॥ वाम्राणि त्रिणी ॥
आ म न्द्रै रातीइ न्द्र ह रि भातुइःश। याकही म यूकिच्राकरोकमा भापाइशर्म्मा त्वा काकिइ चीशात् । नी ये मूखिर्वीश। नाकपा शि नोचिती ध न्वेटिच्वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। वाखयाःप्ल ॥९०॥ आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरि भाताइःश। याकही म यूचिराकरो म भाषिइ र्म्मा त्वा काटीइ चीतात् । नी येकामु र्वीकान्नाकपा शाटाइ नाःता। आ ता इ धाटीन्वेतच्। वाकतंटआटइ हाखाऔ हो वाशि। व योताभीःख ॥९१॥ आ म न्द्रै रि न्द्र हातूरी भीःता। याकहि म यूचिराकरो म भी रा उ वाशू। मा त्वाटाच्केकचि न्नि ये मु र्विकुन्ना पा शि नो उ वाटू। आ तीटाध न्वेचाव तंताआ उ वाटि। ईखहिश ॥९२॥
🎵
Audio missing