॥ कावर्षेद्वे ॥
वा स्तो ष्प तातीइश। ध्रू वा स्थू णाटीउ वोखावाश। अं स त्रंकिच्सोकम्या नाटाम् । द्र प्सः पु रां भे क्ताषूश श्व ताटिइ ना माखिइ न्द्राःणा। मू नी नांकिआ उ वाटि। साखखाश ॥१०५॥ वा स्तो ष्प ते ध्रू वाफूस्थूतणांपस त्रं सोप्लिम्याङनाशम् । द्र प्सः पु रां भे क्ताषूश श्व ताटिइ नाताम् । आटइ न्द्राःता। मू नीटानाखणफप्ल्म् ॥१०६॥
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