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जैमिनीय साम सूक्तमाला
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स्कन्दसूक्तम्
आमन्द्रै रा ती इन्द्रहरि भा तु इः श । या क हीम यू किच् रा क रो क मा भा पा इ श र्म्मात्वा का कि इ ची शा त् । नीये मू खि र्वी श । ना क पाशि नो चि तीध न्वे टिच् वा क तं ट आ ट इ हा खा औहो वा शि । वा ख याः प्ल ॥ ९१ ॥
आमन्द्रैरिन्द्र हा तू रि भा ता इः श । या क हीम यू चि रा क रोम भा षि इर्म्मात्वा का टी इ ची ता त् । नी ये का मु र्वी का न्ना क पा शा टा इ नाः ता । आताइ धा टी न्वे तच् । वा क तं ट आ ट इ हा खा औहो वा शि । व यो ता भीः ख ॥ ९२ ॥
आमन्द्रैरिन्द्र हा तू री भीः ता । या क हिम यू चि रा क रोमभीराउ वा शू । मा त्वा टाच् के क चिन्नियेमु र्वि कु न्नापाशिनोउ वा टू । आ ती टा ध न्वे चा व तं ता आउ वा टि । ई ख हि श ॥ ९३ ॥
आनएवि श्वा तु । सु हा टा ओ व्या टा म् । आइन्द्रंसमा त्सू कू भूषा ता कि ऊ ख पा शप्ल् हा त हा त इ श । ब्र ह्मा का णीसव ना ची नीवृत्र हा ची न्पा क रा मा टा ज्याः त । आ र्चा टा हा त इ श षा क मा औ टा हो ख बा प्ल । हो प्ल इ ळा शा ॥ ९४ ॥
आनोविश्वासु हा तू हा त व्या त म् । इ क न्द्रंसमा त्सू की भूषा ता कि ऊप ब्रा टि ह्मा त । णीसव ना ची निवृत्र हा ची न्पा क र मा टा ज्याः त । आ र्चा टा हा त इ श षा क मा औ टा हो ख बा प्ल । हो प्ल इ ळा शा ॥ ९५ ॥
आनोविश्वासु हा तू व्या त म् । इन्द्रंसमा त्सु षु भुषा ता चि ऊ पा का ब्रा य ह्मा ट । णीसवना नि षु वृत्र हा चि न्पा रा का मा य ज्याः ट । ऋचि षा टि मा खण् । ओ प इ ळा शा ॥ ९६ ॥
हो ख वा श उहुवा हो खि वा ण । प्रासे ना कि नाइश्शू रो टि अग्राइर था खु ना श म् । गव्य न्ने कि ताइहर्षा ते टु आस्य से खि ना श । भाद्रा न्कृ कि ण्वन्निन्द्रा हा की वान्सा खी खि भ्याः प्ल । आसो मो कि वा स्त्रा टा रभ सा कि नि दा खा क्ता त्र इ श । हो ख वा श उहुवा हो खी वा हा प्ला बु श । बा श ॥ ९७ ॥
औ हो फा ओ त वा त । प्रासे ना कि नाइश्शू रो टी अग्राइर था खु ना श म । गव्य न्ने कि ताइहर्षा ते टु आस्य से खि ना श । भाद्रा न्कृ कि ण्वन्निन्दरा हा की वान्सा खी खि भ्याः प्ल । औ हो फा ओ त वा त । आसो मो कि वा स्त्रा टा रभ सा पि नि दा खा । क्ता त्र इ श ॥ ९८ ॥
ओ हो फा ओ त वा त । प्रा क से ना था नाइश्शू रो टी अग्राइरा था खु ना श म । ग क व्य न्ने था ताइहर्षा ते टु आस्य से खि ना श । भा क द्रा न्कृ था ण्वन्निन्द्रा हा टी वान्सा खी खि भ्याः प्ल । ओ हो फा ओ त वा त । आ क सो मो था वा स्त्रा टा रभ सा पि नि दा खाणफप्ल । क्ता ख इ श ॥ ९९ ॥
पावित्र न्ते की वित तं कि ब्र ह्मणस्प ते कु हु वे टा हु वे टा हो वा टा हा त हा त इ श । प्राभुर्गा त्रा टीच् णी क प र्ये टा षीविश्व ता ची हु वे टा हु वे टा हो वा टा हा त हा त इ श । अतप्तत नू कु र्न्नत दा कि मोअश्नु ते की हु वे टा हु वे टा हो वा टा हा त हा त इ श । श्र ता का सइद्व ह की न्तस्सन्तदाश ता कू हु वे टा हु वे टा हो वा टा हा त हा ख औहो वा शि । अर्को दे टि वा नां टा परा मे चि व्यो ट मा ख न् ॥ १०० ॥
पावित्र न्ते की वित तं कि ब्रह्मणस्प ते कीच् हू वा का औ ट हो वा टा । प्राभुर्गा त्रा की णीप र्ये कि षीविश्व तो कीच् हू वा का औ ट हो वा टा । अतप्तत नु कु र्न्नत दा कि मोअश्नु ते कीच् हू वा का औ ट हो वा टा । श्रतासइद्व ह कू न्तस्सन्तदाश ता कू हूवा औ टि हो ट वा ख औहो वा शि । अर्कस्य दे कि वाः कच् परा मे चि व्यो ट मा ख न् ॥ १०१ ॥