| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
देवता (Devata) |
छन्दः (Chandas) |
| 88 |
मेधातिथिः काण्वः |
इन्द्रः |
बृहती |
| 89 |
नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथिः काण्वः पवमानः सोमः जगती ॥ ॥ नृमेध पुरुमेधावाङ्गिरसौ इन्द्रः बृहती ॥
पीबा᳸सू᳹तस्या॑रासी᳒नाः । मत्स्वा॑नइन्द्रागो᳒मा॑तः । आपिर्नोबोधीसा᳒धा॑मा᳹द्ये॑वृधे᳒ । अस्मंआ॑वन्तूते᳒धी᳒याः॑ ॥ १ ॥
बृहा᳒दिन्द्रा॑यगायत । मारू॑तोवृ᳒त्राहन्ता॑मं । ये᳒नज्यो᳒तीरा᳒ज॑नयन्नृता᳒वृधाः॑ । देव᳒न्देवा᳒याजा᳒ग्रवीम् ॥ २ ॥
हा बु पि बा सु तातू। स्य रा सि नोची। हो इकाहो इकाहो इशाहा बु हा बु हातुबुश। सा होचान रःशा। मकत्स्वा न इ न्द्र गोकीम तोका। हो इकाहो इकाहो इशाहा बु हा बु हातुबुश। स त्य मोचिजःश। आकपि र्णो बोकिधीचस ध माकि। हो इकाहो इकाहो इशाहा बु हा बु हातुबुश। स्व र्ज्यो तिः । द्येचवृ धेका। हो इकाहो इकाहो इशाहा बु हा बु हातुबुश। एतस्था दि द मेकीस्था दि द मेकीस्था दीकादचम् । अ स्मंचाआ व न्तु तेकीधि योका। हो इकाहो इकाहो इशाहा बु हा बु हातुबुश। एतद्यौ र क्राकीत् । भू मि र त त नाकूत् । स मु द्रंकिस म चू कू पाकुत् । इ ट् इ ळाटिख् ॥१॥ ॥ हा बु हा बु हातुबुश। बृ हातात्बृ हातात्बृ हातात् । बृ हाकात्बृ हाकात्बृ हाकात् । बृ हाकादि न्द्राथाया गाकायायताट। म रु तो वृचीत्रा हाकान्तायमाटम् । ये नषाज्यो ति र ज न यचूक्नृ ताकावायर्द्धाःट॥ दे वंकादे वाथाया जाकाग्रयवीटम् । हा बु हा बु हातुबुश। बृ हातात्बृ हातात्बृ हातात् । बृ हाकात् बृ हाकात् बृ हाकात् त्बृ हातादा उ वाटि। एतबृ ह देचिबृ ह देचिबृ हाचात् ॥२॥
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छन्दः (Chandas) |
| 90 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
| 91 |
त्रिशोकः काण्वः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ सप्तर्षयः (भरद्वाजो बार्हस्पत्यः) पवमानः सोमः बृहती ॥ ॥ त्रिशोकः काण्वः इन्द्रः गायत्री ॥
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ ३ ॥
आभित्वावृषभासूते᳒ । सूतं᳒सृजामीपीताये॑ । तृ᳒म्पा᳒व्याश्नूहीमा᳒दम्᳒ ॥ ४ ॥
ऐ रा याभिदै रा याभित् । सु व रोकिख्हाप्लहातइश। पू नाचान स्सोकाच्मा धाकाराययाट। आ पोकावा साथानो आचार्षायसीट। आषार त्न धा यो नि म्मृ ताचूस्या साकाइ दायासीट। उ त्सोकादे वोथाही राकाण्याययाट। ऐ रा याभिदै रा याभित् । सु व रोकिख्हाप्लहाखओ हो वाशि। ओ हो वा । एतच्देकवा दि वा ज्योटटतीःख ॥३॥ हातबुशओ हो हाभबुश। अ भि त्वा वातीर्षातभा सु तातिइ । अ भि त्वा वातीर्षातभा सु तातिइ । अ भि त्वा वातीर्षातभा सु तातिइ । ओ हो हाभिबुशओ होचा। सु तं सृ जातीमीतपी त यातिइश। हातबुशओ हो हाभिबुशओ हो । तृं पा व्यातिश्नूतही म दातिम् । तृं पा व्यातिश्नूतही म दातिम् । तृं पा व्यातिश्नूतही म दातिम् । ओ हो हाभिबुशऔ होपाउ हु वाशिहा उ वाति। हाच्स् ॥४॥
| Global # |
ऋषिः (Rishi) |
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छन्दः (Chandas) |
| 92 |
सप्तर्षयः |
पवमानः सोमः |
बृहती |
| 93 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ सप्तर्षयः (भरद्वाजो बार्हस्पत्यः) पवमानः सोमः बृहती ॥ ॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
पुना᳹नस्सो॑माधा᳒रा॑या । आपो॑वा᳒सा॑नोअर्ष॑सि । आर॑त्नाधा᳹यो ᳹नीमृतास्या॑सीदसि । उत्सोदेवो᳹ही॑रण्या॑या ॥ ५ ॥
त᳸वेदि॑न्द्रावा᳒मंवा᳒सू । त्वंपू॑ष्यसिमाध्यामं । सत्रा᳒विश्वास्यापारामास्या॑राजसि । ना᳸कीष्ट्वा᳸गोषू॑वृण्वते ॥ ६ ॥
हा बुषाहा बु हौ वा उ वोतूवाण। हा हाथाआ उ वाटि। पू नाकान स्सो माकिधा र याकिश्र वो बृ हाकीदी हाका। इ ळाचा। आ पो व सा नोकुअ र्षा सीकिश्र वोकाबृ हाचादी हाका। इ ळाचा। आ राकात्ना धा योकिनि म्मृ ता स्य सीकुद सीकाश्र वोकाबृ हाचादी हाका। इ ळाचा। उ र सो दे वोकीहि र ण्य याकीश्र वोकाबृ हाचादी हाका। इ ळाचा। हा बुषाहा बु हौ वा उ वोतूवाण। हा हाथाआ उ वाटि। एतसु व र्ज ग न्म देकूवा नाकाम व साकिवा यं श केकीम वा जि नोकीय मंकाहाचस् । इ ट् इ ळाटिख् ॥५॥ ओ हो वाकिओ हो वाकिऔथहोटवाखओ हो वाशि। ता वेचादि न्द्राशावा मंचाव सु त्वंचिपु ष्य सि माचीद ध्या मंचास त्रा वि श्व स्याकुपषरा म स्य रा ज सीकू। न कि ष्ट्वाकिगो षु वृकिण्व तेखा। ओ हो वाकिओ हो वाकिऔथहोटवाखओ हो वाशि। सु व र्ज्ज ग न्म देकूवा नाकाम व साकिवा यं श केकीम वा जि नोकीय मंकासू व र्ज्ज गकीम्मा मा हाःकि। पृ थि व्याकिदि व माशिहाचस् । बृ हटान्न माःख ॥६॥
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छन्दः (Chandas) |
| 94 |
वसिष्ठो मैत्रावरुणिः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ वसिष्ठो मैत्रावरुणिः इन्द्रः बृहती ॥
त᳸वेदि॑न्द्रावा᳒मंवा᳒सू । त्वंपू॑ष्यसिमाध्यामं । सत्रा᳒विश्वास्यापारामास्या॑राजसि । ना᳸कीष्ट्वा᳸गोषू॑वृण्वते ॥ ७ ॥
औ हो औ होखीवाण। औ हो औ होखीवाण। औ हो औ होखीवाण। इ ळाटाभि राखाओ हो वाशि। ता वेचादि न्द्राशावा मंचाव सु त्वंचिपु ष्य सि माचीद ध्या मंचास त्रा वि श्व स्याकुपषरा म स्य रा ज सीकू। न कि ष्ट्वाकिगो षु वृकिण्व तेखा। औ हो औ होखीवाण। औ हो औ होखीवाण। औ हो औ होखीवाण। इ ळाटाभि राखाओ हो वाशि। एतच्ई ळाकासु वोकाबृ हकान्न माःटाख् ॥७॥
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छन्दः (Chandas) |
| 95 |
मेधातिथि-मेध्यातिथि काण्वौ |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ मेधातिथि – मध्येआतिथी काण्वौ इन्द्रः बृहती ॥
आ᳸त्वासाहस्रा॑माशात᳒म् । युक्ता᳒राथेहीरण्याये॑ । ब्रह्मायू᳒जोहा᳒रा॑यिन्द्राकेशी᳒नाः । वाहन्तूसो᳒मापीतये ॥ ८ ॥
हा बु हाषिबु हा वा त्वा स हातू। स्रा माचाशायताटम् । हा बु हा बु हातुबुश। यु क्ताकारायथाटइश। हा बु हा बु हातुबुश। हि राकाण्याययाटइश। हा बु हा बु हातुबुश। ब्र ह्माकायूयजोट। हा बु हा बु हातुबुश। हा र य इकीन्द्रा काकाइ शायाइ नाःटा। हा बु हा बु हातुबुश। वा हाकान्तूयसोट। हा बु हा बु हातुबुश। मा पीचातापया उ हु वाशिहा उ वाति। हाचस् ॥८॥
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छन्दः (Chandas) |
| 96 |
सिन्धुद्वीप आम्बरीषः त्रित आप्त्यो |
अग्निः |
गायत्री |
॥ सिन्धुद्वीप आम्बरीषः त्रित आत्यो वा अग्निः गायत्री ॥
श᳸न्नो॑देवी᳒राभीष्टा॑ये । श᳒न्नो॑भूवन्तूपीता᳒ये॑ । श᳒य्योराभि᳒स्रावन्तूनः ॥ ९ ॥
उ हु वा यो हा ओ होषृवा इ श न्नो दे वीःतू। उ हु वा यो हाकुओ होटाहा उ वाति। आ वाचात् । आ भी ष्टाटियातइश। उ हु वा यो हा ओ होषृवा इ श न्नो भु वा म् । उ हु वा यो हाकुओ होटाहा उ वाति। सू वाःचा। तू पी ताटियातइश। उ हु वा यो हा ओ होषृवा इ श य्यो र भीतु। उ हु वा यो हाकुओ होटाहा उ वाति। ज्यो तीःका। स्रा वा न्तूटिनाःत। उ हु वा यो हाकुओ होटाहा उ वाति। ईख ॥९॥
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| 97 |
शंयुर्बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ शंयुर्बार्हस्पत्यः इन्द्रः बृहती ॥
इन्द्राज्ये᳹ष्१न्नआभा᳒रा । ओ॑जीष्ठंपूपूरीश्रा᳒वाः॑ । य᳒द्या᳒धृ॑क्षेमवज्रहा᳒स्तारोद॑सि । ओभे᳒सू॑शिप्रवप्राः ॥ १० ॥
हा वौ हो इ न्द्रषुज्ये ष्ठ न्न आ भ राति। हातबुशओ होटा। ओटजि ष्ठंकापु पु रा औकीहो वाथाश्राचवाःश। हातबुशओ होटा। या द दि धृ क्षेकुमा वा ज्र ह स्ता औकूहो वाथारोचदा साचाइश। हातबुशओ होटा। ओटभेकसूथशा इ प्रा औकीहो वाथापाचप्राःश। हातबुशओ होपाउ हु वाशिहा उ वाति। हाचस् ॥१०॥
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| 98 |
वामदेवो गौतमः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ वामदेवो गौतमः इन्द्रः गायत्री ॥
का᳒या॑नश्चित्रआ᳒भु॑वात् । ऊतीस्सा᳹दावृ॑धस्सा᳒खा॑ । का᳒या᳒शाची॑ष्ठयावृतः ॥ ११ ॥
हा बु हा बु हातुबुश। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह त्पा र्थि वंकु। बृ ह त्पा र्थि वंकु। बृ ह त्पा र्थि वंकु। बृ ह द न्त रि क्षंकू। बृ ह द न्त रि क्षंकू। बृ ह द न्त रि क्षंकू। बृ हा द्दि वंकी। बृ हा द्दि वंकी। बृ हा द्दि वंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। का या न श्चिचीत्रा आकाभूयवाटत् । ऊ ती स्सा दाचीवृ धाकास्सायखाट। क या शा चीचीष्ठा याकावायर्क्ताःट। हा बु हा बु हातुबुश। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह त्पा र्थि वंकु। बृ ह त्पा र्थि वंकु। बृ ह त्पा र्थि वंकु। बृ ह द न्त रि क्षंकू। बृ ह द न्त रि क्षंकू। बृ ह द न्त रि क्षंकू। बृ हा द्दि वंकी। बृ हा द्दि वंकी। बृ हा द्दि वंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वाटिमाखऔ हो वाशि। एतबृ ह त्भ्यो वाकीमं वाका। मे भ्यो वाकिमं वाका। मे भ्यो वाकिमं वाकामचम् ॥११॥ बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। काषया न श्चा इ त्र याटूभूखवाणत् । ऊकता इ स्स दा वाटुर्ध स्साखाखाण। काषया श चा इ ष्ठ याटूवाखर्क्ताःण। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वा मंकी। बृ ह द्वाटिमाखऔ हो वाशि। एतबृ ह द्वा मेकीबृ ह द्वा मेकीबृ ह द्वाकिमचम् ॥१२॥
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छन्दः (Chandas) |
| 99 |
शुनः शेप आजीगर्तिः |
इन्द्रः |
गायत्री |
॥ शुनः शेप आजीगर्तिः इन्द्रः गायत्री ॥
रेवातीर्ण॑स्साधामादे॑ । इन्द्रे॑सन्तूतूवी᳒वा॑जाः । क्षुम᳒न्तोयाभिर्मा॑दे॑मा ॥ १२ ॥
हा बु रे वाकीतीकर्णाचइ हाचा। सा ध मा दाकीच्इ हायाउ वाटा। ईखळाण। इ न्द्राटाइ सकान्तूचइ हाचा। तु वि वा जाचीइ हायाउ वाटा। ईखळाण। क्षू माटान्तो याचाइ हाचा। भि र्म्म दे माटीइ हायाउ वाटाइखळाण ॥१३॥ राचइ वा ताटिइ र्न्नाचाइ हाचा। ओ औ होकिऔचहोकइ ळाटा। स धाटामाकदाचइ हाचा। ओ औ होकिऔचहोकइ ळाटा। इ न्द्राटाइ सचान्तूकइ हाचा। ओ औ होकिऔचहोकइ ळाटा। तू वाटाइ वाकाजाचइ हाचा। ओ औ होकिऔचहोकइ ळाटा। क्षू माटान्तोकयाचइ हाचा। ओ औ होकिऔचहोकइ ळाटा। भि र्म्मा दे माटीइ हाचा। ओ औ होकिऔचहोकइ ळाटा। एतच्राचएतप्रचएतरेटख् ॥१४॥
| Global # |
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छन्दः (Chandas) |
| 100 |
भरद्वाजः बार्हस्पत्यः |
इन्द्रः |
बृहती |
॥ भरद्वाजः (शयुः) बार्हस्पत्यः इन्द्रः बृहती ॥
त्वा᳒मि᳒द्धि᳒हा᳒वा॑महे॑ । सा᳒तौवा᳒ज॑स्याकारा᳒वाः॑ । त्वांवृ॑त्रे᳒ष्विन्द्रा॑सात्पातिन्ना᳒राः॑ । त्वांकाष्ठास्व॑र्वातः ॥ १३ ॥
औ हो इ त्वा मि द्धीषूह वा म हातीएत। सा तौ वा जा स्या काकुराखवाःण। तू वापाऔकहो वाथा। वृ त्रा इ षु वाषुवा इ न्द्रा साटीओ त्पा ति न्नाखराःण। तू व ङ्का ष्ठापीऔकहो वाथा। सूटव र्वाखाता हो वाशिहा उ वातिहाचस् ॥१५॥