॥ ग्रह - सूर्यः समिधा - अर्कम् ॥
ऊदूत्यं᳒जाता᳒वे॑दसम् । दे᳒वं᳒वाहन्तींकेता᳒वाः॑ । दृशे᳹वि ᳹श्वा॑यासूर्यम् ॥ १ ॥
उ दु त्य मोतीहातइश। जा ता वेकिदाखसणम् । देकवं व ह न्ती केकुताखवाःण। दा र्शेपाहाणइश। वा इ श्वाकिच्याकसू र्या मौपिहो बाप्ला। होप्लइ ळाशा ॥१७०॥
॥ ग्रह - चन्द्रमाः समिधा - पलाशम् ॥
चन्द्रा᳹मा॑प्सूआ॑टट्यन्तारा । सूपर्णोधा॑वतेदीवि᳒ । नावो॑हीरण्यनेमयः । पा᳒दं᳒वि᳒न्द॑न्तीवीद्यूताः । विक्त᳹म्मेअस्य᳒रो᳒दसि ॥ २ ॥
च न्द्र मा याती। प्सूतआ न्तापाराश। सु प णो र्धाकीच्वाकताटइ दीचावि याता। न वोटाच्हि रकाण्य नेकाम यः पा दं वि न्दकून्ति वि द्यु तोपीहाणइश। वि क्तं हो इ मा याटूहोकथ्स्या रो दाटिसाखण्इश। ओपइ ळाशा ॥१७१॥
॥ ग्रह - मंगलः समिधा - खादिरम् ॥
अ᳒ग्नि᳒र्मूर्द्धादीवाःकाकू᳒त् । पा᳒तीःपृथिव्या᳒आ᳒यम् । आपांरेतांसिजिन्वति ॥ ३ ॥
अ ग्नि र्मू र्द्धा दीतुवः क कूतित् । पा तीटापा र्त्थीटाव्या अ याचिम् । आ पांटारा इ तांटिसीकजि न्वाटाताखण्इश। ओपइ ळाप्ला ॥१७२॥
॥ ग्रह - बुधः समिधा - अपामार्गम् ॥
ब्र᳒ह्मा॑जज्ञानं᳹प्राथामंपुरास्ता॑त् । वीसीमातस्सूरुचोवेनआ॑वात् । सा᳒बुध्न्याऊ॑पामाआस्याविष्ठाः । साताश्चा᳹योनी᳒मा᳒साताश्चावी᳒वाः ॥ ४ ॥
ब्र ह्मा ब्राटिह्मात। ज ज्ञा नंचिप्रा था मंकिपु रा स्ताभित् । वी सा इ वाटिइ सीता। म त स्सु रूकीचो वेथान आ वाभित् । सा बू साटिबूत। ध्न्या उ पाचिमाकआटस्य वा इ ष्ठाःभी। सा ता स्साटिताःत। च यो नी मा साचुता श्च वाकिइ वाःपाण्। ओपइ ळाप्ला ॥१७३॥
॥ ग्रह - बृहस्पतिः समिधा - अश्वत्थम् ॥
सोमंरा᳹जा॑नंवा᳒रूणम् । अ᳒ग्नी᳒मन्वारा॑भामहे । आ᳒दित्यंविष्णुंसू᳒र्य॑म् । ब्र᳒ह्मा᳹ण॑ञ्चाबृहस्पा᳒तिम् ॥ ५ ॥
सो मं रा जाषीनं व रु णातीम् । अ ग्नी म न्वाकीर भा म हेचीहो वाटाहातइश। आथदि त्यं वि ष्णुंकीसू र्यंकाहो वाटाहातइश। ब्र ह्मा णाटिञ्चातहो वाटाहातइश। बृ हाटाउ वाता। स्पाखतिशम् ॥१७४॥
॥ ग्रह - शुक्रः समिधा - औदुम्बरम् ॥
अस्य᳒प्रत्ना᳒मा᳒नुद्युत॑म् । शुक्र᳒न्तु॑दुह्रेअह्रा॑यः । पा᳒या॑स्सहस्रासा᳒मृ᳒षिम् ॥ ६ ॥
अ स्य प्र त्नोचीहाचइश। ओ नु द्यूटिता म्त। शु क्र न्दु दु ह्रे आयूह्रापयाःश। प य स्स होखीहाणइश। ओ सोपाहाचइश। मृकषा औटाहोखबाप्ल। होप्लइ ळाशा ॥१७५॥
॥ ग्रह - शनैश्चरः समिधा - शमी ॥
श᳸न्नो॑देवी᳒राभीष्टा॑ये । श᳒न्नो॑भूवन्तूपीता᳒ये॑ । श᳒य्योराभि᳒स्रावन्तूनः ॥ ७ ॥
श न्नो दे वीती। आ भी ष्टाटियाखइ श न्नो भु वाशुम् । तू पी ताटियाखइ श य्यो र भीःशु। श्रा वा न्तूटिट्नाखऔ हो वाशि। ऊखपाश॥ १८ हु वाताहोपइ श न्नो दे वीप्लुर भि ष्ट याङिइश। हु वाताहोपइ श न्नो भु वाप्लुन्तू पी ता याङीइश। हु वाताहोपइ श य्यो र भीप्लुस्र व न्तुङिनाःश। हु वाताहोटयाखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१७६॥
॥ ग्रह - राहुः समिधा - दूर्वा ॥
कया᳒नश्चित्॑त्रा᳒ता॑भू᳒वा॑त् । ऊ᳒ती॑स्सा᳒दा॑वृ᳒धा॑स्सा᳒खा॑खा᳒ण॑ । कया᳒शा॑चा᳒स्था॑इ᳒षा॑ । वा᳒र्तो॑हा᳒इ॑षा᳒वाः॑᳒ ॥ ८ ॥
क या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । ऊकता इ स दा वाकुर्ध स्साखाखाण। क या शाटिचातइश। ष्ठापयाशवाखर्तोप्ल। हा इशा ॥१७७॥ हो वा इ हो वा इषूक या न श्चीती। त्रातया भूपावाशत् । हो वा इ हो वा इषूऊ तीचास्सा दाकाच्वृ धाकास्सापखाश। हो वा इ हो वा इषूक याताश चाताइश। ष्ठा या वाटिट्र्ताखऔ हो वाशि। ऊखपाश ॥१७८॥
॥ ग्रह - केतुः समिधा - कुशा ॥
केतुं᳸कृण्वन्केतवे । पेशो᳒म᳒र्या᳒अपेशसे । समु᳒ष᳒द्भि᳒रजायथाः ॥ ९ ॥