॥ विष्णोश्च साम ॥
इ दा मेति। वि ष्णूटार्वि चा क्राखिमाणइश। त्रा इ धाचिनि दकाधाचइ पायादांटस मूटाहोयढाटमात। स्याटपाखऔ हो वाशि। एंतसू लेताच् ॥३६॥
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