| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 123 |
विश्वामित्रो गाथिनः |
इन्द्रः |
जगती |
॥ विश्वामित्रो गाथिनः इन्द्रः जगती ॥
चऋष॑णीधृ᳹तंम्माघावाना१मुक्त्यं । इ᳒न्द्रंगीरोबृहातीरभ्यानूषत । वा᳒वृधा᳒नंपू॑रूहूतं᳹सूवृक्ती॑भीः । आ᳹मा॑र्क्त्यंजरा॑माणन्दीवे᳒दिवे ॥ १ ॥
आ भा इ माटीहाकथ्। आ भा इ माटीहाकथ्। आ भा इ माटीहाश। च र्ष णी धृ तचुन्मा घ वाकिचना मूकाक्थाययाटम् । इ न्द्रं गि रोषीबृ ह ती राचीभ्या नूकाषायताट। वा वृ धा नं पु रूकूहू तंथासू वाकाक्तायइ भीःटा। अ म र्त्यं ज राकुमा णकाथ्न्दि वेकादायइ वेटा। आ भा इ माटीहाकथ्। आ भा इ माटीहाकथ्। आ भा इ माटीहाखऔ हो वाशि। साथर्पा सु वाःटिख् ॥१॥ अ भि प्र मंकीहीकरा इ माटिहाकथ्। अ भि प्र मंकीहीकरा इ माटिहाकथ्। अ भि प्र मंकीहीकरा इ माटिहाश। च र्ष णी धृ तंकुमा घ वाकिना मूकाक्थाययाटम् । इ न्द्रषाङ्गि रो बृ ह ती राचूभ्या नूकाषायताट। वा वृ धा नं पु रूकूहू तंथासु वाकाक्तायइ भीःटा। अ म र्क्त्यं ज राकुमा णथान्दि वेकादायइ वेटा। अ भि प्र मंकीहीकरा इ माटिहाकथ्। अ भि प्र मंकीहीकरा इ माटिहाकथ्। अ भि प्र मंकीहीकरा इ माटिहाखऔ हो वाशि। प्राकसाथर्पा सु वाःटिख् ॥२॥ हाषबु हा बु हा उ वातू। च र्ष णीकिधृ त म्माकिघ वा नाकिमू क्थ्याकाम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। इषन्द्र ङ्गि रो बृ ह ती राकूभ्या नूचाषायताट। हाषबु हा बु हा उ वातू। वा वृ धा नंकीपु रू हू तंकीसू वृ क्ती भीःची। हाषबु हा बु हा उ वातू। अ म र्त्यं ज राकुमा णथान्दी वेकादि वेचा। हाषबु हा बु हा उ वातू। उ त्साचार्पा सु वाःटिख् ॥३॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 124 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
त᳸वेदि॑न्द्रावा᳒मंवा᳒सू । त्वंपू॑ष्यसिमाध्यामं । सत्रा᳒विश्वास्यापारामास्या॑राजसि । ना᳸कीष्ट्वा᳸गोषू॑वृण्वते ॥ २ ॥
हाषबु हा बु हा उ वातू। स्व स्संकास र्प न्ताकि। स्ताचवे दि न्द्राकिवा मंचाव सुशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। स्व स्संकास र्प न्ताकि। स्त्वंचपु ष्य सि माकीध्या मशाम् । हाषबु हा बु हा उ वातू। स्व स्संकास र्प न्ताकि। स त्राचावि श्व स्याशिप रा म स्य राचुज सिशा। हाषबु हा बु हा उ वातू। स्व स्संकास र्प न्ताकि। न कि ष्ट्वाकिगो षु वृकिण्व तेचा। हाषबु हा बु हा उ वातू। स्व स्संकास र्प न्ताकि। ए सा र्प ताकिप्र सा र्प ताकीस्व र्ग मे म ते वाकूयचम् ॥४॥ स्व स्संकासा र्पाकासं स र्पाटि। स्व स्संकासा र्पाकासं स र्पाटि। स्व स्संकासा र्पाकासं सटार्पाखओ हो वाशि। ता वे दि न्द्राचीवा मं व सु त्वंचुपु ष्य सि माचीध्या मंचा। स त्रा वि श्व स्याचुप रा म स्य राचुज सिकान कि ष्ट्वाकिगो षु वृकिण्व तेखा। स्व स्संकासा र्पाकासं स र्पाटि। स्व स्संकासा र्पाकासं स र्पाटि। स्व स्संकासा र्पाकासं सटार्पाखओ हो वाशि। स्व र्ग मेकिमाख ॥५॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 125 |
कुत्स आङ्गिरसः |
पवमानः सोमः |
त्रिष्टुप् |
| 126 |
कविर्भार्गवः |
पवमानः सोमः |
जगती |
॥ कुत्स आङ्गिरसः इन्द्रः त्रिष्टुप् ॥ ॥ कविर्भार्गवः पवमानः सोमः जगती ॥
त्वा᳸या॑वायंपावा॑मानेनसोम । भा᳸रे॑कृतं᳒वी᳒ची॑नुयामाशश्वात् । त᳸न्नो᳒मित्रोवा᳒रूणोमामहन्तां । आ᳸दि॑तिस्सिन्धुःपृथीवीमूतद्यौः ॥ ३ ॥
आ᳒भी᳒प्रीया᳒णी॑पवातेचानो॑हितः । ना᳒मा॑नीयह्वो᳒आ᳒धीयेषूवा᳒र्धा॑ते । आ᳒सू᳒र्यास्यबृहा᳒तो᳒बृहन्ना᳒धी । रा᳒थं᳒विष्व᳒ञ्चमऋहद्वीचाक्षाणः᳒ ॥ ४ ॥
सृ पाकाइ त्प्र सृ पोकीइ हा ईटियात। सृ पाकाइ त्प्र सृ पोकीइ हा ईटियात। सृ पाकाइ त्प्र सृ पोकीइ हा ईटियात। त्व या व यं प वाकूमा नेथाना सोचामाश। भ रेषाकृ तं वि ची नु याचूमा शाचाश्वाशत् । त न्नो मि त्रो व रुकूणो माथामा हाचान्ताशम् । अ दिषाति स्सि न्धुः पृ थि वीचूमू ताचाद्यौःश। सृ पाकाइ त्प्र सृ पोकीइ हा ईटियात। सृ पाकाइ त्प्र सृ पोकीइ हा ईटियात। सृ पाकाइ त्प्र सृ पोकीइ हा ईटियाखऔ हो वाशि। एतस्र पाकाइ त्प्र सृ पाकीय एतास्र पाकाइ त्प्र सृ पाकीय एता। स्र पा इ त्प्र सृ पाटूयाःख ॥६॥ स्र पाकाइ त्प्र सृ पोकीहा ईटायात। स्र पाकाइ त्प्र सृ पोकीहा ईटायात। स्र पाकाइ त्प्र सृ पोकीहा ईटायात। आ भिषाप्रि या णि पा व तेचूच नोटाहा इ ताःचि। ना माषानि य ह्रो अ धि येचूषु वाटार्द्वा ताचाइश। आषसू र्य स्य बृ ह तोचूबृ हाटान्ना धाचाइश। रषथं वि ष्व ञ्च मा रुचूह द्वि चाटिक्षाचणाःश। स्र पाकाइ त्प्र सृ पोकीहा ईटायात। स्र पाकाइ त्प्र सृ पोकीहा ईटायात। स्र पाकाइ त्प्र सृ पोकीहा ईटायाखऔ हो वाशि। एतसु व रेकिसु व रेकि। सु वाःटाख् ॥७॥ स्र पाकाइ त्प्र स र्पोटीहाच। स्र पाकाइ त्प्र स र्पोटीहाच। स्र पाकाइ त्प्र स र्पोटीहाच। त्व या व यं प वाकूमा नेथाना सोचामाश। भ रेषाकृ तं वि ची नु याकूमा शाचाश्वाशत् । त न्नो मि त्रो व रूकूणो माथामा हाचान्ताशम् । अ दिषाति स्सि न्धुः पृ थि वीचूमू ताचाद्यौःश। स्र पाकाइ त्प्र स र्पोटीहाच। स्र पाकाइ त्प्र स र्पोटीहाच। स्र पाकाइ त्प्र स र्पोटीट्हाखऔ हो वाशि। एतसु व रेकिसु व रेकिसु वाःटाख् ॥८॥
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ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 127 |
गोतमो राहूगणः |
इन्द्रः |
पंक्तिः |
॥ गोतमो (सम्मदो वा) राहूगणः इन्द्रः पङ्क्त्तिः ॥
स्वादो᳒रित्था᳹वी॑षूवा᳒ताः । मा᳒धोः॑पिबन्तिगौर्याः१ । या᳒इ᳒न्द्रे॑णासा᳒याववा॑रिः । वृष्णामाद॑न्तीशो᳒भा᳒था । व᳒स्वीरा᳹नू॑स्वारा᳒ज्य॑म् ॥ ५ ॥
स्वा दोषारि त्था वि षू व ताचूओ हाटाबुश। म धोः पि ब न्ति गौकूरी याथाओ हाटाबुश। या इषान्द्रे ण स या व राचूओ हाटाबुश। वृ ष्णाषाम द न्ति शो भ याचूओ हाटाबुश। व स्वीषार नु स्व रा जि याचूमोटहाखऔ हो वाशि। दिषशः प्र दि शः क ल्पाकून्ताखऔ हो वाशि। राकजं ग मे माकीस्वा रा जं ग मेकुमाख ॥९॥ स्वा दोषारि त्था वि षू व ताचूए हाटाबुश। म धोः पि ब न्ति गौकूरी याथाए हाटाबुश। या इषान्द्रे ण स या व राचूए हाटाबुश। वृ ष्णाषाम द न्ति शो भ याचूए हाटाबुश। व स्वीषार नु स्व रा जि याचूमोटहाखऔ हो वाशि। उ द दिषिशो वि दि शः क ल्पाकून्ताखऔ हो वाशि। वि राचाजं ग मे माकीस्वा रा जं ग मेकुमाख ॥१०॥