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जैमिनीय साम सूक्तमाला
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श्री सूक्तम्
गिर्वणःपहि न षू स्सुतङ्गिर्वणः पा तू । हीनास्सु ता टीच् म्मा धो का र्धा रा का भीराहो वा की ज्या से टा हाउ वा ति । इन्द्र त्वा टि दा त । तामाइ द्या टीट् शा ख औहो वा शि । हा च रि श्रीः टाख् ॥ ४८ ॥
ओ त हाइसखाय या षू नीषी दा ति ता त । पु ना का नौहोइपु ना कु नौहो ए पि याप्राया प्रा शी । गा क यतौहो इ शी गा क यतौहो ए पी शाइशूंशाइ शू शू म् । नायज्ञौ हो ती इ श नायज्ञौहो ए पु पा री ता पा रा खा औहो वा शि । ए तच् भूषतश्रि ये तुच् ॥ ४९ ॥
स खा फा ययाउ वो खी वा श । नीषाइदा ता टु उ वो खा वा श । पु ना का नायप्र गा की य ता ता शाइ शा टि उ वो खा वा श । नायज्ञैःपारि भू टू षा ता टा उ वो खी वा श । श्रि ये ताच् ॥ ५० ॥
उ च्चा षा तेजातमन्धा सा कू उच्चा ते कि जा थच् । ओअन्ध सा टीच् दिवस त्भू ची म्याहो वा कि दा दे टा हाउ वा ति । उग्रं शा टि र्म्मा त । ओहाइ श्रा टीट् वा ख औहो वा शि । हा च रि श्रीः टाख् ॥ ५१ ॥
स न षा इन्द्राय यज्य वे कूच् सन इ कि न्द्रा च । ओयज्य वा टीच् इवरू णा की यमारूहो वा कू त्भा या टा हाउ वा ति । वरि वो टि वी त त् । ओहाइ श्रा टीट् वा ख औहो वा शि । हा च रि श्रीः टाख् ॥ ५२ ॥
एनावि श्वा षी न्यर्य आ की ए ना का वि श्वा थाच् । ओअर्य आ टीच् द्युम्नानि मा की नुहो वा कि षा णां टा हाउ वा ति । सीषा सा टि न्ताः त । ओना मा टिट् वा ख औहो वा शि । हा च रि श्रीः टाख् ॥ ५३ ॥
तन्देम दां फी गृणीम सा की इ श । वार्षाणंप्र क्षू कु सा सा टा हीं त हो वा टा हा त इ श । ऊलो का टि कृ त हो वा टा हा त इ श । त्नुमा द्रा टिट् इ वा खा औहो वा शि । हा च रिश्री या टिख् म् ॥ ५४ ॥