॥ कावर्षेद्वे ॥
वास्तोष्प तातीइश। ध्रूवास्थू णाटीउ वोखावाश। अंस त्रंकिच्सोकम्या नाटाम् । द्रप्सःपुरांभे क्ताषूशश्व ताटिइना माखिइ न्द्राःणा। मूनी नांकिआउ वाटि। साखखाश॥ १०६ ॥ वास्तोष्पतेध्रू वाफूस्थूतणांपसत्रं सोप्लिम्याङनाशम् । द्रप्सःपुरांभे क्ताषूशश्व ताटिइ नाताम् । आटइ न्द्राःता। मू नीटानाखणफप्ल्म् ॥ १०७ ॥
🎵
Audio missing