॥ शैखण्डिनेद्वे ॥
श्र क्तेताहोतइश। द धाटाहोतमि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हतान्होतइश। य द दाटिहोत। स्यु न्न र्यंटिवि वेचारायपाटआ पाःटा। उ भेताहोतइश। य त्वाटाहोतरो द सीटिधा व ताकिमायनूटआ नूटा। भ्य साताद्धोतइश। ते शुकाहोथच्ष्माकत् । पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्रीटट्। वाखऔ हो वाशि। हाकहा उ वाति। ईख ॥८१॥ श्र क्ताताइश। द धाथाच्मि प्र थ माटीय माकान्यायवाटइशन्या वाटाइश। अ हकान्न्य द दाथिच्स्यु न्न र्यंटिवी वेकारायपाटआ पाःटा। उ भाताइशय त्वाथारो द सीटिधा व ताकिमायनुटआ नुटा। भ्य साताक्ते शुथाच्ष्माकत्पृ थि वीटिची दाचाद्रीयवोटद्री वाःटा। द्री वाकाएखहि याप्लाहाश। होप्लइ ळाशा ॥८२॥
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