । ई याफाई याफाआप्लहातइश। स्व स्त या इ ताकुर्क्ष मि हाखिहू वाखाइश। मात्र ॥२॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 334 |
अरिष्टनेमिस्तार्क्यः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ अरिष्टनेमिस्ताक्ष्र्यः इन्द्रः (ताक्ष्र्यः) त्रिष्टुप् ॥
त्रा᳒ता᳒रमि᳒न्द्रामा᳒वीता᳒रामि᳒न्द्रं॑ । हा᳒वे॑हवेसूहावंशू᳒रामि॑न्द्रम् । हूवे᳒नूशक्रं᳒पू॑रुहूतामिन्द्रं । ई᳒दंहा᳒वि᳒र्मा॑घा᳹वावे॑त्विन्द्राः॑ ॥ २ ॥
त्राकता र मि न्द्रषीम वि ताकिरा मीटान्द्रातम् । हा वे ह वे सूषुहा वं शुकिरा मीटान्द्रातम् । हू वा इ नु श क्रंषूपु रू हूकिता मीटा न्द्रातम् । ई दंथाहा वाचाइशमा घ वा वापीइ तू वाखिइश। न्द्राःत्र ॥३॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 335 |
भरद्वाजः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ भरद्वाजः (गर्गो भारद्वाजः) इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
या᳒जा᳒माहाइ᳒न्द्रंव᳒ज्रा॑दक्षिणं । हा᳒री॑णांरथ्यांटट्यवि᳒व्रा॑तानाम् । प्र᳸श्म᳸श्रू॑भिर्दोधुवदू᳒र्ध्वाधा॑भुवात् । वी᳸से᳸ना॑भिर्भा᳒या॑मानोवीरा᳒धा॑सा ॥ ३ ॥
य जा म होतीवात। आ इ न्द्रं वाकीज्रा द क्षाटिइ णाताम् । हा री णांकिच्र थ्याचावि व्र ताटिनातम् । प्रा श्माकाश्रू भि र्दो धू वाटुदू र्ध्वा धाकिभूखवाणत् । वी साचाइ ना भिकिर्भ य मा नोभीवापइ राशाधाखसोप्ल। हा इशा ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 336 |
विमद ऐन्द्रः, वसुकृद्वा वासुक्रः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ विमद ऐन्द्र वसुकृद्वा वासुकः (प्रजापत्यो वा) इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
सत्रा᳒हा॑णंदाधृ॑षिन्तूम्रामिन्द्रं॑ । मा᳒हामा॑पारं᳹वृ॑षाभं᳒सूवा᳒ज्र॑म् । हन्तायो᳒वृत्रं᳹सानीतोता᳹वा᳒जं॑ । दातामाघा᳹नीमाघा᳹वा॑सूरा᳒धाः॑ ॥ ४ ॥
सा त्राफाह णाखाऔणहोफवाप्ल। दा धृ षींटितू म्र मी न्द्राटीउ वोखावाश। माकहा म पाकिरं वृ षा भंकीसू व ज्राटिह न्ताटायोखवृण। त्रं स नि तोपीता वाखाजात्रम् । दा ताथाच्माकघा नि माकिघ वाटाच्सू राकाधाःटख् ॥५॥ सा त्राफाह ण न्दाफिधृ षीफाइ न्तू मृ मीखीन्द्रशम् । माकहा म पाकिरंकवृ षा भंचिसू व ज्राटिह न्ता योखिवृण। त्रं स नि तोपीता वाखाजात्रम् । दा ताथाच्माकघा नि माकिघ वाटाच्सू राकाधाःटख् ॥६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 337 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
यो᳒नो॑वनूष्य᳹न्ना᳒भीदा᳒तीमा᳒र्क्त्याः॑ । ऊगणावा᳹म᳒न्यामानास्तुरो᳒वा । क्षी᳒धीयूधा᳒शावा॑सावा᳹ता॑मिन्द्राः᳒ । आ᳒भि᳒ष्या॑मवृषामाणस्त्वोताः ॥ ५ ॥
यो नो व नु ष्यषुन्न भि दा ति माखुर्क्ताःप्ल। ऊ ग णा वाषीम न्य मा ना स्तु रोटूवात। क्षी धी यू धाषीश व सा वाकीता माटाइ न्द्राताम् । आ भा इ ष्याभीमातवृ ष माभिणातस्तु वोटाताःखण्। ओपइ ळाप्ला ॥७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 338 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
यं᳒वृत्रे᳹षु॑क्षीता᳒यास्प᳒र्धा᳒मानः । यं᳒युक्तेषु॑तूरा᳹य॑॑न्तोहा᳒व॑न्ते । यं᳒शू᳒रा॑सातौयामापा॑मूपा॑ज्मन् । यंवि᳒प्रा॑सो॑वाज᳹यन्तेसइन्द्राः॑ ॥ ६ ॥
हा बु यं वृ त्रे षूतू। क्षि त य स्प र्ध माखूनाःप्ल। धा मा नाकिईटया इटायाखहा बु यं यु क्ते षुशू। तु र य न्तो ह वाखून्ता इशा। हा वा न्ताकिईटया ईटायाखहा बु यं शू र साःशु। तौ य म पा मु पाखूज्माशन् । ऊ पा ज्माकीनीटया ईटायाखहा बु यं वि प्रा साःशू। वा ज य न्ता ईकुस ईखान्द्राःप्ल। सा इ न्द्रोकिईटया ईटायाखहाप्लउ वाशा। ईख ॥८॥ य य्य यातिहा बु यं वृ त्रे षूतू। क्षि त य स्प र्ध माखूनाःप्ल। धा मा ना यैकीय य्यैटाय य्य याचि। य य्य यातिहा बु यं यु क्ते षूतू। तु र य न्तो ह वाखून्ता इशा। हा व न्ता यैकीय य्यैटाय य्य याचि। य य्य यातिहा बु यं शू र साःतू। तौ य म पा मु पाखूज्माशन् । उ पा ज्मा न्यैकीय य्यैटाय य्य याचि। य य्य यातिहा बु यं वि प्रा साःतू। वा ज य न्ता ईकुस ईखान्द्राःप्ल। सा इ न्द्रो यैकीय य्यैटाय य्य यातिहा उ वाति। ईख ॥९॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 339 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
इन्द्रा॑पर्वताबृहा᳒तारा᳒थेना । वा᳒मी᳒रीळआ᳒वाहतंसूवी᳒राः । वी᳒तं᳒हाव्या᳹न्याध्वारेषुदेवाः᳒ । वर्धेथांगीर्भि᳹रिळा॑यामाद॑न्ताः ॥ ७ ॥
इ न्द्राताहातबुश। हाकहो इ प र्व ताषुबृ ह ता र थाटूइ नाकाउ वाता। ऊखपाश। वा मीतार्हातबुश। हाकहो इ षषिआ व ह तं सु वाटूइ राकाउ वाता। ऊखपाश। वी तांताहातबुश। हाकहो इ ह व्याषीन्य ध्वा रे षु दाटुइ वाकाउ वाता। ऊखपाश। व र्धेताहातबुश। हाकहो थां गी र्भिषीरि ळा या म दाटुन्ता हा उ वाती। ऊ ऊखापाश ॥१०॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 340 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः (पर्वतान्द्रौ) त्रिष्टुप् ॥
इ᳸न्द्रा॑यागीरोआनी॑शीतसर्गः॑ । आ᳒पप्रै᳹रा॑यत्सा᳒ग॑रस्याबुध्ना᳒त् । यो᳒आ᳒क्षेणेवाचा॑क्रीयौशा᳒ची॑भिः । वि᳸ष्वात्तस्तंभा॑पृथि᳒वी᳒मूतद्याम् ॥ ८ ॥
हातहा इथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥११॥ अ सातावाकसा विथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१२॥ कू वाताकूकवा इथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१३॥ अ यातामाकया मिथान्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१४॥ अ वि दाकिद वि द विकीन्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१५॥ ई हाटाईखहाणन्द्रा य गा इ रोटूआ नी शीकित साखार्गाःप्ल। आ पः प्रै रा याटूत्सा गकार स्य बूखिध्नाशत् । यो आ क्षे णा इ वाटूचा क्री यौकिश चीखाभिःप्ल। वी ष्व क्त स्तं भाःटुपा र्थी वीपिमू ताखा। द्यात्रम् ॥१६॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 341 |
रेणुर्वैश्वामित्रः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ रेणुर्वैश्वामित्रः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥
आ᳒त्वासा᳒खा॑यासख्यावा॑वृत्युः॑ । ती᳸राः᳒पूरू᳒ची॑दर्णावा᳒ञ्ज॑गम्या । पि᳒तु᳹र्नापातामा᳒दधीतावेधाः । अस्मि᳒न्क्षायेप्रातारा᳒न्दीद्यानः ॥ ९ ॥
आ त्वा स खा यषुस ख्या य व वृ त्यूःतू। ती रः पु रूषीचि द र्न वा ज गटूम्या बु होचिऔकहो वाका। पी तु र्न्ना पाषीत मा द धी त वाटूइ धा बु होचीऔकहो वाका। अ स्मि न्क्ष येषीप्र त रा न्दी दि याटूना बु होचिऔकहो वाका। औकहो वाकाईटहाख ॥१७॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 342 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
त्रिष्टुप् |
॥ वामदेवो गौतमः (यमी वैवस्वती) इन्द्रः (यमो वैवस्वतः) त्रिष्टुप् ॥
को᳒अद्यायुक्तेधुरिगा᳒ऋता᳒स्य । शी᳒मी॑वतोभामीनो॑दूर्ह्रणायुन् । आ᳒स᳒न्नेषामप्सूवा᳒होमायोभून् । या᳒ए॑षांभृत्या᳒मृणा᳒धत्सा᳒जी॑वान् ॥ १० ॥
को अ द्य युं क्तेषुधु रि गा ऋ त स्यातूएत। शि मी व तोषीभा मी नो दुकिहृ णाटायूतन् । आ स न्ने षाषीम प्सु वा होकीमा योटाभूतन् । या ए षां भृ त्याषुमृ णा धाकित्सा जाटाइ वाकाउ वाता। ऊखपाश ॥१८॥