खण्ड: 16 - सम्पूर्णम्

॥ अहोरात्रयोर्व्रतम् ॥
होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा।   आ प्रा गाकित्भ द्राकायु वा तीकिर्होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा।   अ न्हः के तुकीन्स मी प्स तीकीर्होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा।   अ भूकात्भ द्राकानि वेकाश नीकार्होटवा इ होटिवा इ होटिवा इशा।   वि श्वा स्याकिज ग तोकिरा त्रिकाहोंटवा इ होटिवा इ होटिवाखओ हो वाशि।   ईख ॥१०१॥ 
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